एस. सेनाका कोंगीकरण और कट्टरतावादी मुस्लिमीकरण?

From: Shirish Dave < >

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एस. सेनाका कोंगीकरण और कट्टरतावादी मुस्लिमीकरण?

एस. सेनाका कोंगीकरण और कट्टरतावादी मुस्लिमीकरण?

 

हाँ जी, एस.सेना का अर्थ है ए.एसएस. सेना (ASS SENA) या सुएज़ सेना (गटर सेना) या सोनिया सेना. हाँ जी, यह सेना कभी शिवसेना नहीं हो सकती. जिस सेनाका सेना पति एक महिलाके उपर पूर्वग्रह ही नहीं लेकिन अहंकारकी भावनासे उन्मत्त हो जाय तो वह कभी शिवाजीकी सेनाका सैनिक हो ही नहीं सकता. अहंकार उसका ही हो सकता है जिसने कुछ अच्छा काम किया हो या योगदान दिया हो.

शिवाजी कैसे थे?

शिवाजी एक महाराजा थे. उन्होंने हिन्दुराष्ट्रका स्वप्न देखा था. उनका मंत्रीमंडळ हमारे देशके प्राचीन राज्यव्यवस्थाके अनुसार सुग्रथित था. शिवाजीने उर्दुके स्थान पर संस्कृतको रक्खा था.  शिवाजी महाराज भारतीय संस्कृतिके अनुसार स्त्री दाक्षिण्यता वाले संस्कारवाले थे. चाहे वह स्त्री दुश्मनकी ही क्यों न हो.

शिवाजीके एक सुबेदारने जब एक हारे हुए और भागे हुए दुश्मनकी स्त्री को शिवाजीके समक्ष प्रस्तुत की शिवाजीने उस सुबेदारको डांटा और उस स्त्रीकी क्षमा याचनाकी. उसने यह भी कहा कि यदि मेरी माँ तुम जैसी सौंदर्यवान होती तो मै भी एक सौंदर्यवान पुरुष होता.

ऐसे थे शिवाजी महाराज.

आज तो संजय राउत और उद्धव ठाकरे जैसा ऐरा गैरा शिवाजीका नाम लेता है.

“अरे, यदि तूने मेरे सामने उंगली उठाई तो मैं तुम्हारी उंग्ली तोड दूंगा,

“अरे यदि तूने मेरे सामने आंख उठाई तो मैं तेरी आंख फोड दूंगा,

“तू आ के तो देख, (मेरी गलीमें या मेरी मुंबईमें या मेरे महाराष्ट्रमें) मैं तेरी कमर तोड दूंगा, (बल्हैयाँ मरोड दूंगा),

“मैं कौन हूँ तुज़े मालुम है? मैं शिवाजी महाराजके महाराष्ट्रका फरजंद हूँ …  तूने मेरी सरकारका अपमान किया … ? तू ने मेरे पूलिसतंत्रका अपमान किया … ? यह सब  हमारे शिवाजी महाराजका ही अपमान हुआ … शिवाजी महाराजके महाराष्ट्रका अपमान हुआ. अब मैं तुम्हे नहीं छोडुंगा.

ऐसी भाषा न तो कोई सुशिक्षित पुरुषकी हो सकती है, न तो ऐसी भाषा शिवाजी महाराजके सैनिककी हो सकती है.

हाँ जी, यह भाषा सडक छाप गुन्डेकी अवश्य हो सकती है. उद्धव ठकरे और संजय निरुपम दोनोंने यह सिद्ध कर दिया कि उनकी कक्षा सडकछाप गुन्डेकी है.

निम्नकक्षाके व्यक्तिको यदि आप कितना ही उच्चस्थान पर बैठा दो वह अपना संस्कार नहीं छोड सकता.

संस्कृतमें एक श्लोक है

श्वा यदि क्रियते राजा, अपि नात्ति उपानहम्‌

कुत्तेको यदि राजा कर दो तो क्या वह जूता नहीं खायेगा?

