Islamic Terrorists Planning to Destroy Ram Janam Bhuumi Temple

From” Tilak Shreshtha < >

Dear Hindus,

Namaste!

Note – The words in maroon font are inserted by Suresh Vyas

It is the very nature of the evil Islam generated ideology to attack others. The Ram temple is an excuse. And they will find thousands of excuses, e.g. according to Islam ‘not being a Muslim is a crime.’

The counter or our own survival depends upon the correct analysis of the Islamic threat and correct responses\precautions. The solutions are not ‘justice’, ‘nice’, ‘goodness’, ‘Gandhi’, etc. Such solutions presuppose existence of some form of common humanity, where dialogues on the basis of ‘common humanity’ is possible. With Islam there is none.

Because, Islam is a brainwashing system par excellence. It produces Zombies with a single thought. The world is divided as Muslims and Kafirs. All the thinking and doings are to benefit Muslims and hurt Kafirs. Do not take my words for it, but read Quran \ Hadis \ Shirah and study the history. The correct simile is the relation between the herbivores and the carnivores in the nature. The carnivores must kill and eat herbivores, else die of starvation. Biggest nonsense the herbivores may do is to preach Gandhi. The cowardly and dumb Hindus should learn from the thousand years of own history.

Fortunately, the solution is simple.

  1. The tactical solution is to pose unmistakable counter threat. The Hindus should stop acting like sitting ducks to receive all attacks and rapes. Lootings from the enemy. When the enemy is known and his activities and whereabouts, all we need is a well-planned well executed action.
  2. The strategic solution is ‘not to let Madrassas brain wash young minds’, and to explain exactly what Islam is to all, Muslims and non-Muslims. There should be an international understanding and effort on this front, e.g. small pox.
  3. Respecting ‘multi-culture’ and ‘all religions’ must be coupled with the essential views like:
    1. ‘tolerating intolerance is not tolerance’,
    2. ‘respecting bad culture is bad culture’, and
    3. ‘Fascism with religious burka needs exposing.’

Only China understood the threat since the ‘Battle of Talash’ and today trying to solve it appropriately. Guess why no Muslim leaders speak against China but practice ‘Taquiya.’

I am all for ‘Sarve bhavantu sukhinah’ and ‘sarve bhadrani pashyantu.

But these are not absolute principles of Dharma. Saving freedom to practice dharma, and saving our maatrubhuumi and our women has highest priority.

‘ But do not slap me. If you do, I will help you to realize what Islam is by different means, you may not enjoy. E.g. here is an article FYI on Islam attached.

There is no reason why the Hindus, with unity, should not boycott Muslims till they quit Islam or quit Bhaarat.

Thanks, Tilak

एस. सेनाका कोंगीकरण और कट्टरतावादी मुस्लिमीकरण?

From: Shirish Dave < >

I have an interesting blog to share it with you. If you cannot read this blog properly, kindly click on the link hereunder. Please share it to maximum. It is a call of the time.

https://treenetram.wordpress.com/2020/09/13/%e0%a4%8f%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%9f%e0%a5%8d/

एस. सेनाका कोंगीकरण और कट्टरतावादी मुस्लिमीकरण?

 

हाँ जी, एस.सेना का अर्थ है ए.एसएस. सेना (ASS SENA) या सुएज़ सेना (गटर सेना) या सोनिया सेना. हाँ जी, यह सेना कभी शिवसेना नहीं हो सकती. जिस सेनाका सेना पति एक महिलाके उपर पूर्वग्रह ही नहीं लेकिन अहंकारकी भावनासे उन्मत्त हो जाय तो वह कभी शिवाजीकी सेनाका सैनिक हो ही नहीं सकता. अहंकार उसका ही हो सकता है जिसने कुछ अच्छा काम किया हो या योगदान दिया हो.

शिवाजी कैसे थे?

शिवाजी एक महाराजा थे. उन्होंने हिन्दुराष्ट्रका स्वप्न देखा था. उनका मंत्रीमंडळ हमारे देशके प्राचीन राज्यव्यवस्थाके अनुसार सुग्रथित था. शिवाजीने उर्दुके स्थान पर संस्कृतको रक्खा था.  शिवाजी महाराज भारतीय संस्कृतिके अनुसार स्त्री दाक्षिण्यता वाले संस्कारवाले थे. चाहे वह स्त्री दुश्मनकी ही क्यों न हो.

शिवाजीके एक सुबेदारने जब एक हारे हुए और भागे हुए दुश्मनकी स्त्री को शिवाजीके समक्ष प्रस्तुत की शिवाजीने उस सुबेदारको डांटा और उस स्त्रीकी क्षमा याचनाकी. उसने यह भी कहा कि यदि मेरी माँ तुम जैसी सौंदर्यवान होती तो मै भी एक सौंदर्यवान पुरुष होता.

