Defining One’s Caste by Birth is Sin per Dharma

Dear All:

The Western world, who has deliberately chosen to repeatedly bang the Vedic dharma or Hindus on the so called caste system, need to be informed by the Vedic dharma authorities, Gurus, that the so called caste system is nothing but malpractice, if it still exists, of varna-aashram dharma that defines one’s varna (social class) by one’s guna (qualities) and karma (one’s way of earning living).  In Bhagavad Gita Bhagavaan Krishna says:

“catur-varnyam maya srstam

guna-karma-vibhagasah

tasya kartaram api mam

viddhy akartaram avyayam” Gita 4-13

Translation by Bhakti-vedanta Swami Prabhupada:

“According to the three modes of material nature and the work ascribed to them, the four divisions of human society were created by Me. And, although I am the creator of this system, you should know that I am yet the non-doer, being unchangeable.” – Gita 4-13

Srimad Bhagavatam verse 8-5-41 also says that the four varnas are created from the body of God.

Srimad Bhagavata verses 7-11-21 to 7-11-14 also describe the qualities of the four varnas.

Unfortunately, many Hindus defined one’s varna by birth, and that is sinful malpractice of dharma.

By the current law it is illegal to discriminate or oppress so called lower caste persons.

The Hindus need to be pressed (by gov’t and gurus) to live per dharma and not malpractice it.

It is sinful to hate (or not touch) any varna by any other varna per the Vedic dharma.

Krishna says in Bhagavad Gita verse 18-45:

“sve sve karmany abhiratah

samsiddhim labhate narah

sva-karma-niratah siddhim

yatha vindati tac chrnu”

“By following his qualities of work, every man can become perfect. Now please hear from Me how this can be done.”

By context “sva-karma” is karma according to one’s varna dharma.

Thus, each varna is equally eligible to advance spiritually bu doing one’s varna duties per dharma as described in the verses following the above verse.

Additionally, there is a mantra in Purush Suukta that says that bramhamas are born from the head of Virat (the God), kshatriya from Virat’s arms, vaishyas from Virat’s belly, and shudras from Virat’s legs.

Being so, all the four varnas are healthy parts of Virat, or the Vedic society.  Srimad Bhagavat verse 2-5-37 also says this. Each part has its important function and each part supports the other parts.  There is no question of head or arms hating or misusing legs.

जन्मना जायते शूद्रः संस्कारत् भवेत् द्विजः।

वेद पठेत् भवेत् विप्रः  ब्रह्म जानाति ब्राह्मणः॥

ब्राह्मणः क्षत्रियो वैश्यस् त्रयो वर्णा द्विजायतेयः ।

चतुर्थ एक जातिस्तु शुद्रो नास्ति तु पञ्चमः ॥ – Manu Smriti 10-4

Vedic scriptures also say that one is considered a brahmana, kshatriya, or vaishya if one undergoes sixteen Vedic sanskaras faithfully in one’s family line.  Those who do not undergo these sanskaras are called shudras.

शूद्रोऽपि शीलसंपन्नो गुणवान् ब्राह्मणो भवेत् ।

ब्राह्मणोऽपि क्रियाहीनः शूद्रात् प्रत्यवरो भवेत् ॥ – Vaishampayan says to Yudhishthir in Mahabharat

Therefore, any so called lower caste person can become any other class (varna) by one’s guna and karma or by undergoing the sixteen Vedic sanakar vidhis.  Gov’t is doing dis-service to the so called lower class by creating quotas (unqualified free favor) for them.  To get quota benefits the lower class chooses to remain in lower class.  Per dharma one is free to develop one’s guna and karma of any other class.

This is how the Hindus need to treat so called shudras and poors.

jai sri krishna

Suresh Vyas

Vedic preacher and priest

 

