#SangamTalksHindi #SangamTalks तब्लीगी जमात | मानवता के लिए चुनौती | श्री नीरज अत्रि

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This Is Islam: Death Penalty to Pregnant Woman

This Is Islam: Death Penalty to Pregnant Woman

From: Rajesh Nayak < >

“Islam does not include Human Rights, and therefor it must be declared illegal in non-Muslim democracies.” – Suresh Vyas

A pregnant woman was given DEATH PENALTY court in Sudan- for leaving Islam #ExMuslimLivesMatter

In India, there is a question of Safoora Zargar, who allegedly instigated riots in Delhi in February 2020, being denied bail and kept in jail despite being pregnant. There are laws which specify what needs to be done in such cases, and her being denied bail is perfectly legal. Besides, her dangerous statements are on record. One can see what she said here https://twitter.com/srikanthbjp_/status/1268838524473630721

Despite this, the Left-liberals and camouflaged Islamic radicals like Arfa Sherwani, and others claimed that ‘injustice’ was done to her, and that she should have been released from jail just because she is pregnant. In this context, we must tell the world what Islamists did and continue to do to former Muslims, those who leave Islam.

In May 2014 in Sudan, a HEAVILY PREGNANT woman was given DEATH penalty for converting to Christianity from Islam, marrying a Christian man. https://bbc.com/news/world-africa-27433241 Her only ‘crime’ was leaving Islam.

 

Hindu Muslim Bhaichara – A Fraud

Hindu Muslim Bhaichara – A Fraud

From: K C Garg < >

Islam is a closely knit militant organization based on Sex and Violence.
हिन्दू – मुस्लिम भाईचारा की बात करना – एक बड़ा झूठ, छल और धोखा है 
हिन्दू राजनेता आमतौर पर हिन्दू – मुस्लिम भाई भाई या भाईचारा का राग अलापते हैं। अपनी बात पर बल देने के लिए वे हिन्दुओं को सब प्रकार का झूठ परोसते हैं। वे कहते हैं – आतंक का कोई मजहब नहीं है, मजहब नहीं सिखाता आपस में वैर रखना, सर्वधर्म समभाव, गंगा यमुनी सभ्यता, अनेकता में एकता आदि। जबकि मुसलमानों में भाईचारा सिर्फ मजहब का है। एक मुसलमान दुनिआ में कहीं भी है वह उसका भाई है। उनके लिए हिन्दू काफिर है। वह मुसलमान बन जाये तो ठीक, नहीं तो कत्ल  किये जाने के काबिल है।
 
 इसी सम्बन्ध में क़ुरान की कुछ आयतें –
(9 :5) जब पवित्र महीने बीत जाएँ तब मूर्तिपूजक जहाँ भी मिलें उन्हें कत्ल करो, उन्हें कैद करो, बलपूर्वक घेरो और उन पर हमला करने के लिए छुपकर प्रतीक्षा करो। परन्तु अगर वे पश्चाताप करें, मुस्लिम प्रेयर करें और गरीब मुसलमानों के लिए धन दें तो उन्हें छोड़ दो। निश्चित तौर पर अल्लाह क्षमा करने वाला और दया करने वाला है।
(8 :12) गैर मुस्लिमों के दिलों में मैं आतंक बिठा दूंगा। उनकी गर्दनों पर और सब उंगलिओं पर सख्त प्रहार करो।
(69 : 30 – 33) उसे अचानक और ताकत से पकड़ो, उसके पैरों में बेड़ी डालो , फिर जलती हुई आग में फेंक दो। फिर उसे सत्तर हाथ लम्बी जंजीर से बाँध दो। उसे महान अल्लाह पर विश्वास न था।
(4 :101) गैर मुस्लिम निश्चित तौर पर तुम्हारे खुले शत्रु हैं। 
 
भाईचारा एक समान विचारों का, एक समान खान-पान और व्यवहार का होता है। जबकि वास्तविकता यह है कि हिन्दुओं और मुसलमानों की आपस में किसी बात में भी समानता या साँझ नहीं है। मुस्लिम लीग के अध्यक्ष और पाकिस्तान के जनक मुहम्मद अली जिन्नाह ने 23 मार्च 1940 को लाहौर में मुस्लिम लीग के सम्मलेन में स्पष्ट शब्दों में कहा था –
 
 ” इस्लाम और हिंदुत्व – ये दो अलग अलग सामाजिक व्यवस्थाएं हैं। ये कभी सांझी राष्ट्रीयता नहीं अपना सकते। ये दो अलग अलग मजहबी विचारधाराओं, सामाजिक रीति रिवाजों और साहित्य से जुड़े हैं।
ये आपस में न शादियां करते हैं और न ही इनका आपस का खान-पान का सम्बन्ध है। वास्तव में ये दो अलग अलग सभ्यताओं से सम्बन्ध रखते हैं जो एक दुसरे की विरोधी हैं। उनके जीवन के लक्ष्य अलग अलग हैं। यह बिलकुल स्पष्ट है कि हिन्दू और मुसलमान अपनी प्रेरणा अलग अलग इतिहास से लेते हैं। इनके महाकाव्य, इनके आदर्श पुरुष,  इनकी कथा कहानियां अलग अलग हैं। आम तौर पर एक का महाबली दुसरे का शत्रु है, एक की जीत होती है तो दूसरे की हार होती है। ऐसी दो कौमों को  एक राष्ट्र में बांधना असंतोष को बढ़ावा देगा।  
        ऐसे ही भाषण जिन्नाह ने और कई अवसरों पर दिए थे। जिन्नाह सत्य कहता था, परन्तु हिन्दुओं का दुर्भाग्य है कि हमारे हिन्दू नेता इस सत्य को स्वीकार न करते थे और आज भी नहीं करते।
 
