नथुराम गोडसे की कविता।

From: Sanjeev Kulkarni < >

A poem by Tathuram Godes

माना गांधी ने कष्ट सहे थे ,
अपनी पूरी निष्ठा से ।
और भारत प्रख्यात हुआ है,
उनकी अमर प्रतिष्ठा से ॥
किन्तु अहिंसा सत्य कभी,
अपनों पर ही ठन जाता है ।
घी और शहद अमृत हैं पर ,
मिलकर के विष बन जाता है।
अपने सारे निर्णय हम पर,
थोप रहे थे गांधी जी।
तुष्टिकरण के खूनी खंजर,
घोंप रहे थे गांधी जी ॥
महाक्रांति का हर नायक तो,
उनके लिए खिलौना था ।
उनके हठ के आगे,
जम्बूदीप भी बौना था ॥
इसीलिये भारत अखण्ड,
अखण्ड भारत का दौर गया ।
भारत से पंजाब, सिंध,
रावलपिंडी,लाहौर गया ॥
तब जाकर के सफल हुए,
जालिम जिन्ना के मंसूबे।
गांधी जी अपनी जिद में ,
पूरे भारत को ले डूबे॥
भारत के इतिहासकार,
थे चाटुकार दरबारों में ।
अपना सब कुछ बेच चुके थे,
नेहरू के परिवारों में ॥
भारत का सच लिख पाना,
था उनके बस की बात नहीं ।
वैसे भी सूरज को लिख पाना,
जुगनू की औकात नहीं ॥
आजादी का श्रेय नहीं है,
गांधी के आंदोलन को ।
इन यज्ञों का हव्य बनाया,
शेखर ने पिस्टल गन को ॥
जो जिन्ना जैसे राक्षस से,
मिलने जुलने जाते थे ।
जिनके कपड़े लन्दन, पेरिस,
दुबई में धुलने जाते थे ॥
कायरता का नशा दिया है,
गांधी के पैमाने ने ।
भारत को बर्बाद किया,
नेहरू के राजघराने ने ॥
हिन्दू अरमानों की जलती,
एक चिता थे गांधी जी ।
कौरव का साथ निभाने वाले,
भीष्म पिता थे गांधी जी ॥
अपनी शर्तों पर आयरविन तक,
को भी झुकवा सकते थे ।
भगत सिंह की फांसी को,
दो पल में रुकवा सकते थे ।।
मन्दिर में पढ़कर कुरान,
वो विश्व विजेता बने रहे ।
ऐसा करके मुस्लिम जन,
मानस के नेता बने रहे ॥
एक नवल गौरव गढ़ने की,
हिम्मत तो करते बापू  ।
मस्जिद में गीता पढ़ने की,
 हिम्मत तो करते बापू ॥
रेलों में, हिन्दू काट-काट कर,
भेज रहे थे पाकिस्तानी ।
टोपी के लिए दुखी थे वे,
पर चोटी की एक नहीं मानी ॥
मानों फूलों के प्रति ममता,
खतम हो गई माली में ।
गांधी जी दंगों में बैठे थे,
छिपकर नोवाखाली में ॥
तीन दिवस में श्री राम का,
धीरज संयम टूट गया ।
सौवीं गाली सुन, कान्हा का
चक्र हाथ से छूट गया ॥
गांधी जी की पाक, परस्ती पर
जब भारत लाचार हुआ ।
तब जाकर नथू,
बापू वध को मज़बूर हुआ ॥
गये सभा में गांधी जी,
करने अंतिम प्रणाम ।
ऐसी गोली मारी गांधी को,
याद आ गए श्री राम ॥
मूक अहिंसा के कारण ही
भारत का आँचल फट जाता ।
गांधी जीवित होते तो
फिर देश,  दुबारा बंट जाता ॥
थक गए हैं हम प्रखर सत्य की
अर्थी को ढोते ढोते ।
कितना अच्छा होता जो
“नेताजी” राष्ट्रपिता होते ॥
नथू को फाँसी लटकाकर
गांधी जो को न्याय मिला ।
और मेरी भारत माँ को
बंटवारे का अध्याय मिला ॥
लेकिन जब भी कोई भीष्म
कौरव का साथ निभाएगा ।
तब तब कोई अर्जुन रण में
उन पर तीर चलाएगा ॥
अगर गोडसे की गोली
उतरी ना होती सीने में ।
तो हर हिन्दू पढ़ता नमाज ,
फिर मक्का और मदीने में ॥
भारत की बिखरी भूमि
अब तलक समाहित नहीं हुई ।
नथू की रखी अस्थि
अब तलक प्रवाहित नहीं हुई ॥
इससे पहले अस्थिकलश को
सिंधु सागर की लहरें सींचे ।
पूरा पाक समाहित कर लो
इस भगवा झंडे के नीचें ॥

जो मजहब लोकतंत्र-दुश्मन है उनको मताधिकार है क्युं ? | Ask this to Bhaaratiya Muslims

