अकबर ”महान,” तो महाराणा प्रताप कौन ?

Source: youtube.com/watch?v=GMSifPwSiaw

From: Ajay Soni

 

जलती रही जोहर में नारियां

भेड़िये फ़िर भी मौन थे।

हमें पढाया गया अकबर” महान,

तो फिर महाराणा प्रताप कौन थे।

😇😇

 

सड़ती रही लाशें सड़को पर

गांधी फिर भी मौन थे,

हमें पढ़ाया गांधी के चरखे से आजादी आयी,

तो फांसी चढ़ने वाले 25-25 साल के वो जवान कौन थे

😇😇

 

वो रस्सी आज भी संग्रहालय में है

जिस्से गांधीजी बकरी बांधा करते थे

किन्तु वो रस्सी कहां है

जिस पे भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु हसते हुए झूले थे

😇😇

 

” हालात.ए.मुल्क देख के रोया न गया…

कोशिश तो की पर मूंह ढक के सोया न गया”.

जाने कितने झूले थे फाँसी पर,कितनो ने गोली खाई थी….

क्यो झूठ बोलते हो साहब, कि चरखे से आजादी आई थी….

😥😥😥😥😥😥

 

मंगल पांडे को फाँसी❓

तात्या टोपे को फाँसी❓

रानी लक्ष्मीबाई को अंग्रेज सेना ने घेर कर मारा❓

भगत सिंह को फाँसी❓

सुखदेव को फाँसी❓

राजगुरु को फाँसी❓

चंद्रशेखर आजाद का एनकाउंटर अंग्रेज पुलिस द्वारा❓

सुभाषचन्द्र बोस को गायब करा दिया गया❓

भगवती चरण वोहरा बम विस्फोट में मृत्यु❓

रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसी❓

अशफाकउल्लाह खान को फाँसी❓

रोशन सिंह को फाँसी❓

लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज में मृत्यु❓

वीर सावरकर को कालापानी की सजा❓

चाफेकर बंधू (३ भाई) को फाँसी❓

मास्टर सूर्यसेन को फाँसी❓

 

ये तो कुछ ही नाम है जिन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम और इस देश की आजादी में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया.

 

कई वीर ऐसे है हम और आप जिनका नाम तक नहीं जानते.

 

एक बात समझ में आज तक नही आई

कि भगवान ने गांधी और नेहरु को ऐसे कौन से कवच-कुण्डंल दिये थे

जिसकी वजह से अग्रेंजो ने इन दोनो को फाँसी तो दूर, कभी एक लाठी तक नही मारी…❓

 

उपर से यह दोनों भारत के बापू और चाचा बन गए

और इनकी पीढ़ियाँ आज भी पूरे देश के उपर अपना पेंटेंट समझती है❓

 

गहराई से सोचिए.

 

जिसने भी मुझे यह संदेश भेजा है, उसको धन्यवाद।।

 

मोदी और ओबामा में फर्क नजर नहीं आता है

From: Kumar Arun < >

~~मोदी और ओबामा में फर्क नजर नहीं आता है ~~

मोदी के चलते ही बी जे पी भी प्यारा लगने लगा था
दिन रात एक कर गरीबों में एक आशा जगने लगा था

जो जिंदगी में बोट नहीं डाले ओ भी लम्बी कतारों में खड़े थे
वाजपेयी और आडवाणी को किनारे कर मोदी के लिए बढे थे

आज मोदी बड़े शान से प्रधान बने हैं
हिन्दुओं के दिल में आशा के केंद्र बने हैं

देख हालत के हिन्दुओं के पतन की सिर्फ रोना आता है
सोनिआ के आगे मोदी कुयूं झुकते यह समझ नहीं आता है

कब हिन्दुओं के अच्छे दिन, भारत-माता की आन-बाण बढ़ेगी
कब मोदी बी जे पी के हाथो से इंडिया भी हिन्दुस्थान बनेगी

डॉ. कुमार अरुण
मई २१ , २०१८

प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से…

 

Shrikrishna Pandey < >

April 7 at 11:03pm

 

ये कविता किसने लिखी है, मुझे नहीं मालूम, पर जिसने भी लिखी है उसको नमन करता हूँ।

आरक्षण के मुद्दे पर बहुत ही प्रभावी अभिव्यक्ति है…..