ऐसे थे शिवाजी महाराज.

आज तो संजय राउत और उद्धव ठाकरे जैसा ऐरा गैरा शिवाजीका नाम लेता है.

“अरे, यदि तूने मेरे सामने उंगली उठाई तो मैं तुम्हारी उंग्ली तोड दूंगा,

“अरे यदि तूने मेरे सामने आंख उठाई तो मैं तेरी आंख फोड दूंगा,

“तू आ के तो देख, (मेरी गलीमें या मेरी मुंबईमें या मेरे महाराष्ट्रमें) मैं तेरी कमर तोड दूंगा, (बल्हैयाँ मरोड दूंगा),

“मैं कौन हूँ तुज़े मालुम है? मैं शिवाजी महाराजके महाराष्ट्रका फरजंद हूँ …  तूने मेरी सरकारका अपमान किया … ? तू ने मेरे पूलिसतंत्रका अपमान किया … ? यह सब  हमारे शिवाजी महाराजका ही अपमान हुआ … शिवाजी महाराजके महाराष्ट्रका अपमान हुआ. अब मैं तुम्हे नहीं छोडुंगा.

ऐसी भाषा न तो कोई सुशिक्षित पुरुषकी हो सकती है, न तो ऐसी भाषा शिवाजी महाराजके सैनिककी हो सकती है.

हाँ जी, यह भाषा सडक छाप गुन्डेकी अवश्य हो सकती है. उद्धव ठकरे और संजय निरुपम दोनोंने यह सिद्ध कर दिया कि उनकी कक्षा सडकछाप गुन्डेकी है.

निम्नकक्षाके व्यक्तिको यदि आप कितना ही उच्चस्थान पर बैठा दो वह अपना संस्कार नहीं छोड सकता.

संस्कृतमें एक श्लोक है

श्वा यदि क्रियते राजा, अपि नात्ति उपानहम्‌

कुत्तेको यदि राजा कर दो तो क्या वह जूता नहीं खायेगा?

अर्थात्  जूते खाजाना कुत्तेकी तो प्रकृति है, कुत्तेको राजा बना दो तो भी वह जूता खाना छोडेगा नहीं.

एस.सेना के उद्धव और संजयका यही हाल है. पूर्व प्रकाशित ब्लोगमें हमने देखा ही है कि एस.सेनाके लोग कैसे हप्ता वसुली करते है.

दाउद भी वैसे तो सडकका गुन्डा ही था.

 

ऐसी हवा है कि एस.सेनाके फरजंद या और नेता ड्रगके मामलेमें फंसे है. इसलिये ये एस.सेनाके नेता बोखला गये है. उनका असामाजिक आचरणकी मानसिकता उजागर हो के जनताके सामने आ गयी है.

हो सकता है कि शरदने इन नेताओंको आगे किया हो. जी हाँ. शरद यह सब कर सकता है.

ड्रग्ज़के कारोबारका नेट वर्क

ड्रग्ज़के कारोबारका नेट वर्क अति विस्तृत है. यह पाकिस्तानसे भी होता है.

आतंकवादी संगठनोंको जिवित और सक्रिय रहेनेके लिये पैसे तो चाहिये ही.

 

ओवर ईन्वोईन्सींगके व्यापरसे जो धन प्राप्त होता है, हवालासे इन संगठनोंको पैसे मिलते है. किन्तु आतंकवादी संगठनोंको तो जितने पैसे मिले वे कम ही है. मालेतुजार लोगोंके फरजंदोंकी आदतें बिगाडके उनको ड्रग्ज़सेवनके आदी  कर देतें है. ड्रग्ज़का कारोबार केवल ब्लॅक मनीसे ही हो सकता है. काले धनका उद्भवस्थान, अचलसंपत्तिकी खरीद-बीक्रीमें, होता है, ड्र्ग्ज़के व्यापारमें होता है. ड्रग्ज़को वहीं खरीद सकता है जिसके पास काला धन है. कालाधनके संचयमें, कोंगी और उसके सांस्कृतिक साथी जिनमें उनके सहायक मीडीयाकर्मी , पूलिसके बडे अफसर, सरकारके बडे अफसर, फिलमी दुनियाके महानुभाव होते है. इनका एक नेटवर्क होता है.

 

एस.सेनाका गठबंधन प्रत्यक्ष रुपसे इस शठविद्यामें प्रवीण लुट्येन गेंगसे हुआ तो उनको भी अपनी चारित्र्यिक योग्यता सिद्ध करनी पडेगी ही न?