गौ हत्यारा गाँधी

From: Pramod Ageawal < >

गौ हत्यारा गाँधी
२०वीं सदी का मीरजाफर पाकपिता राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी मुसलमानोंको इंडियामें रोकनेका अपराधी.
मैं पाठकों के सामने गांधी की दिल्ली डायरी – भाग ३ दिनांक २७ सितम्बर, १९४७ का अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ.
“इसके बाद गांधी ने एक आर्य समाजी दोस्त के खत का जिक्र किया, जिसमे कहा गया था कि कांग्रेस पहले ही तीन बड़ी बड़ी गलतियाँ कर चुकी है. अब वह सबसे बड़ी चौथी गलती कर रही है. यह गलती कांग्रेस की इस इच्छा में है कि हिंदुओं और सिक्खों के साथ मुसलमानों को भी देश में बसाया जाये. गांधी ने कहा, हालांकि मैं कांग्रेस की तरफ से नहीं बोल रहा हूँ, फिर भी खत में जिस गलती का जिक्र किया गया है, उसे करने के लिए पूरी तरह तैयार हूँ.”
“धमकियों से डर कर घर न छोड़ो
“मेरे पास बराबर इस बात की शिकायतें आ रही हैं कि यूनियन के मुसलमानों को अपने बाप दादों के मकान छोड़ने और पाकिस्तान जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है. यह कहा जाता है कि उनको तरह-तरह की तरकीबों से अपने घर छुड़वा कर कैम्पों में रहने पर मजबूर जा रहा है, जहां से उन्हें रेल द्वारा अथवा पैदल भेज दिया जाय. मुझे विश्वास है कि मन्त्रिमन्डल की यह नीति नहीं है. … इस जगह हम खास तौर पर यह जांच रहे हैं कि केन्द्रीय सरकार की हालत क्या है? उसे किसी हालत में भी कमजोर नहीं बनना चाहिए. इसलिए अगर इसमें कुछ भी सच्चाई है कि कर्मचारी पूरी तरह सरकारी हुक्म (या गांधी के षड्यंत्र) का पालन नहीं करते, तो ऐसे कर्मचारियों को तुरंत निकल जाना चाहिए या मिलिटरी या सम्बन्धित मंत्री को त्यागपत्र देकर ऐसी ताकत को जगह देनी चाहिए जो कामयाबी के साथ कर्मचारियों की नाफर्मबरदारी को दूर कर सके. (ताकि हत्यारे अल्लाह के अनुयायी मुसलमान इंडिया में ही रहें और आर्यों को समूल नष्ट करने में कामयाबी हासिल की जा सके.) जब कि मैं उन शिकायतों को, जो मेरे पास आती रहती हैं, संकोच के साथ आप को सुनाता हूँ. …” गांधी की दिल्ली डायरी भाग ३, २७ अक्टूबर, १९४७.
इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा हैधरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद यानी काफिरों की हत्या करने का असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार है| (भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)). आगे दिए गए विवरण से स्पष्ट हो जायेगा कि २०वीं सदी का मीरजाफर पाकपिता – राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ईसाईयों और मुसलमानों को इंडिया में रखने का अपराधी है.
गांधी का भयादोहन.
२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता – राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी की कमजोरी औरत थी. आतंक की साया में जीता था. जैसा कि आज हो रहा है, संत और जज सहित सारे उपनिवेशवासी यौन शोषण के अपराध में जेल जाने से आतंकित हैं. आशाराम बापू और नित्यानंद की फर्जी सीडी की भांति तथाकथित मनु, आभा, नायडू … सूची लम्बी है आदि के साथ … ब्रह्मचर्य के प्रयोग में गांधी भी जेल चला जाता. जेल जाने से बचने के लिए गांधी वही करता था, जो अँगरेज़ चाहते थे.
सत्ता के हस्तानान्तरण की पहली शर्त ही इस्लाम का दोहन है. इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रहीइसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकतेइसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैंहिंदू मरे या मुसलमान – अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है|
इस्लामी शासन काल में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध था. 
गौ हत्या के विरुद्ध दिए गए संविधान पीठ के २००५ के निर्णय से स्पष्ट हो जाता है कि भारत में गौ हत्या ब्रिटिश शासन काल में, जिसके आप दास हैं, लैंसडाउन नामक अँगरेज़ से शुरू कराई. 
2 अक्तूबर 2014
वेद, गुरुकुल, गंगा और गो वैदिक सनातन धर्म की चार आधार शिलाएं हैं|
इंडियन उपनिवेश की मल्लिका एलिजाबेथ का षड्यंत्र स्पष्ट है. अमेरिकी माया संस्कृति की भांति वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करना है. क्यों कि जहां अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा ईशनिंदा का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया गया हैवहीँ एलिजाबेथ के दासों द्वारा गो हत्या विरोधियों को गोलियों से भूना गया, जेलों में बंद किया जा रहा है. संत गोपाल दास नमो राज्य में आज भी जेल में हैं. अन्यों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ को लागू कर, प्रताड़ित किया जा रहा है. 
फिर भी आप धरती की सभी नारियों के बलात्कारी जेहोवा और अल्लाह को अपराधी कहते ही जेल चले जायेंगे. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-
ईसाई व मुसलमान गोमांस भक्षी और वैदिक सनातन संस्कृति के शत्रु हैं| गाँधी जीवन भर दोनों का संरक्षण करता रहा|
पाकपिता गाँधी का सत्य?
पाकपिता गाँधी जीवन भर झूठ बोलता रहा| पाकिस्तान उसकी लाश पर बनना था, लेकिन पाकिस्तान भी बनवाया और अनशन कर कश्मीर पर आक्रमण से प्रसन्न हो कर पाकिस्तान को ५५ करोड़ रुपये ईनाम भी दिलवाया|
पाकपिता गाँधी की अहिंसा?
३५ लाख हिन्दुओं को कत्ल करवाया| लगभग ४ करोड़ लोग अपनी मातृभूमि से विस्थापित हुए| नारियों को नंगा कर जुलूस निकाला गया और बलात्कारित की गईं| पाकपिता गाँधी के अहिंसा का इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है?
पाकपिता गाँधी का इस्लाम प्रेम?
पाकपिता गाँधी इस्लाम से इतना प्रेम करते थे कि मुसलमानों को पाकिस्तान भी दिलवाया और भारत भी! काफिरों का जीवन, नारियां, सम्पत्ति और धरती सभी कुछ मुस्लिम पर्सनल ला देकर मुसलमानों को सौंप दिया| मस्जिदों से अजान द्वारा काफिरों के इष्ट देवों का अपमान करने और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने का अधिकार भी दे डाला!
पाकपिता गाँधी का सद्भाव
गो हत्या का सद्भाव
15 अगस्त 1947 को इंडिया के सत्ता हस्तानान्तरण के बाद देश के कोने – कोने से लाखों पत्र और तार प्रायः सभी जागरूक व्यक्तियों तथा सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा भारतीय संविधान परिषद के अध्यक्ष डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के माध्यम से गांधी जी को भेजे गये जिसमें उन्होंने मांग की थी कि अब देश स्वतन्त्र हो गया हैं अतः गौहत्या को बन्द करा दो । तब पाकपिता गांधी ने कहा, “राजेन्द्र बाबू ने मुझको बताया कि उनके यहाँ करीब 50 हजार पोस्ट कार्ड 25 – 30 हजार पत्र और कई हजार तार आ गये हैं। हिन्दुस्तान में गौ – हत्या रोकने का कोई कानून बन ही नहीं सकता । इसका मतलब तो जो हिन्दू नहीं हैं उनके साथ जबरदस्ती करना होगा| जो आदमी अपने आप गौकुशी नहीं रोकना चाहते उनके साथ मैं कैसे जबरदस्ती करूँ कि वह ऐसा करें।
 
