गांधी पर कैसा गर्व ?

From: Vinod Kumar Gupta < >

➖ गांधी पर कैसा गर्व ➖

 

🔘➖आज भी भारत का अधिकांश समाज यह मानता कि गांधी जी की विचारधारा को मारा जा रहा है, पूर्णतः अतार्किक है, अशुद्ध है ।देश में आज भी “बुरा न बोल, न सुन, न देख ” की विचारधारा अहिंसात्मक होकर बहुसंख्यक वर्ग के भरोसे फल-फूल रही है।

🔘➖यह कहना भी अनुचित नहीं होगा कि गांधी जी की मुस्लिम पोषित विचारधारा आज भी राष्ट्र को सुदृढ़ व सफल बनाने में बाधक बनी हुई है।

🔘➖जो इस्लाम आज भारत के साथ साथ विश्व में आतंकवाद का पर्याय बन चुका है उसमें गांधी जी को क्या सत्य व अहिंसा के दर्शन हुए थे जो उन्होंने उनको वह पाठ पढ़ाने का कभी साहस नहीं किया?

🔘➖क्या अहिंसा का दर्शन करोड़ों भारतवासियों को आज भी कायरता का पाठ नहीं पढाता? क्या अहिंसात्मक मनस्थिति से अन्याय, अत्याचार व आतंकवाद को बढ़ावा नहीं मिला ?

🔘➖परिस्थितियां और वास्तविकता की अज्ञानता में आज भी करोड़ों भारतीय गांधी जी पर “गर्व” करते होंगे। परंतु राष्ट्र की अस्मिता पर अभिमान करने वाले करोड़ों भारतीयो को यह कौन समझायेगा कि राष्ट्रीयता के पतन का मुख्य कारण ‘मुस्लिम उन्मुखी राजनीति’ गांधी जी की देन नहीं थी?

🔘➖भारत की स्वतंत्रता से पहले का मुस्लिम पोषित इतिहास व विभाजन की पीड़ा को समझे बिना ‘गांधी’ पर गर्व करना उन लाखो निर्दोषो की आत्माओं के साथ विश्वासघात होगा, जो उस समय “गांधी – दर्शन” के कारण मुस्लिम धर्मान्धता का शिकार बनें थे।

🔘➖काश गांधी जी अंग्रेज़ो के प्रभाव में स्वतंत्रता के पश्चात् कश्मीर जाकर शेख अब्दुल्ला के घर न ठहरते और कश्मीर के राजा हरीसिंह से पाकिस्तान में विलय का सुझाव/आग्रह न करते तो संभवतः कश्मीर के भारत में बिना शर्त विलय हो जाने पर भी अभी तक विवादित अनुच्छेद 370 का समावेश नहीं होता और नहीं शीघ्रता में जनमत संग्रह के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ से कहना पड़ता? यह आत्मघाती काम नेहरु जी ने अंग्रेज़ो व गांधी जी की इच्छानुसार ही किया था।

🔘➖अंत में एक वाक्य से यह समझना और सरल होगा कि “गांधी भारत में सर्वोत्तम ब्रिटिश पुलिसमैन” थे जो नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अपनी पुस्तक INDIAN STRUGGLE ➖ 1920-1942 में एक ब्रिटिश महिला सांसद एलन विल्किसन को उद्द्दत करते हुए लिखा था और बर्लिन रेडियो पर भी 12 अक्टूबर 1942 में अपने भाषण में यह बात कही थी।

 

▶इनके विषय इतिहास से बहुत कुछ समझने को शेष है…

 

विनोद कुमार सर्वोदय

गाज़ियाबाद, 201001

उत्तर प्रदेश, (भारत)

भारत में रह रहीं तस्लीमा ने किया Tweet

From: Pramod Ageawal < >

भारत में रह रहीं तस्लीमा ने किया  Tweet

(I request Talisma to quit Islam formally and publicly, and set an example for other Muslims to follow. – Skanda987)

(9 Jun) नई दिल्ली: भारत में रह रहीं बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन ने एक विवादित ट्वीट किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि मैं फास्ट क्यों रखूं? मैं बेवकूफ नहीं हूं। गौरतलब है कि इन दिनों रमज़ान चल रहे हैं और मुसलमान रमज़ान के महीने में 30 दिन तक रोज रोज़ा रखते हैं। आपको बता दें कि तस्लीमा का विवादों से पुराना नाता रहा है। 51 साल की लेखिका तस्लीमा नारीवादी विषयों पर अपने प्रगतिशील विचार सामने रखने के लिए चर्चित रही हैं। उनका उपन्यास लज्जा भी काफी चर्चा में रहा और इसकी आलोचना भी हुई। बांग्लादेश में उनपर फतवा तक जारी किया जा चुका है। Why should I fast? I am not stupid.