अर्थात्  जूते खाजाना कुत्तेकी तो प्रकृति है, कुत्तेको राजा बना दो तो भी वह जूता खाना छोडेगा नहीं.

एस.सेना के उद्धव और संजयका यही हाल है. पूर्व प्रकाशित ब्लोगमें हमने देखा ही है कि एस.सेनाके लोग कैसे हप्ता वसुली करते है.

दाउद भी वैसे तो सडकका गुन्डा ही था.

 

ऐसी हवा है कि एस.सेनाके फरजंद या और नेता ड्रगके मामलेमें फंसे है. इसलिये ये एस.सेनाके नेता बोखला गये है. उनका असामाजिक आचरणकी मानसिकता उजागर हो के जनताके सामने आ गयी है.

हो सकता है कि शरदने इन नेताओंको आगे किया हो. जी हाँ. शरद यह सब कर सकता है.

ड्रग्ज़के कारोबारका नेट वर्क

ड्रग्ज़के कारोबारका नेट वर्क अति विस्तृत है. यह पाकिस्तानसे भी होता है.

आतंकवादी संगठनोंको जिवित और सक्रिय रहेनेके लिये पैसे तो चाहिये ही.

 

ओवर ईन्वोईन्सींगके व्यापरसे जो धन प्राप्त होता है, हवालासे इन संगठनोंको पैसे मिलते है. किन्तु आतंकवादी संगठनोंको तो जितने पैसे मिले वे कम ही है. मालेतुजार लोगोंके फरजंदोंकी आदतें बिगाडके उनको ड्रग्ज़सेवनके आदी  कर देतें है. ड्रग्ज़का कारोबार केवल ब्लॅक मनीसे ही हो सकता है. काले धनका उद्भवस्थान, अचलसंपत्तिकी खरीद-बीक्रीमें, होता है, ड्र्ग्ज़के व्यापारमें होता है. ड्रग्ज़को वहीं खरीद सकता है जिसके पास काला धन है. कालाधनके संचयमें, कोंगी और उसके सांस्कृतिक साथी जिनमें उनके सहायक मीडीयाकर्मी , पूलिसके बडे अफसर, सरकारके बडे अफसर, फिलमी दुनियाके महानुभाव होते है. इनका एक नेटवर्क होता है.

 

एस.सेनाका गठबंधन प्रत्यक्ष रुपसे इस शठविद्यामें प्रवीण लुट्येन गेंगसे हुआ तो उनको भी अपनी चारित्र्यिक योग्यता सिद्ध करनी पडेगी ही न?

नया मुसलमानः

आम मुसलमान दिनमें पांच बार नमाज़ पढता है. जब एक व्यक्ति नया नया मुसलमान बनता है तब वह सात बार नमाज़ पढता है.

अब यह एस.सेना भी कोंगीयोंकी सांस्कृत्क गेंगमें आ गयी तो उसको अपनी योग्यता तो सिद्ध करना ही पडेगा.

सर्व प्रथम तो पालघरमें हिन्दु संतोंका पूलिस और एन.सी.पी. के नेताकी उपस्थितिमें ही तथा कथित मोबलींचींग द्वारा हत्या करवाना.  और इसमें जिन्होंने जांचके उपर प्रश्न उठाये उनको स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा धमकी देना. इस प्रकार एस.सेनाने कोंगी गेंगके सदस्य बननेकी अपनी क्षमता सिद्ध कर दी. अर्णव गोस्वामीके उपर एफ.आई.आर. लगाके पूलीस स्टेशनमें १२ घंटा रक्खा क्यों कि उसने कोंगीके प्रमुखको उसके पैतृक नामसे संबोधन किया.

अर्णव गोस्वामीको मारडालने लिये गुन्डे भेजे गये और अर्णव गोस्वामीने उनके उपर केस दर्ज किया. तो गुन्डोंको जमानत मिल गयी. लेकिन जो मीडीया कर्मी उद्धवके फार्म हाउस पर गये और उसने वॉचमेनको पूछा कि यह फार्म हाउस किसका है तो इन मीडीयाकर्मीयोंको गिरफ्तार करवा दिया और इनको जमानत नहीं मिली.

