मुस्लिम लडकियाँ कृपा करके ध्यान से पढे

From: Pramod Agrawal < >

मुस्लिम लडकियाँ कृपा करके ध्यान से पढे और अपने सुरक्षित भविष्य पर गौर करें …………

—: फायदा ही फायदा :—

—:: फैसला एक फायदे अनेक ::—

 

अगर कोई मुस्लिम कन्या हिंदू लङके से शादी करेगी तो ……….

उसे निम्न लिखित फायदे बिना मांगे ही मिल जायेंगे…………

  1. 👉 तलाक का डर नहीं…………….

(क्योंकी हम हिन्दूओ में शादी को 7 जन्मों का पवित्र बंधन माना जाता है)

  1. 👉 सूअरों की तरह 20-25 बच्चे पैदा करने से आजादी ………
  2. 👉 बुरके से आजादी ………..
  3. 👉 घर में पूर्ण सुरक्षा ( अपने भाई, चाचाओं और मौसाओं से )

 

  1. 👉 बच्चे भी हमेशा प्राक्रतिक रहेंगे , मतलब कहीं से कोई काट छाँट नहीं होगी …………
  2. 👉 बच्चियों की भी घर में पूर्ण सुरक्षा ( मुहम्मद साहब और फातीमा का प्रकरण तो आप लोगों को याद ही होगा, जबकी दोनों सगे बाप-बेटी थे)
  3. 👉 बच्चे आतंकवादी नहीं बनेंगे……..
  4. 👉 और सबसे बड़ी बात की…..

आप बैठे बिठाये दुनिया के सबसे पवित्र और गौरवशाली हिन्दू सनातन धर्म का हिस्सा बन जाओगी …….!

 

अपने भाई , चाचाओं और मौसाओं को खो बार-बार ……..

हिन्दू लङको को भी देखो एक बार .

 

अगर आप सच्चे हिन्दू हैं तो इस मेसेज को रूकने न दें और ज्यादा से ज्यादा फारवर्ड करें …..

 

33 करोड़ नहीं , 33 कोटी देवी-देवता हैँ हिंदू धर्म में हैं ।

From: Pramod Agrawal < >

33 करोड़ नहीं , 33 कोटी देवी-देवता हैँ हिंदू धर्म में हैं ।

अधूरा ज्ञान खतरना होता है।

 

कोटि = प्रकार ।

देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते हैं ।

कोटि का मतलब प्रकार होता है, और एक अर्थ करोड़ भी होता ।

 

कुल 33 प्रकार के देवता हैं –◾12 आदित्य है – धाता, मित्, अर्यमा, शक्र, वरुण, अंश, भग, विवस्वान, पूषा, सविता, त्वष्टा,एवं विष्णु

◾8 वसु हैं – धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष, तथा प्रभाष

◾11 रूद्र हैं – हर , बहुरूप, त्र्यम्बक, अपराजिता, वृषाकपि, शम्भू, कपर्दी, रेवत,

म्रग्व्यध, शर्व, तथा कपाली .

◾2 अश्विनी कुमार हैं .

कुल – 12 +8 +11 +2 =33

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योगी आदित्यनाथ का कमाल !

योगी आदित्यनाथ का कमाल !

 

From: Pramod Agrawal < >

मुस्लिमो ने बंद करवाया हुआ था मंदिर, CM योगी ने 20 जिलों से भेजी पुलिस, खुला मंदिर .

 

दैनिक भारत और सुदर्शन न्यूज़ के अलावा किसी भी अन्य मीडिया ने इस खबर को लोगों के सामने नहीं रखा यूपी के संभल में जिहादियों ने बीते दिनों दंगा किया था और पूर्व सांसद और स्थानीय मुस्लिम नेता शफीकुर रहमान बर्क ने हिन्दुओ के कत्लेआम की धमकी दी थी और संभल को कश्मीर बना देने की बात कही थी .

पर इस बार यूपी में योगी जी की सरकार है, और 18 जिहादियों को अबतक पुलिस ने गिरफ्तार किया है . घर खुलवा खुलवा कर योगी जी की पुलिस ने जिहादियों को गिरफ्तार किया है, 450 से अधिक जिहादी संभल छोड़कर फरार है, योगी जी ने सभी के गिरफ़्तारी के आदेश दिए है .

सुरेश चव्हाणके ने इसके बाद बताया “मैं 12 साल से लगातार जिहादियों की करतूत बताता आया हूँ, बसपा भी चली गयी, केंद्र में कांग्रेस रही, सपा भी यूपी में रही, पर कभी जिहादियों पर कारवाही नहीं की गयी . पर मैंने संभल में जिहादियों की करतूत दिखाई और योगी जी ने रात को 3 बजे, रातों रात 20 जिलों से पुलिस संभल में भेजी, और 18 जिहादियों को गिरफ्तार किया गया, और 450 से अधिक जिहादी फरार है .”

सुरेश चव्हाणके ने बताया की, संभल पहुंची पुलिस ने वहां स्थानीय शिव मंदिर 35 साल बाद खुलवाया, 1 पुलिस वाले ने उस मंदिर में शिवलिंग के दर्शन किये और 35 साल बाद उसपर जल चढ़ाया गया . पुलिस वाले ने ही सुरेश चव्हाणके को बताया “मुझे उम्मीद नहीं थी पर योगी सरकार के बाद ये मुमकिन हो सका.”

सुरेश चव्हाणके ने कहा की, योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के रूप में नहीं बल्कि ईश्वर के दूत के रूप में पहुंचे है , और अब लग रहा है की हिन्दुओ का शोषण बंद होगा, और उत्तर प्रदेश बच सकेगा .

संभल मुद्दे पर आप सुदर्शन न्यूज़ का ये कार्यक्रम भी देख सकते है, जो किसी मीडिया ने दिखाने की हिम्मत नहीं की है .

 

मुस्लिम केअपनी पत्नियों पर किए ज़ुल्म

From: Pramod Agrawal < > wrote:

इन मुस्लिम केअपनी पत्नियों पर किए ज़ुल्म का कालाचिट्ठा पढ़कर आपके होश उड़ जाएँगे !!

शादी के बाद तीन अक्षरों का शब्द तलाक महिला की ज़िन्दगी को तबाह कर देता है. मुस्लिम समाज में यह अक्सर देखने को मिलता है. शादी जैसे पवित्र रिश्ते को एक कठपुतली का खेल समझा जाता है. मुस्लिम समाज में पहले बेगम बनाया जाता है. फिर उन्हें पैर की घिसी हुई जूती की तरह घर से बहार फैंक दिया जाता है. इस बर्ताव से बड़े हैं. इस बात की हकीकत नीचे दी बातों से समझ आ जानी चाहिए.

