भारत के खिलाफ देश में खतरनाक फ़ौज

 

भारत के खिलाफ देश में तैयार हो चुकी

है, ये खतरनाक फ़ौज ट्रेनिंग भी हुई पूरी

भारत के खिलाफ देश

खतरनाक फ़ौज

Several Acts To Be Done By Modi ji

Source: youtube.com/watch?v=Id8DvZLE3ZM

By Shirshendu Dey

Several steps left for Modiji

  1. Implement Indus water treaty so that Pakistanis are left without water
  2. Stop entry for Chinese product in India, and tell China: “Either you leave supporting Pakistan or loose 120 crore business”
  3. Start killing the terrorist as Israeli did
  4. Remove 370 and 35A articles from the constitution.

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jaya sri krishna!

 

“हरामखोर गद्दारों को गोळी मारो सालों को”

Source: youtube.com/watch?v=PCc_9eLIa_E

It is clear that some internal gaddaaras have played part in this terrorist attack.

Think of the solution, he says; free from politics.
I believe this kshatriya bhaaratiya lion can lead all the angry youths, and guide their anger in well organized proper actions to eliminate 500 mini-Pakistans within Bhaarat.
jaya sri krishna!

jaya sri krishna!

 

हिन्दू अब ये मूर्खता छोडें

Source: youtube.com/watch?v=eMYpEo0wyQg

By Raj Singh

 

(हिन्दू अब ये मूर्खता छोडें.)

 

भारत के जवान तो मरने ही थे,

जब हमारे ही देश के अंदर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते है,

तो हमले तो होंगे ही.

 

भारत के टुकड़े होने के नारे लगते है,

मुस्लिम रैलियों में पाकिस्तान का झंडा फहराते है,

इस्लाम-मुस्लिम ब्रदरहुड-जिहाद के नाम पर

आतंकवादियों को अपने घरों में शरण देते हो,

तो उन पाकिस्तानियों का होंसला जब भारत के लोग बढ़ाते है,

फिर हमले भी होंगे, हमारे जवान भी शहीद होंगे.

 

जब तक भारत भी, चीन और म्यंमार की तरह,

आतंकवाद की बजाय इस्लाम के खिलाफ कार्यवाही नही करता,

तब तक भारत सुरक्षित नही हो सकता.

वरना हमारे जवानों सहित आम नागरिक

आगे भी जिहाद के नाम पर बेमौत मरते रहेंगे.

 

जब इस्लाम के नाम पर अफगनिस्तान बना,

फिर पाकिस्तान, बंगलादेश,भूटान,मालदीव,

अब कश्मीर बनाने की कोशिश.

लेकिन 800 सालो से अत्याचार सहन कर रहे

हिन्दुओ को अभी भी अक्लल नहीं आई.

अब हमारे 40 जवान शहीद हुए ,

थोड़े दिन बाद फिर भूल जाएंगे(?),

जैसे मुम्बई में 350 लोगो की हत्या भूल गए थे.

 

इस्लाम में सबसे पहले दिमाग गिरवी रखा जाता है,

जो इन कन्वर्टेड मुस्लिमो (की प्रजा) का रखा हुआ है.

 

इनका मकसद तो क्लियर-साफ है,

ओर हिन्दू खुद ही इनकी दलील दी देते फिरते है

कि यह सच्चा मुसलमान नही हो सकता.

 

सच्चे मुसलमान के लिए जब इनकी किताब में ही लिखा है,

कि मूर्ति पूजको की हत्या करने वाला ही सच्चा मुसलमान है,

ओर मूर्ति पूजक तो हम हिन्दू ही है.

 

अगर मिला, तो वो मूर्ति पूजको को तो जरूर काटेगा,

तभी वह सच्चा मुसलमान होगा.

 

अब देख लेना, की आपको सच्चा मुसलमान ठीक लगता है या झूठा.

लेकिन इनकी किताब के कानून के हिसाब से

गैर मुस्लिमों का मरना निश्चित है.

 

हिन्दू राजाओ का इतिहास देख लो,

पृथ्वीराज चौहान ने 17 बार माफ् किया,

लेकिन महोमद गोरी ने

उसी माफ् करने वाले की आंखे निकाल ली थी.