 

https://t.co/MkcbLu5rBQ – taslima nasreen (@taslimanasreen) June 8, 2016 Is Mamataji fasting? Just curious.- taslima nasreen (@taslimanasreen) June 8, 2016 इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान जैसा बन रहा है बांग्लादेश: तस्लीमा नसरीन तस्लीमा को मिली जिहादियों से धमकी मुस्लिमों को पांच की बजाए दिन में एक बार नमाज पढ़ने की सलाह दे चुकी हैं तस्लीमा बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन ने नमाज पढ़ने को लेकर विवादित बयान दिया है। तस्लीमा ने कहा है किमुस्लिमों को 5 बार की जगह एक वक्त ही नमाज पढ़नी चाहिए। यही नहीं उन्होंने कहा है कि सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने की आजादी नहीं होनी चाहिए। तस्लीमा ने नमाज पर ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि ”स्कूल, कॉलेज, एयरपोर्ट और मार्केट सभी पब्लिक प्लेस पर प्रेयर रूम बंद होने चाहिए। आपको नमाज पढऩी है तो घर पर पढ़ें।” Ppl used to pray 50 times a day. Prophet went to the heaven by a winged horse& met god, asked him to reduce 50 to 5. Now time to reduce 5 to 1- taslima nasreen (@taslimanasreen)

 

March 12, 2016 अगली स्लाइड में पढ़ें तस्लीमा का पुराना विवादित बयान तस्लीमा बोलीं हिंदू थे हमारे पूर्वज अकसर विवादों से घिरी रहने वाली बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया यह बड़ा खुलासा किया कि उनके पूर्वज हिंदू थे और उनके एक पूर्वज का नाम हरधन सरकार, जिनका बेटा मिमेनसिंह (बांग्लादेश) में धर्मपरिवर्तन करके मुसलमान बन गया था। नसरीन ने ट्वीट करके कहा है, “मेरे हिंदू पूर्वज का नाम हरधन सरकार था। वे कायस्थ थे। उनके बेटे ने धर्मपरिवर्तन करके इस्लाम धर्म अपना लिया था। ये सूफी प्रभाव था? धर्म परिवर्तन करने के लिए वह मजबूर किए गए थे? मैं नहीं जानती।” अपने हिंदू प्रशंसकों के पूछने पर कि क्या वह हिंदू धर्म में लौटना पसंद करेंगी, लेखिका ने ट्वीट करके कहा, “मैं पहले ही तर्कवाद औऱ मानवतावाद में कन्वर्ट हो चुकी हूं। यह फाइनल है।” तसलीमा का जन्म 25 अगस्त, 1962 को डॉ रजब अली और उनकी पत्नी एदुल आरा (Edul Ara) के यहां मिमेनसिंह नाम के शहर में हुआ था। यह लेखिका तीन बार शादी कर चुकी हैं। उनका पहला विवाह बंगाली कवि रूद्र मोहम्मद शाहीदुल्लाह और दूसरा विवाह एक बंगाली पत्रकार नयीमुल इस्लाम खान से हुआ था। उनका तीसरा विवाह एक संपादक मिनार महमूद से हुआ था। बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरपंथियों ने उनके खिलाफ फतवा जारी कर दिया था। अपनी हत्या कर दिए जाने के डर से तसलीमा ने 1994 में बांग्लादेश छोड़ दिया और तभी से निर्वासन में जीवन बिता रही हैं। उन्हें 2007 में कोलकाता छोड़ने पर भी मज़बूर होना पड़ा, जब इस्लाम के खिलाफ लिखने की वजह से धार्मिक कट्टरपंथियों ने उनके लेखन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किए। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड नाम के एक संगठन ने तो मार्च 2007 में तसलीमा के सिर पर 5 लाख रुपये घोषित कर दिए। तसलीमा का बांग्लादेशी पासपोर्ट रद्द कर दिया गया था। तसलीमा ने अपनी जिंदगी के 10 साल यूरोप और अमेरिका में भी निर्वासन में बिताए। स्वीडन सरकार ने उन्हें नागरिकता भी प्रदान की, लेकिन फिर भी वह 2007 से पुलिस की सुरक्षा में दिल्ली में ही रह रही हैं।