उमर अब्दुल्ला ने पहले पायल नाथ को बेगम बनाया. फिर बच्चे पैदा किये और बाद में अपनी मर्जी से तलाक दे कर उसे गुमनाम राह पर छोड़ दिया. इमरान ने भी शीला दीक्षित की बेटी लतिका के साथ शादी की. कुछ देर बाद मारपीट कर उसे तलाक दे दिया.

बालीवुड के खानों में टॉप पर चल रहे आमिर खान की पहली पत्नी हिन्दू थी. उसे छोड़ दिया और फिर से एक हिन्दू लड़की से शादी कर ली.

नवाब पटौदी के पुत्र सैफ अली खान ने अमृता सिंह को इस लिए छोड़ दिया क्योंकि उन्हें अपने से बहुत कम उम्र की अभिनेत्री से इश्क हो गया था. यह सिसिला यू हीं बढ़ता रहा जब अमृता राव को अरबाज़ खान ने तलाक के तीन शब्द कह खुद से हमेशा के लिए अलग कर दिया.

अपने समय की बेहद खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक रीना रॉय भी मोहसिन खान की पत्नी बनी. मगर यह रिश्ता भी जल्दी तलाक पर ख़त्म हो गया. कांग्रेस विधायक रूबी नाथ असाम की विधायक थी. उनकी कहानी तो और भी दिल दहलाने वाली है. उन्होंने दूसरी शादी एक मुसलमान से की. वो उसे बांग्लादेश ले गया और तलाक देकर वैश्यावृत्ति में धकेल दिया.
बात यही नहीं ख़त्म होती. एक राष्ट्रीय स्टार की शूटर तारा सहदेव से रकीबुल हसन खान ने रणजीत कोहली बन कर पहले शादी की. फिर उसे मुसलमान बना कर तलाक दे दिया. इस फेहरिस्त में बॉलीवुड की नामचीन अभिनेत्री संगीता बिजलानी भी शामिल हैं. जिन्होंने मुल्स्लिम क्रिकेटर अजरूदीन से शादी की. अंत मगर तलाक ही रहा.

इन सभी वाक्यों से यह तो साफ़ नज़र आता है की मुस्लिम समाज में जब भी किसी गैर धर्म की स्त्री ने शादी की, तो उसका अंजाम तकलीफदेह ही रहा. महिलाओं के साथ-साथ उनके बच्चों का भविष्य भी ख़ाक में मिल कर रह गया ।

जब इस लेवल पर जाकर भी मुस्लिम औरतों पर ज़ुल्म करते हैं तो आम समाज में क्या होता होगा ?

 रूमाना सिद्दीक़ी जी लिखती हैं की ,
कब आँखे खोलोगे मुसलमानो ??

1. आप 1400 से ज्यादा सालोँ से अपने हक के लिए लड़े जा रहे है, अल्लाह जाने कौन सा हक़ है जो पूरी दुनियाँ आपको 1400 सालों से नही दे पा रही…
2. आप सिर्फ लड़ने के लिए ही पैदा हुए, जहाँ गैर मुस्लिम है वहां आप उनसे लड़ रहे है, जहाँ गैर मुस्लिम नही है वहां आप आपस में ही लड़ रहे है…
3. आप लड़ना बन्द नही कर सकते इसलिए कम से कम लड़ाई के तरीके बदलिए ताकि आप की हार जीत में बदल सके… आप मेरे देखते देखते 2014 के बाद से भारत में लगातार राजनैतिक रूप से हार रहे है… आप के योगदान के बिना सरकारें बन रही, आपकी मर्जी के खिलाफ पीएम और सीएम बन रहे है… लोग आपको आपकी विचारधारा को नकार रहे हैं… अपने खिलाफ ये नकारात्मक माहौल आपका खुद का बनाया हुआ है…
4. सच्चर कमेटी की रिपोर्ट कहती है मुसलमानो की हालात सबसे खराब है देश में, लाखो मुस्लिम बेघर है, शिक्षा के आभाव में पंचर बना रहे, न आप बड़े उद्योगपति है, न देश में होटल आपके, न मॉल, न हॉस्पिटल आपके, न आपके बैंक एकाउंट न एकाउंट में पैसा लेकिन नोटबन्दी के खिलाफ आप इतने मुखर थे जैसे सबसे बड़ा घाटा आपका ही हुआ, जैसे आपके लाखो करोड़ो के नोट बर्बाद हो गए, जैसे बेरोजगार सिर्फ मुस्लिम ही हुए हो…
5. आप खुद ही कहते रहे की बूचड़खाने भाजपा के हिन्दू नेताओ और जैनियों के है, सिर्फ 14% मांस मुस्लिम खाते है बाकी का हिन्दू खाते है… और अवैध बूचड़खानों पर सबसे ज्यादा कपड़े आप ही फाड़ रहे… तो आप खुद ही अपने झूठ का पर्दाफाश कर के अपने खिलाफ नकरात्मक माहौल बनाते है फिर इलज़ाम दूसरों पर क्यों लगाते है… बूचड़खानों पर या तो आप कल झूठ बोल रहे थे या आज झूठ बोल रहे है…
6. एंटीरोमियो स्क्वाड पर भी आपकी आपत्ति बेवज़ह है… आप अपनी बहू बेटियों को बुर्के में रखते है ताकि बुरी नज़र से बचाया जा सके, महिलाओं को अकेले बाहर जाने की इज़ाज़त नही इस्लाम में, आप पञ्च वक्त के नमाज़ी और ईमान वाले है, आपको भी नज़र के पर्दे का हुक्म है , चरित्रहीन महिला को संगसार करने की सज़ा है इस्लाम में , फिर एंटीरोमियो स्क्वाड का विरोध आप किस लॉजिक के आधार पर कर रहे…?
7. साल भर आप जय भीम जय मीम करते है, भीम भी आपके साथ ब्राह्मणों को गरियाता है और चुनाव के वक्त मीम को छोड़ के भगवा थाम लेता है। आपको ईवीएम टेम्परिंग का झुनझुना पकड़ा दिया जाता है और आप बजाते रह जाते हैं।”
8. देश का नाम भारत है, हिंदुस्तान है पहले आर्यव्रत, रीवा भी था मतलब संस्कृत और हिंदी नाम ही रहे, भारत में साधू संत देवी देवता जन्मे, विद्वान् महापुरुष जन्मे, कोई हिन्दू राजा शाशक कभी इराक ईरान सीरिया सऊदी मिस्र नही गया राज़ करने युद्ध लड़ने अपनी धौस जमाने जैसे की यहाँ भारत में बाबर, हुमांयू, अकबर, ओरंगजेब, गजनबी सहित हजारो मुगल शाशक आए! भारत भूमि का कण कण कहता है की ये राष्ट हिन्दुओ का था और मुस्लिम बाहरी थे फिर भी हिन्दुओ ने मुस्लिमो को स्वीकार किया! हिन्दुओ के लाखो मन्दिर प्राचीनकाल में मुगलो ने तोड़े उनमे से एक राम मन्दिर भी था जिसको बाबर ने मस्जिद का रूप दिया! सीरिया पाक इराक ईरान तालिबान में हजारो मस्जिद बम से उड़ा दी जेहादियो आतंकियों ने उनके लिए कभी रोए नही और यहाँ राम मन्दिर की जंगह, एक मस्जिद के लिए लड़े मरे जा रहे हो! 