 

फिर महोमद बिन कासिम से लेकर ओरंगजेब तक देख लो,

राम मंदिर तोड़ने से लेकर बाबर को,

इजराइल में यहूदी टेम्पल को गिराकर अलअसका मस्जिद बनाने का देख लो,

सोमनाथ मंदिर, कटासराज मन्दिर.

 

9वें सिक्ख गुरु साहब का शिष

इस्लाम के नाम पर ओरंगजेब ने उतारा,

 

ओर यह कन्वर्टेड दोगले तैमूर, खिलजी, बाबर, मो.बिन कासिम,

ओर सिक्ख गुरुओ के कातिल ओरंगजेब को

21वीं सदी के मुस्लिम अपना हीरो खलीफा मानते है.

 

10वें गुरु साहिब जी के पुत्रो, 2 साहिबजादों को

12 साल 14 साल के मासूम बच्चो को जिंदा दीवार में चुनवाया.

 

यह तो इतिहास में भी लिखा है,

ओर श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में भी है.

 

अफगानिस्तान में जो हिन्दुओ के साथ हुआ था वो कम था क्या?

फिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान, सिंध, पंजाब, कश्मीर, बंगालदेश में,

भूटान, मालदीव में है कोई हिन्दू ?

 

केरल में, पश्चिम बंगाल में, म्यंमार,आसाम में देख लो,

कातिल कानूनों वाली किताब में जब यह लिखा है

कि घात लगाकर हमला करें, या मोके का इंतजार करें.

 

यह तो वो सब कर रहे हैं.

लेकिन हिन्दू क्या कर रहे हैं?

अपने अंत अपनी बारी का इंतजार कर रहे हो तो करते रहो.

 

90के दशक में कश्मीरी पंडितों को चुन-चुन कर मारा गया

तब भारत सरकार, विपक्षी पार्टियों, मानवाधिकार,

मीडिया ओर नेताओ ने आंखों पर पट्टी बांध ली थी.

 

अब अपनी रक्षा हिन्दुओ को उसी तरह करनी होगी,

जैसे पंजाब में सिक्ख गुरुओ ने हिंदुत्व का ढिंढोरा फेंक कर

हिन्दुओ की रक्षा के लिए कृपाण उठाई थी,

ओर जनेऊ में धर्म व आत्मरक्षा के लिए चाकू डाल लिया था.

 

अरबी अनुयायी सिर्फ गद्दार कोम का धर्म मजहब

सिर्फ अरबी लुटेरों के रूल्स फोलोव करना है,

ओर मौका देखकर.

 

तब तक ईमान धर्म की बात करते है,

जब तक वो भला आदमी फिर से

उनके चंगुल बहकावे में नही आ जाता,

ओर हरामी सेकुलर लोग जब तक यह नही कहते

कि नही यार, सब एक जैसे मुसलमान नही होते,

पांचो उंगलियां बराबर नहीं होती.

 

ओर फिर अपने अरबी लुटेरों राक्षसों

आकाओ की दिखाई गई मंजिल की ओर फिर चल पड़ते है.

 

लेकिन इतिहास गवाह है, आज तक इनका यही मकसद रहा है,

की सबको अरबी सभ्यता के गुलाम बनाओ, या मार डालो,

ओर यह कर भी रहे है.

 

ओर हिन्दुओ ने फिर वही रट लगानी होती है,

नही यार पांचो उंगलियां बराबर नही होती.

 

(सच यह है कि ईस्लाम का देश मे होनो ही

हिन्दूओं के लिये जानलेवा, मान लेवा, माल लेवा खतरा है।

जय श्री कृष्ण

Hinduunation.com)

 

जहरीले जिहाद का ज़नून..

