A message to Hindustani Muslims

 

From: Tilak Shrestha < >

(To Hindustani Muslims,)

Actually, Islam is the Enemy of Humanity. It is about oppressing women and attacking non-Muslims. Muhammad is child rapist and murderer. Every body must know what Islam actually is, and take proper precaution. Those days of victimizing non-Muslims, especially Hindus, are gone. If you do ‘Godhra’ there will be ‘Gujrat.’ If you try evil Jihad on us, we will break your legs. Since we also practice ‘Compassion’, we will carry you to the Hospital.
Read evil Quran: Al Taubah (9 – 29): Fight those who believe not in Allah nor the Last day, nor hold the the forbidden, which have been forbidden by Allah and his messenger, nor acknowledge the Religion of Truth from among the People of the Book, until they pay the Jaziyah with willing submission and feel themselves subdued.

गुमराह सिख को भेजा गया पत्र

From: Nitin Sehgal < >

गुमराह सिख को भेजा गया पत्र:

आचार्यजी का खंडन: 

“एक संकीर्ण सोच वाले सिख को एक पत्र भेजा गया, जिसने कहा, “मुझे हिंदुओं, उनके धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। मैं केवल एक सिख हूं और इससे अधिक नहीं। मैं पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करता, और भगवान में भी विश्वास नहीं करता। । मैं केवल एक सिख हूं। ” कृपया आचार्यजी द्वारा इस भ्रमित सिख को भेजे गए उत्तर को हिंदी और अंग्रेजी दोनों में पढ़ें। शाश्वत सत्य को खारिज करते हुए, उनका मनोविज्ञान एक विशेष क्लब का निर्माण करना है और इसलिए, प्रत्येक हिंदू को इस अलगाव के खिलाफ बोलना चाहिए क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्रकारी लिखते हैं कि पंजाब भारत की रोटी की टोकरी है, इस प्रकार कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड से सिखों को भरमाता है।

 और वे बदले में, भारत में रहने वाले सिखों को उत्साहित और अंतरंग करते हैं। इस तरह, लाखों सिख आत्म-प्रदत्त अज्ञानता के शिकार हुए हैं। आचार्यजी चाहते हैं कि निम्नलिखित संदेश सभी सिखों को पहुंचें ताकि बुरी शक्तियों से मुकाबला करने के लिए, जो हताश और आक्रामक रूप से विभाजन बना रहे हैं और भारत को आगे तोड़ने के लिए। अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्रकारियों का नियंत्रण सनकी अखबार गुमराह करने के लिए लिखते हैं, और सिखों को गुदगुदाते हैं, “पंजाब भारत की रोटी की टोकरी (Bread Basket) है: जब सच्चाई यह है कि यूपी राज्य पंजाब और हरयाणा दोनों में पैदा होने वाले संयुक्त गेहूं की तुलना में अधिक गेहूं पैदा करता है।“

शुक्रवार, 12 मार्च, 2021

प्रिय जगजीत सिंह जी,

नमस्ते का सबसे गहरा संस्कृत अर्थ है – “आप एक असीम आत्मा हैं और नमस्ते के साथ बधाई देने वाला स्वीकार करता है कि वह / वह एक असीम आत्मा है, और आप की तरह, वह भी समान सुपर आत्मा, सर्वशक्तिमान ईश्वर ओम का हिस्सा है, इसलिए मैं विनम्रतापूर्वक और आदरपूर्वक श्रद्धा से मैं अपना सम्मान प्रदान करता हूं।”

जगजीत का संस्कृत में अर्थ होता है, जिसने सभी का दिल जीत लिया है। यह नाम आपकी संकीर्ण सोच के साथ मेल नहीं खाता है।

जैसा कि आपने कहाआप केवल एक सिख हैंक्या आप सिख धर्म की अपनी विशिष्टता से पुराने पुराने शाश्वत कालातीत विज्ञान को अलग कर सकते हैंकृपया पढ़ें और बहस  करें। यह आपको कुछ यथार्थवादी शाश्वत निरपेक्ष सत्य सिखाएगा। यह शर्म की बात है कि ज्यादातर सिखों को जो बोले सो निहाल … सत श्री अकाल के अर्थ का थोड़ा भी अंदाजा नहीं है।

जो बोले सो निहाल … सत श्री अकाल – सच्चा महान समयहीन एक ओमकार है जिसका अर्थ है कि एक व्यक्ति को सदा आशीर्वाद दिया जाएगा जो कहता है कि ओमकार (ईश्वर) परम सत्य है। … गुरु की जीत की जय हो! “) … अंश दशम ग्रंथ के भजनों से लिए गए हैं गुरु गोबिंद राय सिंह द्वारा, जिन्होंने अपनी एक काव्य रचना अकाल उस्ताद का शीर्षक, कालातीत एक भगवान ओंकार की प्रशंसा में किया था।

अर्थ। सत शब्द संस्कृत के शब्द “सत्य” से लिया गया है और जिसका अर्थ है “सत्य या वास्तविक”। श्री (या श्री या श्री), एक सम्मानजनक शब्द, संस्कृत मूल का है जो सर्वशक्तिमान के सम्मान या सम्मान के रूप में उपयोग किया जाता है। अकाल या अकाल [अ + काल = समय से परे] कई नामों में से एक है जिसका उपयोग “कालातीत, ईश्वर – ओम कार” के लिए किया जाता है।

सत श्री अकाल – इसका अर्थ इस प्रकार है सत यानी सत्य, श्री एक सम्मान सूचक शब्द है और अकाल का अर्थ है समय से रहित यानी  ईश्वर  (ओमकार)  इसलिए इस वाक्यांश का अनुवाद मोटे तौर पर इस प्रकार किया जा सकता है, “ओमकार (ईश्वर) ही अन्तिम सत्य है”।

सत श्री अकाल का उपयोग लगभग सभी सिखों द्वारा एक दूसरे को बधाई देने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह जयकारा उनके सिख-सिसियारों को दिया गया था दसवें गुरु गोबिंद राय सिंह द्वारा, “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल”। … इसका मतलब यह है कि जो व्यक्ति कहता है कि ईश्वर परम सत्य है, उसे ईश्वर (ओमकार) का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

सत शब्द संस्कृत के शब्द “सत्य” से लिया गया है और जिसका अर्थ है “सत्य या वास्तविक”।

श्री एक संस्कृत शब्द है जिसका उपयोग किसी व्यक्तिदेवता या पवित्र ग्रंथ के नाम से पहले सम्मान देने के लिए किया जाता है, जैसे “श्री ग्रंथ साहिब।”

अकाल (या अकाल) एक संस्कृत यौगिक है जिसमें शब्द और काल शामिल हैं।  काल एक संस्कृत शब्द (या अकाल) है, जिसका शाब्दिक अर्थ वस्तुतः कालातीत, अमर, गैर-अस्थायी।

जय श्री कृष्ण – हर हर महादेव

हरि बोलो

भ्रष्टाचार के कारण राष्ट्र की 60% प्रगति रुकी हुई है | Letter to Modi ji

 

