मै हिन्दू हूँ , तो तुम्हे दिक्कत है ?

Source: https://www.youtube.com/watch?v=RpNvekCyrDA

By Dhruv Patel

 

तुम मुसलमान हो, मुझे दिक्कत नही है

तुम ईसाई हो , मुझे दिक्कत नही है

मै हिन्दू हूँ , तो तुम्हे दिक्कत है ?

फिर तो तुम दिक्कत मे रहोगे हमेशा

क्योंकि मै गर्वित कट्टर हिन्दू हूँ ।

 

पाक से लेकर पेरिस तक

कहीं भी आतकी हमला हो

तो एक ही कौम एक ही महजब

और एक ही मानसिकता वाले लोगो पर शक जाता है

और वो शक सच साबित भी होता है .

तो कैसे मैं कह दूँ

आतंकवाद का कोई महजब नही होता ?

 

1 गांधी मरा, 6000 ब्राहमणों को मारा गया ।

1 इंदिरा गांधी मरी, 4700 सिखों को मारा गया ।

1 दामिनी को

दर्दनाक मौत दी गयी, 1 मोमबत्ती जली ।

 

मुस्लमान

वन्दे मातरम न बोले तो ये उन का धार्मिक मामला है ।

नरेन्द्र मोदी टोपी ना पहने

तो ये साला सांप्रदायिक मामला है ?

 

डेनमार्क में अगर

कोई फोटो बन गयी तो उस का सर कलम ।

श्रीराम की जमीन पर

अगर मंदिर बनाने को बोला जाये तो हिन्दू बेशर्म ?

 

गोधरा में जो 50-60 हिन्दू

ट्रेन में जले वो सब भेड़ बकरी थे,

और उसके बाद

जो मुस्लिम मरे वो देश के सच्चे प्रहरी ?

 

15 साल पहले ही

कश्मीर हो गयी हिन्दुओ से खाली,

देश की बढती

मुस्लिम आबादी हमारी खुशहाली ?

 

पठानी सूत,

नमाजी टोपी में वो ख़ूबसूरत,

हम सिर्फ

तिलक लगा लें या राम कह दे

तो

भगवा आतंक की मूरत?

 

कोई लड़ता है यहाँ

पाकिस्तान के लिए, को

ई लड़ता है

उर्दू जुबान के लिए,

सब चुप हो जाते हैं

श्री राम नाम के लिए,

अब तो गूंजते हैं नारे

तालिबान के लिए,

हिन्दू परेशान है

नौकरी और दुकान के लिए।

 

मैं पूछता हूँ

इसका समाधान कहाँ है?

अरे तुम ही बोलो

हिन्दू का हिन्दुस्तान कहां है ?

जिसकी_तलवार_की_छनक_से अकबर_का_दिल_घबराता_था

वो_अजर_अमर_वो_शूरवीर वो_महाराणा_कहलाता_था

 

फीका_पड़ता_था_ तेज_सूरज_का, जब_माथा_ऊंचा_करता_था ,

थी_तुझमे_कोई_बात_राणा, अकबर_भी_तुझसे_डरता_था

 

पुत्र मैं भवानी का …

मुझ पर किसका जोर …

काट दूंगा हर वो सर …

जो उठा मेरे धर्म की ओर …

 

भुल जाओ अपनी जात …

करो सिर्फ धर्म की बात …

एकबार नही …

सौ बार सही …

 

हर बार यही दोहरायेगे …

जहाँ जन्म हुआ …

प्रभु श्री राम जी का …

मंदिर वहीं बनायेंगे ..

 

हिन्दुस्तान की सभी हिंदुत्व संगठन एक बनाऐ !!

इंडिया नहीं हमें हिन्दुस्तान चाहिये !!

 

!! अहींसा परमो धर्मः

धर्म हिंसा तदैव च: !!

 

अगर हिंदुत्व का खून हो तो

share करना नही भूलना ….. ।।

 

🚩जय हिंद🚩

🚩जय श्रीराम🚩 🚩गर्व से कहो हम हिंदु है🚩.

मुझे दिखा दो बस वो फंदा, जिसे भगतसिंह ने पहना था।।

Source: https://www.youtube.com/watch?v=SQpBptbtoqc

By Scholarship Plus

भले ही गांधी की धोती,तेरी खातिर गहना था।

मुझे दिखा दो बस वो फंदा, जिसे भगतसिंह ने पहना था।।

चलो मान लिया कि चरखे ने ही अंग्रेजो को पटका था।

पर हमको दे दो वो पावन रस्सी ,जिस पर मेरा बिस्मिल लटका था।।

हम मान रहे कि नेहरु ने ही, भारत आजाद कराया था।

पर हमें सुना दो फिर वो धुन ,जिसे राजगुरू ने गाया था।।

चलो आजादी के महायुद्ध में,सारा कार्य तुम्हारा था।

पर हमें दिला दो वो अन्तिम गोली , जिससे शेखर ने खुद को मारा था।।

 