रूमाना सिद्दीक़ी

1946 and 1947: Destructive Years

From: Rajput < >

 

TWO HISTORIC YEARS THAT DESTROYED AN ANCIENT CIVILISATION- 1946 & 1947.

 

We lived in Multan where I went to DAV High School. My super mum took care of the house and my father was a successful lawyer. Since the population was mostly Muslim the courts were kept busy by two kinds of crime: Forcible abduction and conversion of Hindu girls and the jealous husbands murdering their cheating wives- often along with their illicit lovers.

 

The hottest news in 1946 was the trial of the three officers of INA, Prem Sahgal, Gurubaksh Singh Dhillon and Shah Nawaz Khan. Lahore in Diwali 1946 remained dark as the traditional earthen lamps lit on Diwali were not lit by families in support of the prisoners.

 

The fires of patriotism burning in the heart of Subhash Chandra Bose galvanized the men & women of “Azad Hind Fauj” (INA) to fight for freedom. The venomous rodent called “Pakistan” was deep in the hole somewhere, waiting for its day to come out as a voracious PIG to gobble up one third of India just a few months later.

 

The other hot news was the unprovoked and unprecedented genocide of Hindus in the Noakhali district of Bengal. It was a warning shot fired by All India Muslim League with the threat, “THIS IS THE FORE-TASTE OF WHAT WE WILL DO IF YOU DO NOT CONCEDE PARTITION!”

 

In hindsight one can say that they did not have to drop a “nuclear bomb” to scare the top Hindu leaders when one was in their own pocket and the other their best friend. In the event Nehru “went along” and Gandhi collapsed with no breath left to utter just ONE word, “Defend!”

 

It seems in hindsight that Partition was the joint idea of Jinnah and Nehru. The latter had Muslim blood in his genes just like the former President of the USA, Barak Hussain OBAMA. “Bapu” MK Gandhi was shattered- not only due to the bloodshed but also due to the new awareness of reality, seeing the upside-down power ratio that showed the minority capable of inflicting a deep LETHAL wound in the body of the majority community! Gandhi saw Noakhali as the ominous prelude to a much bigger national calamity.

 

Back in Multan my father took up the case of INA prisoners in jail since no other lawyer was willing to handle their case since Pandit Nehru had, like the British rulers, called them “traitors and deserters” and wanted arrest warrants issued to try and hang Subhash Chandra Bose!

 

Father was congratulated by all when the prisoners were released and welcomed by the citizens of that ancient city where once Bhagat Prahlad lived!

 

But father became sad and reflective. He had a very sharp mind to hear the death knell of Akhand Bharat after witnessing the specter of “Might is Right,” that is, “Dagger prevailing over Rosary!” or “Rascal killing the Mahatma!”

 

Today, 70 years on, one asks, “What else had the MUSLIMS been doing in Hindusthan since 712 A.D. except killing the natives, destroying temples, raping girls and women and carting Hindu slaves to Kabul for auction and to Hindukush mountains to perish?” With such a perennial enemy living within for centuries, the Hindus ought to have been well prepared for the attack!

 

Father, being President of the Minorities Federation, Multan, phoned Mr. Gandhi to take advice to be conveyed to the citizens of Multan. He was astonished to find Gandhi calmly telling everyone, “There is no danger from the Muslims. They respect & adore me. They will give up the demand for Pakistan and stand up along with us for Akhand Bharat.”

 

Gandhi added, “Tell everyone not to panic. India will be cut upon my dead body!” Father told family and friends, not to worry. Everything will be well. He continued, “Mr. Gandhi is respected by all, including our British masters and we ought to believe him. There will be no partition so long as Gandhi is alive.”

 

But at the same time Father drew another conclusion based on the reality of the upside-down Power Ratio. He had doubts about Gandhi’s influence over the Indian Muslims and he saw the ogre of Partition staring in his face. Suddenly he started reading Bhagwat Gita and telling us that upon one’s death only body dies while the soul is immortal. At the same time, he turned to the martial compositions by Guru Gobind Singhji and asked us children to learn them by heart. Perhaps a premonition, since his own commitment to “Akhand Bharat” was extreme, far above his own life. He, too, had declared the same resolve in front of a huge gathering of citizens of Multan on the evening of March 4, 1947, “India will be cut upon my dead body!”

 

Since he meant what he said, he fell a martyr within 24 hours.

He was the first victim in our peaceful & prosperous province of Punjab, to be killed by the separatist, sectarian, divisive, intolerant and bloodthirsty poisonous ideology of one “mad man” in the 7th.century AD who wrote the word “Kafir” in his book thus pitching his followers against the rest of mankind, and fracturing the human race forever! That ONE word sealed India’s fate in bloodshed in Multan on March 5, 1947.

 

There are many lessons to be learnt from Partition but to the country’s bad luck NONE in the ruling establishment is willing to discuss Partition. The Constitution of truncated Bharat also does not contain two words: “Hindu” and “Partition”. The ideology of the country with overwhelming Hindu majority is “secular mongrel Kitsch”!

 

Father’s legacy remains unfulfilled. The Hindu nation, and everyone else who is loyal to the sacred soil, culture & spiritual heritage of Bharat, has a stark choice: Either denounce that bogus Partition vehemently or perish!

 

The wheel that flies off a speeding car has to be re-fitted in its place. The frontier at Khyber Pass is the right one. It is natural. But the one between Lahore and Amritsar is wrong. Day and night, it broadcasts Pandit Nehru’s High Treason to the world. It is like the line drawn in sand. It flies in the face of Truth and logic. It did not have the legitimacy conferred by referendum. It has locked up one nation in three separate sealed compartments to suffocate all to death!

 

Father gave the perfect answer to the question, “WHAT CAN UNITE HINDUS & MUSLIMS IN INDIA?”

 

IT IS NEITHER RELIGION, NOR LANGUAGE & NOR EVEN PATRIOTISM since the Muslims put Arabia and Allah ABOVE Bharat.

 

The answer is “ONE language and ONE Law for all”. To ENFORCE this, we need a strong army and a new Constitution that does mention the two banned words, “Partition” and “Hindu”, does define the constitutional status of Muslims in view of Partition, does mention our eternal commitment to “Akhand Bharat” (frontier back to Khyber!) and does empower the government to ENFORCE one Law for all.