Nitina Sehgal < >               Mon, Feb 15, 2021 at 2:47 AM

To: Narendra Modi <narendramodi1234@gmail.com>

Bcc: skanda987@gmail.com

भ्रष्टाचार के कारण राष्ट्र की 60% प्रगति रुकी हुई है – कृपया अंदर पढ़ें, इस प्रकार देश अंततः गिरता है – अंधेर नगरी को होने से बचाओ और बचो। लोगों को उन भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ बोलना होगा। आप किस का इंतजार कर रहे हैं? मोदी और योगी को या अपने राज्य के मुख्यमंत्री को रोज फोन करो। यदि भ्रष्ट कर्मचारी अपने वेतन से संतुष्ट नहीं हैं, तो सरकार को अन्य नौकरियों को खोजने के लिए कहकर ज्ञान दिखाना चाहिए जो उनकी आवश्यकताओं को पूरा करेगा। लेकिन अब और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता के प्रति अपने कर्तव्यों को सम्मान, सम्मान और समर्पण से भरे उनके सेवकों के रूप में पूरा करें।

Please read in Hindi and English – कृपया हिंदी और अंग्रेजी में पढ़ें।

कृपया भ्रष्टाचार को रोकने के लिए शीघ्रता से कार्य करने की सलाह देते हुए, श्री मोदी को लिखे एक पत्र के अंदर पढ़ें, इससे पहले कि लोकतंत्र कम हो जाए और अंततः अधिनायकवादी शासन द्वारा नष्ट हो जाए।

भारत के भावी लोकतंत्र के विनाश को रोकें, सभी को अपने भीतर की बुरी प्रकृति को पढ़ना और नष्ट करना होगा। जो लोग अपनी शक्ति, स्थिति, लालच के माध्यम से भारत माता (धरती-माता) का अपमान और दुरुपयोग करते हैं, वे दंडनीय हैं।

मृत्यु के 30 सेकंड के भीतर एक पूरे भौतिक जीवन का पता चलता है – इसका उत्तर जानें, इस भौतिक पोशाक को त्यागने के बाद आप कहां जा रहे हैं? इस भौतिक दुनिया में, हर कोई भगवान में विश्वास करता है, लेकिन क्या वे वास्तव में भगवान के शब्दों में विश्वास करते हैं, जैसा कि भगवान श्री कृष्ण जी के परम व्यक्तित्व द्वारा कहा गया है?

वेदों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भगवान सर्वज्ञ हैं, सभी के मन के ज्ञाता, सर्वव्यापी, हर परमाणु में मौजूद हैं और आपके हृदय में अणु हैं, और सर्वशक्तिमान, सबसे शक्तिशाली है कि कोई भी दानव उसे कभी नहीं हरा सकता।

आचार्यजी प्रत्येक समझदार मानव से पूछते हैं, जिनके कंधों पर कुछ बुद्धिमत्ता है, यदि आप धोखा देते हैं, धोखा देते हैं, शक्ति और स्थिति का गलत तरीके से और कठोर रूप से उपयोग करते हैं, तो किसी भी मानव साथी के सम्मान के बिना, क्या आपको लगता है कि आप कभी भी ईश्वर को वापस पाने के लिए मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। स्वर्गीय आध्यात्मिक ग्रहों में वापस जाने के लिए, वैकुंठ, भौतिक जन्मों और मृत्यु के चक्रों के बंधन से; मानव शरीर सहित 8.4 मिलियन अवांछित प्रजातियों में शामिल हो गए?

यदि आप गलत संगति में फंस गए हैं, तो सही रेल गाडी पकड़ने के लिए, वैकुंठ, स्वर्गीय आध्यात्मिक ग्रहों के लिए सबसे तेज़ ट्रेन, आचार्यजी की सलाह पर ध्यान दें, प्रसन्नता, परम शांति, खुशी, सत-चित-आनंद को प्राप्त करने के लिए।

भगवान श्री कृष्ण जी भागवत-गीता अध्याय १६:२१ में कहते हैं, ” तीन द्वार हैं जो नरक की ओर ले जाते हैं, लालच वासना, और क्रोध। प्रत्येक समझदार व्यक्ति को ये त्याग देना चाहिए, क्योंकि वे आत्मा का ह्रास करते हैं। ”

पारिस्थितिकी – पर्यावरण भाग 1:

कृपया आचार्यजी के YouTube वीडियो के अंदर देखें: “संस्कृत, भारत-यूरोपीय भाषाओं की मातृभाषा – सरल उदाहरण। दुनिया के लिए अतुलनीय उपहार

दुनिया के लिए एक अतुलनीय उपहार:

भारत को एक अधिनायकवादी क्षेत्र में गिरने से बचाने के लिए तत्काल संदेश।

यदि सरकार के विभागों में भ्रष्टाचार नहीं रोका जाता है, प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता के परिणाम खो जाएंगे, यहां तक कि जो लोग भ्रष्ट हैं, जैसे मकड़ी अपने बनाए हुए जाल में फंस गई। ये स्वार्थी लालची भ्रष्ट कर्मचारी लोगों की प्रगति को रोक रहे हैं और परिणामस्वरूप राष्ट्र, क्योंकि उन्हें प्रतिपूर्ति की आवश्यकता है, एहसान कार्य करने के लिए।

15 फरवरी 2021 को रविवार है

प्रिय श्री मोदी जी

नमस्ते,

यह बहुत आवश्यक है कि आप सभी सरकारी विभागों में निहित बहुत गंभीर भ्रष्टाचार की सच्चाई का पता लगाएं। यथार्थवादी स्थिति जानने के लिए कृपया फिल्म देखें।

 

 

गहराती फिल्म का संदेश भारत माता के सभी लोगों के लिए है, इसलिए लोकतंत्र को अधिनायकवाद की ओर ले जाने के लिए, कर्मचारियों के लालच और शक्ति और स्थिति का दुरुपयोग करने के कारण यह भ्रष्ट कर्मचारियों को बाहर निकालने और ईमानदार समर्पित देशभक्तों के साथ बदलने का समय है क्योंकि लाखों लोग एक सच्चे जीवन जीने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

यह समय है, मौके पर भ्रष्ट कर्मचारियों से छुटकारा पाने के लिए, देश के लिए नंबर एक दुश्मन, चूंकि गंदे कर्मचारी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के सुचारू कार्य को बिगाड़ते हैं।

जो लोग राष्ट्र के लिए अच्छी तरह से मतलब रखते हैं, उनकी प्रगति रुक गई क्योंकि लालची भ्रष्ट कर्मचारियों को कुछ एहसानों की जरूरत है, समयबद्ध तरीके से अपने कर्तव्यों को निभाने और करने के लिए।

पारिस्थितिकी – पर्यावरण भाग 1:

कृपया आचार्यजी का YouTube वीडियो देखें: “संस्कृत, भारत-यूरोपीय भाषाओं की मातृभाषा – सरल उदाहरण। दुनिया के लिए अतुलनीय उपहार

ऐसे गंदे कर्मचारी सरकार के सुचारू कार्य के लिए कुल बाधा हैं, और इस तरह, देश की अर्थव्यवस्था का लगभग 60% हिस्सा खो रहा है क्योंकि ऐसी आदतें उत्पादकता को रोकती हैं, और समय का एक बड़ा नुकसान होता है, जिससे लोगों में गंभीर निराशा होती है। ऐसे गंदे स्वार्थी लालची कर्मचारी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को धीमा करने के लिए जिम्मेदार रहे हैं। लालची कर्मचारी अर्थव्यवस्था की मंदी, राष्ट्र की प्रगति, उद्यमी के सपने और उपलब्धियों के प्रति स्वतंत्रता का कारण बनते हैं।

