Info About Indian Muslim Population

Source: quora.com/Is-the-majority-of-Muslim-population-in-India-Shia-or-Sunni

By Prithvi Singh

Most Muslims in India are Sunnis. The Shias comprise of about 10–15% of total Muslim population in India.

The Sunni being biggest Islamic sect is not a single sect but is divided into different sub-sects.

Indian Sunnis are divided into two major branches.

  1. Barelwi (those inclined towards Sufism)
  2. Deobandi (fundamentalists)

Barelwis are also divided into many sub-groups, some are cult like groups, adhering to peeri-muridi system and blindly following their peers who sometimes exploits them.

Deobandis are also divided into sub-groups. There are Ahle-Hadis who are similar to Deobandis in beliefs but differ in practice.

The Barelwis and Deobandis are all divided into at least four sub-sects when it comes to following Islam. There are Hanfi, Shafa’i, Maliki and Hanbali Sunni Muslims. While Ahle-Hadis Muslims don’t follow any of these four sects and only follow Quran and Hadis.

There are at least three sects among Sunni Muslims when it comes to believing in God, his actions and attributes. These three sects are Asharis, Mutazilis and Maturidis.

Most of the Sunnis are ignorant about their faith and less practicing. Most Shias are knowledgeable and practicing. Sunnis persecute Shias for their beliefs and practices.

Most Muslims in India are Sunnis. The Shias comprise of about 10–15% of total Muslim population in India.

The Sunni being biggest Islamic sect is not a single sect but is divided into different sub-sects.

Indian Sunnis are divided into two major branches.

  1. Barelwi (those inclined towards Sufism)
  2. Deobandi (fundamentalists)

Barelwis are also divided into many sub-groups, some are cult like groups, adhering to peeri-muridi system and blindly following their peers who sometimes exploits them.

Deobandis are also divided into sub-groups. There are Ahle-Hadis who are similar to Deobandis in beliefs but differ in practice.

The Barelwis and Deobandis are all divided into at least four sub-sects when it comes to following Islam. There are Hanfi, Shafa’i, Maliki and Hanbali Sunni Muslims. While Ahle-Hadis Muslims don’t follow any of these four sects and only follow Quran and Hadis.

There are at least three sects among Sunni Muslims when it comes to believing in God, his actions and attributes. These three sects are Asharis, Mutazilis and Maturidis.

Most of the Sunnis are ignorant about their faith and less practicing. Most Shias are knowledgeable and practicing. Sunnis persecute Shias for their beliefs and practices.

Most Muslims in India are Sunnis. The Shias comprise of about 10–15% of total Muslim population in India.

The Sunni being biggest Islamic sect is not a single sect but is divided into different sub-sects.

Indian Sunnis are divided into two major branches.

  1. Barelwi (those inclined towards Sufism)
  2. Deobandi (fundamentalists)

Barelwis are also divided into many sub-groups, some are cult like groups, adhering to peeri-muridi system and blindly following their peers who sometimes exploits them.

Deobandis are also divided into sub-groups. There are Ahle-Hadis who are similar to Deobandis in beliefs but differ in practice.

The Barelwis and Deobandis are all divided into at least four sub-sects when it comes to following Islam. There are Hanfi, Shafa’i, Maliki and Hanbali Sunni Muslims. While Ahle-Hadis Muslims don’t follow any of these four sects and only follow Quran and Hadis.

There are at least three sects among Sunni Muslims when it comes to believing in God, his actions and attributes. These three sects are Asharis, Mutazilis and Maturidis.

Most of the Sunnis are ignorant about their faith and less practicing. Most Shias are knowledgeable and practicing. Sunnis persecute Shias for their beliefs and practices.