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Rajput

31 March 2017.

अयोध्या की कहानी

From: Pramod Agrawal < >

अयोध्या की कहानी

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जब बाबर दिल्ली की गद्दी पर आसीन हुआ उस समय जन्मभूमि सिद्ध महात्मा श्यामनन्द जी महाराज के अधिकार क्षेत्र में थी। महात्मा श्यामनन्द की ख्याति

सुनकर ख्वाजा कजल अब्बास मूसा आशिकान अयोध्या आये । महात्मा जी के शिष्य बनकर ख्वाजा कजल अब्बास मूसा ने योग और सिद्धियाँ प्राप्त कर ली और उनका नाम भी महात्मा श्यामनन्द के ख्यातिप्राप्त शिष्यों में लिया जाने लगा।

ये सुनकर जलालशाह नाम का एक फकीर भी महात्मा श्यामनन्द के पास आया और उनका शिष्य बनकर सिद्धियाँ प्राप्त करने लगा। जलालशाह एक कट्टर मुसलमान था, और उसको एक ही सनक थी, हर जगह इस्लाम का आधिपत्य साबित करना । अत: जलालशाह ने अपने काफिर गुरू की पीठ में छुरा घोंपकर ख्वाजा कजल अब्बास मूसा के साथ मिलकर ये विचार किया की यदि इस मदिर को

तोड़ कर मस्जिद बनवा दी जाये तो इस्लाम का परचम हिन्दुस्थान में स्थायी हो जायेगा। धीरे धीरे जलालशाह और ख्वाजा कजल अब्बास मूसा इस साजिश को अंजाम देने की तैयारियों में जुट गए ।

सर्वप्रथम जलालशाह और ख्वाजा बाबर के विश्वासपात्र बने और दोनों ने अयोध्या को खुर्द मक्का बनाने के लिए जन्मभूमि के आसपास की जमीनों में बलपूर्वक मृत मुसलमानों को दफन करना शुरू किया॥ और मीरबाँकी खां के माध्यम से बाबर को उकसाकर मंदिर के विध्वंस का कार्यक्रम बनाया। बाबा श्यामनन्द जी अपने मुस्लिम शिष्यों की करतूत देख के बहुत दुखी हुए और अपने निर्णय पर उन्हें बहुत पछतावा हुआ।

दुखी मन से बाबा श्यामनन्द जी ने रामलला की मूर्तियाँ सरयू में प्रवाहित किया और खुद हिमालय की और तपस्या करने चले गए। मंदिर के पुजारियों ने मंदिर के अन्य सामान आदि हटा लिए और वे स्वयं मंदिर के द्वार पर रामलला की रक्षा के लिए खड़े हो गए। जलालशाह की आज्ञा के अनुसार उन चारो पुजारियों के सर काट लिए गए. जिस समय मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाने की घोषणा हुई उस समय भीटी के राजा महताब सिंह बद्री नारायण की यात्रा करने के लिए निकले थे, अयोध्या पहुचने पर रास्ते में उन्हें ये खबर मिली तो उन्होंने अपनी यात्रा स्थगित कर दी और अपनी छोटी सेना में रामभक्तों को शामिल कर १ लाख चौहत्तर हजार लोगो के साथ बाबर की सेना के ४ लाख ५० हजार सैनिकों से लोहा लेने निकल पड़े।

रामभक्तों ने सौगंध ले रक्खी थी रक्त की आखिरी बूंद तक लड़ेंगे जब तक प्राण है तब तक मंदिर नहीं गिरने देंगे। रामभक्त वीरता के साथ लड़े ७० दिनों तक घोर संग्राम होता रहा और अंत में राजा महताब सिंह समेत सभी १ लाख ७४ हजार रामभक्त मारे गए। श्रीराम जन्मभूमि रामभक्तों के रक्त से लाल हो गयी। इस भीषण कत्ले आम के बाद मीरबांकी ने तोप लगा के मंदिर गिरवा दिया । मंदिर के मसाले से ही मस्जिद का निर्माण हुआ पानी की जगह मरे हुए हिन्दुओं का रक्त इस्तेमाल किया गया नीव में लखौरी इंटों के साथ ।

इतिहासकार कनिंघम अपने लखनऊ गजेटियर के 66वें अंक के पृष्ठ 3 पर लिखता है की एक लाख चौहतर हजार हिंदुओं की लाशें गिर जाने के पश्चात मीरबाँकी अपने मंदिर ध्वस्त करने के अभियान मे सफल हुआ और उसके बाद जन्मभूमि के चारो और तोप लगवाकर मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया.. इसी प्रकार हैमिल्टन नाम का एक अंग्रेज बाराबंकी गजेटियर में लिखता है की ” जलालशाह ने हिन्दुओं के खून का गारा बना के लखौरी ईटों की नीव मस्जिद बनवाने के लिए दी गयी थी। उस समय अयोध्या से ६ मील की दूरी पर सनेथू नाम का एक गाँव के पंडित देवीदीन पाण्डेय ने वहां के आस पास के गांवों सराय सिसिंडा राजेपुर आदि के सूर्यवंशीय क्षत्रियों को एकत्रित किया॥ देवीदीन पाण्डेय ने सूर्यवंशीय क्षत्रियों से कहा भाइयों आप लोग मुझे अपना राजपुरोहित मानते हैं ..अप के पूर्वज श्री राम थे और हमारे पूर्वज महर्षि भरद्वाज जी। आज मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जन्मभूमि को मुसलमान आक्रान्ता कब्रों से पाट रहे हैं और खोद रहे हैं इस परिस्थिति में हमारा मूकदर्शक बन कर जीवित रहने की बजाय जन्मभूमि की रक्षार्थ युद्ध करते करते वीरगति पाना ज्यादा उत्तम होगा॥

देवीदीन पाण्डेय की आज्ञा से दो दिन के भीतर ९० हजार क्षत्रिय इकठ्ठा हो गए दूर दूर के गांवों से लोग समूहों में इकठ्ठा हो कर देवीदीन पाण्डेय के नेतृत्व में जन्मभूमि पर जबरदस्त धावा बोल दिया । शाही सेना से लगातार ५ दिनों तक युद्ध हुआ । छठे दिन मीरबाँकी का सामना देवीदीन पाण्डेय से हुआ उसी समय धोखे से उसके अंगरक्षक ने एक लखौरी ईंट से पाण्डेय जी की खोपड़ी पर वार कर दिया। देवीदीन पाण्डेय का सर बुरी तरह फट गया मगर उस वीर ने अपने पगड़ी से खोपड़ी से बाँधा और तलवार से उस कायर अंगरक्षक का सर काट दिया। इसी बीच मीरबाँकी ने छिपकर गोली चलायी जो पहले ही से घायल देवीदीन पाण्डेय जी को लगी और वो जन्मभूमि की रक्षा में वीर गति को प्राप्त हुए..जन्मभूमि फिर से 90 हजार हिन्दुओं के रक्त से लाल हो गयी। देवीदीन पाण्डेय के वंशज सनेथू ग्राम के ईश्वरी पांडे का पुरवा नामक जगह पर अब भी मौजूद हैं॥ पाण्डेय जी की मृत्यु के १५ दिन बाद हंसवर के महाराज रणविजय सिंह ने सिर्फ २५ हजार सैनिकों के साथ मीरबाँकी की विशाल और शस्त्रों से सुसज्जित सेना से रामलला को मुक्त कराने के लिए आक्रमण किया । 10 दिन तक युद्ध चला और महाराज जन्मभूमि के रक्षार्थ वीरगति को प्राप्त हो गए। जन्मभूमि में 25 हजार हिन्दुओं का रक्त फिर बहा। रानी जयराज कुमारी हंसवर के स्वर्गीय महाराज रणविजय सिंह की पत्नी थी।