वे सत्ता और स्थिति का दुरुपयोग करके कानून को अपने हाथ में लेते हैं और इस प्रकार वे अनावश्यक प्रतिबंध, भय और भय पैदा करने के लिए जिम्मेदार हैं।

हर सरकार के कार्यालय के बाहर, मेल बॉक्स के समान एक शिकायत बॉक्स और एक बड़ा साइन बोर्ड होना चाहिए, जिससे लोगों को एक निश्चित विभाग के कर्मचारियों के साथ अपनी राय और अनुभव छोड़ने के लिए कहा जा सके:

https://images.app.goo.gl/8SHUsFjGFV6Jcxxb7

यह योग्य देशभक्तों को काम पर रखने का समय है जो पूरी लगन, प्यार और सम्मान के साथ लोगों की सेवा करना पसंद करेंगे। लाखों लोगों को नौकरियों का इंतजार है।

एक महान देश, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, सबसे भ्रष्ट देशों में से क्यों है?

यदि यह दुनिया के क्षेत्र में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाता है, तो यह समय नहीं है कि आचार्यजी द्वारा सलाह के अनुसार नीतियों को लागू करने के लिए त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि कोई भी कभी भी गंदे स्वार्थी अभिमानी, सत्ता और स्थिति के भूखे कर्मचारियों से आहत न हो,

जिन्हें एहसान की ज़रूरत होती है, वे अनावश्यक प्रतिबंध लगाते हैं, डराने का काम करते हैं, ताकि लोगों में भय पैदा हो।

https://m.economictimes.com/news/politics-and-nation/india-ranked-80th-in-corruption-perception-index/amp_articleshow/73560064.cms

जब तक जमीनी स्तर से भ्रष्टाचार पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक एक राष्ट्र ईमानदारी से प्रगति की ओर काम नहीं कर सकता है।

आचार्यजी सलाह देते हैं कि यह सही मायने में उनकी योजना पर काम करने का समय है।

स्वार्थी लालची देशद्रोही को रोकने के लिए सरकार को सही दृष्टिकोण की आवश्यकता है, क्योंकि वे उन ईमानदार और ईमानदार लोगों में निराशा, अकाल, गरीबी, कुपोषण और गरीबी की ओर ले जाते हैं जो राष्ट्र का भला करना चाहते थे।

मोदी जी, आपको अपना पैर मजबूती से नीचे रखने की ज़रूरत है जैसे कि अंगद भाई ने रावण की लंका पर किया था, इसलिए कोई भी आपको चुनौती नहीं दे सकता।

विज्ञान यह है कि यदि आप सभी को खुश करने का प्रयास करते हैं, तो आप किसी को भी खुश नहीं कर सकते, लेकिन यदि आप लोकतांत्रिक प्रणाली के धार्मिक सिद्धांतों को दृढ़ता से लागू करते हैं, तो आप सभी को खुश करेंगे।

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति लिंकन ने ज्ञान के महान शब्दों को बोला, जो सभी लोगों के लिए था।

अमेरिकी राष्ट्रपति, अब्राहम लिंकन के शब्द, “लोगों की सरकार, लोगों द्वारा, लोगों के लिए, पृथ्वी से नष्ट नहीं होगी।” अब्राहम लिंकन ने आगे कहा, “हमारे पास, जैसा कि सभी सहमत होंगे, एक स्वतंत्र सरकार, जहां हर आदमी को हर दूसरे आदमी के साथ समान होने का अधिकार है। इस महान संघर्ष में, सरकार का यह रूप और मानव अधिकार का हर रूप लुप्तप्राय है, अगर हमारे दुश्मन सफल होते हैं।”

यह शर्म की बात है कि भारत का भ्रष्टाचार की स्थिति दुनिया के तानाशाह, अधिनायकवादी, निरंकुश देशों में शुमार है, जो पृथ्वी पर मौजूद भ्रष्ट राष्ट्रों में शुमार है।

फिर उस लोकतंत्र का उद्देश्य क्या है, जहां हर विभाग सत्ता, पद और समाज की सेवा के लिए कुछ लाभ पाने के आधार पर काम करता है?

क्या आपको लगता है कि भारत का कोई भी देशभक्त अपनी छवि दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों में से एक है जो अधिनायकवादी है?

भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र माना जाता है, फिर भारत में इतना भ्रष्टाचार क्यों है, जो तानाशाही राष्ट्र के साथ मेल खाता है?

उत्तर: सच्चाई यह है कि सरकार हर ‘सरकार के विभाग’ के जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने के लिए वास्तव में मजबूत उपायों को लागू करने में विफल रही है।

https://m.economictimes.com/news/politics-and-nation/india-ranked-80th-in-corruption-perception-index/amp_articleshow/73560064.cm

मोदीजी, आचार्यजी आपको रातों रात भ्रष्टाचार को रोकने में मदद कर सकते हैं। यह एक शाश्वत सत्य है लेकिन आप ऐसे सलाहकारों से घिरे हुए हैं जो अब तक पूरी तरह से असफल साबित हुए हैं।

कृपया इसे एक सकारात्मक दिशा में ले जाएं क्योंकि आचार्यजी का उद्देश्य आपको मदद करना है।

ऐसा क्यों कहा जा रहा है?

उत्तर: क्योंकि भ्रष्टाचार ने हर विभाग में स्तर तक कई गुना वृद्धि की है, जैसे कि दीमक इमारत के खंभों के शीर्ष तक पहुंच गए हैं, पूरे घर को नीचे गिराने के लिए तैयार हैं।

मतलब, ये अधिनायकवादी स्वार्थी लालची कर्मचारी बहुत अधिक समस्याएं पैदा कर रहे हैं

जब तक वे लोगों से कुछ व्यक्तिगत लाभ नहीं देखते हैं, समय पर शिष्टाचार पर लोगों की सेवा करने के लिए।

यहां एक मेल बॉक्स का एक उदाहरण दिया गया है – इसी तरह के शिकायत बॉक्स हर सरकार के कार्यालय के बाहर स्थापित किए जा सकते हैं, शहर के कार्यालय, जल-विद्युत विभाग, अदालतें, पुलिस स्टेशन, अस्पताल, हर गाँव में, जहाँ लोग अपनी राय छोड़ सकते हैं, चाहे वे गुमनाम ही क्यों न हों।

आचार्यजी ने आपको मोहनी बाण के उपयोग के बारे में सलाह दी थी जिसे भगवान श्री राम जी ने पंचवटी में खर और दुशन के राक्षसों से छुटकारा पाने के लिए इस्तेमाल किया था।

मोदी जी आपका मतलब देश के लिए अच्छा है। कार्रवाई में लागू करने के लिए, आपको अपने जैसे कई अच्छे अर्थ वाले देशभक्तों को सशक्त करना होगा। शब्दों और भाषणों में सीमा होती है। इसे व्यावहारिक रूप देने का समय आ गया है।