*२८ मई : वीर सावरकर जन्म तिथि*

From: Mahabaleshwar DEshpande < >

*२८ मई वीर सावरकर जन्म तिथि*
ये 25 बातें पढ़कर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो उठेगा,
इसको पढ़े बिना आजादी का ज्ञान अधूरा है!
आइए जानते है एक ऐसे महान क्रांतिकारी के बारें में जिनका नाम इतिहास के पन्नों से मिटा दिया गया। जिन्होंने
ब्रिटिश हुकूमत के द्वारा इतनी यातनाएं झेली की उसके बारें में कल्पना करके ही इस देश के करोड़ो भारत माँ के कायर पुत्रों में सिहरन पैदा हो जायेगी।
जिनका नाम लेने मात्र से आज भी हमारे देश के राजनेता
भयभीत होते हैं क्योंकि उन्होंर माँ भारती की निस्वार्थ सेवा की थी। वो थे हमारे परम पूज्य वीर सावरकर।
1. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे जिन्होंने_
1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें?
क्या किसी भारतीय महापुरुष के निधन पर ब्रिटेन में शोक सभा हुई है.?
2. वीर सावरकर पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को
त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि गुलामी का उत्सव मत मनाओ !
3. विदेशी वस्त्रों की पहली होली पूना में 7 अक्तूबर 1905 को वीर सावरकर ने जलाई थी…।
4. वीर सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी
वस्त्रों का दहन किया, तब बाल गंगाधर तिलक ने अपने पत्र केसरी में उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी जबकि इस घटना की दक्षिण अफ्रीका के अपने पत्र ‘इन्डियन ओपीनियन’ में गाँधी ने निंदा की थी…।
5. सावरकर द्वारा विदेशी वस्त्र दहन की इस प्रथम घटना के 16 वर्ष बाद गाँधी उनके मार्ग पर चले और 11 जुलाई 1921 को मुंबई के परेल में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया…।
6. सावरकर पहले भारतीय थे जिनको 1905 में विदेशी वस्त्र दहन के कारण पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया और दस रूपये जुरमाना किया… इसके विरोध में हड़ताल हुई… स्वयं तिलक जी ने ‘केसरी’ पत्र में सावरकर के पक्ष में सम्पादकीय लिखा…।
7. वीर सावरकर ऐसे पहले बैरिस्टर थे जिन्होंने 1909 में ब्रिटेन में ग्रेज-इन परीक्षा पास करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफादार होने की शपथ नही ली… इस कारण उन्हें बैरिस्टर होने की उपाधि का पत्र कभी नही दिया गया…।
8. वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे जिन्होंने अंग्रेजों द्वारा ग़दर कहे जाने वाले संघर्ष को ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ नामक ग्रन्थ लिखकर सिद्ध कर दिया…।
9. सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी लेखक थे जिनके लिखे ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक पर ब्रिटिश संसद ने प्रकाशित होने से पहले प्रतिबन्ध लगाया था…।
10. ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ विदेशों में छापा गया और भारत में भगत सिंह ने इसे छपवाया था जिसकी एक एक प्रति तीन-तीन सौ रूपये में बिकी थी… भारतीय क्रांतिकारियों के लिए यह पवित्र गीता थी… पुलिस छापों में देशभक्तों के घरों में यही पुस्तक मिलती थी…।
11. वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई 1910 को समुद्र में कूद पड़े थे और तैरकर फ्रांस पहुँच गए थे…।
12. सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जिनका मुकद्दमा