जन्मभूमि की रक्षा में महाराज के वीरगति प्राप्त करने के बाद महारानी ने उनके कार्य को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया और तीन हजार नारियों की सेना लेकर उन्होंने जन्मभूमि पर हमला बोल दिया और हुमायूं के समय तक उन्होंने छापामार युद्ध जारी रखा। रानी के गुरु स्वामी महेश्वरानंद जी ने रामभक्तों को इकठ्ठा करके सेना का प्रबंध करके जयराज कुमारी की सहायता की। साथ ही स्वामी महेश्वरानंद जी ने सन्यासियों की सेना बनायीं इसमें उन्होंने २४ हजार सन्यासियों को इकठ्ठा किया और रानी जयराज कुमारी के साथ , हुमायूँ के समय में कुल १० हमले जन्मभूमि के उद्धार के लिए किये। १०वें हमले में शाही सेना को काफी नुकसान हुआ और जन्मभूमि पर रानी जयराज कुमारी का अधिकार हो गया।

लेकिन लगभग एक महीने बाद हुमायूँ ने पूरी ताकत से शाही सेना फिर भेजी , इस युद्ध में स्वामी महेश्वरानंद और रानी कुमारी जयराज कुमारी लड़ते हुए अपनी बची हुई सेना के साथ मारे गए और जन्मभूमि पर पुनः मुगलों का अधिकार हो गया। श्रीराम जन्मभूमि एक बार फिर कुल 24 हजार सन्यासियों और 3 हजार वीर नारियों के रक्त से लाल हो गयी। रानी जयराज कुमारी और स्वामी महेश्वरानंद जी के बाद यद्ध का नेतृत्व स्वामी बलरामचारी जी ने अपने हाथ में ले लिया। स्वामी बलरामचारी जी ने गांव गांव में घूम कर रामभक्त हिन्दू युवकों और सन्यासियों की एक मजबूत सेना तैयार करने का प्रयास किया और जन्मभूमि के उद्धारार्थ २० बार आक्रमण किये. इन २० हमलों में काम से काम १५ बार स्वामी बलरामचारी ने जन्मभूमि पर अपना अधिकार कर लिया मगर ये अधिकार अल्प समय के लिए रहता था थोड़े दिन बाद बड़ी शाही फ़ौज आती थी और जन्मभूमि पुनः मुगलों के अधीन हो जाती थी..जन्मभूमि में लाखों हिन्दू बलिदान होते रहे। उस समय का मुग़ल शासक अकबर था।

शाही सेना हर दिन के इन युद्धों से कमजोर हो रही थी.. अतः अकबर ने बीरबल और टोडरमल के कहने पर खस की टाट से उस चबूतरे पर ३ फीट का एक छोटा सा मंदिर बनवा दिया. लगातार युद्ध करते रहने के कारण स्वामी बलरामचारी का स्वास्थ्य गिरता चला गया था और प्रयाग कुम्भ के अवसर पर त्रिवेणी तट पर स्वामी बलरामचारी की मृत्यु हो गयी .. इस प्रकार बार-बार के आक्रमणों और हिन्दू जनमानस के रोष एवं हिन्दुस्थान पर मुगलों की ढीली होती पकड़ से बचने का एक राजनैतिक प्रयास की अकबर की इस कूटनीति से कुछ दिनों के लिए जन्मभूमि में रक्त नहीं बहा।

यही क्रम शाहजहाँ के समय भी चलता रहा। फिर औरंगजेब के हाथ सत्ता आई वो कट्टर मुसलमान था और उसने समस्त भारत से काफिरों के सम्पूर्ण सफाये का संकल्प लिया था। उसने लगभग 10 बार अयोध्या मे मंदिरों को तोड़ने का अभियान चलकर यहाँ के सभी प्रमुख मंदिरों की मूर्तियों को तोड़ डाला।