 

तो आप समज़ गये कि यह सब कैसे होता है

 

इस एस. सेनाने अपनी योग्यता सिद्ध करनेके लिये फर्जी धर्म-निरपेक्षता, जूठ बोलनेका नैपूण्यम्‌, आतंकवादका समर्थन, असामाजिक तत्त्वोंके महानुभावोंसे मेलमिलाप, और उनको केवल समर्थन ही नहीं लेकिन सहायताके लिये तत्परता, और फिल्मी कलाकारोंसे मिलना जुलना, पार्टीयां करना … ये सब तो करना पडेगा ही न.

 

एस.सेनाको ऐसा करनेमें कोई कष्ट नहीं है. क्यों कि वे तो ऐसा करनेके लिये कई वर्षोंसे आतुर थे. हप्ताबाजी तो उनके संस्कारमें था. किन्तु ये सब छोटे पैमाने पर था. अब जब कोंगी-सेनामें मिल गये है तो अब कुछ बडा करना आवश्यक है.

 

देशप्रेमी होना, नीतिमान होना, आमजनता लक्षी होना, सहिष्णु होना, शांतिप्रेमी होना … ये सब बकवास है. ये सब तो फरेबीसे भी सिद्ध कर सकते है.

 

एस.सेनाने सोचा;

“यह साला बीजेपीके साथमें, खुले आम कुछ भी नहीं हो सकता है, ये लुट्येन गेंग हमारे पीछे ही पड जाती है. यदि हम कोंगी गेंगमें मिल जावे तो अच्छा होगा. कोंगी गेंगमें हम सुरक्षित है, और चाहे वह का सकते है. सिर्फ हमें यह अहेसास दिलाना होता है कि वे हमें जो कुछ भी कहें, उन सबको करनेके लिये हम सक्षम है.

 

“कोंगीयोंके पास क्या नहीं है? टूकडे टूकडे गेंग है, अर्बन नक्षल है, समान रुपवाले सांस्कृतिक पक्षके महानुभावमंडल है. हमें और क्या चाहिये? यदि मर जायेंगे तो ये ईशा मसिहा हमारा सब पाप अपने सर पर लेनेको तयार ही है. नहिं तो हमारे मुस्लिम साथीयोंकी कृपासे, हम मुस्लिम बन जायेंगे.  इन मुस्लिमोंकी कृपासे जन्नतमें सोलह सोलह हुरें मिलेगी. और मरनेसे पहेले तो इस मृत्युलोकमें, जी ते जी, हुरें ही हुरें है. चाहे तो फार्म हाउसमें में समुह मज़ा कर लो या चाहे तो सप्ततारक होटेलमें अकेले उनके साथ मजा कर लो. कौन रोकने वाला है! यदि कोई मीडीयावाला आया तो, आनेवाले को जेल ही भेज देंगे और उसकी चेनलको ताला लगा देंगे. यदि कोई न्यायाधीशने चापलुसी की तो …? शीट! यह कोई बात है!!

“अरे भाई देखा नहीं कि सर्वोच्च अदालतके एक निवृत्त न्यायाधीशने क्या कहा था? यदि निष्पक्ष न्याय दिलाना है तो लुट्येन गेंगको खतम करना पडेगा.

 

“इस गेंगको खतम करनेवाला अभी तक अवतरित नहीं हुआ है.

एस. सेना आगे बोली “हमें पहेले अक्ल क्यूँ नहीं आयी?…”

 

शिरीष मोहनलाल दवे

Watch the video to know about the Congi – Daud – NCP – Bollywood – ISI

 

https://youtu.be/cU8NXTeo6GY

 

Resist Move to Further Raise Marriageable Age for Girls

From: Madhu Kishwar < >

On the occasion of Independence Day this year PM Narendra Modi announced that a task force had been set up to raise the “age of marriage” for girls.
In this article Sankrant Sanu challenges this move by offering cogent reasons why the move is ill-advised.

Ill- Advised Move to Further Raise Marriageable Age of Girls