From: Vinod Kumar Gupta < >

जहरीले जिहाद का जनून…★            15.02.2019

★क्या यह उचित है कि दुश्मन के छदम युद्धों का सिलसिला बना रहें और हम उसे कायराना हमला कहकर निंदा करके अपने दायित्वों से भागते रहें ? निसंदेह केवल आक्रोशित होकर उत्साहवर्धक बयान तक सीमित रह जाने वाला नेतृत्व आज हमारे देश की नियति बन चुका है ।
★कल (14.2.2019) जम्मू-कश्मीर हाईवे पर अवंतीपोर के पास गोरीपोरा में सी.आर.पी.एफ. के 2500 सैनिकों से अधिक के काफिले पर लगभग 100 किलो आर.डी.एक्स. (विस्फोटक) से भरी “कार बम” बनी एक स्कॉर्पियो गाड़ी से आत्मघाती आतंकवादियों ने आक्रमण करके एक बार फिर हमको ललकारा है।

★अभी तक प्राप्त समाचारों के अनुसार इस जिहादी जनून में हमारे लगभग 40 जवानों का बलिदान हुआ और 25 से अधिक घायल हुए है। इस्लामिक आतंकवादियों के दुःसाहस को बार-बार कायराना हमला कहकर हम केवल शब्दवीर बन जाते है। जबकि ऐसे नरसंहारों से जिहादियों के हौंसले आसमान को छूने लगते है।
★हम शत्रुओं की जिहादी सोच को समझने के बाद भी अपनी रणनीति को प्रभावी बनाने का प्रयास ही नही करते। क्या यह हमारा राष्ट्रीय दुर्भाग्य नही है कि स्वतंत्रता के बाद भी हम दशकों से इस्लामिक आतंकवाद से जूझ रहें है। यह “जहरीला जिहाद का जनून” शतकों से यथावत विद्यमान है।
★हमारा शासन-प्रशासन व सभ्य समाज जिहादियों द्वारा बहाये गये निर्दोषों व मासूमों के बहते रक्त के प्रति तत्काल आक्रोशित होकर निंदा व भर्त्सना करने तक अपने को सीमित कर लेता है। आज सभ्य समाज की एक सामान वैश्विक विवशता है कि वे आतंकवादी घटना घटने के बाद शोकाकुल व एकजुट होकर श्रद्धाञ्जलि सभा करना व मोमबत्ती जलाना ही अपना कर्तव्य समझने लगा है।
★संभवतः  इससे उनका आक्रोश व प्रतिशोध ठंडा हो जाता हो,परंतु यह दुःखद है कि वे पुनः ऐसी ही दुर्घटनाओं की पुनःरावर्त्ति तक उदासीन हो जाते हैं। जबकि हम सबको जिहादियों की जहरीली मानसिकता को समझकर संघर्ष करने के लिए सजग रहना चाहिये। आज देश में आतंकवाद विरोधी “टाडा” या “पोटा” जैसा कठोर कानून बनाने की पुनः आवश्यकता है।
★आज देश का प्रत्येक नागरिक पाकिस्तानियों व देश में छिपे पाक परस्त षड्यंत्रकारियों के आक्रमणों से अत्यधिक दुखी है। पिछले कुछ वर्षों से ये जिहादी हमारे सैन्य व पुलिस ठिकानों को लक्ष्य बना कर निसंकोच हानि पहुँचा रहें हैं।
★भारत-पाक सीमाओं पर प्रति वर्ष सैंकड़ों बार होने वाला युद्धविराम उल्लंघन एवं आतंकवादियों की घुसपैठ भी हमको शर्मसार करती आ रही है। पिछले 40-45 वर्षों में सुरक्षाकर्मियों सहित लगभग 90 हज़ार देशवासियों को भी हम खो चुके हैं। जब हमारा भारत विकसित राष्ट्रों की श्रेणी आने की ओर अग्रसर है तो फिर हमकों कम से कम अपने मुकुट “जम्मू – कश्मीर”  को जिहादी जल्लादों से तो बचाना ही होगा ।
★विचार करना होगा कि 29 सितंबर 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक द्वारा शत्रुओं के लाँचिंग पैडों पर अपनी अद्भूत साहसिक रणनीति का परिचय देने के अब ढाई वर्ष उपरांत भी पाकिस्तानी सेना व उसके आतंकियों में भारतीय सेना का कोई भय नहीं ? वे बार बार हमारे क्षेत्रों में अकारण आक्रमण करने का दुःसाहस कर रहें हैं।