दूसरे शब्दों में, आपको अपने भ्रष्टाचार को साफ करने के लिए अपने प्राधिकार को सौंपना होगा गुप्त जांच दल बनाकर: लाल, नारंगी और हरे रंग की चेतावनी महान देशभक्तों की जांच टीम जो आपके द्वारा सशक्त हैं। साथ ही, दाएं हाथ को बाएं हाथ का पता नहीं है .. मतलब रेड अलर्ट टीम नारंगी और हरे रंग की सतर्क टीमों को नहीं जानती है। इस तरह, वे एक-दूसरे पर भी सतर्कता बरतेंगे।

https://images.app.goo.gl/8SHUsFjGFV6Jcxxb7

यह समय है कि सरकार को इस तेजी से बुराई को रोकना चाहिए, जो भारत माता की लोकतंत्र की नींव और स्तंभों को नष्ट करने के लिए तैयार है, यह दीमक सभी मूल निवासियों को स्वतंत्रता और लोकतंत्र के सिद्धांतों को मजबूती से बनाए रखने के लिए बहुत खतरना

आचार्यजी ने आपको कई बार सलाह दी थी कि आपको भगवान श्री राम की रणनीति का उपयोग करने की आवश्यकता है। विभिन्न विभागों में जाएं या सत्य का पता लगाने के लिए विभिन्न विभागों में सबसे विश्वसनीय देशभक्तों को भेजें, “वे कैसे कार्य कर रहे हैं?” उनके पास मौके पर किसी भी गलत कर्मचारी को खारिज करने का अधिकार होना चाहिए।

सवाल यह है कि, “क्या उन्हें अपना वेतन नहीं मिल रहा है?”

क्या वह वेतन राशि संतोषजनक नहीं है?

यदि ऐसा नहीं है, तो उन्हें यह कहकर ख़ारिज कर दें, “दूसरी नौकरी खोजें जो आपकी ज़रूरत को पूरा करे। इस नौकरी ने आपको भुगतान किया जो आपको ईमानदारी, समर्पण, प्रेम और सम्मान के साथ जनता की सेवा करने के लिए रखा गया था? इसलिए, आपको लोगों से किसी विशेष एहसान की मांग करने का अधिकार नहीं था, समय पर शिष्टाचार में उनकी सेवा करने की प्रतिपूर्ति।” “इसके अलावा, आपके पास कानून को अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं था। आप लोगों की प्रगति और काम को रोक नहीं सकते क्योंकि यह राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है। आपने अर्थव्यवस्था की धीमी गति का कारण बनने के लिए अनुचित स्वतंत्रता ली है। इसलिए, आप अपराध के दोषी हैं और राष्ट्र के नंबर एक दुश्मन हैं। क्या आप इस बिंदु को जोर से और स्पष्ट रूप से समझते हैं?”

लालची लोग और कर्मचारी मेहनती लोगों के जीवन को खतरे में डालते हैं जो एक ईमानदार जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं।

यह नरक बाध्य लालच प्रकृति उपलब्धियों, और उनके उद्यमियों के विकास के लाभ के लिए देश के ईमानदार मेहनती लोगों की प्रगति को रोकती है।

लालच नरक बाध्य प्रकृति बच्चों के मुंह से दूध और भोजन छीन लेती है, जिससे विशाल अकाल और कुपोषण होता है।

भगवद-गीता शालीनता और सभ्यता के मानदंडों के भीतर ऐसे लालची लोगों और रिश्वत की तलाश करने वालों को चेतावनी देती है।

क्या वे गरीब या अमीर की परवाह किए बिना पूरे समर्पण, सम्मान, प्रेम और पूर्ण समर्पण के साथ ईमानदारी से समाज की सेवा करने के लिए नहीं चुने गए हैं?

इस तरह की कक्षाएं लोगों के लिए, देश के लिए और खुद के लिए, और अपने स्वयं के परिवारों के लिए नंबर एक दुश्मन हैं, क्योंकि यह उन लोगों की प्रगति को रोकती है, जो अपने परिवारों सहित, एक सच्चे जीवन जीने की इच्छा रखते हैं।

इस प्रकार के लोगों को हर तरह से रोका जाना चाहिए क्योंकि वे आघात, निराशा से डराने के लिए जिम्मेदार हैं।

ईमानदार सरकार का यह कर्तव्य है कि वह लालची कर्मचारियों के ऐसे दुष्ट वर्गों को छान-बीन करे जो कि पूरी लगन के साथ और बिना किसी अवैध प्रतिपूर्ति के लोगों की सेवा करने के लिए थे।

आचार्यजी आपका मार्गदर्शन कर सकते हैं क्योंकि उन्होंने पूर्ण सत्य को देखा है।

जय श्री कृष्ण – हर हर महादेव

हरि बोलो

 

An Open letter to SC of Bhaarat

On Wed, Jan 20, 2021 at 3:34 AM am <mohanalok@gmail.com> wrote:

As Received (on WhatsApp)

Dear Supreme court Judges,

  • A party Wins Lok Sabha elections gets 303 seats with massive 46% vote share.
  • Then they Win State after state to state & get majority in Rajya Sabha
  • They Pass a bill in Both House get President’s approval & it becomes law.

Some 20-25 K farmers/agents of one state Punjab sit on Delhi roads for a month, then you stay the LAW.

What a mockery of the democratic process?

Where are our protectors of democracy now? (Where are) those who were screaming that democracy is being murdered not so long ago?

The Supreme Court today said, “We are trying to solve the problem in accordance with the law.”

Hello Sir jee! Your job is not to solve a problem. That would mean you don’t want to annoy any party. You want to please everyone. Sorry! you are not here to please people. You are here to interpret existing law and pronounce a judgment. Your job is to say who is right and who is wrong. That’s all. Nothing more. Nothing less.

But you didn’t do that. What do you do? From this country of 130 crore people, you hand pick four people and ask them to tell you what is their opinion about these laws. And then you would ask the gov’t to implement their opinion. You would ask the gov’t elected by 130 crore people to implement the opinion of four people. The wish of 130 crore people expressed through their representatives in the parliament is insignificant for you.

Dear Supreme Court!

If a committee can decide how this country should be governed, why bother about an Election Commission and why should millions of voters vote? Scrap the Parliament (to save hundreds of crores!) And form various committees of experts, who will tell you how this country should be governed?

Or, you can ask the government that before they introduce a bill in the Parliament, they must first bring it before you, and seek your pre-approval. (I think that also is not right. – Steve Brown) Only after that, you or a committee formed by you have approved it, it can be taken to the Parliament for vote. (Not right because then the ultimate power would be in the four persons. – Steve Brown) That will save time and effort of a lot of people.

But you won’t do that. You want to take over the power of the parliament. But obviously, you don’t want to be seen doing it. (When the environment is full of anti-democratic asuras, the cowards cannot show courage to do right thing.  Same, if the asuras are on the position of the judges. Therefore, the Vedic scriptures tell the people: वयम् राष्ट्रे जगृयाम्॥ – Suresh Vyas)

By the way, yesterday you said that you have received many petitions against the farm laws, but you haven’t received a single petition supporting the law. I would hold it as the most stupid argument ever made by the apex court in its entire history. I mean, what kind of an idiotic argument is this? Let me ask you. The population of this country is 130 crores. We have seen only a few lakhs protesting against the laws at Delhi borders. Even if we take the number of people, we have seen participate in various dharna, pradarshans across the country as 1 crore, there are still 129 crore people in this country who we never saw taking part in these protests. So, can we say that 129 crore people are supporting these laws? Can we? No, we can’t. That will be a silly argument.