  • जिस मजहब को बुलाया नहि है उस मजहब देश मे है क्युं ? Why this majhab is in Bhaarat where it is not invited?
    जिस मजहब ने मंदीर तोडे उस मजहब देश मे है क्युं ? Why this majhab that has destroyed temples is in Bhaarat?
    जिस मजहब ने हिंदू मारे उस मजहब देश मे है क्युं ? Why this majhab that has killed Hindus is in Bhaarat?
    जिस मजहब ने देश कटवाया उस मजहब देश मे है क्युं ? Why this majhab that has caused the 1947 partition is in Bhaarat?
    जिसजिस ने विभाजन मांगा वो देश के बाहर गये न क्युं ? Why those who voted for the partition did not go out after the partition?
    जो मजहब बिनधर्मी को मारे वो मजहब देश मे है क्युं ? Why this s majhab that kills infidels is in Bhaarat?
    जो मजहब नारी को बेचे वो मजहब देश मे है क्युं ? Why this majhab that sells women is in Bhaarat?
    जो मजहब गायों को मारे वो मजहब देश मे है क्युं ? Why this majhab that kills cows is in Bhaarat?
    जो मजहब संविधान ना माने वो मजहब देश मे है क्युं ? Why this majhab that is against the constitution is in Bhaarat?
    जो मजहब अहेशान ना माने वो मजहब देश मे है क्युं ? Why this majhab that never has sense of gratitude is in Bhaarat?
    जिस मजहब आतंक मचाये वो मजहब देश मे है क्युं ? Why this majhab that terrorizes infidels is in Bhaarat?
    जो मजहब गुलाम बनाये वो मजहब देश मे है क्युं ? Why this majhab that enslaves others is in Bhaarat?
    जो मजहब सच स्विकार ना करे वो मजहब देश मे है क्युं ? Why this majhab that refuses to accept the truth is in Bhaarat?
    जो मजहब लोकतंत्र-दुश्मन है उनको मताधिकार है क्युं ? Why this majhab that is enemy of democracy is in Bhaarat?
    बटवारा तुमने करवाया तो तुमको मताधिकार दें हम क्युं ? Why we give you the right to vote when you caused the 1947 partition?
    ये देश है राम-कृष्ण का, उनकी तुम संतान हो
    ये तुमको समझ मे ना आये, तो यहां से जल्द पलायन हो
    This country is of Shri Rama and Shri Krishna, and you are their dependents. If you do not understand this, then quit Bhaarat.
    नहिं पलायन होना है तो घर-वापसी कर शकते हो. If you do not want to quit, then quit Islam/ accept Hindu Dharma (which is universal religion for mankind.)
    Suresh Vyas, hinduunation.com

नींद से जागा हिन्दू

Source: https://www.youtube.com/watch?v=1OsdmcenKLU

Comment by Tusharika Trivedi:

प्रचंड वेग यह राष्टवाद का रुकने को तैयार नहीं,

और नींद से जागा हिन्दू झुकने को तैयार नहीं।

Comment by ROHIT KUMAR:

वो मेरे ही देवी देवताओं को गाली देता रहा,

और कानून मेरा सोता रहा .

जिस दिन मिला उसी दिन गाड़ दूंगा इसी माटी मे,

तब कर्ज पुरा हो जब भगवा होगा इसकी छाती मे.

  जय माता दी 🙏💐

#अंग्रेजी_नव_वर्ष मनाने वालों, आप भी बन रहे हैं मिशनरियों की साजिश का शिकार..

 

https://hinduunation.com/2020/12/31/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80/

*ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं* A Poem

From: Vinod Kumar Gupta < >

_*ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं*_
_*है अपना ये त्यौहार नहीं*_
_*है अपनी ये तो रीत नहीं*_
_*है अपना ये व्यवहार नहीं*_
_*धरा ठिठुरती है सर्दी से*_
_*आकाश में कोहरा गहरा है*_
_*बाग़ बाज़ारों की सरहद पर*_
_*सर्द हवा का पहरा है*_
_*सूना है प्रकृति का आँगन*_
_*कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं*_
_*हर कोई है घर में दुबका हुआ*_
_*नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं*_
_*चंद मास अभी इंतज़ार करो*_
_*निज मन में तनिक विचार करो*_
_*नये साल नया कुछ हो तो सही*_
_*क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही*_
_*उल्लास मंद है जन -मन का*_
_*आयी है अभी बहार नहीं*_
_*ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं*_
_*है अपना ये त्यौहार नहीं*_
_*ये धुंध कुहासा छंटने दो*_
_*रातों का राज्य सिमटने दो*_
_*प्रकृति का रूप निखरने दो*_
_*फागुन का रंग बिखरने दो*_
_*प्रकृति दुल्हन का रूप धार*_
_*जब स्नेह – सुधा बरसायेगी*_
_*शस्य – श्यामला धरती माता*_
_*घर -घर खुशहाली लायेगी*_
_*तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि*_
_*नव वर्ष मनाया जायेगा*_
_*आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर*_
_*जय गान सुनाया जायेगा*_
_*युक्ति – प्रमाण से स्वयंसिद्ध*_
_*नव वर्ष हमारा हो प्रसिद्ध*_
_*आर्यों की कीर्ति सदा -सदा*_
_*नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा*_
_*अनमोल विरासत के धनिकों को*_
_*चाहिये कोई उधार नहीं*_
_*ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं*_
_*है अपना ये त्यौहार नहीं*_
_*है अपनी ये तो रीत नहीं*_
_*है अपना ये त्यौहार नहीं*_
*✍🏻राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर*

_वर्षो से यही सर्वोच्च काव्य   *ईसाई नववर्ष* पर प्रेषित करके हम अपना विरोध जताते आ रहे हैं___फिर भी हमें खेद है कि
*🚩हिन्दू नव वर्ष🚩*
_के स्वागत के लिए हम उत्साहवर्धक व सम्मानजनक आयोजनों को राष्ट्रव्यापी न बना सकें___

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