इसलिए मैं तो यह कहूँगा कि तार और पत्र भेजने का सिलसिला बन्द होना चाहिये इतना पैसा इन पर फैंक देना मुनासिब नहीं हैं । मैं तो अपनी मार्फत सारे हिन्दुस्तान को यह सुनाना चाहता हूँ कि वे सब तार और पत्र भेजना बन्द कर दें । भारतीय यूनियन कांग्रेस में मुसलमान ईसाई आदि सभी लोग रहते हैं । अतः मैं तो यही सलाह दूँगा कि विधान – परिषद् पर इसके लिये जोर न डाला जाये । ( पुस्तक – ‘ धर्मपालन ‘ भाग – दो ,प्रकाशक – सस्ता साहित्य मंडल नई दिल्ली पृष्ठ – 135 )
गौहत्या पर कानूनी प्रतिबन्ध को अनुचित बताते हुए इसी आशय के विचार गांधी जी ने प्रार्थना सभा में दिये –
” हिन्दुस्तान में गौ-हत्या रोकने का कोई कानून बन ही नहीं सकता । इसका मतलब तो जो हिन्दू नहीं हैं उनके साथ जबरदस्ती करना होगा । ” – ‘ प्रार्थना सभा ‘ ( 25 जुलाई 1947 )
हिन्दुस्तान ( 26 जुलाई 1947 ) हरिजन एवं हरिजन सेवक ( 26 जुलाई 1947 )
अपनी 4 नवम्बर 1947 की प्रार्थना सभा में गांधी जी ने फिर कहा कि –
” भारत कोई हिन्दू धार्मिक राज्य नहीं हैं इसलिए हिन्दुओं के धर्म को दूसरों पर जबरदस्ती नहीं थोपा जा सकता । मैं गौ सेवा में पूरा विश्वास रखता हूँ परन्तु उसे कानून द्वारा बन्द नहीं किया जा सकता । “
( दिल्ली डायरी पृष्ठ 134 से 140 तक )
इससे स्पष्ट हैं कि गांधी जी की गौरक्षा के प्रति कोई आस्था नहीं थी । वह केवल हिन्दुओं की भावनाओं का शौषण करने के लिए बनावटी तौर पर ही गौरक्षा की बात किया करते थे इसलिए उपयुक्त समय आने पर देश की सनातन आस्थाओं के साथ विश्वासघात कर गये ।
7 नवम्बर 1966 को गोपाष्टमी के दिन गौरक्षा से सम्बन्धित संस्थाओं ने संयुक्त रूप से संसद भवन के सामने एक विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया जिसमें तत्कालीन सरकार से गौहत्या बन्दी का कानून बनाने की मांग की गई । इस प्रदर्शन में भारत के प्रत्येक राज्य से करीब 10 – 12 लाख गौभक्त नर – नारी साधु – संत और छोटे – छोटे बालक – बालिकाएं भी गौमाता की हत्या बन्द कराने इस धर्मयुद्ध में आये थे ।
उस समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री पद पर थी और गुलजारिलाल नन्दा गृहमंत्री थे । श्री नन्दा जी ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को परामर्श दिया कि इतनी बडी संख्या में देशभर के सर्व विचारों के जनता की मांग गौहत्या बन्दी का कानून स्वीकार करें । तब इंदिरा गांधी ने कठोरता से कहा ” गौहत्या बन्दी का कानून बनाने से मुसलमान और ईसाई समाज कांग्रेस से नाराज हो जायेंगे । गौहत्या बन्दी का कानून नहीं बन सकता । ” इंदिरा के न मानने पर गुलजारिलाल नन्दा ने अपने गृहमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया और गौभक्त भारतीयों के इतिहास में अमर हो गये ।
उधर इंदिरा गांधी ने प्रदर्शन खत्म कराने के लिए निहत्थे अहिंसक गौभक्त प्रदर्शनकारियों पर गोली चलवा दी जिसमें अनेकों साधुओं व गौभक्तों की हत्याएँ हुई । इंदिरा गांधी ने यह नृशंश हत्याकाण्ड गौपाष्टमी के पर्व पर कराया था अतः विधि का विधान देखिये कि – इंदिरा गांधी की हत्या भी गौपाष्टमी को हुई थी संजय गांधी की दुर्घटना में मृत्यु भी अष्टमी को हुई राजीव गांधी की हत्या भी अष्टमी को हुई गौहत्या के महापाप से गांधी – नेहरू परिवार का नाश हो गया ।
स्वतन्त्रता प्राप्ति के इतने दिन बाद भी राष्ट्रीय स्तर पर गौहत्या बन्दी का कानून न बन पाना भारतीयों के लिए बडे ही दुःख और अपमान की बात हैं । हे परमात्मा नेहरू के वंशजों और गांधी के अनुयायी इन राजनेताओं को सद्बुद्धि दो । भारत की प्राणाधार गौमाता की हत्या बन्दी का कानून सम्प्रदायवाद की भावना से उठकर शीघ्र बने यहीं प्रार्थना हैं ।
– विश्वजीतसिंह
एक नजर इधर भी…
१. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (१९१९) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के नायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।
२. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएंकिन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।
३. ६ मई १९४६ को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।
४.मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए १९२१ में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग १५०० हिन्दु मारे गए व २००० से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं कियावरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।
५.१९२६ में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द की अब्दुल रशीद नामक मुस्लिम युवक ने हत्या कर दीइसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।
६.गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजीमहाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।
७.गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दू राजा हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दियावहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।
८. यह गान्धी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि से विभूषित किया।
८. कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (१९३१)ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।
९. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा थाअत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।
१०. लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।
११. १४-१५ १९४७ जून को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला थाकिन्तु गान्धी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।
१२. मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया।
१३. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित कियाकिन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और १३ जनवरी १९४८ को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।
१४. पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी के आदेश पर उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्धस्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।
१५. २२ अक्तूबर १९४७ को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दियाउससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को ५५ करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी। उपरोक्त परिस्थितियों में नथूराम गोडसे नामक एक युवक ने गान्धी का वध कर दिया। न्य़यालय में चले अभियोग के परिणामस्वरूप गोडसे को मृत्युदण्ड मिला किन्तु गोडसे ने न्यायालय में अपने कृत्य का जो स्पष्टीकरण दिया उससे प्रभावित होकर उस अभियोग के न्यायाधीश श्री जे. डी. खोसला ने अपनी एक पुस्तक में लिखा-“नथूराम का अभिभाषण दर्शकों के लिए एक आकर्षक दृश्य था। खचाखच भरा न्यायालय इतना भावाकुल हुआ कि लोगों की आहें और सिसकियाँ सुनने में आती थीं और उनके गीले नेत्र और गिरने वाले आँसू दृष्टिगोचर होते थे। न्यायालय में उपस्थित उन प्रेक्षकों को यदि न्यायदान का कार्य सौंपा जाता तो मुझे तनिक भी संदेह नहीं कि उन्होंने अधिकाधिक सँख्या में यह घोषित किया होता कि नथूराम निर्दोष है।” तो भी नथूराम ने भारतीय न्यायव्यवस्था के अनुसार एक व्यक्ति की हत्या के अपराध का दण्ड मृत्युदण्ड के रूप में सहज ही स्वीकार किया। परन्तु भारतमाता के विरुद्ध जो अपराध गान्धी ने किएउनका दण्ड भारतमाता व उसकी सन्तानों को भुगतना पड़ रहा है। यह स्थिति कब बदलेगी?
२ अक्तूबर (गान्धी जयन्ती) पर यह विषय विशेष रूप से विचारणीय हैजिससे कि हम भारत के भविष्य का मार्ग निर्धारित कर सकें।
sabhaar……..  डॉ. जय प्रकाश गुप्तअम्बाला छावनी।

Mother Teresa Was A Crook And A Fraud

From: Pramod Agrawal < >

Mother Teresa Was A Crook And A Fraud

By Morris M. , September 27, 2015
“The hunger for love is much more difficult to remove than the hunger for bread.” —Mother Teresa

In A Nutshell

The words “Mother Teresa” are modern-shorthand for things like “good,” “kind-hearted,” and “selfless.” Unfortunately, the real Mother Teresa was an authoritarian crook who palled around with some of the most despicable men of her day.

The Whole Bushel

Mother Teresa is famed for being one of history’s true altruists. She devoted her life to the poor, opening her first Missionaries of Charity home in 1950s Calcutta, and going on to open hundreds more across the world. As word of her mission spread, it caught the public imagination and millions of dollars began to pour in, all of which went to help those who needed it most. At least, that’s the official version.

The reality is far grimmer. According to those who’ve volunteered there, Mother Teresa’s missions are squalid cesspits run along violent, authoritarian lines. There are reports of unruly children being tied to beds and beaten, of outdated equipment not being replaced, and of needles being reused in countries with high HIV infection rates (such as Haiti) until they were so blunt they caused pain. All of this wrapped up in a culture of unquestioning obedience, secrecy, and control that is said to resemble a cult.
This might all be okay if the Missionaries were doing some good, but they’re not. In 1991, German magazine Stern revealed that only 7 percent of donations to the organization were used for charity. The rest was funneled into secret bank accounts or used to build more missions. There are reports that missions won’t even buy bread to feed their inmates, preferring instead to rely only on donated food.
And where does all this money come from? Well, some of it comes from regular, kind-hearted folk giving what they can. A heck of a lot more came from some of the most evil men who ever lived. Mother Teresa herself personally took large donations from the psychopathic Haitian dictator “Baby Doc,” publicly defending his blood-soaked rule in return. In the 1990s, fraudster Charles Keating donated $1.25 million of stolen money to the Missionaries. When asked to return the fraudulent money, Mother Teresa simply stayed silent.
Mother Teresa undoubtedly did some good things in her time, but they may yet be overshadowed by her awful legacy. In 2010, Forbes revealed that the first home she set up had a mortality rate of over 40 percent. To paraphrase an old saying, if the poor have friends like her, they no longer need enemies.