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में चला, मगर ब्रिटेन और फ्रांस की मिलीभगत के कारण उनको न्याय नही मिला और बंदी बनाकर भारत लाया गया…।
13. वीर सावरकर विश्व के पहले क्रांतिकारी और भारत के पहले राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सरकार ने दो आजन्म कारावास की सजा सुनाई थी…।
14. सावरकर पहले ऐसे देशभक्त थे जो दो जन्म कारावास की सजा सुनते ही हंसकर बोले-“चलो, ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान लिया.”…..।
15. वीर सावरकर पहले राजनैतिक बंदी थे जिन्होंने काला
पानी की सजा के समय 10 साल से भी अधिक समय तक आजादी के लिए कोल्हू चलाकर 30 पोंड तेल प्रतिदिन निकाला…।
16. वीर सावरकर काला पानी में पहले ऐसे कैदी थे जिन्होंने काल कोठरी की दीवारों पर कंकर कोयले से कवितायें लिखी और 6000 पंक्तियाँ याद रखी..।
17. वीर सावरकर पहले देशभक्त लेखक थे, जिनकी लिखी हुई पुस्तकों पर आजादी के बाद कई वर्षों तक प्रतिबन्ध लगा रहा…।
18. वीर सावरकर पहले विद्वान लेखक थे जिन्होंने हिन्दू को परिभाषित करते हुए लिखा कि
‘आसिन्धु सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारत भूमिका,
पितृभू: पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरितीस्मृतः.’
अर्थात समुद्र से हिमालय तक भारत भूमि जिसकी पितृभू है, जिसके पूर्वज यहीं पैदा हुए हैं व यही पुण्य भू है, जिसके तीर्थ भारत भूमि में ही हैं, वही हिन्दू है..।
19. वीर सावरकर प्रथम राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सत्ता ने 30 वर्षों तक जेलों में रखा तथा आजादी के बाद 1948 में नेहरु सरकार ने गाँधी हत्या की आड़ में लाल किले में बंद रखा पर न्यायालय द्वारा आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा कर दिया… देशी-विदेशी दोनों सरकारों को उनके राष्ट्रवादी विचारों से डर लगता था…।
20. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी थे जब उनका 26 फरवरी 1966 को उनका स्वर्गारोहण हुआ तब भारतीय संसद में कुछ सांसदों ने शोक प्रस्ताव रखा तो यह कहकर रोक दिया गया कि वे संसद सदस्य नही थे जबकि चर्चिल की मौत पर शोक मनाया गया था…।
21. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त स्वातंत्र्य वीर
थे जिनके मरणोपरांत 26 फरवरी 2003 को उसी संसद में मूर्ति लगी जिसमे कभी उनके निधन पर शोक प्रस्ताव भी रोका गया था…।
22. वीर सावरकर ऐसे पहले राष्ट्रवादी विचारक थे जिनके
चित्र को संसद भवन में लगाने से रोकने के लिए कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा लेकिन
राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने सुझाव पत्र नकार दिया और वीर सावरकर के चित्र अनावरण राष्ट्रपति ने अपने कर-कमलों से किया…।
23. वीर सावरकर पहले ऐसे राष्ट्रभक्त हुए जिनके शिलालेख को अंडमान द्वीप की सेल्युलर जेल के कीर्ति स्तम्भ से UPA सरकार के मंत्री मणिशंकर अय्यर ने हटवा दिया था और उसकी जगह गांधी का शिलालेख लगवा दिया..।
24. वीर सावरकर ने दस साल आजादी के लिए काला पानी में कोल्हू चलाया था जबकि गाँधी ने काला पानी की उस जेल में कभी दस मिनट चरखा नही चलाया..?
25. वीर सावरकर माँ भारती के पहले सपूत थे जिन्हें जीते जी और मरने के बाद भी आगे बढ़ने से रोका गया… पर आश्चर्य की बात यह है कि इन सभी विरोधियों के घोर अँधेरे को चीरकर आज वीर सावरकर सभी मे लोकप्रिय और युवाओं के आदर्श बन रहे है।।