औरंगजेब के हाथ सत्ता आई वो कट्टर मुसलमान था और उसने समस्त भारत से काफिरों के सम्पूर्ण सफाये का संकल्प लिया था। उसने लगभग 10 बार अयोध्या मे मंदिरों को तोड़ने का अभियान चलकर यहाँ के सभी प्रमुख मंदिरों की मूर्तियों को तोड़ डाला। औरंगजेब के समय में समर्थ गुरु श्री रामदास जी महाराज जी के शिष्य श्री वैष्णवदास जी ने जन्मभूमि के उद्धारार्थ 30 बार आक्रमण किये। इन आक्रमणों मे अयोध्या के आस पास के गांवों के सूर्यवंशीय क्षत्रियों ने पूर्ण सहयोग दिया जिनमे सराय के ठाकुर सरदार गजराज सिंह और राजेपुर के कुँवर गोपाल सिंह तथा सिसिण्डा के ठाकुर जगदंबा सिंह प्रमुख थे। ये सारे वीर ये जानते हुए भी की उनकी सेना और हथियार बादशाही सेना के सामने कुछ भी नहीं है अपने जीवन के आखिरी समय तक शाही सेना से लोहा लेते रहे। लम्बे समय तक चले इन युद्धों में रामलला को मुक्त कराने के लिए हजारों हिन्दू वीरों ने अपना बलिदान दिया और अयोध्या की धरती पर उनका रक्त बहता रहा। ठाकुर गजराज सिंह और उनके साथी क्षत्रियों के वंशज आज भी सराय मे मौजूद हैं। आज भी फैजाबाद जिले के आस पास के सूर्यवंशीय क्षत्रिय सिर पर पगड़ी नहीं बांधते, जूता नहीं पहनते, छता नहीं लगाते, उन्होने अपने पूर्वजों के सामने ये प्रतिज्ञा ली थी की जब तक श्री राम जन्मभूमि का उद्धार नहीं कर लेंगे तब तक जूता नहीं पहनेंगे, छाता नहीं लगाएंगे, पगड़ी नहीं पहनेंगे। 1640 ईस्वी में औरंगजेब ने मन्दिर को ध्वस्त करने के लिए जबांज खाँ के नेतृत्व में एक जबरजस्त सेना भेज दी थी, बाबा वैष्णव दास के साथ साधुओं की एक सेना थी जो हर विद्या मे निपुण थी इसे चिमटाधारी साधुओं की सेना भी कहते थे । जब जन्मभूमि पर जबांज खाँ ने आक्रमण किया तो हिंदुओं के साथ चिमटाधारी साधुओं की सेना की सेना मिल गयी और उर्वशी कुंड नामक जगह पर जाबाज़ खाँ की सेना से सात दिनों तक भीषण युद्ध किया । चिमटाधारी साधुओं के चिमटे के मार से मुगलों की सेना भाग खड़ी हुई। इस प्रकार चबूतरे पर स्थित मंदिर की रक्षा हो गयी । जाबाज़ खाँ की पराजित सेना को देखकर औरंगजेब बहुत क्रोधित हुआ और उसने जाबाज़ खाँ को हटाकर एक अन्य सिपहसालार सैय्यद हसन अली को 50 हजार सैनिकों की सेना और तोपखाने के साथ अयोध्या की ओर भेजा और साथ मे ये आदेश दिया की अबकी बार जन्मभूमि को बर्बाद करके वापस आना है , यह समय सन् 1680 का था । बाबा वैष्णव दास ने सिक्खों के गुरु गुरुगोविंद सिंह से युद्ध मे सहयोग के लिए पत्र के माध्यम संदेश भेजा । पत्र पाकर गुरु गुरुगोविंद सिंह सेना समेत तत्काल अयोध्या आ गए और ब्रहमकुंड पर अपना डेरा डाला । ब्रहमकुंड वही जगह जहां आजकल गुरुगोविंद सिंह की स्मृति मे सिक्खों का गुरुद्वारा बना हुआ है। बाबा वैष्णव दास एवं सिक्खों के गुरुगोविंद सिंह रामलला की रक्षा हेतु एकसाथ रणभूमि में कूद पड़े ।इन वीरों कें सुनियोजित हमलों से मुगलो की सेना के पाँव उखड़ गये सैय्यद हसन अली भी युद्ध मे मारा गया। औरंगजेब हिंदुओं की इस प्रतिक्रिया से स्तब्ध रह गया था और इस युद्ध के बाद 4 साल तक उसने अयोध्या पर हमला करने की हिम्मत नहीं की। औरंगजेब ने सन् 1664 मे एक बार फिर श्री राम जन्मभूमि पर आक्रमण किया । इस भीषण हमले में शाही फौज ने लगभग 10 हजार से ज्यादा हिंदुओं की हत्या कर दी नागरिकों तक को नहीं छोड़ा। जन्मभूमि हिन्दुओं के रक्त से लाल हो गयी। जन्मभूमि के अंदर नवकोण के एक कंदर्प कूप नाम का कुआं था, सभी मारे गए हिंदुओं की लाशें मुगलों ने उसमे फेककर चारों ओर चहारदीवारी उठा कर उसे घेर दिया। आज भी कंदर्पकूप “गज शहीदा” के नाम से प्रसिद्ध है, और जन्मभूमि के पूर्वी द्वार पर स्थित है। शाही सेना ने जन्मभूमि का चबूतरा खोद डाला .

 

 

Muslim Hindrance?

From: Rajput < >

Subject line: “MUSLIM HINDRANCE….!”

Isn’t that normal? Muslims are always and everywhere an OBSTACLE, a HINDRANCE, a BRAKE, an OBSTRUCTION, a SPOKE in the wheel, and a ROCK in the middle of the road,

Sometimes a Muslim goes mad and drives his car or truck through the crowd- be it Berlin, London or the beach in Nice, France!

When did they make Hindus’ life easy? How many stood up for Akhand Bharat? How many embraced Hindu Dharma on marrying a Hindu maiden? How many will welcome the Hindus back in Srinagar?

SO WE ASK:

Why do Hindus in Partitioned India need the Muslims’ approval to construct Sri Ram Mandir in Ayodhya? (WE SHOULD BE ASKING THEM TO GO TO THEIR PAKISTAN, INSTEAD!)

Hindus are STUCK (SHAME!) at Ayodhya. What should they do now?

JUST PROCEED!

And if any mischief-monger creates trouble, then the jail is the place for him, or Pakistan.

Let us ASSERT ourselves on our own patch. Concede the Muslims as much attention as the HINDUS receive in Bangladesh!

Those who wish to avoid “provoking” the Muslims, or wish to avoid confrontation, should KNOW that one day, inevitably, the BATTLE for Delhi will begin. And there is a WARNING for the Hindus:

“Buckray ki maan kab tak Khair manayai-gee!”?

“बकरी कि मां कब तक खैर मनायेगी” ?

It means that the Hindus behaved like the lambs when we had to defend Lahore and Chittagong, Gilgit and Baltistan!

It means that we had to INSIST on “population exchange” simultaneously at the time of withdrawal of the Indian Army from Peshawar, Rawalpindi, Lahore, Multan, Quetta and Karachi!

To match the PROWESS of an alien and ever hostile minority, if the Hindus have to learn some MARTIAL arts, then so be it!   “Dump Gandhi. Go for Gobind!”

Sticking to “Gandhian” patriotic vacuum, & his “Ahimsa Parmo Dharma”, will mean the unconditional SURRENDER of Delhi eventually!

We let them stay. We did not throw them out. We appeased and pleased them all the time. We gave them one third of India without a single condition. We kept them home as “brothers”. So, by ISLAMIC logic, now the chickens have come home to roost!

By Law of Nature if one wishes to survive on one’s own territory, one will have to be STRONGER than all the enemies who wish to exterminate him (as in Lahore!) or force him out of his home (as in Srinagar!) put together.

So, the Hindus need to know “MARTIAL ART” (be strong or FIGHTING FIT) in the land where the Muslims are posturing in front of Sri Ram Mandir.

rajput

26 Mar 17

PS: PLEASE FLY “BHAGWA” ON TOP OF RASHTRAPATI BHAWAN and LOK SABHA and from every roof top in Ayodhya!

Go on. DO IT!

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“मुसलमानों का अनावश्यक विरोध”

“मुसलमानों का अनावश्यक विरोध”

महोदय/महोदया,

 

जब यह सर्वविदित ही है कि अनेक साक्ष्यों के आधार पर अयोध्या स्थित “श्री राम जन्मभूमि मंदिर” सिद्ध हो चूका है । फिर भी इस्लामिक कट्टरपंथियों की दूषित व घ्रणित प्रवृति के कारण यह विवाद अभी सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है । अतः अभी संभावित सकारात्मक निर्णय की प्रतीक्षा करनी होगी ।

ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश का सुझाव कि “अयोध्या मंदिर विवाद को आपस में सुलझा लिया जाय” क्या स्वीकार्य होगा ? समझदार व सभ्य समाज विवादों को हल करने के शान्तिपूर्ण विकल्प ढूंढते है, परंतु जिस समाज का दर्शन पृथक संस्कृति को ही नकारता हो और अपनी घृणित सोच से उनके मान बिंदुओं को खंडित करके उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाना ही हो तो कोई क्या करें ?