नया मुसलमानः

आम मुसलमान दिनमें पांच बार नमाज़ पढता है. जब एक व्यक्ति नया नया मुसलमान बनता है तब वह सात बार नमाज़ पढता है.

अब यह एस.सेना भी कोंगीयोंकी सांस्कृत्क गेंगमें आ गयी तो उसको अपनी योग्यता तो सिद्ध करना ही पडेगा.

सर्व प्रथम तो पालघरमें हिन्दु संतोंका पूलिस और एन.सी.पी. के नेताकी उपस्थितिमें ही तथा कथित मोबलींचींग द्वारा हत्या करवाना.  और इसमें जिन्होंने जांचके उपर प्रश्न उठाये उनको स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा धमकी देना. इस प्रकार एस.सेनाने कोंगी गेंगके सदस्य बननेकी अपनी क्षमता सिद्ध कर दी. अर्णव गोस्वामीके उपर एफ.आई.आर. लगाके पूलीस स्टेशनमें १२ घंटा रक्खा क्यों कि उसने कोंगीके प्रमुखको उसके पैतृक नामसे संबोधन किया.

अर्णव गोस्वामीको मारडालने लिये गुन्डे भेजे गये और अर्णव गोस्वामीने उनके उपर केस दर्ज किया. तो गुन्डोंको जमानत मिल गयी. लेकिन जो मीडीया कर्मी उद्धवके फार्म हाउस पर गये और उसने वॉचमेनको पूछा कि यह फार्म हाउस किसका है तो इन मीडीयाकर्मीयोंको गिरफ्तार करवा दिया और इनको जमानत नहीं मिली.

 

तो आप समज़ गये कि यह सब कैसे होता है

 

इस एस. सेनाने अपनी योग्यता सिद्ध करनेके लिये फर्जी धर्म-निरपेक्षता, जूठ बोलनेका नैपूण्यम्‌, आतंकवादका समर्थन, असामाजिक तत्त्वोंके महानुभावोंसे मेलमिलाप, और उनको केवल समर्थन ही नहीं लेकिन सहायताके लिये तत्परता, और फिल्मी कलाकारोंसे मिलना जुलना, पार्टीयां करना … ये सब तो करना पडेगा ही न.

 

एस.सेनाको ऐसा करनेमें कोई कष्ट नहीं है. क्यों कि वे तो ऐसा करनेके लिये कई वर्षोंसे आतुर थे. हप्ताबाजी तो उनके संस्कारमें था. किन्तु ये सब छोटे पैमाने पर था. अब जब कोंगी-सेनामें मिल गये है तो अब कुछ बडा करना आवश्यक है.

 

देशप्रेमी होना, नीतिमान होना, आमजनता लक्षी होना, सहिष्णु होना, शांतिप्रेमी होना … ये सब बकवास है. ये सब तो फरेबीसे भी सिद्ध कर सकते है.

 

एस.सेनाने सोचा;

“यह साला बीजेपीके साथमें, खुले आम कुछ भी नहीं हो सकता है, ये लुट्येन गेंग हमारे पीछे ही पड जाती है. यदि हम कोंगी गेंगमें मिल जावे तो अच्छा होगा. कोंगी गेंगमें हम सुरक्षित है, और चाहे वह का सकते है. सिर्फ हमें यह अहेसास दिलाना होता है कि वे हमें जो कुछ भी कहें, उन सबको करनेके लिये हम सक्षम है.

 

“कोंगीयोंके पास क्या नहीं है? टूकडे टूकडे गेंग है, अर्बन नक्षल है, समान रुपवाले सांस्कृतिक पक्षके महानुभावमंडल है. हमें और क्या चाहिये? यदि मर जायेंगे तो ये ईशा मसिहा हमारा सब पाप अपने सर पर लेनेको तयार ही है. नहिं तो हमारे मुस्लिम साथीयोंकी कृपासे, हम मुस्लिम बन जायेंगे.  इन मुस्लिमोंकी कृपासे जन्नतमें सोलह सोलह हुरें मिलेगी. और मरनेसे पहेले तो इस मृत्युलोकमें, जी ते जी, हुरें ही हुरें है. चाहे तो फार्म हाउसमें में समुह मज़ा कर लो या चाहे तो सप्ततारक होटेलमें अकेले उनके साथ मजा कर लो. कौन रोकने वाला है! यदि कोई मीडीयावाला आया तो, आनेवाले को जेल ही भेज देंगे और उसकी चेनलको ताला लगा देंगे. यदि कोई न्यायाधीशने चापलुसी की तो …? शीट! यह कोई बात है!!

“अरे भाई देखा नहीं कि सर्वोच्च अदालतके एक निवृत्त न्यायाधीशने क्या कहा था? यदि निष्पक्ष न्याय दिलाना है तो लुट्येन गेंगको खतम करना पडेगा.