Dear Supreme Court! Please don’t allow people to make a mockery of yourself. I hope, you know that the protestors have rejected your verdict even before you have given it.

You know it very well. These (agitating) people don’t believe in courts. Didn’t you hear the same people say at Shaheen Bagh last year that they don’t believe in Supreme Court and they would take over public place to bring the government to its knees? Don’t you remember that? You certainly do. Then why don’t you pass judgments? Why do you dilly dally and let people openly disobey you?

Please do what you are supposed to do. Don’t do things that you are not supposed to do.

Your job is not to solve a problem to everyone’s satisfaction. Your job is to pass judgments, interpret the law, not stay it! So just do that. You have no business forming a committee to approve or reject a legislation passed by the legislative assembly.

Nor are you God!

(The gov’t needs to select only the patriotic persons as judges, then provide sufficient protection to enable them to fearlessly pass judgements on important matters per the constitution. – Suresh Vyas)

Open Letter to PM Modi ji | Modi Ji must stop the loot of Hinduu Temples

From: Mohan Gupta < >
Sent: Thu, 14 Jan 2021 18:40
Subject: Modi Ji must stop the loot of Hinduu Temples

Modi Ji, please stop the loot of Hinduu Temples
               Please allow freedom for temples by enacting a system of representative council constituted with religiously relevant people with scholastic abilities to oversee, advise & decide. Stop intervention of secular governments & political nominees in Hinduu religious affairs
Dear Sirs,
On behalf of millions of devotees from the Global Hinduu communities, who considers their temples as means to worship the God – the Almighty, we humbly request your attention to the following to affect the creation of a proper system for the service, maintenance & preservation of Hinduu temples, temple assets, temple customs, temple arts, knowledge of Thantra-Mantra-Yantra etc. associated with temples, learning, teaching & propagation of Vedas, Upanishads, other scriptures and numerous other tenets of Hinduu Cultural life. It is further humbly requested that the Constitutional guidelines and laws may be reviewed if required to effect a constructive change.
1. A new system for Hinduu temple service and maintenance has to be developed and implemented at the earliest considering the historical backdrop to ensure no intervention of secular government and politicians in Hinduu temple affairs, noting that they are not intervening in Christian Church and Muslim Mosque affairs. 
2. This system should ensure that the numerous ancient Hinduu temples in India are properly, effectively and meaningfully preserved and utilized for the purposes for which it is intended and not just for purposes of tourism development and commercial benefits. As we all know, the prime purpose of temples are not to promote commercial tourism.
 3. At present, the temple assets and its affairs at large, are taken care by the bodies set up by the secular government which are a mixture of government officials and political nominees. It is evident that these personnel are the key decision makers in the affairs of temples about which they are not really conversant enough as it appears.
4. Such government officials are entering into the government service through PSC examinations or such processes. And political nominees get their entry based on their comparative merits in their party and as decided by the party!!
5. It is anyone’s guess that a governing body of temple affairs, constituted through such a secular process will not really stand the test of merit and competency when it is compared to a panel of subject experts in the area of temple affairs, spiritual practices, Thantra etc. that are part & parcel of Hinduu religious life.
6. As an obvious result, temples have become centers of commercial activity and many consider temples as mere establishments for employment. In many temples it is observed that the Priests eyes on devotees who pay higher amount as ‘dakshina’. In many temples, the temple employees behave in rude manner as if the devotes committed a great mistake of visiting the temple. Recently, in Guruvayur temple, a devotee was beaten up by a temple employee. Many might have had several of such experiences of inadequacy to cite upon. All this happens or it shows that the people who are engaged for the temple services are not really capable to execute the work they are entrusted with. The administrative bodies are clueless about how to recruit the right people for the right job, how to train them, how to retain them, the importance of means & ways of setting right attitude in the temple staff as well as visiting devotees. All these happens while a large number of scholars and such people knowledgeable in such matters relating to Hinduu culture, rituals, Vedas, Upanishads, Thantra etc are not given any opportunity to contribute their wisdom for the well being of the Hinduu society that they hail from.
7. In many temples, crores of rupees are received as offerings. Many Hinduus believe that such income is not fully and effectively utilized for the Hinduu religious purpose but it adds to the treasury of the secular government apart from paying the salary of temple staff.  And this happens while many ancient temples are running short of money to maintain themselves in a reasonable status.  While other religions are utilizing such fund for their religious affairs such as learning, teaching and propagation of their religious texts, literatures, their customs etc, Hinduus do not enjoy that freedom to have centers of learning, teaching etc. As a result, majority of Hinduus becomes just ‘believers’ without possing the knowledge they are supposed to have about their culture, religion and religious practices,customs, rituals, literature etc. and its significance. They find it hard to find a facility in their neighborhood for the learning of their relevant religious texts and Samskritam, the language that is the key to treasures of Hinduu wisdom.
8. Ideally, government officials & politicians should refrain from temple affairs and focus on their area of activity and excel in that.
9. Decision making authority & responsibility on temple affairs should be entrusted with a duly constituted, competent body that is populated with the subject experts such as Sanyasins from prominent ashrams /mutts, intellectuals and veterans in the Hinduu religious & scriptural matters, and principles governing the installation and maintenance of temples. 
10. As we know, there are a lot of such people in every states of India who have devoted their life for the pursuit of learning and propagating Hinduu scriptures, spiritual practices and its ways and means and so on. But the knowledge of such visionaries are hardly utilized for any policy making, temple related issues etc and the community to which they belong to. 
11. A suggestion about a model apex body to be laid out is stated here. We request this model be subjected for debate, correction and implementation by involving intellectuals. The model is explained below.
11.1. Based on the geographical area, each state may be divided into 3 or four zones. For example, to start with the southern most state, Kerala, it may be divided into 3 zones – Southern, Middle and North zones. Then the Government will nominate one IAS officer to each of these zones as Zonal Devaswam Commissioners (ZDC). The senior person will be the ‘Chief Devaswam Commissioner’.
11.2. These commissioners will initiate the process to constitute an apex body of Hinduu religious and temple affairs preferably with name – ‘Hinduu Mandir Seva Prathinidhi Sabha’ (HMSPS). The name shall remain uniform for all the states but with the prefix of the corresponding state name.
11.3. The zonal commissioners shall collect the data of ashrams, mutts, other spiritual/religious institutions, temples, scholarly individuals etc. Then, each institution will be contacted directly and by way of an announcement in the leading media, inviting expression of interest from all religious/cultural entities to join as member of HMSPS by explaining them the whole plan.
11.4. All such applicants/nominated persons should undergo a screening process to establish their credibility and caliber before being inducted into HMSPS. Care must be taken to counsel them well before so that no one gets misunderstood about the whole idea.
11.5. Such screened & finalized applicants & nominated persons shall elect one among them as their representative through secret balloting.
 11.6. The elected representative and the Chief Devaswam Commissioner shall be the authorized joint signatories of HMSPS.
 11.7. Any issue pertaining to the Hinduu temples and the society at large shall be debated & decided in HMSPS in a democratic way.
 11.8. Norms for recruitment, remuneration, training etc. of staff in each temple shall be decided by the HMSPS.
 11.9. An executive officer with staff shall be appointed in each temple by the HMSPS with clearly stating his duties & responsibilities. The size of organization and the facilitations shall be governed by the prominence, size and activity of the temple.
 11.10 HMSPS shall have zonal offices at a centrally located town.
 11.11. With the implementation of this system after thorough debate at various forums in a time bound manner, the present system of secular government involving in temple affairs could be scrapped at the earliest.
11.12. HMSPS should facilitate centers for the learning (Pata Shala) of Samskritam language, Vedic Mathematics, The Chathur Vedas, Upanishads, Jyothi-sham, Vasthu Shasthra, Gemology, Vegetarian cookery, Basic customs & procedures of pooja, Environmental preservation, meaning & significance of the customs and rituals, science behind temple etc etc as prescribed by the religious and spiritual masters of Hinduu Dharma. This would ensure that ignorant citizen will not get cheated by fraudsters and also to avoid Hinduu religious becoming a center stage for the so- called secularism drama.
11.13. Whenever situations demands and if required, the Minister of cultural affairs will act based on the inputs from the HMSPS and never directly.
We humbly request you to treat this with top priority since the efficient existence of Hinduu Dharmic thoughts would directly imply the effective prevalence of secularism in India.  We humbly request the government to subject the concept of creation of such a representative council for a national debate by scholarly people and enact a new suitable law at the earliest and help Hinduus to know Hinduu Dharma and its basics at least. Hinduus wish to learn Hinduu Dharma in an authentic way.
Mechanical engineering is handled by Mechanical engineers. Cardiology is handled by Cardiologists and Nuclear science is handled by nuclear scientists so as to have good results for the efforts. It would be disastrous if such technological establishments are controlled by non experts. Similarly Hinduu temple affairs are to be handled by people who have expertise in the relevant sciences, physiology and psychology pertaining to temples. Else it would lead to undesirable effects to the society as we have been witnessing so far and at present.
So, a change for betterment is essential. We are hopeful of the newly elected government at the center under respectable leader- ship of Shri Narendra Modi ji.
Sir, we humbly request you to do the needful to ensure equality and natural justice for Hinduus along with the followers of other religions as assured by the Constitution of India.
This petition should be sent to all members of parliament members, all MLA’s of every state, all corporators of every municipality and corporations:
Please help in sending mail to all such people.
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Government control of Hindu Temples
Hindu Religious and Charitable Endowment Act of 1951
                    Allows State Governments and politicians to take over thousands of Hindu Temples and maintain complete control over them and their properties. It is claimed that they can sell the temple assets and properties and use the money in any way they choose.
 