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Hindi » तस्लीमा नसरीन

तारेक फतह, तस्लीमा नसरीन जैसों ने माहौल खराब किया : गुलाम नबी आजाद

 

राज्यसभा में सोमवार को कई सदस्यों ने कुछ टीवी चैनलों पर निशाना साधा और उन पर तनाव भड़काने, सांप्रदायिक आधार पर मतभेद कायम करने जैसे आरोप लगाए।

 

भारत में अल्पसंख्यक मुसलमान दंगे और रेप कर सकते हैं, बांग्लादेश में हिंदू ऐसा सोच भी नहीं सकते: तस्लीमा नसरीन अपने बयानों को लेक अक्सर चर्चा में रहने वाली बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। तस्लीमा ने कहा है कि भारत में अल्पसंख्यक मुसलमान दंगे और रेप कर सकते हैं लेकिन बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदू ऐसा करने के बारे में सोच भी नहीं सकते।

 

छिटपुट घटनाओं को लेकर भारत को असहिष्णु नहीं कहूंगी: तस्लीमा

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने शनिवार को कहा कि ‘कुछ खराब घटनाएं’ भारत को ‘असहिष्णु’ नहीं बना देती है और उनमें शामिल लोगों को अधिक समावेशी होने की ‘शिक्षा’ दी जानी चाहिए।

 

5 के बजाय दिन में एक वक्त ही नमाज पढ़ें मुस्लिम: तस्लीमा नसरीन

 

बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन ने नमाज को लेकर विवादित बयान दिया है। तस्लीमा ने कहा है कि मुस्लिमों को 5 बार की जगह एक वक्त ही नमाज पढ़नी चाहिए। यही नहीं उन्होंने कहा है कि सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने की आजादी नहीं होनी चाहिए। तस्लीमा ने ये बातें ट्वीट कर कही हैं।

 

हिंदू पुजारी की हत्या: तस्लीमा नसरीन ने कहा- ‘कट्टर इस्लामी नहीं चाहते कि हिंदू बांग्लादेश में रहें’

इस्लामिक स्टेट ने दावा किया है कि बांग्लादेश में भारत की सीमा से सटे एक मंदिर में बंदूक और चाकू का इस्तेमाल करके एक हिंदू पुजारी की नृशंस हत्या हिंदुओं के खिलाफ इस खूंखार संगठन का पहला हमला है। उत्तरी पंचागढ़ जिले के देवीगंज उपजिला में हुए इस हमले में दो श्रद्धालु भी घायल हो गये थे। घटना पर टिप्पणी करते हुए बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इस्लामिक स्टेट हिंदुओं को बांग्लादेश में नहीं रहने देना चाहता।

भारत में धर्मनिरपेक्षता और कट्टरवाद के विचारों के बीच टकराव : तस्लीमा

 

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने रविवार को कहा कि भारत में टकराव हिंदुत्व और इस्लाम के बीच नहीं बल्कि धर्मनिरपेक्षता और कट्टरवाद के विचारों के बीच है। तस्लीमा ने एक वीडियो संदेश में कहा ‘भारत में टकराव है, यह टकराव धर्मनिरपेक्षता और कट्टरवाद के दो विभिन्न विचारों के बीच है। मैं उनसे सहमत नहीं हूं जो सोचते हैं कि टकराव हिंदुत्व और इस्लाम के बीच है।’

भारत में ज्यादातर धर्मनिरपेक्ष लोग हिंदू विरोधी हैं : तस्लीमा नसरीन

 

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने लेखकों के दोहरे रवैये पर निशाना साधा है। छद्म धर्मनिरपेक्षता पर निशाना साधते हुए तसलीमा ने ‘बढ़ती असहिष्णुता’ के खिलाफ लेखकों के विरोध-प्रदर्शन पर सवाल खड़ा किया है।

शिवसेना के विरोध पर बोले गुलाम- ‘निराश हूं’, तस्लीमा ने कहा- ‘हिन्दू सऊदी अरब बनता जा रहा है भारत?’