★ऐसी स्थिति में जब हमारे सैनिक व आम नागरिक का शत्रुओं की कुटिल चालों से बलिदान हुए जा रहा हैं तो इनसे प्रतिशोध लेने के लिए कोई अन्य ठोस आक्रामक नीति तो पुनः अपनानी ही होगी ? हम पाकिस्तानी सेना व आईएसआई के षडयंत्रों और हाफिज सईद व मसूद अजहर आदि आतंक़ियों के मुखियाओं के जिहादी संकल्प को क्यों नही समझना चाहते ?  क्या जिहादियों के इस जहरीले जनून को नष्ट किए बिना राष्ट्र की रक्षा हो पायेगी ?
★हमें अपनी सुरक्षा में हो रही कमियों व अन्य संदेहात्मक तत्वों की सच्चाई को समझना होगा। सुरक्षाबलों और सीमाओं पर बार – बार होने वाले आतंकी हमलों के पीछे छुपे देशद्रोही भेदियों व उनके साथियों को ढूँढना होगा। बिना किसी गुप्त सूचनाओं के कोई बाहरी शत्रु व घुसपैठिये हमारी सेनाओं के अतिसुरक्षित क्षेत्रों और सुरक्षाबलों के काफिले को निशाना बनाने में कैसे सफल हो सकते है ?
★हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि अनेक अवसरों पर पाकिस्तान व आतंकी संगठनों के स्थानीय संपर्कों को पकड़ा गया है। जम्मू-कश्मीर सहित देश के अनेक भागों में इस्लामिक आतंकवादियों के नेटवर्क सक्रिय है। जिहादी सोच के भटकाव में हज़ारों स्लीपिंग सेल व ओवर ग्राउंड वर्कर आतंकवादियों का सहयोग कर रहें है।
★पाकिस्तान गुप्तचर एजेंसी (आई.एस.आई.) की भी पर्दे के पीछे स्थानीय एजेंटों की सूचनाओं के आधार पर ऐसी आतंकवादी गतिविधियों को किर्यान्वित करवाने में बड़ी भूमिका होती है।
★हमें हमारी सेनाओं व सुरक्षाबलों की सजगता, सतर्कता व कर्तव्यपरायणता के प्रति कोई संदेह नही फिर भी क्या हम ऐसी आत्मघाती आक्रमणों को अपनी सीमाओं व सीमांत क्षेत्रों में योंही झेलते रहें ? ऐसी संकटकालीन स्थिति में हमारी सुरक्षा व्यवस्था की त्रुटियों का विश्लेषण अवश्य होता होगा और उसके उपाय भी विशेषज्ञों द्वारा सुझाये जाते होंगे फिर भी हम आहत होते रहें तो क्या इस पर राष्ट्रीय चिंतन नही होना चाहिये ? अब और अधिक धैर्य व संयम युद्धकालीन रणनीतिक कौशल के अभाव का नकारात्मक संकेत देगा ?
★आज श्री नरेंद्र मोदी जी जैसे कर्मठ प्रधानमंत्री के होने से देश की वैश्विक स्थिति सकारात्मक है तो क्यों न हमें कम से कम अपने जन्मजात शत्रु पाकिस्तान से सभी राजनैतिक , व्यापारिक व सांस्कृतिक  सम्बन्धों को तोड़ने का विकल्प तो अपनाना ही चाहिये। पाकिस्तानी घुसपैठियों व आतंकवादियों के प्रवेश पर अंकुश लगाने के लिए सड़क व रेल मार्गों को भी बंद करना उचित होगा।
★पीओके, कश्मीर व देश के अंदर व सीमाओं पर जितने भी आतंकियों के प्रशिक्षण केंद्र व अन्य अडडे हैं , सबको “सर्जिकल स्ट्राइक” के समान एक विशिष्ट अभियान चला कर विंध्वस करना होगा।