 

करता हूँ अनुरोध आज मैं, भारत की सरकार से,

प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से…

वर्ना रेल पटरियों पर जो, फैला आज तमाशा है,

जाट आन्दोलन से फैली, चारो ओर निराशा है…

 

अगला कदम पंजाबी बैठेंगे, महाविकट हडताल पर,

महाराष्ट में प्रबल मराठा , चढ़ जाएंगे भाल पर…

राजपूत भी मचल उठेंगे, भुजबल के हथियार से,

प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से…

 

निर्धन ब्राम्हण वंश एक दिन परशुराम बन जाएगा,

अपने ही घर के दीपक से, अपना घर जल जाएगा…

भड़क उठा गृह युध्द अगर, भूकम्प भयानक आएगा,

आरक्षण वादी नेताओं का, सर्वस्व मिटाके जायेगा…

 

अभी सम्भल जाओ मित्रों, इस स्वार्थ भरे व्यापार से,

प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से…

जातिवाद की नही , समस्या मात्र गरीबी वाद है,

जो सवर्ण है पर गरीब है, उनका क्या अपराध है…

 

कुचले दबे लोग जिनके, घर मे न चूल्हा जलता है,

भूखा बच्चा जिस कुटिया में, लोरी खाकर पलता है…

समय आ गया है उनका , उत्थान कीजिये प्यार से,

प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से…

 

जाति गरीबी की कोई भी, नही मित्रवर होती है,

वह अधिकारी है जिसके घर, भूखी मुनिया सोती है…

भूखे माता-पिता , दवाई बिना तडपते रहते है,

जातिवाद के कारण, कितने लोग वेदना सहते है…

 

उन्हे न वंचित करो मित्र, संरक्षण के अधिकार से

प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से…

 

I got this post from what’s app.

This is best poetry in my view. Please share it.

 

A Poem हवा लगी पश्चिम की

A Poem हवा लगी पश्चिम की

By Vinod Gupta < >

 

हवा लगी पश्चिम की , सारे कुप्पा बनकर गए फूल।

ईस्वी सन तो याद रहा , पर अपना संवत्सर गए भूल ।।

 

चारों तरफ नए साल का , ऐसा मचा है हो-हल्ला ।

बेगानी शादी में नाचे , जैसे कोई दीवाना अब्दुल्ला ।।

 

धरती ठिठुर रही सर्दी से , घना कुहासा छाया है ।

कैसा ये नववर्ष है , जिससे सूरज भी शरमाया है ।।

 

सूनी है पेड़ों की डालें , फूल नहीं हैं उपवन में ।

पर्वत ढके बर्फ से सारे , रंग कहां है जीवन में ।।

 

बाट जोह रही सारी प्रकृति , आतुरता से फागुन का ।

जैसे रस्ता देख रही हो , सजनी अपने साजन का ।।

 

अभी ना उल्लासित हो इतने , आई अभी बहार नहीं ।

हम अपना नववर्ष मनाएंगे , न्यू ईयर हमें स्वीकार नहीं ।।

 

लिए बहारें आँचल में , जब चैत्र प्रतिपदा आएगी ।

फूलों का श्रृंगार करके , धरती दुल्हन बन जाएगी ।।

 

मौसम बड़ा सुहाना होगा , दिल सबके खिल जाएँगे ।

झूमेंगी फसलें खेतों में , हम गीत खुशी के गाएँगे ।।

 

उठो खुद को पहचानो , यूँ कबतक सोते रहोगे तुम ।

चिन्ह गुलामी के कंधों पर , कबतक ढोते रहोगे तुम ।।

 

अपनी समृद्ध परंपराओं का , आओ मिलकर मान बढ़ाएंगे ।

आर्यवृत के वासी हैं हम , अब अपना नववर्ष मनाएंगे ।।

 

💐वंदे मातरम💐