मुंबई में 9 अक्टूबर को होने वाला कार्यक्रम रद्द किये जाने के बाद पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली ने निराशा जताई। वहीं बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने घटना को आपत्तिजनक बताते हुए भारत को ‘हिंदू सऊदी अरब’ बनता करार दिया है।

 

रूश्दी और तस्लीमा पश्चिम बंगाल में अनवांटेड : सुलतान अहमद

 

सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुल्तान अहमद ने कहा है कि राज्य सरकार का फैसला बंगाल की जनता की भावना के अनुसार था और भविष्य में रूश्दी एवं तसलीमा नसरीन को राज्य में कभी नहीं आने दिया जाएगा।

 

सुनील गंगोपाध्याय ने मेरा यौन शोषण किया : तस्लीमा

 

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बांग्ला साहित्य एकेडमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय पर यौन प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

न्यूड वाले ट्वीट पर भड़की पूनम

अपनी आलोचना के बाद किंगफिशर मॉडल पूनम पांडे ने बंगलादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को निशाने पर लिया है।

  • जाकिर नाईक पर तसलीमा का वार, कहा- 21वीं सदी में कर रहे हैं 7वीं सदी की बात
  • जाकिर नाईक पर तसलीमा का वार, कहा- 21वीं सदी में कर रहे हैं 7 वीं सदी की बात .

आतंकवाद के साथ अलगाववाद का हाथ

From: विनोद कुमार सर्वोदय < >

महोदय/ महोदया

➖हमारे देश के नागरिकों  द्वारा दिए जा रहें भारी राजस्व से हो रहा है देशद्रोही अलगाववादियों  व आतंकियों के आनंदमय जीवन के लिए  सरकारी सहायता का गोरखधंधा 1989 में आरम्भ की गई 2 योजनाओं में आवंटित धन के घोटालों से हो रहा है।इन घोटाले की अधिकृत  जानकारी  CAG द्वारा मार्च 2016 में  प्रकाशित 162 पेज की  रिपोर्ट से हुआ है। अशांत राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा संबंधी व्यय योजना  (SRE-P)  व पुलिस कर्मियों और विस्थापितों के पुनर्वास व सहायता के लिए बनाई गयी दूसरी योजना (SRE-RR) के अन्तर्गत जम्मू -कश्मीर को भारत सरकार ने क्रमशः  Rs. 4735.51 व  Rs.2472.45 करोड़  की आर्थिक सहायता दी गई थी।परंतु इन दोनों योजनाओं का धन अलगाववादियों की विदेश यात्राओं,सुरक्षा,फाइव स्टार होटल सुविधा,सरकारी कारें,निवास व कार्यालय और स्वास्थ आदि पर व्यय हुआ ।

➖यह भी कहना गलत नहीं होगा कि इन अलगाववादियों को मिली सरकारी सहायता से ही आतंकियों को पोषित किया जाता आ रहा है , जिससे पिछले 35 वर्षों में  5462 सुरक्षाकर्मियों व 16725 निर्दोष नागरिको की हत्याऐं हुई।पिछले 6 वर्षो से अलगाववादियों पर 100 करोड़ प्रति वर्ष केंद्र व राज्य सरकार द्वारा  व्यय के समाचार आये है वह संभवतः इन योजनाओं के घोटाले से अलग हो ।

➖क्या हमारी सरकार इतनी अंधी हो गई , कि वह दीमक की तरह देश को खोखला करने वाले अलगाववादियों व आतंकियों के प्रति बिलकुल निश्चिन्त ही नहीं , बल्कि उन सापों को दूध पिला कर उनके विषैली दंश से आहत भी हो रही है ।मुख्य रुप से पिछले लगभग 35 वर्षो से देश मज़हबी आतंकवाद “जिहाद” से पीड़ित है। इसमें जम्मू-कश्मीर के कुछ वरिष्ठ  अलगाववादियों के सहयोग को नकारा नहीं जा सकता, जिनको समय समय पर शत्रु देश पाकिस्तान का भी सहयोग मिल रहा है ।