★इन सबके अतिरिक्त एक और महत्वपूर्ण कार्य भारत सरकार को “सिंधु जल साझेदारी संधि” को राष्ट्रीय आवश्यकता के अंतर्गत निरस्त करके उसके सारे जल पर पुनः अपना एकाधिकार करना चाहिये। जिससे शत्रु की कई नदियाँ स्वाभाविक रुप से सूख जायेगी जो एक बड़ा कूटनीतिक कदम होगा। लेकिन ऐसे आवश्यक निर्णयों के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में दृढ़ इच्छाशक्ति चाहिये। संभवतः मोदी जी ऐसा करने का साहसिक निर्णय ले सकते हैं।
★इन परिस्थितियों में विचार करना होगा कि निर्दोष लोगो की मौत को कोई भी सभ्य व्यक्ति, समाज ,समुदाय व धर्म कैसे स्वीकार कर सकता है ? क्या मदरसा शिक्षा प्रणाली में इतनी सामर्थ्य है कि मुस्लिम समुदाय के अपरिपक्व बचपन को तोते की तरह रटा-रटा कर उसमें “क़ाफ़िर” व “अविश्वासी”  के प्रति इतनी अधिक नफरत भर देती है कि वह “जन्नत की हूरो” के लालच में गैर मुस्लिमों के सर्वनाश करने को उद्वेलित हो जाता है।
★पुलवामा में हुए इस आतंकी हमले का मास्टर माइंड जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया ‘मौलाना मसूद अजहर’ के विषय में तो यहां तक कहा गया है कि वह 15 मिनट में  “जिहाद” के लिए मुस्लिम बालकों को आत्मघाती बम (फिदायीन) बनने को तैयार कर देता है। इस्लाम में “मदरसा शिक्षा” प्रायः अनिवार्य नहीं परंतु आवश्यक है। जिससे धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा मिलने से समाज में वैमनस्यता व अलगाववाद की भावना ही जहरीले जिहाद का कारण है।
★अब धर्म के नाम पर बार-बार निर्दोषो का बहने वाला लहू सभ्य समाज के लिये भयावह चुनौती बन चुका है। फिर भी सत्य, अहिंसा, धर्मनिरपेक्षता, सहिष्णुता व मानवता की बात करने वाले बड़े बड़े बुद्धिजीवी केवल शांति से रहने वाले उदार और सहिष्णु समाज को ही उपदेश देना जानते है ।
★क्यों नहीं कोई मानवतावादी बुद्धिजीवी मुस्लिम समाज की कट्टरता व असहिष्णुता को चुनौती देता ? क्यों नहीं कोई मदरसा शिक्षा प्रणाली को प्रतिबंधित करने की मांग करता ? क्या कभी कोई इस्लामी विद्याओं में आवश्यक परिवर्तन करवाने का साहस करेगा ?
★आज इस्लामिक आतंकवाद जिसे जिहाद (धर्मयुद्ध) भी कहा जाता है, एक वास्तविकता है और भारत सबसे अधिक इसकी भयानक चपेट में है। ऐसे में सेक्युलर कहे जाने वाले मानवतावादी शान्ति बनाये रखने में कैसे सफल हो सकते है ? इस्लामी मानसिकता के जहरीले जनून से भरे जिहादियों के सामने शान्ति का प्रस्ताव किसी मूर्खता से कम नहीं। ★भारत के साथ साथ विश्व के समस्त राजनीतिज्ञों व बुद्धिजीवियों को चिंतन करना होगा कि कौन समाज मिलजुल कर सहिष्णुता के साथ अहिंसक तरीके से रहना चाहता है और कौन कट्टरता के कारण असहिष्णु व हिंसक व्यवहार करने में विश्वास करता है।
★हम भारतवासी आखिर कब तक अपना रक्त बहा कर  पाकिस्तान व पाक समर्थित इस्लामिक आतंकवाद का दंश झेलने को विवश होते रहेंगे ? एक तरफा धार्मिक उन्माद से उपजे अमानवीय अत्याचारों की जड़ों को ढूंढ कर सूखा देने से वसुधैव कुटुम्बकम की धारणा को बल देना होगा।अन्यथा धार्मिक श्रेष्ठता की होड़ में जहरीले जिहाद के जनून से निर्दोषों व मासूमों का नरसंहार मानवता को कलंकित करता रहेगा ?