 

“इस गेंगको खतम करनेवाला अभी तक अवतरित नहीं हुआ है.

एस. सेना आगे बोली “हमें पहेले अक्ल क्यूँ नहीं आयी?…”

 

शिरीष मोहनलाल दवे

Watch the video to know about the Congi – Daud – NCP – Bollywood – ISI

 

https://youtu.be/cU8NXTeo6GY

 

Brutal facts of Goa-Inquisition-by-Christians. Everyone should know.

From: Chelvapia < >

01. It is estimated that by the end of the 17th century, the Portuguese carried out ethnic cleansing of Hindus and Muslims who constituted less than 20,000 out of the total Goan population of 2,50,000. Among the severely punished was 4,046, out of whom 3,034 were men and 1,012 were women.02. Indigenous or native people were forced to accept Portuguese religious beliefs, abandoning their faith.03. The new Christian Missionaries from Portugal mandated that all Hindu temples be closed by 1541. 04. By 1559 Portuguese missionaries ordered the destruction of Hindu temples in that region.5.. In 1567, in Bardez 300 Hindu temples were destroyed. 6…From 1567 .Hindu rituals, including marriages and cremations, were banned .7…Everyone above 15 years of age was forced to listen to Christian preaching, 8. Fr. Francis Xavier, turned worse for Hindus, Muslims and for Jews With the introduction of Goa Inquisition. Goa Inquisition was almost on par with Inquisition in Spain -1478 in terms of gory treatment and violence.9…Even the indian Christians went through hell of inquisition and mental agony cause by christian preaching. Note: christianity of india was even older then the christianity of whole europe or roman catholic.10. Introduced in 1560, all non-Christians went through hell and mental agony caused by Portuguese preachers in their mother land.11. Xavier commented “The Hindus are an unholy race. They are liars and cheats to the very backbone. Their idols are black—as black as black can be— ugly and horrible to look at , smeared with oil and smell in a evil manner…”12. It is a paradox that Francis Xavier, the devil in the guise of a priest, who forced the King of Portugal to legally introduce the Inquisition in Goa and ordering the torture of tens of thousands of Hindus and Jews, using various innovative methods, was canonized by Pope Gregory XV in 1622.13. Numerous Jewish families came to India to lead a peaceful life. Earlier they faced Inquisition in Spain and later in Portugal. They never thought the same fate would drive them to the wall here in India.
Credit- Navrang-India

Dissolve Maharashtra Government Under Rule Article 356 of Constitution

From:B K Chaudhari < >

Dear President,
A political figure that also of the stature of CM of an important
State of Bharat is intolerant and too narrow minded that he is offended
by a CARTOON!  His goons do not hesitate to openly thrash a Great warrior
in the open.  He is so stubborn and NAPUSANK that he cannot leash his
GOONS and makes no Statements/Comments at all. He is so Shameless!
He ought to know that his father was also a known Cartoonist of his time
and established himself as a CRUEL STARIST and entered into Politics.
I agree with you that Bala Sahib Thackray is being portrayed now against
his actual deeds.  He was a very narrow minded person always mired into
dirty PROVINCIALISM. It was him, who made the slogan very infamous,
MUMBAI HAMCHI.  It was him who set the precedent of vendetta against
the South Indians and threatened  and carried out violence at the slightest cause.
Beating, extorting, humiliating even shaving persons in the open.
The legacy continued with impunity by his illustrious tribesmen.  They even
beat up the EXAMINEE CANDIDATES, when they were deep asleep at the
Railway Stations.  The list continues.
While doing so they forgot the Great Contribution of Maharashtra in the struggle
for Independence and the other Sacrifices which the Great Marathas have made.
The excellent Leaders like Economists CD Deshmukh, Social and Political Assets
like Bal Gangadharji and many others mean nothing to these Goons.  Savarkarji
will be crying in heaven at this type of predicament.  And what about the BHARAT GAURAV
CHATTRAPATTI SHIVAJI MAHARAJ, who had principles, even for the enemies!
Yesterday in an ugly write up of their mouthpiece SAaMNA it has been openly claimed
that MAHARASHTRA MEIN HI DESH HAI, whereas a sensible DESH BAKHT will say that DESH MEIN HI
MAHARASHTRA HAI.  How separatists and narrow regionalism has plagued their mindset?
Finally, in a discussion in DANGAL of AAJ TAK, their representative Kishore Tiwari did not leave
any room to reaffirm the disgusting credentials of SHAV Sena (Shaitan Seva).  He was treating the
occasion as if he was in a MACHHLI BAZAR!
With regards
BK Chaudhari