➖कट्टरपंथी इस्लामिक “जिहाद” को पुरे देश में फैलाने के लिए आतंकियों ने कश्मीर को आधार बना कर देश के विभिन्न स्थानों के आतंकियों से मिलकर अपने नेटवर्क को जिस प्रकार बढ़ाया है उसमें इन अलगाववादियों की मुख्य भूमिका हो तो कोई आश्चर्य नहीं।इन आतंकियों के नेटवर्क को गुप्तचर विभागों की अनेक फाइलों में ढूंढा जा सकता है ।

➖परंतु अकर्मण्यता की स्थिति में आतंकियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही न होने से इनके हौसले बहुत बढ़ गए है ।सत्ता के लालच में कोई भी शासन-प्रशासन इस फैलती हुई जिहादी जड़ को संज्ञान में ही नहीं लेता ? क्योंकि हमारे राजनेताओं की प्राथमिकता “देश की सत्ता” पाने के लिए राजनीति करने की है न कि “देश की संप्रभुता ” की रक्षा के लिए ?

➖इस आतंकवाद के लिए बार बार हमारी सरकार केवल पाकिस्तान को दोष देती है पर यह नहीं सोचती की पहले अपने ही घर में पल रहें सापों को दूध पिलाना बंद करके उनके विष को नष्ट किया जाय। जिस प्रकार दीमक प्रायः दिखाई नहीं देती, वह पेड़ को अंदर ही अंदर चुपचाप खोखला करती रहती है और पता जब चलता है, जब पेड़ अचानक गिरता है । कुछ यही हाल अलगाववादियों व आतंकवादियों का भी है उनको पोषित करने वाली अनेक सहायतायें भी चुपचाप पुरे देश में आतंकवाद का विस्तार करने में लगी हुई है।

➖अतः केंद्र सरकार को समस्त ऐसी योजनाओं पर रोक लगा कर इन देशद्रोही अलगाववादियों के “प्रिवीपर्स” बंद करके काला पानी के समान कठोर सजा देनी होगी तभी इन देशद्रोहियों में भय व्याप्त होगा और इस्लामिक आतंकवाद से मुक्ति मिल सकेगी ?अन्यथा वार्तायें चाहे पाकिस्तान से हो या अलगाववादियों से सब व्यर्थ होती रहेगी और  समाज व राष्ट्र को जिहादरुपी दीमक अंदर ही अंदर खोखला करती रहेगी।

✍विनोद कुमार सर्वोदय
गाज़ियाबाद

ईसाई संस्थाओं को कांग्रेस सरकार ने बांटें करोड़ों!

From: Pramod Agrawal < >

 

(1) हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने वाली ईसाई संस्थाओं को कांग्रेस सरकार ने बांटें करोड़ों!

(2) इसाई एजेंडा चलाने वाली टेरेसा थी कट्टरपंथी और धोखेबाज : तसलीमा नसरीन

हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने वाली ईसाई संस्थाओं को कांग्रेस सरकार ने बांटें करोड़ों!

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार क्या राज्य में ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रही है? यह सवाल खड़ा हुआ है एक आरटीआई से पता चला है कि कांग्रेस में सिद्धारमैया की सरकार बीते कुछ समय में ईसाई संस्थाओं को करोड़ों रुपये दिए हैं। ये पैसे राज्य में बने चर्च की मरम्मत और सुंदरीकरण के नाम पर दिए गए हैं। इसके अलावा बड़ी रकम नए चर्च और क्रिश्चियन कम्युनिटी हॉल बनाने के लिए दी गई है। ऐसा करना संविधान की मूल भावना का उल्लंघन है, क्योंकि सेकुलर देश होने की वजह से कोई सरकार धार्मिक संस्थाओं को पैसा नहीं दे सकती। जाहिर है यह सवाल उठता है कि खुद को सेकुलर पार्टी बताने वाली कांग्रेस और उसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी को क्या कर्नाटक सरकार को रोकना नहीं चाहिए। या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि ईसाई संस्थाओं की जेब भरने का काम आलाकमान के इशारे पर ही हो रहा है?

 

ईसाई धर्म को बढ़ावा देने का एजेंडा?

26 मार्च 2016 को आरटीआई के तहत कर्नाटक सरकार से कुल 4 सवाल पूछे गए। ये सवाल सरकारी आदेश नंबर- MWD 318MDS2011 (दिनांक 16/01/2012) के हवाले से राज्य अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से चर्च को दिए जा रहे फंड के बारे में थे।

 

पहला सवाल– चर्च की मरम्मत के लिए सरकार की तरफ से साल दर साल कितना फंड दिया गया?