विनोद कुमार सर्वोदय
(राष्ट्रवादी चिंतक व लेखक)
गाज़ियाबाद

Criminal Negligence: The Tragedy Could Be Foreseen

From: Rajput < >

CRIMINAL NEGLIGENCETRAGEDY COULD BE FORESEEN
Yesterday it was the Day of Mourning in Bharat when in the West people were buying roses for Valentine Day.
The irony is that the tragedy was AVOIDABLE.
The way the soldiers were travelling NONCHALANCE in the Muslim majority State embroiled in militancy in Partitioned India reminds one of putting too many eggs in one basket and then crying out loud after falling on hard ground.
And with such a valuable cargo on the move along public roads in a State where terrorism is high, there was NO check or control beforehand along the route of travel to investigate any suspicious object, individual or vehicle parked along the route.
2,500 armed men, and their commanders, were having a happy ride as if travelling between Mumbai and Pune! “Sleepy nation, sleepy army!”
The price of NEGLIGENCE was 40 precious lives of “Defenders of Bharat” lost. The instant response by everyone was to blame Pakistan though the attacker was “home grown”, i.e., Indian subject! The criminals were the local police and civil administration who had NO clue whatsoever as to “who is who” within their own community and did not nab the killer before he struck.
When we think of Pakistan, we must also think of the “father” of Pakistan, MK Gandhi, who “went along” the looming Partition like a sheep being taken to abattoir. Accepting Pakistan also meant suffering the consequences of not only breaking up an ancient country where all were living in relative harmony together, but also dividing the Muslim community of India into three segments, ignoring the implications.
When “Gandhian” Bharat, with no commitment to Akhand Bharat, that has not dared to reject “Partition without condition or referendum”, is attacked in this way, it is Bharat alone to blame. Mentioning Pakistan again and again is to ignore the teachings of their Koran that makes Jihad against the Infidels compulsory duty for every Muslim.
Reality is that Hindustan, under the present Constitution, has NO identity, and with such a large number of MUSLIMS in it, is no different from the India of 1940 when “Pakistan Resolution” was passed in Lahore. For the following SEVEN years it was never challenged by “Father of Nation” Gandhi! Thus Gandhi and his followers (Hindus) “went along” with the threat of bloodshed as with the actual event on August 15, 1947 when PARTITIONED India went straight under the foot of traitor NEHRU.
Nehru had two different yardsticks, one for West Punjab and East Bengal (to be surrendered) and the other for Jammu & Kashmir State (to be defended at all cost)!
When he ordered “cease fire”, in Kashmir robbing the Jawans of victory, he ought to have been eliminated. But he lived on to put Article 370 in Constitution that “pampered” one State and “punished” all the others.
The FOLLOWING was not done by the subsequent governments of Partitioned India:
1.  Repeal Article 370;
2.  carry out radical population (demographic) adjustment to make the State a Hindu majority State. Settle Hindu/Sikh ex servicemen along the CEASE-FIRE line.
3.  Blow up the house of anyone who commits an act of terrorism.
Fortunately for the timid “rabbits who are riding the elephant”, there is precedence for each action suggested.
1. Adjusting the demography of the State. See Kaliningrad and Crimea in Russia.
2. Punishing the terrorists. See Israel.
3. Dealing with MK Gandhi and JL Nehru: See what the PEOPLE of Italy did to Mussolini and the PEOPLE of Romania did to Ceausescu.
Lastly, IMPROVE THE QUALITY OF SECURITY SERVICES who should have a profile of every POTENTIAL terrorist and grab him before he acts.
The Hindus should seem to be WARRIORS to deter the terrorists. Throughout history the weak have been kicked and ultimately overwhelmed and enslaved.
A Memorial should be erected where the attack took place and a much bigger Memorial ought to be erected in front of Rashtrapati Bhawan, New Delhi, to pay homage to the Dead of 1947 otherwise even these FORTY martyrs will be forgotten within days just like those TWO MILLION (of 1947).
J & K State should be put under Central administration forthwith till the demography is corrected as suggested above. History tells us that NO “Muslim majority” area, or country, can live in peace anywhere.
14 February should be declared “Day of Martyrs” and this loss of life yesterday, recalled every year publicly by the Supreme Commander of Bharat.
Rajput
15 Feb 19