वन्दे मातरम्।

राजा विक्रमादित्य जिसने भारत को बनाया था ‘सोने की चिड़िया’

From: Pramod Agrawal < >

वो ‘राजा’ जिसे भूल गया हमारा इतिहास, भारत को बनाया था ‘सोने की चिड़िया’ ।

हिंदुस्तान के इतिहास में ऐसा बहुत कुछ छूट गया, जिसे लोग कभी नहीं जान पाएंगे। क्योंकि इनके सम्मान में बहुत कम जगहों पर ही वर्णन किया गया है। आप कह सकते हैं कि ये हमारे लिए शर्म की बात है कि जिसने देश को सोने की चिड़िया बनाया, आज उसके बारे में हम कुछ नहीं जानते।

हम बात कर रहे हैं महाराज विक्रमादित्य के बारे में, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को ज्ञान है। इन्हीं के शासनकाल में भारत को सोने की चिड़िया बना था। इस काल को देश का स्वर्णिम काल भी माना जाता है।

महाराज विक्रमादित्य कौन?
उज्जैन के राजा गन्धर्व सैन थे। इनकी तीन संताने थी, सबसे बड़ी संतान एक लड़की थी मैनावती, दूसरी संतान लड़का भृतहरि और सबसे छोटी संतान वीर विक्रमादित्य। बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पद्म सैन के साथ कर दी गई। जिनका एक लड़का हुआ गोपीचन्द। आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए। फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली।

आज हिंदुस्तान की संस्कृति और नाम केवल विक्रमादित्य के कारण अस्तित्व में है। अशोक मौर्य ने बौद्ध धर्म अपना लिया। बौद्ध बनकर 25 साल राज करने के बाद भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था।

विक्रमादित्य को क्यों याद रखना जरूरी?
शायद ही आपको पता हो कि रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे। महाराज विक्रमादित्य ने ही इनकी पुनः खोज करवा कर स्थापित किया। भगवान विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाए। सनातन धर्म की रक्षा की।

विक्रमादित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् को लिखा। जिसमें भारत का इतिहास है। अन्यथा भारत का इतिहास तो दूर की बात हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके होते।

हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे। उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि ने राज छोड़कर श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए। राज अपने छोटे भाई विक्रमदित्य को दे दिया। वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्ही के कारण सनातन धर्म की रक्षा हुई, हमारी संस्कृति सुरक्षित हुई।

विक्रमादित्य के शासन काल को भारत का स्वर्णिम युग कहा जाता है। विक्रमादित्य के काल में भारत का कपड़ा, विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे। भारत में इतना सोना आ गया था कि विक्रमादित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे।

हिन्दू कैलंडर की स्थापना भी विक्रमादित्य की देन
हिंदू धर्म में आज जो ज्योतिष गणना होती है हिन्दी सम्वंत, वार, तिथियां, राशि, नक्षत्र, गोचर आदि भी उन्ही की रचना है। वे बहुत ही पराक्रमी, बलशाली और बुद्धिमान राजा थे।

ऐसा कहा जाता है कि कई बार देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे। विक्रमादित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे। न्याय, राज सब धर्मशास्त्र के नियमों पर चलता था। विक्रमादित्य का काल राम राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इनके शासन काल में प्रजा धर्म और न्याय पर चलने वाली रही।

नोट: इतना सबकुछ होने के बाद भी आज हम भारत के सबसे महानतम राजा के बारे में कुछ भी नहीं जानते। आप इस लेख को शेयर करें ताकि राष्ट्र को उसको गौरव देने वाले के बारे में ज्ञान प्राप्त हो। वो जान सकें कि भारत को सोने की चिड़िया बनाने वाला देश का महान राजा कौन था.

 

Jihad By Muslim Doctor(s) – Be Warned

From: Amit Bhadhuri < >

http://www.hirunews.lk/217188/the-sudden-decision-made-by-the-ministry-of-health-in-connection-with-dr-safi-of-the-kurunegala-hospital-whom-everybody-is-talking-about-for-having-sterilized-4000-mothers

(Hindus,)
Mithron,
This Sri Lankan doctor Dr Siya Muhammad Sufi removed the wombs of 8,000 Hindu and Christian women without their knowledge.  This is another kind Jihad.  In the UK, those of you non-Musulmans under Musalman GP’s/doctors, just think what should do.
Don’t regret later that, I did not warn you.
Jai Shree Krishna,
Amit