भारत का नया राष्ट्रगीत New National Song of India

From: Pramod Agrawal < >

भारत का नया राष्ट्रगीत
New National Song of India

आओ बच्चों तुम्हे दिखायें,
शैतानी शैतान की।

नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की।।

बड़े-बड़े नेता शामिल हैं,
घोटालों की थाली में।

सूटकेश भर के चलते हैं,
अपने यहाँ दलाली में।।

देश-धर्म की नहीं है चिंता,
चिन्ता निज सन्तान की।

नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की।।

चोर-लुटेरे भी अब देखो,
सांसद और विधायक हैं।

सुरा-सुन्दरी के प्रेमी ये,
सचमुच के खलनायक हैं।।

भिखमंगों में गिनती कर दी,
भारत देश महान की।

नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की।।

जनता के आवंटित धन को,
आधा मन्त्री खाते हैं।

बाकी में अफसर-ठेकेदार,
मिलकर मौज उड़ाते हैं।।

लूट-खसोट मचा रखी है,
सरकारी अनुदान की।

नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की।।

थर्ड क्लास अफसर बन जाता,
फर्स्ट क्लास चपरासी है।

होशियार बच्चों के मन में,
छायी आज उदासी है।।

गंवार सारे मंत्री बन गये,
मेधावी आज खलासी है।

आओ बच्चों तुम्हें दिखायें,
शैतानी शैतान की।।

नेताओं से बहुत दुखी है,.
जनता हिन्दुस्तान की।

Why Keep Fatwa Legal in Kafir Democracies?

From: Rajput  >

FATWA, the means by which the crude and bigoted mullahs, maulvis and imams, get rid of those (often too intelligent and smart in society) whom they don’t like, ought to be banned by Government of Bharat.

 

The uncivilized practice seriously undermines the authority of the President, the Constitution and the Judiciary of Bharat. There must not be two authorities for a citizen privileged to live in a democracy.

 

Surely the long awaited new Constitution will ban the practice along with other revolting and disgusting Islamic practices like four wives, FGM. amputation of limbs and stoning to death. They belong to Dark ages of the past when the Koran was written up to regulate every aspect of a Muslim’s life and served as penal code, too.

 

A civilized modern State must NOT behave like the Islamic State (Daesh or Isil) where beheadings, rape and sale of women, ethnic cleansing of whole communities and the destruction of ancient monuments and temples is “sanctioned by their Rasul Allah”.

 

Rajput

 

PS: Anyone issuing a FATWA in Bharat ought to be prosecuted and sentenced to LONG terms of imprisonment.

=  = = = =

In a message dated 5/15/2016 3:49:22 P.M. GMT Daylight Time, skanda987@gmail.com writes:

Below I have cut pasted the message lines, converted to sentence case, and embedded my responses.

 

“Fatwa, is just an opinion and opinion only. It is not binding on anybody.”

sv: Not so for the Muslims. Any Muslims serious about following Islam can take fatwa order personally as a religions duty for execution. It is an ingenious Islamic method by which any mullah or any Islamic religious authority can declare fatwa against anyone, get any Muslims act on it, and the fatwa issuer cannot be claimed to be the doer of the act under the kafir law system.  It does serve Islam interests mostly with violence.

 

“Hence having no legal legitimacy in India nor binding on anybody, why should it at all be issued?”

sv: As explained above, the the Islamic religious authorities will issue fatwas and never stop issuing.  What the kafir countries (where mostly Islam has invaded by force) can do is enact a law that makes issuing fatwa a crime severally punishable.

 

“They only commercialize the passions, polarize the society and galvanize a particular community     the nation / country is only bound to the constitution of India…period. Instead of advising the members to follow the constitution of India, such intemperate authorizations by the religious institutions can only create communal tensions. They should, hence, be banned, in the cause of maintaining peace, law and order.”

sv: Exactly! What is in the best interest of Hindustan and her majority Hindus is to declare Islam illegal.  A short article at below link provides all the rationale why is is necessary to declare Islam illegal.

https://skanda987.wordpress.com/2011/06/20/reasons-why-islam-needs-to-be-declared-illegal/

 

“Freedom of speech should not be hijacked by such religious and fanatic organizations like darul uloom deoband by issuing fatwas.”

 

sv: That is Vedic (or civil people’s) view virtue, not Islamic virtue.  We the Vedics have God-given right to unite and act to serve our Vedic interests like declaring Islam illegal and amending the constitution making it pro-Vedic because currently it is anti-Vedic and so anti-majority.

 

When a Vedic party is ruling in the Vedic land, it is sacred duty of the party to serve the Vedic interests.  All the Vedic, and the world need to know clearly that Vedic dharma and sanskriti are not sectarian. Vedic is universal religion for mankind. It provides complete science for mankind with which anyone can advance spiritually.  The Vedics need to stop any malpractice (such as caste by birth) of dharma.

 

This humble Vedic preacher will any questions in this matter.

 

jai sri krishna!

-sv

 

The Battle of Chamkaur

From: Rajput < >

From: Pramod Agrawal < >

 

The Battle of Chamkaur

 

1 सिक्ख = 1.25 लाख मुगल — जानने के लिये पुरी पोस्ट पढ़ें
धरती की सबसे मंहंगी जगह सरहिंद (पंजाब), जिला फतेहगढ़ साहब में है. यहां पर श्री गुरुगोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों का अंतिम संस्कार किया गया था।

सेठ दीवान टोंडर मल ने यह जगह 78000 सोने की मोहरे (सिक्के) जमीन पर फैला कर मुस्लिम बादशाह से ज़मीन खरीदी थी।

सोने की कीमत के मुताबिक इस 4 स्कवेयर मीटर जमीन की कीमत 2500000000 (दो अरब पचास
करोड़) बनती है।

दुनिया की सबसे मंहंगी जगह खरीदने का रिकॉर्ड आज सिख धर्म के इतिहास में दर्ज करवाया गया है। आजतक दुनिया के इतिहास में इतनी मंहंगी जगह कही नही खरीदी गयी।

दुनिया के इतिहास में ऐसा युद्ध ना कभी किसी ने पढ़ा होगा ना ही सोचा होगा, जिसमे 10 लाख
की फ़ौज का सामना महज 42 लोगों के साथ हुआ था .

और जीत किसकी होती है..?? उन 42 सूरमो की !

यह युद्ध ‘चमकौर युद्ध’ (Battle of Chamkaur) के नाम से भी जाना जाता है जो कि मुग़ल योद्धा वज़ीर खान की अगवाई में 10 लाख की फ़ौज का सामना सिर्फ 42 सिखों के सामने 6 दिसम्बर 1704 को हुआ जो की गुरु गोबिंद सिंह जी की अगवाई में तैयार हुए थे !