भारतमाता की जय ।। अमर शहीदों की जय ।। 💪जय हिंद वन्देमातरम्💪

नाथुराम गोडसे की जन्म तिथि पर एक कविता

From: Tulsi < >

आज नाथुराम गोडसे की जन्म तिथि है ! वर्षों बाद किसी कवि ने दबे सच को फिर से उजागर करने की कोशिश की है ! आप सभी  साहित्य प्रेमी पाठकों के लिए कवि की मूल कविता नीचे विस्तार से लिखी गयी है !
यह कविता आज सुबह से सोशल मीडिया पर भारी संख्या में शेयर की जा रही हैं !
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माना गांधी ने कष्ट सहे थे,
अपनी पूरी निष्ठा से।
          और भारत प्रख्यात हुआ है,
               उनकी अमर प्रतिष्ठा से ॥
किन्तु अहिंसा सत्य कभी,
अपनों पर ही ठन जाता है।
           घी और शहद अमृत हैं पर,
        मिलकर के विष बन जाता है।।
अपने सारे निर्णय हम पर,
थोप रहे थे गांधी जी।
              तुष्टिकरण के खूनी खंजर,
                    घोंप रहे थे गांधी जी ॥
महाक्रांति का हर नायक तो,
उनके लिए खिलौना था ।
                        उनके हठ के आगे,
                 जम्बूदीप भी बौना था ॥
इसीलिये भारत अखण्ड,
अखण्ड भारत का दौर गया।
                   भारत से पंजाब, सिंध,
                रावलपिंडी, लाहौर गया॥
तब जाकर के सफल हुए,
जालिम जिन्ना के मंसूबे ।
                 गांधी जी अपनी जिद में,
                   पूरे भारत को ले डूबे ॥
भारत के इतिहासकार,
थे चाटुकार दरबारों में ।
           अपना सब कुछ बेच चुके थे,
                   नेहरू के परिवारों में ॥
भारत का सच लिख पाना,
था उनके बस की बात नहीं।
          वैसे भी सूरज को लिख पाना,
               जुगनू की औकात नहीं ॥
आजादी का श्रेय नहीं है,
गांधी के आंदोलन को ।
                इन यज्ञों का हव्य बनाया,
              शेखर ने पिस्टल गन को ॥
जो जिन्ना जैसे राक्षस से,
मिलने जुलने जाते थे ।
            जिनके कपड़े लन्दन, पेरिस,
                 दुबई में धुलने जाते थे ॥
कायरता का नशा दिया है,
गांधी के पैमाने ने ।
                  भारत को बर्बाद किया,
                 नेहरू के राजघराने ने ॥
हिन्दू अरमानों की जलती,
एक चिता थे गांधी जी ।
           कौरव का साथ निभाने वाले,
              भीष्म पिता थे गांधी जी ॥
अपनी शर्तों पर इरविन तक,
को भी झुकवा सकते थे ।
               भगत सिंह की फांसी को,
           दो पल में रुकवा सकते थे।।
मन्दिर में पढ़कर कुरान,
वो विश्व विजेता बने रहे ।
                 ऐसा करके मुस्लिम जन,
                 मानस के नेता बने रहे ॥
एक नवल गौरव गढ़ने की,
हिम्मत तो करते बापू ।
               मस्जिद में गीता पढ़ने की,
                  हिम्मत तो करते बापू ॥
रेलों में, हिन्दू काट-काट कर,
भेज रहे थे पाकिस्तानी ।
                 टोपी के लिए दुखी थे वे,
          पर चोटी की एक नहीं मानी॥
मानों फूलों के प्रति ममता,
खतम हो गई माली में ।
                 गांधी जी दंगों में बैठे थे,
                छिपकर नोवा खाली में॥
तीन दिवस में *श्री राम* का,
धीरज संयम टूट गया ।
             सौवीं गाली सुन कान्हा का,
                  चक्र हाथ से छूट गया॥
गांधी जी की पाक परस्ती पर,
जब भारत लाचार हुआ ।
                          तब जाकर नाथू,
            बापू वध को मज़बूर हुआ॥
गये सभा में गांधी जी,
करने अंतिम प्रणाम।
               ऐसी गोली मारी गांधी को,
                याद आ गए *श्री राम*॥
मूक अहिंसा के कारण ही,
भारत का आँचल फट जाता ।
                    गांधी जीवित होते तो,
            फिर देश, दुबारा बंट जाता॥
थक गए हैं हम प्रखर सत्य की,
अर्थी को ढोते ढोते ।
                कितना अच्छा होता जो,
           *नेता जी राष्ट्रपिता* होते॥
नाथू को फाँसी लटकाकर,
गांधी जी को न्याय मिला ।
                  और मेरी भारत माँ को,
             बंटवारे का अध्याय मिला॥
लेकिन
जब भी कोई भीष्म,
कौरव का साथ निभाएगा ।
             तब तब कोई अर्जुन रण में,
                   उन पर तीर चलाएगा॥
अगर गोडसे की गोली,
उतरी ना होती सीने में।
               तो हर हिन्दू पढ़ता नमाज,
             फिर मक्का और मदीने में॥
भारत की बिखरी भूमि,
अब तक समाहित नहीं हुई ।
                     नाथू की रखी अस्थि,
           अब तक प्रवाहित नहीं हुई॥
*इससे पहले अस्थिकलश को,*
*सिंधु सागर की लहरें सींचे।*
        *पूरा पाक समाहित कर लो,*