               A charge has been made not by any Temple authority, but by a foreign writer, Stephen Knapp, in a book (Crimes Against India and the Need to Protect Ancient Vedic Tradition), published in the United States that makes shocking reading. Hundreds of temples in centuries past have been built in India by devout rulers and the donations given to them by devotees have been used for the benefit of the (other) people. If, presently, money collected has ever been misused (and that word needs to be defined), it is for the devotees to protest and not for any government to interfere. This letter is what has been happening currently under an intrusive law.
                  It would seem, for instance, that under a Temple Empowerment Act, about 43,000 temples in Andhra Pradesh have come under government control and only 18 per cent of the revenues of these temples have been returned for temple purposes, the remaining 82 per cent being used for purposes unstated.
Apparently even the world famous Tirumala Tirupati Temple has not been spared. According to Knapp, the temple collects over Rs 3,100 crores every year and the State Government has not denied the charge that as much as 85 per cent of this is transferred to the State Exchequer, much of which goes to causes that are not connected with the Hindu community.
Was it for that reason that devotees make their offering to the temples?
Another charge that has been made is that the Andhra Government has also allowed the demolition of at least ten temples for the construction of a golf courses. Imagine the outcry, writes Knapp, if ten mosques had been demolished.
It would seem that in Karanataka, Rs. 79 crores were collected from about two lakh temples and from that, temples received Rs seven crores for their maintenance, Muslim madrassahs and Haj subsidy were given Rs 59 crore and churches about Rs 13 crore. Very generous of the government.
Because of this, Knapp writes, 25 per cent of the two lakh temples or about 50,000 temples in Karnataka will be closed down for lack of resources, and he adds: The only way the government can continue to do this is because people have not stood up enough to stop it.
                Knapp then refers to Kerala where, he says, funds from the Guruvayur Temple are diverted to other government projects denying improvement to 45 Hindu temples. Land belonging to the Ayyappa Temple, apparently has been grabbed and Church encroaches are occupying huge areas of forest land, running into thousands of acres, near Sabarimala.
                A charge is made that the Communist state government of Kerala wants to pass an Ordinance to disband the Travancore & Cochin Autonomous Devaswom Boards (TCDBs) and take over their limited independent authority of 1,800 Hindu temples. If what the author says is true, even the Maharashtra Government wants to take over some 450,000 temples in the state which would supply a huge amount of revenue to correct the states bankrupt conditions.
And, to top it all, Knapp says that in Orissa, the state government intends to sell over 70,000 acres of endowment lands from the Jagannath Temple, the proceeds of which would solve a huge financial crunch brought about by its own mismanagement of temple assets.
                Says Knapp: Why such occurrences are so often not known is that the Indian media, especially the English television and press, are often anti-Hindu in their approach, and, thus, not inclined to give much coverage, and certainly no sympathy, for anything that may affect the Hindu community. Therefore, such government action that play against the Hindu community go on without much or any attention attracted to them.
             Knapp obviously is on record. If the facts produced by him are incorrect, it is up to the government to say so. It is quite possible that some individuals might have set up temples to deal with lucrative earnings. But that, surely, is none of the governments’ business? Instead of taking over all earnings, the government surely can appoint local committees to look into temple affairs so that the amount discovered is fairly used for the public good?
            Says Knapp: Nowhere in the free, democratic world are the religious institutions managed, maligned and controlled by the government, thus denying the religious freedom of the people of the country.
But it is happening in India.
                Government officials have taken control of Hindu temples because they smell money in them, they recognize the indifference of Hindus, they are aware of the unlimited patience and tolerance of Hindus, they also know that it is not in the blood of Hindus to go to the streets to demonstrate, destroy property, threaten, loot, harm and/or kill. Many Hindus are sitting and watching the demise of their culture. They need to express their views loud and clear. Knapp obviously does not know that should they do so, they would be damned as Communists. But, it is time someone asked the Government to lay down all the facts on the table so that the public would know what is happening behind its back. Robbing Peter to pay Paul is not secularism. And temples are not for looting, under any name. One thought that Mohammad of Ghazni has long been dead.
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Freeing Hindu temples from government control

हिन्दू ओ को मरना नहि है; जी के जंग जीतना है।

From: Suresh Vyas < >

Sri Bina Goel ji,
Below are your lines and my responses.
“I have decided that for if SWAMI PARAMHANS JI is given O.K. by
President of India for “ICCHA MRITU” “
sv: Yes, the law says to end one’s own life is illegal, but it is not enforceable.
During Kumbh Mela, some choose to quit the body.
 