राष्ट्रहित के लगभग हर विषय में मुसलमान हिन्दुओं के विरुद्ध खड़े होते हैं – चाहे जम्मू कश्मीर में धारा 370 समाप्त करने का विषय हो, नागरिकता कानून में सुधार का विषय हो, सारे देश के लिए एक समान कानून बनाने की बात हो, देश में जनसँख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने का मामला हो, राम मंदिर का विषय हो , मुस्लिम स्त्रियों को तीन तलाक से छुटकारा दिलाने का कानून हो। वे देश के कानून की अपेक्षा कुरान के आदेशों को ज्यादा महत्त्व  देते हैं। भारत में रहने वाले लगभग सभी मुसलमानों के पूर्वज हिन्दू थे। उन्हें तलवार के जोर से या लालच देकर मुसलमान बनाया गया था। परन्तु वे इस सचाई को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
 
अकबर (1542 -1605) की क्रूरता – चित्तौड़ के किले को जीतने के बाद अकबर ने वहां मौजूद सेना तथा अन्य लोगों का कत्लेआम करवाया। आयरलैंड के इतिहासकार और ‘भारत का आरंभिक इतिहास’ के लेखक विन्सेंट स्मिथ के अनुसार इस कत्लेआम में 30,000 लोग मारे गए । अँगरेज़ अधिकारी और लेखक  कर्नल ताड का कहना है कि चित्तौड़ को जीतने के बाद अकबर ने बचे हुए सभी स्मारकों को तोड़ दिया था। अकबर का नवरत्न  अबुल फज़ल ‘अकबर नामा ‘ में लिखता है – अकबर के आदेश से पहले आठ हज़ार राजपूत योद्धाओं को हथिआरविहीन कर दिया गया, फिर उनका तथा अन्य 40,000 किसानों का भी वध कर दिया गया । 
 
जहांगीर के आदेश पर सिखों के पांचवें गुरु अर्जुनदेव को लाहौर में तीन दिनों तक कठोर यातनाएं दी गयीं। उन्हें लोहे की प्लेट पर बिठाया गया। फिर उनके शरीर पर गर्म रेत डाला गया। उन्हें एक बड़े पानी भरे कढाहे में बिठाकर पानी उबाला गया था। अंत में 30 मई 1606 को उन्हें शहीद कर दिया गया।
 
औरंगज़ेब ने गुरु तेग बहादुर तथा उनके तीन साथिओं को इस्लाम स्वीकार करने  को कहा। उनके इंकार करने पर उन्हें यातनाएं देकर मारा – भाई मतिदास को आरे से चिरवाया, भाई दयालदास को खौलते पानी के कढाहे में उबालकर मारा, भाई सतीदास के शरीर पर रुई लपेटकर उन्हें जिन्दा जलाकर मारा गया तथा अंत में 11 नवम्बर 1675 को गुरु तेग बहादुर का सिर धड़ से अलग कर दिया गया । 
 
गुरु गोबिंद सिंघ के दो किशोर बेटों – जोरावर सिंघ और फतह सिंघ को इस्लाम स्वीकार न करने पर सरहन्द (पंजाब) में दीवार में जिन्दा चिनवा दिया गया। जब दीवार उनकी गर्दनों तक ऊंची हो गई उसे गिरा दिआ गया तथा 12 दिसंबर 1705 को उनका गला काटकर उनकी हत्या कर दी गई ।
 
इस्लाम स्वीकार न करने पर सन 1734 में वसंत पंचमी के दिन लाहौर की कत्लगाह में हजारों लोगों के सामने 14 वर्ष के बालक हकीकत राय का सिर तलवार के एक वार से शरीर से अलग कर दिया गया।
 
सन 1921 में गाँधी के समर्थन वाले खिलाफत आंदोलन के दौरान मालावार के मोपला मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अथाह अत्याचार किये। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 10,000 हिन्दू कत्ल किये गए। बड़ी संख्या में हिन्दुओं को जबरदस्ती मुसलमान बनाया गया। स्त्रियों से बलात्कार किया गया, उन्हें सब प्रकार से प्रताड़ित किया गया। हिन्दुओं के मकान तथा दुकानें जलाई गईं। 
 
सन 1946  में जिन्नाह के सीधी कार्रवाई (direct action) के आवाहन पर नोआखली (बंगाल) में वहां के मुख्यमंत्री सोहरावर्दी के संरक्षण में मुसलमानों ने हिन्दुओं का नरसंहार किया। कई हजार हिन्दुओं को कत्ल किया, जबरदस्ती मुसलमान बनाया, औरतों से बलात्कार, आगजनी, लूट-पाट सब किया।
 
सन 1947 में भारत विभाजन के समय पकिस्तान में मुसलमानों ने दसों लाख हिन्दुओं को कत्ल किया, उन्हें जबरदस्ती मुसलमान बनाया,  स्त्रियों से बलात्कार किये। विभाजन के बाद पकिस्तान में 20 % हिन्दू रह गए थे। अब वहां पर सिर्फ 1 % हिन्दू रह गए हैं।
 
सन 1989 -90  में कश्मीर में मुसलमानों ने हिन्दुओं पर सब प्रकार के अत्याचार किये और साढ़े तीन लाख के करीब कश्मीरी हिन्दुओं को वहां से भगा दिया। 
 
अब भी भारत में जिस गली मोहल्ले में मुसलमान ज्यादा संख्या में हो जाते हैं वहां पर हिन्दुओं का रहना दूभर कर देते हैं। हिन्दू अपने मकान दुक़ान औने पौने भाव में बेचकर कहीं दूर चले जाते हैं।
 
                                                           कृष्ण चंद्र गर्ग        0172 – 4010679