इन जिहाद पिपासुओं की मानसिकता मंदिर जैसे धार्मिक विवादो पर कभी भी मध्यम मार्ग नहीं अपनायेगी ? हम कब तक मुस्लिम पोषित राजनीति से आत्मस्वाभिमान को ठेस पहुँचा कर जिहादियों के सपने पूरे करने के लिये अपने अस्तित्व को ही संकट में डालते रहेंगे ? कब तक बहुसंख्यकों की सरकार अल्पसंख्यको की अनुचित मांगों को मान कर बहुसंख्यकों का उत्पीड़न करती रहेंगी ?

याद करो जब 1985 में एक मुस्लिम तलाकशुदा बुजूर्ग महिला शाहबानो बेगम को जीवन निर्वाह के लिये धन देने को उसके पति को सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था । तब मुस्लिम कट्टरपंथियों के दबाव में आकर कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने1986 में संसद द्वारा विधेयक पास करके कानून बनाया और मुसलमानों को अपनी तलाक़ शुदा पत्नी को खर्चा देने की बाध्यता से मुक्त कर दिया था।

अतः इस प्रकरण को ध्यान में रखते हुए केंद्र की राष्ट्रवादी सरकार को अपनी प्रबल इच्छाशक्ति से करोड़ों हिन्दुओं की आस्थाओं के प्रतीक “भगवान श्री राम” का अयोध्या में भव्य मंदिर बनवाने के लिए आवश्यक विधेयक लाकर समस्त विवादों को पूर्ण विराम लगाना होगा।

भवदीय

विनोद कुमार सर्वोदय

ग़ाज़ियाबाद

(Much more important than building the Rama Temple is to make the constitution pro-Vedic, and make Hindustan a Vedic State, not secular (because the Vedic dharma and culture are inherently tolerant of all the tolerant religions and ideologies. – Skanda987)

 

 

 

मुस्लिम बादशाओं के हिंदुओं पर अत्याचार .

From: Pramod Agrawal < > wrote:

मुस्लिम बादशाओं के हिंदुओं पर अत्याचार और हत्याएं और मंदिरों को लूटना और तोडना ——-

क्या कभी वामपंथी और कोंग्रस इतिहासकारों ने आपको ये बताया ?

👇🏽

१. सन् 1018 में मुस्लिम तुर्कीयों का आक्रमण और मुस्लिम अब्दुल कासिम महमुद(महमुद गजनी) के द्वारा 50 हजार हिन्दुओं का कत्ल, हजारो स्त्रियों के साथ दुराचार व लगभग १ हजार मन्दिरो को नष्ट करना ।

२. सन् 1024 मे महमुद गजनी का पुन: आक्रमण और 50 हजार हिन्दुओं का कत्ल, सोमनाथ मन्दिर की लुट, और मन्दिर को तोड़ देना ।

३. सन् 1193 मे मुहमद गौरी का आक्रमण और 1 लाख हिन्दुओं का कत्ल ।

४. सन् 1196 कुतुब अल दीन ऐबक का आक्रमण और 1 लाख से ज्यादा हिन्दुओं का कत्ल ।

५. सन् 1197 मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी का अाक्रमण करके नालन्दा विश्वविधालय को धव्स्त करना और 10 हजार हिन्दु और बौद्धष्ठो का कत्ल ।

६. गयासुद्दीन बलबन का आक्रमण और मेवात के 1 लाख राजपुतो का कत्ल करना ।

७. सन् 1323 मे मुहम्मद बिन तुगलक के द्वारा 12 हजार हिन्दुओं का कत्ल ।

८. सन् 1353 मे फिरोज शाह तुगलक के द्वारा 1 लाख 80 हजार हिन्दुओं का कत्ल ।

९. सन् 1366 में बहमनी सल्तनत के द्वारा 5 लाख हिन्दुओं का कत्ल, गर्भवती स्त्रियों का पेट काटना, और हिन्दु महिलाओं के साथ दुराचार ।

१०. सन् 1398 तैमुर का भारत पर आक्रमण करके 45 लाख हिन्दुओं का हरियाणा मे कत्ल करना ।

११. सन् 1398 मे तैमुर द्वारा पर भटनेर के किले पर आक्रमण करके सम्पुर्ण आबादी का सफाया।

१२. सन् 1398 मे ही तैमुर द्वारा गाजियाबाद के निकट लगभग 1 लाख स्त्रियों और बच्चो का दुराचार के बाद कत्ल करना । ।

१३. सन् 1398 मे तैमुर द्वारा दिल्ली मे 1.5 लाख हिन्दु समेत अन्य धर्मो के लोगो का कत्ल ।

१४. सन् 1399 में तैमुर मेरठ में द्वारा 3 लाख हिन्दुओं का कत्ल, और लाखो स्त्रियों के साथ दुराचार ।

१५. मार्च 1527 खानवा के युद्ध मे बाबर की सेना द्वारा 20 हजार हिन्दुओं की हत्या, जिसमे से 10 हजार राजपुत सैनिक बलिदान हुये ।

१६. सन् 1560 मे अकबर द्वारा नरसिंहपुर जिले मे 48 हजार हिन्दुओं की हत्या, मुख्यत: राजपुत मारे गये ।

१७. सन् 1565 मे दक्कन के सुलतान द्वारा 1 लाख से अधिक हिन्दुओं का नरसंहार और सभी मुख्य मन्दिरो को ध्वस्त करना ।

१८. सन् 1568 अकबर द्वारा किये गये आक्रमण मे चितौड़ केे 30 हजार राजपुतो का नरसंहार, और 8 हजार स्त्रियों का हरम मे जाने से बचने के लिये स्वयं को समापत कर लेना ।

१९. सन् 1618 से 1707 के मध्य मुगल साम्रज्य और ओरंगजेब के द्वारा 46 लाख हिन्दुओं की हत्या, लगभग 15 लाख ब्राहम्ण की हत्या काशी, हरिद्वार व अन्य स्थानो पर ।

२०. सन् 1738 से लेकर 1740 के मध्य नादिर शाह( फारसीयो द्वारा) के द्वारा 3 लाख हिन्दुओं की हत्या ।

२१. सन् १७६१ मे अफगानो के आक्रमण पर मराठो के साथ युद्ध मे 70 हजार मराठों का बलिदान होना, और 22 हजार मराठा स्त्रियों और बच्चों को गुलाम बनाना।

(बाबरी मस्जिद विवाद और वामपंथी फरेब)

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले ने विवादित स्थल पर मंदिर होने के शोधपूर्ण वैज्ञानिक निष्कर्षों की पुष्टि तो की ही थी, साथ ही साथ मस्जिद-कमिटी की ओर से गवाह के तौर पर वामपंथी इतिहासकार इरफ़ान हबीब की अगुवाई में पेश हुए देश के तमाम वामपंथी इतिहासकारों के फरेब को भी न्यायालय ने उजागर किया था l न्यायालय को ये टिप्पणी करनी पडी थी कि इन इतिहासकारों ने अपने रवैये से उलझाव, विवाद, और सम्प्रदायों में तनाव पैदा करने की कोशिश की और इनका विषय-ज्ञान छिछला है l क्रॉस एग्जामिनेशन में पकड़े गए इनके फरेबों के दृष्टांत आपको हैरत में डाल देंगे :-