 I will go to AYODHYA to FAST UNTO DEATH to support him for BHARAT to be declared HINDU RASTRA
sv: I do not recommend it for two reasons:
1) No Hindu Dharma scripture tells us to fast, or fast till death, for a political reason.
2) The modus operandi of the Islam is to use brute force to spreaad Islam and kill kafirs. So, if a kafir dies by fasting, then it is the easiest thing for them.
 
Therefore, I suggest start a movement, be on streets with friends and whoever comes to join, to press the govt to officially declare Bhaarat a Vedic/Hindu State, where the constitution will be pro-Vedic, and Islam will be illegal.
 
(it is hindu rastra as 80 Percent population is HINDU) by Act of LOK/RAJYA SABHA and bill passed by RASTRAPATI JI.
sv: Doable. Let us press the President to do it.
I am 81 year old and Ex-Medical Officer (Army No.RO(M) 20326 and VETERON
served during Indo-Pak War 1971 and was posted at COMILA(Now Bangladesh)
3 General Hospital under 3 Corps of Lt.Gen. SAGAT SINGH, My comm.Officer
was Col. KUDWA. At present I am a practising Pathologist At Indore, My Mob Nos are 9893966540 & 6264307075.
sv: My praNaam to you for the service you did and are doing.
I am deeply impressed by your thoughts,
Best wishes- CAPT DR G.K.GOEL,MBBS,DCP,Ex-AMC”
sv: All glory to my Guru and Sri Krishna!. I am just an ordinary Krishna devotee.
Every moment at this time the Hindus have to think how to defeat the enemies of Bhaarat and enemies of the Hindus and Hindu Dharma who are close wherever they are.
Unity, and united actions for the goal is the mantra of today till Bhaarat becomes Vedic State.
jaya sri krishna!
sv

 

A STRONG Message to Honorable President, PMO, MHA, Governor, CM, Defense, Military Forces, Global Citizens, NGOs, VHP/RSS/Sangh and Global Media

From: pvtint < >

My SERIOUS-STRICT-STRONG Message to Honorable President, PMO, MHA, Governor, CM, Defense, Military Forces, Global Citizens, NGOs, VHP/RSS/Sangh and Global Media.

Title1: All India Association of Criminals, Murderers, Terrorists, Fraudsters and Every Other Types of Criminals – We Citizens Request Security, Safety and Justice From You.
 
Title2: ऐसा लगता है कि अब कोई और चारा नही बचा – अगर भारतीय संविधान, कानून, पुलिस और नेता हमारी रक्षा नही कर सकते, तो फिर अपराधियों, गुंडो, खूनियों, आतंकवादियों और गुनाहगारों से ही मदद मांगनी पड़ेगी।
 
Title3: All India Politicians, Parliamentarians, MPs, MLAs, Constitutionally Responsible People and Judiciary People, Administrative People and Police – You All Failed in Providing Security, Safety and Justice to Citizens.
 
आज मुझे ऐसा कंटेंट लिख़ने की नौबत क्यों आयी? अपराधियों, गुंडो, खूनियों, आतंकवादियों और गुनाहगारों से मदद क्यों मांगनी पड़ रही है? उसका कारण समझने की ज़रूरत है। इसी पर आज का ये कंटेंट समर्पित करता हूँ।
 
आदरणीय राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री जी, रक्षामंत्री जी एवं गृहमंत्री जी,
 
आप इस कंटेंट को ज़रूर पढ़े, और पढ़ कर मुझ पर अत्याधिक क्रोध करें – ये ही मेरे इस कंटेंट का मकसद है। क्योंकि जब तक आपको मुझपे क्रोध नहीं आएगा, तब तक आप आप एक्शन नहीं लेंगे। क्योंकि प्यार से, इज़्ज़त और सम्मान से, संवैधानिक एवं कानूनी तरीके से तो, स्वयं मैं भी, और देश के करोड़ों लोग भी, आपसे नम्र निवेदन कर चुके। लेकिन अब तक आप लोगों ने हमारे उन कानूनी नम्र निवेदनों पर कोई ध्यान नही दिया, न एक्शन लिया। जी हाँ, मैं महाराष्ट्र में हो रहे अत्याचारों की ही बात कर रहा हूँ। एक सम्मानित पत्रकार अर्णब गोस्वामी बेचारा रो-रो कर केंद्र सरकार से, सुप्रीम कोर्ट से, राष्ट्रपति से, जनता से; अपने प्राणों की रक्षा की भीख मांग रहा है – लेकिन आप में से किसी ने भी अभी तक इस पर कोई कार्यवाही नही की। इतने सारे नागरिक सड़क पर आकर महाराष्ट्र में 356 के तहत आपातकाल(emergency) घोसित करने की प्रार्थना कर रहे है, ताकि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शाशन लागू किया जा सके। लेकिन वो भी आपको दिखाई नही दे रहा। ये तो वाकई में बड़ा बहादुरी का काम कर रहे हो आप। अच्छा है, मारने दो सालों को। वैसे भी आम लोग जीकर क्या करेंगे, फालतू मैं देश की जनसंख्या बढ़ाएंगे – क्यों सही कहा न मैंने? प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी की एक आवाज़ पर हम दीपक भी जलाते है, हम ताली-बर्तन भी बजाते है, हम आज्ञा का पालन भी करते है और हम ज़रूरत पड़ने पर क्षमा भी मांग लेते है। लेकिन ये अंबेडकर जी का कौनसा संविधान या कानून है, जो आपकी एक आवाज पर तुरंत कार्य करे, और जनता के हज़ारों-लाखों आवाज़ पर, एक बार भी सुनवाई न करें? इसलिए आज के कंटेंट के टाइटल मैं, मैंने अपराधियों, गुंडो, खूनियों, आतंकवादियों और गुनाहगारों से मदद माँगने की बात लिखी है। ताकि आप सभी पढ़ने वालों को कुछ एहसास हो, अपनी ज़िम्मेदारीयों के पालन का। The complaints/grievances registered by my does contain several strong reasons for termination of Maharahtra Government. It’s not just about Mr. Arnab Goswami. It’s about a large amount of population in general, who are suffering due to misuse and abuse of powers by state government, state administration and state police.
 
Finally: The point is that, please take action on my pending grievances to PMO, HM, SC, PRESIDENT, etc. for termination of Maharashtra Government under rule 356 of constitution. The unattended pending grievance complaint numbers are:
 
1) PMOPG/D/2020/0208028 
2) PMOPG/E/2020/0828343
 
If anything happens to Mr. Arnab Goswami under the Maharashtra Government and Maharashtra Police; you all responsible for maintaining law and order, judicial process and the constitutional dignity; shall all be equally considered responsible, if you don’t take immediate actions without any delay. That’s the point to note and understand!
 
NOTE: I am transmitting this message throughout my “VVIP NATIONAL PRIVATE MESSAGING NETWORK” across India. Keep forwarding across your entire contact database on your mobile. इस संदेश को कृपया मेरी तरह, आपके कॉन्टैक्ट लिस्ट के सभी लोगों को भी फॉरवर्ड करें। धन्यवाद, आपका दिन शुभ हो।
Have a great day everyday,
Sincerely
Kalpesh Sharma
My Slogan: I Just Don’t Speak, I Make Things Happen.