नतीजा यह निकलता है की उन 42 शूरवीर की जीत होती है जो की मुग़ल हुकूमत की नीव जो की बाबर ने रखी थी , उसे जड़ से उखाड़ दिया, और भारत को आज़ाद भारत का दर्ज़ा दिया।

औरंगज़ेब ने भी उस वक़्त गुरु गोबिंद सिंह जी के आगे घुटने टेके और मुग़ल राज का अंत हुआ हिन्दुस्तान से ।

तभी औरंगजेब ने एक प्रश्न किया गुरुगोबिंद सिंह जी के सामने। कि यह कैसी फ़ौज तैयार की आपने जिसने 10 लाख की फ़ौज को उखाड़ फेंका।

गुरु गोबिंद सिंह जी ने जवाब दिया  :

“चिड़ियों से मैं बाज लडाऊं , गीदड़ों को मैं शेर बनाऊ।”
“सवा लाख से एक लडाऊं तभी गोबिंद सिंह नाम कहाउँ !!”

गुरु गोबिंद सिंह जी ने जो कहा वो किया, जिन्हे आज हर कोई शीश झुकता है , यह है हमारे भारत की अनमोल विरासत जिसे हमने कभी पढ़ा ही नहीं ! अगर आपको यकीन नहीं होता तो एक बार जरूर गूगल में लिखे ‘बैटल ऑफ़ चमकौर’ और सच आपको पता लगेगा .

आपको अगर थोड़ा सा भी अच्छा लगा और आपको भारतीय होने का गर्व है तो जरूर इसे आगे शेयर करे जिससे की हमारे भारत के गौरवशाली इतिहास के बारे में दुनिया को पता लगे !
***कुछ आगे *##***चमकौर साहिब की जमीन आगे चलकर एक सिख परिवार ने खरीदी उनको इसके इतिहास का कुछ पता नहीं था । इस परिवार में आगे चलकर जब उनको पता चला के यहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी के दो बेटे शहीद हुए है तो उन्हों ने यह जमीन गुरु जी के बेटो की यादगार ( गुरुद्वारा साहिब) के लिए देने का मन बनाया ….जब अरदास करने के समय उस सिख से पूछा गया के अरदास में उनके लिए गुरु साहिब से क्या बेनती करनी है ….तो उस सिख ने कहा के गुरु जी से बेनती करनी है के मेरे घर कोई औलाद ना हो ताकि मेरे वंश में कोई भी यह कहने वाला ना हो के यह जमीन मेरे बाप दादा ने दी है .

वाहेगुरु….और यही अरदास हुई और बिलकुल ऐसा ही हुआ उन सिख के घर कोई औलाद नहीं हुई……अब हम अपने बारे में सोचे . 50….100 रु. दे कर क्या माँगते है । वाहे गुरु….

 

आठ सिद्धियां, नौ निधियां तथा गौण सिद्धियां

From: Pramod Agrawal < >

आठ सिद्धियांनौ निधियां तथा गौण सिद्धियां

 अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन्ह जानकी माता ।।  (31)