(1) वामपंथी इतिहासकार प्रोफ़ेसर मंडल ने ये स्वीकारा कि खुदाई का वर्णन करती उनकी पुस्तक दरअसल उन्होंने बिना अयोध्या गए ही (मामले को भटकाने के लिए) लिख दी थी l

(2) वामपंथी इतिहासकार सुशील श्रीवास्तव ने ये स्वीकार किया कि प्रमाण के तौर पर पेश की गयी उनकी पुस्तक में संदर्भ के तौर पर दिए पुस्तकों का उल्लेख उन्होंने बिना पढ़े ही कर दिया है l

(3) जेएनयू की इतिहास-प्रोफ़ेसर सुप्रिया वर्मा ने ये स्वीकार किया कि उन्होंने खुदाई से संदर्भित ‘राडार सर्वे’ की रिपोर्ट को पढ़े बगैर ही रिपोर्ट के गलत होने की गवाही दे दी थी l

(4) अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर जया मेनन ने ये स्वीकारा कि वे तो खुदाई स्थल पर गयी ही नहीं थी लेकिन ये (झूठी) गवाही दे दी थी कि मंदिर के खंभे बाद में वहां रखे गए थे l

(5) ‘एक्सपर्ट’ के तौर पर उपस्थित वामपंथी सुविरा जायसवाल जब क्रोस एग्जामिनेशन में पकड़ी गयीं तब उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें मुद्दे पर कोई ‘एक्सपर्ट’ ज्ञान नहीं है; जो भी है वो सिर्फ ‘अखबारी खबरों’ के आधार पर ही है l

(6) पुरात्व्वेत्ता वामपंथी शीरीन रत्नाकर ने सवाल-जवाब में ये स्वीकारा कि दरअसल उन्हें कोई “फील्ड-नॉलेज” है ही नहीं l

(7) “एक्सपर्ट” प्रोफ़ेसर मंडल ने ये भी स्वीकारा था, “मुझे बाबर के विषय में इसके अलावा – कि वो सोलहवीं सदी का एक शासक था – और कुछ ज्ञान नहीं है l न्यायधीश ने ये सुन कर कहा था कि इनके ये बयान विषय सम्बंधित इनके छिछले ज्ञान को प्रदर्शित करते है l

(8) वामपंथी सूरजभान मध्यकालीन इतिहासकार के तौर पर गवाही दे रहे थे पर क्रॉस एग्जामिनेशन में ये तथ्य सामने आया कि वे तो इतिहासकार थे ही नहीं, मात्र पुरातत्ववेत्ता थे l

(9) सूरजभान ने ये भी स्वीकारा कि डी एन झा और आर एस शर्मा के साथ लिखी उनकी पुस्तिका “हिस्टोरियंस रिपोर्ट टू द नेशन” दरअसलद खुदाई की रपट पढ़े बगैर ही (मंदिर संबंधी प्रमाणों को झुठलाने के) दबाव में केवल छै हफ्ते में ही लिख दी गयी थी l

(10) वामपंथी शिरीन मौसवी ने क्रॉस एग्जामिनेशन में ये स्वीकार किया कि उन्होंने झूठ कहा था कि राम-जन्मस्थली का ज़िक्र मध्यकालीन इतिहास में नहीं है l

दृष्टान्तों की सूची और लम्बी है l पर विडंबना तो ये है कि लाज हया को ताक पर रख कर वामपंथी इतिहासकार रोमिला थापर ने इन्हीं फरेबी वामपंथी इतिहासकारों व अन्य वामपंथियों का नेतृत्व करते हुए न्यायालय के इसी फैसले के खिलाफ लम्बे लम्बे पर्चे भी लिख डाले थे l पर शर्म इन्हें आती है क्या ?

(सन्दर्भ: Allahabad High court verdict dated 30 September 2010 )

On March 23, 2003 Twenty Four Kashmiri Pandits were massacred

From: Mohan Natarajan < >

 

14 years ago on this day 24 Kashmiri Pandits were massacred

in Nadimarg Kashmir, here’s their story

By Hemant Bijapurkar

Posted on March 23, 2017

 

It was the night of 23rd March 2003. At about 10:30 PM at night masked terrorists entered Nadimarg, a sleepy village in Pulwama District of Jammu and Kashmir and massacred 24 Kashmiri Pandits including men, women and toddlers.

Now 14 years later we revisit the dastardly incident and remember just one aspect of one of the biggest injustices heaped on the citizens of this country since independence. We were aided in this story by the tweets of Journalist Rahul Pandita who provided information which the establishment has tried to hard to stifle.

In 2003 the village of Nadimarg was home to only some 52 Kashmiri Pandits spread across 4 extended families, with others having already fled the valley during the 1990 exodus of their community. In the days leading up to the massacre, on 21st and 22nd March the assailants which comprised of members of a terrorist group and some youths from a nearby village scouted Nadimarg to ascertain the location of the Kashmiri Pandits.

And on that fateful night of the 23rd, they came with guns. As Rahul narrates, Pandits were taken to a courtyard, made to kneel down and shot in their heads. The assailants didn’t even spare toddlers.

The police later provided a token security to the surviving Pandits in the desperate hope that they stayed on. Not because they wished for the Pandits to remain in their motherland but because they wanted to ensure that the ashes of the victims were disposed of in Kashmir. They feared their making way to Jammu and then possibly getting paraded on the streets could have become an instigator for communal riots.

Mohan Bhatt one of the survivors of this attack recounted how he had managed to save himself by hanging on a roof wedge. His parents, sister and uncle weren’t so fortunate. To further aggravate his pain, the very next day he caught a man from his own village selling his dead mother’s Dejharu, a piece of jewelry sacred to Kashmiri Pandits.

Mohan revealed another shocking detail when he claimed that the terrorists were even accompanied by a few policemen. Even reports from 2003 were suggestive of an investigation against 9 police officers for being complicit in the crime. There were also reports of two terrorists involved in the attack visiting the nearby police picket for months before the attack. But almost all the facts still lie behind a veil of secrecy.

The motive? The assailants reportedly wanted to celebrate Pakistan Resolution Day which also falls on 23rd March or wanted to extol revenge for the post Godhra riots in Gujarat. We might never know as the local police hasn’t made any effort to reveal the identity of the killers let alone punish them.

Most of the above details are a result of a ground zero investigation by Kashmiri Pandit Sangarsh Samiti (KPSS) an organization formed by a group of Pandits who have stayed back in the valley. The president of KPSS Sanjay K Tikoo called it a well-planned attempt and also alleged that nobody has been for the heinous attack.

It has been fourteen years since the attack took place and battling the haunting memory of that fateful night, the Pandits from Nadimarg still await justice.