Dissolve Maharashtra Government Under Rule Article 356 of Constitution

From:B K Chaudhari < >

Dear President,
A political figure that also of the stature of CM of an important
State of Bharat is intolerant and too narrow minded that he is offended
by a CARTOON!  His goons do not hesitate to openly thrash a Great warrior
in the open.  He is so stubborn and NAPUSANK that he cannot leash his
GOONS and makes no Statements/Comments at all. He is so Shameless!
He ought to know that his father was also a known Cartoonist of his time
and established himself as a CRUEL STARIST and entered into Politics.
I agree with you that Bala Sahib Thackray is being portrayed now against
his actual deeds.  He was a very narrow minded person always mired into
dirty PROVINCIALISM. It was him, who made the slogan very infamous,
MUMBAI HAMCHI.  It was him who set the precedent of vendetta against
the South Indians and threatened  and carried out violence at the slightest cause.
Beating, extorting, humiliating even shaving persons in the open.
The legacy continued with impunity by his illustrious tribesmen.  They even
beat up the EXAMINEE CANDIDATES, when they were deep asleep at the
Railway Stations.  The list continues.
While doing so they forgot the Great Contribution of Maharashtra in the struggle
for Independence and the other Sacrifices which the Great Marathas have made.
The excellent Leaders like Economists CD Deshmukh, Social and Political Assets
like Bal Gangadharji and many others mean nothing to these Goons.  Savarkarji
will be crying in heaven at this type of predicament.  And what about the BHARAT GAURAV
CHATTRAPATTI SHIVAJI MAHARAJ, who had principles, even for the enemies!
Yesterday in an ugly write up of their mouthpiece SAaMNA it has been openly claimed
that MAHARASHTRA MEIN HI DESH HAI, whereas a sensible DESH BAKHT will say that DESH MEIN HI
MAHARASHTRA HAI.  How separatists and narrow regionalism has plagued their mindset?
Finally, in a discussion in DANGAL of AAJ TAK, their representative Kishore Tiwari did not leave
any room to reaffirm the disgusting credentials of SHAV Sena (Shaitan Seva).  He was treating the
occasion as if he was in a MACHHLI BAZAR!
With regards
BK Chaudhari

आदरणीय मोदी जी, हमारे “मन की बात” भी सुनें .

From: Vinod Kumar Gupta < >

आदरणीय मोदी जी हमारे “मन की बात” भी सुनें .

माननीय प्रधानमंत्री जी

सादर वंदे

विषय: “मन की बात” कार्यक्रम में राष्ट्रहित हेतू कुछ आवश्यक सुझाव___

1__जब सन् 1947 में देश के विभाजन का आधार ही हिन्दू-मुस्लिम था और पाकिस्तान इस्लामिक देश घोषित हुआ तो उस समय यह स्वाभाविक मान लिया गया था कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र होगा। लेकिन 73 वर्ष उपरांत भी भारत को अभी तक हिन्दू राष्ट्र घोषित न किया जाना देशवासियों के साथ क्या विश्वासघात नहीं है? अत: इस सन्दर्भ में आपसे विनम्र निवेदन है कि  सभी आवश्यक संवैधानिक संशोधन करके भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिये।

2__भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार देश के समस्त नागरिकों में समानता हो इसके लिये  “समान नागरिक संहिता” का प्रावधान करना होगा। इस सन्दर्भ में  “सर्वोच्च न्यायालय” ने भी अनेक बार शासन को निर्देश दिये हैं। “संयुक्त राष्ट्र संघ” ने भी सभी नागरिकों के लिये एक समान आचार संहिता का सुझाव पूर्व में तत्कालीन भारत सरकार को दिये थे।अत: इसमें आने वाले सभी व्यवधानों को हटवा कर “समान नागरिक संहिता” की अविलंब व्यवस्था करके राष्ट्रीय विकास को गति प्रदान की जा सकती है।

3__यह भी सर्वविदित है कि आज  देश की विभिन्न समस्याओं की जड़ बढती जनसंख्या भयंकर रूप ले चुकी है।अत: अनेक राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के लिये सभी देशवासियों के लिये एक समान “जनसंख्या नियन्त्रण कानून” बनाना आवश्यक हो गया है।

4_बहुसंख्यकों व अल्पसंख्यकों में परस्पर बढते संघर्षों पर अंकुश लगाने के लिये “अल्पसंख्यक मंत्रालय” व “अल्पसंख्यक आयोग” आदि व इससे सम्बंधित सभी संस्थाओं को निरस्त करके समस्त देशवासियों में सामाजिक व साम्प्रदायिक सद्भाव बनाने का सार्थक प्रयास किया जाना चाहिये ।

5_क्या यह विचार करना अनुचित होगा कि विदेशी आक्रांताओं के धर्म/मजहब को हमारे देश में धार्मिक आधार पर अल्पसंख्यक नहीं माना जा सकता हैं? क्योंकि उन धर्मों का उद्गम भारत भूमि पर नहीं हुआ है। ऐसे में  “संयुक्त राष्ट्र संघ” के अनुसार “अल्पसंख्यक” कौन को परिभाषित करके सुनिश्चित किया जाना उचित होगा।

6__आपातकाल में धर्मनिरपेक्षता को संविधान में जोड़ना न्यायसंगत नहीं था, अत: इसकी पुन: विवेचना करके राष्ट्रहित में इसे हटाया जाए। Comment by Suresh Vyas: The word ‘secular’ was inserted in the constitution during Indira’s emergency time by her w/o any due democratic process. Therefore, it must be deleted just by the order of the President. No lengthy process should be required to correct what was illegal in the first place. Jaya sri krishna!

अत: अन्त में आपसे विनम्र अनुरोध है कि आज जब “सबका साथ, सबका विकास व सबका विश्वास” राष्ट्रीय मन्त्र बन चुका है तो सशक्त व समर्थ भारत के लिये ऐसे कुछ कठोर निर्णय लेकर माँ भारती के प्रधान सेवक की भूमिका को चरितार्थ करें।

सधन्यवाद

निवेदक

विनोद कुमार सर्वोदय
(राष्ट्रवादी चितंक व लेखक)
गाज़ियाबाद (उ.प्र.)

विशेष नोट:
*समर्थ भारत__सशक्त भारत*
आप सभी माननीय भारतभक्तों से अनुरोध है कि 30 अगस्त को हमारे मा. प्रधानमंत्री जी कि   *”मन की बात”* कार्यक्रम में  उपरोक्त सुझाव रखे।

कृपया उपरोक्त सुझाव देने के लिये टोल फ्री नं.1800117800 पर काॅ‌ल करें तत्पश्चात एक बीप सुनाई देने पर तुरंत अपनी बात कम शब्दों में केवल 40-45 सेकंड में रखे। क्योंकि इससे अधिक रिकार्ड नही हो पायेगी।ध्यान रहे कि आप इस नम्बर पर केवल दो बार ही अपनी बात कह सकते हैं।
आप ईमेल appt.pmo@gov.in पर भी करके अपने सुझाव दे सकते हैं।

इस संदेश को अपने सभी मित्रों व  साथियों को भेज कर अपने राष्ट्र को महान बनाने में प्रधानमन्त्री जी को भी सशक्त करके जन-जन में राष्ट्रभक्ति का संचार करें।