यह हनुमान चालीसा की एक चौपाई  जिसमे तुलसीदास जी लिखते है कि हनुमानजी अपने भक्तो को आठ प्रकार की सिद्धयाँ तथा नौ प्रकार की निधियाँ प्रदान कर सकते हैं ऐसा सीतामाता ने उन्हे वरदान दिया । यह अष्ट सिद्धियां बड़ी ही चमत्कारिक होती है जिसकी बदौलत हनुमान जी ने असंभव से लगने वाले काम आसानी से सम्पन किये थे। आइये अब हम आपको इन अष्ट सिद्धियोंनौ निधियों और भगवत पुराण में वर्णित दस गौण सिद्धियों के बारे में विस्तार से बताते है।
आठ सिद्धयाँ :
हनुमानजी को  जिन आठ सिद्धियों का स्वामी तथा दाता बताया गया है वे सिद्धियां इस प्रकार हैं-
1.अणिमा:  इस सिद्धि के बल पर हनुमानजी कभी भी अति सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं।
इस सिद्धि का उपयोग हनुमानजी तब किया जब वे समुद्र पार कर लंका पहुंचे थे। हनुमानजी ने अणिमा सिद्धि का उपयोग करके अति सूक्ष्म रूप धारण किया और पूरी लंका का निरीक्षण किया था। अति सूक्ष्म होने के कारण हनुमानजी के विषय में लंका के लोगों को पता तक नहीं चला।
2. महिमा:  इस सिद्धि के बल पर हनुमान ने कई बार विशाल रूप धारण किया है।
जब हनुमानजी समुद्र पार करके लंका जा रहे थेतब बीच रास्ते में सुरसा नामक राक्षसी ने उनका रास्ता रोक लिया था। उस समय सुरसा को परास्त करने के लिए हनुमानजी ने स्वयं का रूप सौ योजन तक बड़ा कर लिया था।
इसके अलावा माता सीता को श्रीराम की वानर सेना पर विश्वास दिलाने के लिए महिमा सिद्धि का प्रयोग करते हुए स्वयं का रूप अत्यंत विशाल कर लिया था।
3. गरिमा:  इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी स्वयं का भार किसी विशाल पर्वत के समान कर सकते हैं।
गरिमा सिद्धि का उपयोग हनुमानजी ने महाभारत काल में भीम के समक्ष किया था। एक समय भीम को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था। उस समय भीम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमानजी एक वृद्ध वानर रूप धारक करके रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर बैठे हुए थे। भीम ने देखा कि एक वानर की पूंछ से रास्ते में पड़ी हुई हैतब भीम ने वृद्ध वानर से कहा कि वे अपनी पूंछ रास्ते से हटा लें। तब वृद्ध वानर ने कहा कि मैं वृद्धावस्था के कारण अपनी पूंछ हटा नहीं सकताआप स्वयं हटा दीजिए। इसके बाद भीम वानर की पूंछ हटाने लगेलेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई। भीम ने पूरी शक्ति का उपयोग कियालेकिन सफलता नहीं मिली। इस प्रकार भीम का घमंड टूट गया।
4. लघिमा:  इस सिद्धि से हनुमानजी स्वयं का भार बिल्कुल हल्का कर सकते हैं और पलभर में वे कहीं भी आ-जा सकते हैं।
जब हनुमानजी अशोक वाटिका में पहुंचेतब वे अणिमा और लघिमा सिद्धि के बल पर सूक्ष्म रूप धारण करके अशोक वृक्ष के पत्तों में छिपे थे। इन पत्तों पर बैठे-बैठे ही सीता माता को अपना परिचय दिया था।
5. प्राप्ति:  इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी किसी भी वस्तु को तुरंत ही प्राप्त कर लेते हैं। पशु-पक्षियों की भाषा को समझ लेते हैंआने वाले समय को देख सकते हैं।
रामायण में इस सिद्धि के उपयोग से हनुमानजी ने सीता माता की खोज करते समय कई पशु-पक्षियों से चर्चा की थी। माता सीता को अशोक वाटिका में खोज लिया था।
6. प्राकाम्य:  इसी सिद्धि की मदद से हनुमानजी पृथ्वी गहराइयों में पाताल तक जा सकते हैंआकाश में उड़ सकते हैं और मनचाहे समय तक पानी में भी जीवित रह सकते हैं। इस सिद्धि से हनुमानजी चिरकाल तक युवा ही रहेंगे। साथ हीवे अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देह को कारण कर सकते हैं। इस सिद्धि से वे किसी भी वस्तु को चिरकाल तक प्राप्त कर सकते हैं।
इस सिद्धि की मदद से ही हनुमानजी ने श्रीराम की भक्ति को चिरकाल का प्राप्त कर लिया है।
7. ईशित्व:  इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी को दैवीय शक्तियां प्राप्त हुई हैं।
ईशित्व के प्रभाव से हनुमानजी ने पूरी वानर सेना का कुशल नेतृत्व किया था। इस सिद्धि के कारण ही उन्होंने सभी वानरों पर श्रेष्ठ नियंत्रण रखा। साथ हीइस सिद्धि से हनुमानजी किसी मृत प्राणी को भी फिर से जीवित कर सकते हैं।
8. वशित्व:  इस सिद्धि के प्रभाव से हनुमानजी जितेंद्रिय हैं और मन पर नियंत्रण रखते हैं।
वशित्व के कारण हनुमानजी किसी भी प्राणी को तुरंत ही अपने वश में कर लेते हैं। हनुमान के वश में आने के बाद प्राणी उनकी इच्छा के अनुसार ही कार्य करता है। इसी के प्रभाव से हनुमानजी अतुलित बल के धाम हैं।
नौ निधियां  : 
हनुमान जी प्रसन्न होने पर जो नव निधियां भक्तों को देते है वो इस प्रकार है
1. पद्म निधि: पद्मनिधि लक्षणो से संपन्न मनुष्य सात्विक होता है तथा स्वर्ण चांदी आदि का संग्रह करके दान करता है ।
2. महापद्म निधि: महाप निधि से लक्षित व्यक्ति अपने संग्रहित धन आदि का दान धार्मिक जनों में करता है ।
3. नील निधि: निल निधि से सुशोभित मनुष्य सात्विक तेजसे संयुक्त होता है। उसकी संपति तीन पीढीतक रहती है।
4. मुकुंद निधि: मुकुन्द निधि से लक्षित मनुष्य रजोगुण संपन्न होता है वह राज्यसंग्रह में लगा रहता है।
5. नन्द निधि: नन्दनिधि युक्त व्यक्ति राजस और तामस गुणोंवाला होता है वही कुल का आधार होता है ।
6. मकर निधि: मकर निधि संपन्न पुरुष अस्त्रों का संग्रह करनेवाला होता है ।
7. कच्छप निधि: कच्छप निधि लक्षित व्यक्ति तामस गुणवाला होता है वह अपनी संपत्ति का स्वयं उपभोग करता है ।
8. शंख निधि: शंख निधि एक पीढी के लिए होती है।
9. खर्व निधि: खर्व निधिवाले व्यक्ति के स्वभाव में मिश्रीत फल दिखाई देते हैं ।
दस गौण सिद्धियां : इसके अलावा भगवत पुराण में भगवान कृष्ण ने दस गौण सिद्धियों का वर्णन और किया है जो निम्न प्रकार है
1.  अनूर्मिमत्वम्
2.  दूरश्रवण
3.  दूरदर्शनम्
4.  मनोजवः
5.  कामरूपम्
6.  परकायाप्रवेशनम्
7.  स्वछन्द मृत्युः
8.  देवानां सह क्रीडा अनुदर्शनम्
9.  यथासंकल्पसंसिद्धिः
10. आज्ञा अप्रतिहता गतिः
सोलह सिद्धिया:-
गौण सिद्धियों का वर्णन और किया है जो निम्न प्रकार है
1. वाक् सिद्धि:– जो भी वचन बोले जाए वे व्यवहार में पूर्ण होवह वचन कभी व्यर्थ न. जायेप्रत्येक शब्द का महत्वपूर्ण अर्थ होवाक् सिद्धि युक्त व्यक्ति में श्राप अरु वरदान देने की क्षमता होती हैं!
2. दिव्य दृष्टि:– दिव्यदृष्टि का तात्पर्य हैं कि जिस व्यक्ति के सम्बन्ध में भी चिन्तन किया जायेउसका भूतभविष्य और वर्तमान एकदम सामने आ जायेआगे क्या कार्य करना हैंकौन सी घटनाएं घटित होने वाली हैंइसका ज्ञान होने पर व्यक्ति दिव्यदृष्टियुक्त महापुरुष बन जाता हैं!
3. प्रज्ञा सिद्धि:– प्रज्ञा का तात्पर्य यह हें की मेधा अर्थात स्मरणशक्तिबुद्धिज्ञान इत्यादि! ज्ञान के सम्बंधित सारे विषयों को जो अपनी बुद्धि में समेट लेता हें वह प्रज्ञावान कहलाता हें! जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से सम्बंधित ज्ञान के साथ-साथ भीतर एक चेतनापुंज जाग्रत रहता हें!
4. दूरश्रवण: – इसका तात्पर्य यह हैं की भूतकाल में घटित कोई भी घटनावार्तालाप को पुनः सुनने की क्षमता!
5. जलगमन: – यह सिद्धि निश्चय ही महत्वपूर्ण हैंइस सिद्धि को प्राप्त योगी जलनदीसमुद्र पर इस तरह विचरण करता हैं मानों धरती पर गमन कर रहा हो!
6. वायुगमन: इसका तात्पर्य हैं अपने शरीर को सूक्ष्मरूप में परिवर्तित कर एक लोक से दूसरे लोक में गमन कर सकता हैंएक स्थान से दूसरे स्थान पर सहज तत्काल जा सकता हैं!
7. अदृश्यकरण: – अपने स्थूलशरीर को सूक्ष्मरूप में परिवर्तित कर अपने आप को अदृश्य कर देना! जिससे स्वयं की इच्छा बिना दूसरा उसे देख ही नहीं पाता हैं!
8. विषोका: – इसका तात्पर्य हैं कि अनेक रूपों में अपने आपको परिवर्तित कर लेना! एक स्थान पर अलग रूप हैंदूसरे स्थान पर अलग रूप हैं!
9. देवक्रियानुदर्शन:– इस क्रिया का पूर्ण ज्ञान होने पर विभिन्न देवताओं का साहचर्य प्राप्त कर सकता हैं! उन्हें पूर्ण रूप से अनुकूल बनाकर उचित सहयोग लिया जा सकता हैं!
10. कायाकल्प:– कायाकल्प का तात्पर्य हैं शरीर परिवर्तन! समय के प्रभाव से देह जर्जर हो जाती हैं,लेकिन कायाकल्प कला से युक्त व्यक्ति सदैव तोग्मुक्त और यौवनवान ही बना रहता हैं!
11. सम्मोहन: – सम्मोहन का तात्पर्य हैं कि सभी को अपने अनुकूल बनाने की क्रिया! इस कला को पूर्ण व्यक्ति मनुष्य तो क्यापशु-पक्षीप्रकृति को भी अपने अनुकूल बना लेता हैं!
12. गुरुत्व: – गुरुत्व का तात्पर्य हैं गरिमावान! जिस व्यक्ति में गरिमा होती हैंज्ञान का भंडार होता हैं,और देने की क्षमता होती हैंउसे गुरु कहा जाता हैं! और भगवन कृष्ण को तो जगद्गुरु कहा गया हैं!
13. पूर्ण पुरुषत्व:– इसका तात्पर्य हैं अद्वितीय पराक्रम और निडरएवं बलवान होना! श्रीकृष्ण में यह गुण बाल्यकाल से ही विद्यमान था! जिस के कारन से उन्होंने ब्रजभूमि में राक्षसों का संहार किया! तदनंतर कंस का संहार करते हुए पुरे जीवन शत्रुओं का संहार कर आर्यभूमि में पुनः धर्म की स्थापना की!
14. सर्वगुण संपन्न:जितने भी संसार में उदात्त गुण होते हैंसभी कुछ उस व्यक्ति में समाहित होते हैं,जैसे – दयादृढ़ताप्रखरताओजबलतेजस्विताइत्यादि! इन्हीं गुणों के कारण वह सारे विश्व में श्रेष्ठतम व अद्वितीय मन जाता हैंऔर इसी प्रकार यह विशिष्ट कार्य करके संसार में लोकहित एवं जनकल्याण करता हैं!
15. इच्छा मृत्यु:इन कलाओं से पूर्ण व्यक्ति कालजयी होता हैंकाल का उस पर किसी प्रकार का कोई बंधन नहीं रहतावह जब चाहे अपने शरीर का त्याग कर नया शरीर धारण कर सकता हैं!
16. अनुर्मि:– अनुर्मि का अर्थ हैं-जिस पर भूख-प्याससर्दी-गर्मी और भावना-दुर्भावनाका कोई प्रभाव न हो!

