Source: https://www.youtube.com/watch?v=yHapZF-xH_I
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👇🔥 पहले मैं मानता था कि ‘मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर करना पर कुरआन पढने के बाद मेरे विचार सर के बल पलटा गये और इसका कारण कुरआन की ये सूरा : आयतें हैं पढ लीजिये नफरत फैलाती और खून बहाने वाली कुरआन की ये सूरा : आयतें —
2:98 – अल्लाह गैर मुस्लिमों का शत्रु है
3:85 – इस्लाम के अलावा कोई अन्य धर्म स्वीकार नहीं है ।
8:12 – इस्लाम को इंकार करने वालों के दिलों में अल्लाह खौफ भर देगा और मुसलमानों तुम उनकी गर्दन पर वार करके उनका अंग-अग काट दो ।
3:118केवल मुसलमानों को ही अपना अंतरंग मित्र बनाओ ।
9:23 – गैर मुस्लिमों को दोस्त न बनाओ
8:39 – गैर मुस्लिमों से तब तक युद्ध को जब तक की अल्लाह का दीन पूरी तरह कायम न हो जाए ।
22:30मूर्तियां गन्दगी हैं। ।
9:5 – मूर्तिपूजकों को जहां और जैसे पाओ वहां घात लगा कर मार दो । 33:61- मुनाफिक और मूर्तपूजक जहां भी पकडे जाएंगे बुरी तरह कत्ल किये जाएंगे ।
3:62 ,2:255, 27:61 और 35:3 अल्लाह के अलावा कोई अन्य प्रभू पूज्य नहीं है।
21:98 – अल्लाह के सिवाय किसी और को पूजने वाले जहन्नुम का ईधन हैं।
9:28 मूर्तपूजक नापाक हैं।
4:101 – काफिर तुम्हारे खुले दुश्मन हैं ।
9:123 – काफिरों पर जल्म करो । 66:9 – काफिरों और मुनाफिकों से जिहाद (जंग ) करो । 4:56 – आयतों को इंकार करने वाले की खाल पकाएंगे 8:69 – लूट का सब माल (मतलब महिलाओं सहित) हलाल है ।
9:14 – अल्लाह मोमिनों के हाथों काफिरों को यातना देगा ।
8:57 युद्धबंदियों पर नृशंसता करो
32:22 – इस्लाम छोडने वालों से बदला लो ।
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