दूसरा सवाल– उन ईसाई संस्थाओं/चर्च के नाम और पते बताएं जिन्हें मरम्मत के नाम पर सरकार से पैसे मिले हैं?

तीसरा सवाल– नए चर्च बनाने पर साल दर साल राज्य सरकार ने कितने पैसे जारी किए?

चौथा सवाल– उन ईसाई संस्थाओं/चर्च के नाम और पते बताएं जिन्हें नए चर्च बनाने के लिए पैसे दिए गए?

 

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इसाई एजेंडा चलाने वाली टेरेसा थी कट्टरपंथी और धोखेबाज : तसलीमा नसरीन

 

नई दिल्ली- भारत में निर्वासित जीवन बिता रही चर्चित बंगलादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन तथाकथित संत घोषित होने जा रही मदर टेरेसा पर मार्च में ट्वीट कर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

 

 

 

 

 

 

 

गौरतलब है कि तस्लीमा पहले भी टेरेसा पर सवाल उठाती रही है। पिछले साल फरवरी में उन्होंने मदर टेरेसा को मूर्ख बताते हुए कहा था कि वह गरीबों की नहीं गरीबी की हमदर्द थी। तब उन्होंने कहा था कि जब वे आंध्र ज्योति तेलगू की ब्यूरो चीफ थी तो 1975 में उन्होंने हैदराबाद में मदर टेरेसा का इंटरव्यू किया है। उन्हें टेरेसा बेवकूफ लगीं थीं।

 

तब नसरीन ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि मदर टेरेसा धोखेबाज और कट्टर थीं। वह गरीबी और दुख को आध्यात्मिक करार देती थीं। उन्हें गरीबों से नहीं गरीबी से हमदर्दी थी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में वेटिकन ने घोषणा की थी कि वह ‘कथित रूप से’ सेवा कार्य करने वाली और गरीबों की भलाई के लिए काम करने वाली मदर टेरेसा को संत की उपाधि देगा।

 

वेटिकन के इस फैसले पर कई लोगों ने सवाल खड़े किये हैं क्योंकि टेरेसा पर आरोप था कि वो भी मिशनरियों की तरह सेवा की आड़ में धर्म परिवर्तन का घृणित खेल चलाती थी। ऐसे तथ्यों की भी कमी नहीं है जो यह साबित करते हैं कि टेरेसा का एजेंडा सेवा नहीं बल्कि ईसाईयत का प्रचार था। मदर टेरेसा पर ऐसे भी आरोप लगे थे कि वह दर्द से कराहते लोगों की सेवा करने के बजाय उन क्षणों का आनंद लेती थी और पीड़ित के दर्द से कराहने को उसे जीजस का किस करना बताती थी।

 

तस्लीमा ने टेरेसा को संत घोषित करने के फैसले पर अफ़सोस जताते हुए ट्वीट किया है कि…. इसाई एजेंडा चलाने वाली टेरेसा थी कट्टरपंथी और धोखेबाज ।

 

About Pak-India Conflict – Videos

From: Pramod Agrawal < >

 

xx- PAKISTANI INTELLECTUALS  TALK ABOUT PAK-IND CONFLICTS
  {TOP BOTH > in  ENGLISH}   Others > MIXED
XXXXX-BY PAKISTANI-XX–IN ENGLISH
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XXXXX-BY PAKISTANI-XX–IN ENGLISH
XXXXX-BY PAKISTANI-XX–IN ENGLISH
XXXXX-BY PAKISTANI-XX–IN ENGLISH
TAREK FATAH A PAKISTANI – but  ANTI PAKISTAN
IS LIVING IN CANADA UNDER PROTECTION BECAUSE
OF DEATH THREAT ON HIS HEAD by Paki Muslims
 
XXXXPAKISTANISXXXXXX
XXX-ENGLISH & URDU-MIXEDXX
The book is written  by Haqqani

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13:22

About M. Mehbooba by S. Swami

From: Pramod Agrawal <>

Mufti Mehbooba has her old ‘terrorist’ and ‘anti-Hindu’ link – Dr Subramanian Swamy