मैं प्रधानमंत्री,”नरेन्द्र मोदी जी”, का सम्मान क्यों करता हूं ?

From: Pramod Agrawal < >

 

मैं _प्रधानमंत्री,”नरेन्द्र मोदी जी”का सम्मान क्यों करता हूं ?

जान लीजिए ..

 

💥क्या इससे पहले देखा था, की:—-

प्रधानमंत्री का सगा छोटा_भाई, (श्री प्रल्हाद मोदी ) बिना किसी सुरक्षा के, आश्रम एक्सप्रेस की,

जनरल बोगी से,दिल्ली जाकर राशन की दुकानदारो के, मार्जिन बढ़ाने के लिए,आन्दोलन करे ???

 

भारत में एक ऐसा प्रधानमंत्री है..!! जिसके

परिवार के सभी सदस्य,अपनी मेहनत से कमाया हुवा खाते हैं ..!!

 

💥नरेंद्र मोदी जी के, अन्य चार भाई :—–

💥➖एक भाई – पेंशन याफ्ता है..!!

💥➖एक भाई – कारखाने में, लेथ मशीन चलाता है..!!

💥➖एक भाई – सुबह से शाम तक, सरकारी कोटे वाली राशन की दुकान में, चीनी-गेंहू-केरोसिन तौलता है..!!

💥➖एक भाई – सुचना विभाग में काम करता है..!!

 

💥”इकलौती”बहन का पति”, एलआईसी में, क्लास थर्ड से रिटायर है..!

💥 और वो- गुजरात के एक छोटे से गाँव में रहता है…!

💥नरेंद्र मोदी की ‪#‎भतीजी ने,”प्रथम श्रेणी मे ग्रेजुएशन”करने के बाद, अच्छी नौकरी की आस में,निवास जाकर,”नरेंद्र मोदीजी”को,अपनी इच्छा जताने पर :—–

💥मोदीजी ने, अपनी जेब से 101/-

देते हुये कहा था :—-

💥” बेटी – एक अकेली आप हकदार नहीं..बल्कि सारे # गुजरात की बेटीयाॅ मेरी हैं..!

मैं -उनके साथ,”अन्याय”नहीं कर सकता..!!

💥आपको मेरा आशिर्वाद

है..”स्पर्धा परीक्षा”की तैयारी कर, अपना मुकाम स्वयं हासिल करो..!!”

 

💥आज जरा – मंत्री क्या बन गये..अरे मंत्री छोड़ो,जरा सी सत्ता क्या हासिल कर ली..! अपने

परिवार..सगे..संबंधी..मामा..भांजे..जिजा..साले..सबको,फायदा पहुचाने, और कमाने,की होड लग जाती है..!!

 

💥अब आप ही बताये..ऐसे “कालजयी_व्यक्तित्व”का, मैं -सम्मान नहीं करू, तो क्या करु..??

 

💥यदी, मेरी बातों से आप संतुष्ट नहीं हैं..तो मुझे बताए..? ?

💥➖अरविन्द_केजरीवाल के घर वाले क्या करते हैं ?

💥➖राहुल_गांधी के घर वाले क्या करते हैं ?

💥➖लालू_यादव के घर वाले क्या करते हैं ?

💥➖मुलायम_यादव के घर वाले क्या करते हैं ?

💥➖मायावती के घर वाले क्या करते हैं ?

💥इनके अलावा- जिनका भी नाम, आपको याद आये, उनका नाम बताएं..???

 

💥67 साल पहले- एक गुजराती ने देश को”अंग्रेजों”से,”मुक्त”किया था !!

 

💥अब 67 साल बाद,एक गुजराती ने,देश को”कांग्रेस”से,”मुक्त”किया है !!

 

💥पहले वाला-गुजराती ‘नोटो’ पर छा गया !!!

 

💥अभी वाला-गुजराती ‘वोटों’ पर छा गया !!

 

💥🙏 ऐ दोस्त – खिडकिया खोल के देखने दे, मुझे ..?????

 

💥मेरे वतन की,”नई तस्वीर”बन रही है !!!

 

🌻आज, भारत- फिरसे”आजाद” हुआ !!

 

💥➖पहले – “इग्लेड की रानी”से !!!

 

💥🙏 और आज :–💥🙏 💥➖” इटली की नौकरानी से ” !!!

 

💥➖जो, पढ़ सके न खुद, किताब मांग रहे हैं ???

 

💥➖खुद, रख न पाए, वो हिसाब मांग रहे हैं ????

 

💥➖जो, कर सके न साठ साल में- कोई विकास देश का, वो 1 साल में जवाब मांग रहे हैं ????

 

💥➖आज – गधे गुलाब मांग रहे हैं?? चोर लुटेरे इन्साफ मांग रहे हैं??

 

💥➖जो Loot te रहे देश को,60 सालों तक ???

 

💥सुना है, आज वो- 1साल का हिसाब मांग रहे हैं??

 

💥🙏वर्षों बाद – एक नेता को, माँ गंगा की आरती करते देखा है !!

 

💥वरना – अब तक, एक परिवार की समाधियों पर,”फूल चढ़ते”देखा है।!!

 

💥वर्षों बाद – एक नेता को, अपनी”मातृभाषा”में बोलते देखा है ।!

 

💥वरना – अब तक, रटी रटाई “अंग्रेजी”बोलते देखा है।!

 

💥 ➖अब तक -एक परिवार की मूर्तियां बनते देखा है।!

 

💥वर्षों बाद-: एक नेता को,”संसद की माटी चूमते”देखा है !!

 

💥वरना- अब तक,”इटैलियन सैंडिल”चाटते देखा है।!

 

💥वर्षों बाद – एक नेता को,”देश के लिए रोते”देखा है !!

 

💥वरना – अब तक,”मेरे पति को मार दिया”कह कर, वोटों की भीख मांगते देखा है।!

 

💥➖पाकिस्तान को घबराते देखा है !!

 

💥➖अमेरिका को झुकते देखा है।

 

💥इतने वर्षों बाद-भारत माँ को, खुलकर”मुस्कुराते”देखा है।

 

💥आप सभी से”निवेदन”है, इस मेसेज को,पुरे भारत ke,हर एक नागरीक तक,पहुचाने में मेरी मदद करें! !!

💥नाम इसलिए उँचा है, हमारा:☆—

☆☆क्योंकि☆☆—

 

💥हम -“बदला”लेने की नहीं, “बदलाव”लाने की,सोच रखते हैं !!!

 

💥समझदार व्यक्ति,”वह नहीं”,जो “ईट का जवाब पत्थर”से दे ।

 

💥समझदार व्यक्ति वो है, जो-फेंकी हुई ईट से,अपना”आशियाना”बना ले ।!

 

💥कांग्रेस 2014 — भाजपा 2015

💥नाम मूल्य प्रति किलो

 

☆शक्कर 34 रु ———23

☆पेट्रोल 78रु ———64

☆सोना 31000रु ——-25000

☆चांदी 49000रु——-30000

☆सोया तेल 79रु———-66

आदि—————

 

👮पुलिस प्रशासन अलर्ट !!!

🙅प्रोपर्टी का बूम ख़तम !!!

🚗सडको का निर्माण जारी !!

💩सफाई कर्मचारी अलर्ट !!

🔫आतंकवाद का सफाया जारी !!

🎥घोटालो का खुलासा जारी !!

 

💥🎉🎊अगर अभी भी, नहीं समझे,की अच्छे दिन क्या हैं? ?

 

💥तो फिर, सरकारी अस्पताल में दिमाग का इलाज करवाओ।।।

 

👼और समझ गये, तो ओरो को bhi समझाओ।।।।

 

✅ 5/- रूपये वाली ‘बीयर’ की बोतल-आज 80/- रुपये की हो गई, कभी किसी ने दारु का ठेका नहीं फूंका ?????

 

✅ 25 पैसे वाली कोकाकोला- आज 12/- रुपये की हो गई, कभी किसी ने अमेरिका का पुतला नहीं फूंका ????

 

✅ 5/- रूपये वाला Mac-Donald बर्गर, आज 55/- रुपये में बिक रहा है, कभी किसी ने रेल नहीं रोकी ?????

 

✅ 5/- रूपये का चिप्प्स 🍕🍕 का पैकट, आज 30/- रूपये का हो गया, कभी किसी ने रेल नहीं रोकी ?????

 

✅ 5/- रुपये में आने वाला सिनेमा का टिकिट-300/- रूपये का हो गया, कभी किसी ने कोई सिनेमा हॉल नहीं फूँका ??????

 

✅ चीनी २/- रुपये महँगा क्या हुई Breaking news हो गई I??

 

✅ और 10/- रूपये का रेल टिकट- 11.40/- रूपये का क्या हुआ, सब छातिया पीटने लगे I जो महिनो में एक दो बार देना है !? ?

 

💥अच्छे दिन आयेंगे !! सब्र तो करो ।!

💥जम्मू से कटरा,रेल का किराया- 20 रुपया हैँ ।

💥टेक्सी वाले 2500 से 3000 रुपया लेते हैं|

💥यही तो अच्छे दिन हैं !!

💥कांग्रेस 10 साल में, एक “सरबजीत सिह”को, वापिस हिन्दुस्तान नहीं ला सकी, और मोदी सरकार 15 दिन में ही “ईराक में फसे 174 भारतीयों”, को खुंखार आतंकवादीयो से छुडाकर ले आयी ।

💥सब्र रखो – अच्छे दिन आयेंगे ।

💥 मोदीजी- 5 साल में, देश को यूरोप के विकसित देशों की लाइन में, सबसे आगे खड़ा कर देंगे ।

💥 बस- देश की जनता -“आलू-प्याज़”को छोड़कर, कुछ बड़ा सोचे”।

 

💥China मोदी के खिलाफ !

💥 America मोदी के खिलाफ !

💥CIA मोदी के खिलाफ !

💥 CBI मोदी के खिलाफ !

💥 IB मोदी के खिलाफ !

💥ISI मोदी के खिलाफ !

💥PAK मोदी के खिलाफ !

💥Congress मोदी के खिलाफ !

💥JDU मोदी के खिलाफ !

💥BSP मोदी के खिलाफ !

💥SP मोदी के खिलाफ !

💥CPI मोदी के खिलाफ !

💥CPIM मोदी के खिलाफ !

💥AAP मोदी के खिलाफ !

 

💥लालू, मालू, भालू, कालू, राहु, कजरी, मोदी के खिलाफ

 

💥सारे गद्दार मोदी के खिलाफ !

💥सारे देश द्रोही-मोदी के Virodh में!!!

 

💥सारी -कायनात लगी है, एक शख्स को झुकाने में…..

💥 खुदा भी – सोचता होगा ??

Na जाने,”किस मिटटी”का इस्तेमाल किया tha,मैंने ??? “मोदी” को बनाने में ????

 

💥🙏 “JARA SOCHO” 💥🙏

 

💥जो व्यक्ति :—

💥 PM बनने से पहले,

यदि

💥अमरीका को,झुका सकता है?

💥भूखे नंगे देश, “पाकिस्तान”में, “हडकंप” मचा सकता है?

💥चीन-जैसे”गद्दार”देश के, अखबारों की, सुर्खियों में आ सकता है??

💥🙏 तो भाई, “वह”,भारत को,”विश्व गुरु” बना सकता है !!

💥🙏 यह बात पक्की है!!

 

💥🙏” देश की”जरुरत”है, मोदी “💥🙏🙏

 

💥”मैं- मुफ्त भोजन दूंगा” – राहुल गांधी !!

 

💥”मैं मुफ्त पानी दूंगा” – केजरीवाल !!

 

💥 “न तो मैं —

 

💥मुफ्त पानी दूँगा !!

💥ना ही,मुफ्त भोजन

कि बात करूंगा !!

💥 बल्कि,मैं :–

 

💥इतने”रोजगार”पैदा करूँगा !!

 

💥 भारत के युवाओं को, इतना सक्षम कर दूंगा !!

” की”

💥मेरे देश का”हरेक व्यक्ति”,

“स्वाभिमान”से,अपना भी पेट भरेगा,और दूसरों की भी,”प्यास बुझाएगा”!!!!

👍 – नरेंद्र मोदी -👍

 

💥 दिक्कत “केजरीवाल” में नहीं, “भारत की जनता”,में है !!

💥जो”मुफ्त”की चीज”पाने के लिए”, ☆लादेन☆ को भी,वोट दे देगी !!!😱😱

 

💥🙏 अगर “देश के लिए” कुछ करना है, तो यह सन्देश -30 लोगों को भेजना है।

💥🙏 बस – आपको तो एक कड़ी जोड़नी है, देखते ही देखते,”पूरा देश” जुड़ जायेगा।!!

 

💥बस…जरासा forwards..करो.

सिफॅ 2-3 सेकंड लगेंगे…

 

🙏🙏”Jai hind”🙏🙏