“What is going in the valley is nothing but a Pak sponsored Jihad in Kashmir”

Subramanian Swamy thinks ‘Mehbooba as incorrigible’ and equates Mehbooba Mufti with ‘tail of a dog’.

dr-swamy-on-mufti-mehboobas-terrorlink

New Delhi : Swamy again hit straight the role of J&K Chief Minister for a peace process in the present unrest in the State. Senior BJP leader and nominated Rajya Sabha MP Dr Subramanian Swamy equated Jammu and Kashmir chief minister Mehbooba Mufti with the “tail of a dog, which can’t be straightened” in a interview of a TV channel.
“There should be President’s rule in her place …she is like tail of a dog, which can’t be straightened,” said Swamy , in clear defiance of the party which is a partner in the PDP-led coalition government.
“Mehbooba kabhi sudhregi nahi” (Mehbooba will never change,)” said Swamy and added, “She has old links with terrorists”. He said the BJP formed a coalition government with Mehbooba on the hope she will “reform” herself.
Swamy’s comments fly in the face of the synergy between Mehbooba and PM Narendra Modi as was seen when they met last week and agreed on the common goal to combat terrorism and address popular demands.
“Laldenga was a terrorist but he became Mizoram chief minister and ran a successful government,” said Swamy. The Rajya Sabha MP wanted to clarify that even once terrorist could run a Govt. after rejecting the subversive attitude, but Mehbooba failed to change.
When asked whether his remark (as published in a TV channel) will put BJP in a trouble, Swamy told HENB this “I am not that person to reject truth for any cheap politics. Mehbooba Mufti and her father were never a friend of the uprooted Kashmiri Hindupeople and the pandits anyway. They had alleged link with separatists in Kashmir and this is very clear now with her intention to sit with the separatist again.”
“What is going in the valley is nothing but a Pak sponsored Jihad in  Kashmir”, the veteran statesman of India told HENB.

राष्ट्र-चिंतन – क्या मदर टेरेसा संत थीं ?

From: Pramod Agrawal < >

(1) राष्ट्र-चिंतन

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1929 में गुलाम भारत में ईसाइयत के प्रचार-प्रसार के लिए वेटिकन सिटी ने अपना कर्मचारी बना कर मदर टरेसा को भेजा था। मदर टरेसा का समर्पण किसके प्रति था?मदर टरेसा का समर्पण ‘‘ वेटिकन सिटी ‘‘ के प्रति था। वेटिकन सिटी की ही वह कर्मचारी थी। वेटिकन सिटी कथैलिक ईसाई धर्म की राजधानी है और जिसका सर्वेसर्वा पोप होता है। मदर टरेसा का समर्पण उसी वेटिकन सिटी के प्रति था जिस वेटिकन सिटी के अनुआयियों ने भारत को गुलाम बनाया था, मदर टरेसा का समर्पण उसी वेटिकन सिटी के प्रति जिस वेटिकन सिटी के अनुआयियों ने अफ्रीका में छुआछूत और रंगभेद का नंगा नाच किया था और जिसके विरोध में नेल्सन मंडेला को 30 सालों तक जेल में रहना पड़ा था, मदर टरेसा का समर्पण उसी वेटिकन सिटी के प्रति था जिसके अनुआयी अमेरिका पर कब्जा कर अमेरिका के आदिवासी और मूल निवासी रेड इंडियनो की संस्कृति को जमीेदोज की थी रेड इंडियन आज तक अमेरिका में रंगभेद के शिकार हैं, जिनके साथ पशुवत व्यवहार होता है और जिन्हें राजनीतिक तौर पर हाशिये पर रखा गया है।, मदर टरेसा का समर्पण उसी वेटिकन सिटी के प्रति था जिस वेटिकन सिटी के अनेको पादरी अमेरिका और यूरोप में बाल यौन शोषण के आरोपी रहे हैं जिन्हें सजा के लिए कानून को सौंपने की जगह उनके नाम और पते बदल कर भारत और अफ्रीकी देशों में भेज दिये गये थे। वेटिकन सिटी आज भी बाल यौन शोषण के आरोपी पादरियों की असली पहचान बताने से इनकार करती रही है। अनाथ बच्चों को ईसाई मिशनरियां किस प्रकार से ईसाई बनाती हैं, यह कौन नहीं जानता है।

भारत में अनेकानेक संगठन और हस्तियां रहें हैं जिन्होंने मानवता की सेवा में सर्वश्रेष्ठ योगदान देने की सफलतम कोशिश की है पर इन्हें मदर टरेसा जैसा सौभाग्य नहीं मिला। रामकृष्ण मिशन ने अनाथ बच्चों की सेवा में बडा योगदान दिया है। हरिद्वार और वाराणसी में बीमार, बुजुर्ग और असहाय तथा अनाथ महिलाओं की रक्षा और उनके जीवन को सुखमय बनाने में कई संगठन और कई धार्मिक हस्तियां लगी हुई हैं पर इन संगठनों और इन हस्तियों की चर्चा तक नहीं होती है। इन्हें विदेशी फड नहीं मिलते हैं और न ही देशी सरकारों से फंड मिलते हैं। पर वेटिकन सिटी और अन्य ईसाइयत के संगठनों को न केवल विदेशी फंड मिलते हैं और बल्कि देशी सरकारों से भी करोड़ों-अरबों का फंड मिलता है। भारज में अंधविश्वास को दूर करने और शती प्रथा जैसी हिंसक धार्मिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए राजा राम मोहन राय ने बड़ी भूमिका निभायी थी, रामकृष्ण परमहंस और दयानंद सरस्वती ने धार्मिक पाखंड को समाप्त करने के लिए बडी भूमिका निभायी थी। पर क्या रामकृष्ण परमहंस और दयानंद सरस्वती को नोबेल पुरकार मिला था? उत्तर नहीं। पर अधविश्वास के प्रतीक चमत्माकर को स्थापित करने वाले,विदेशी पैसे पर सेवाभाव करने वाले, गुलाम भारत पर एक शव्द भी न बोलने वाले को न केवल नोबल पुरस्कार मिलता है बल्कि वेटिकन सिटी संत भी घोषित कर देता है।

(2) क्या मदर टेरेसा संत थीं?

केथोलिक संप्रदाय के विश्व-गुरु पोप फ्रांसिस आज मदर टेरेसा को संत की उपाधि प्रदान करेंगे। मदर टेरेसा भारतीय नागरिक थीं। इसलिए उन्हें कोई संत कहे और विश्व-स्तर पर कहे तो क्या हमें अच्छा नहीं लगेगा? वैसे भी उन्हें भारत-रत्न और नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका है। उनके योगदान पर कई पुस्तकें भी आ चुकी हैं और छोटी-मोटी फिल्में भी बन चुकी हैं।

लेकिन मेरे मन में आज यह जिज्ञासा पैदा हुई कि मालूम करुं कि केथोलिक संप्रदाय में संत किसे घोषित किया जाता है? संत किसे माना जाता है? दो शर्तें हैं। एक शर्त तो यह है कि जो ईसा मसीह के लिए अपना जीवन समर्पित करे और दूसरी यह कि जो जीते-जी या मरने के बाद भी कम से कम दो चमत्कार करे। टेरेसा ने ये दोनों शर्तें पूरी की हैं। इसीलिए पूरी खात्री करने के बाद रोमन केथोलिक चर्च आज उन्हें ‘संत’ की सर्वोच्च उपाधि से विभूषित कर रहा है।

जहां तक ‘चमत्कारों’ की बात है, यह शुद्ध पाखंड है। विज्ञान, विवेक और तर्क की तुला पर उन्हें तोला जाए तो ये चमत्कार शुद्ध अंधविश्वास सिद्ध होंगे। टेरेसा का पहला चमत्कार वह था, जिसमें उन्होंने एक बंगाली औरत के पेट की रसौली को अपने स्पर्श से गला दिया। उनका दूसरा चमत्कार माना जाता है, एक ब्राजीलियन आदमी के मष्तिष्क की कई गांठों को उन्होंने गला दिया। यह चमत्कार उन्होंने अपने स्वर्गवास के 11 साल बाद 2008 में कर दिखाया। ऐसे हास्यास्पद चमत्कारों को संत-पद के लिए जरुरी कैसे माना जाता है? ऐसे चमत्कार सिर्फ ईसाइयत में ही नहीं हैं, हमारे भारत के हिंदू पाखंडी, स्याने-भोपे और बाजीगर भी दिखाते रहते हैं और अपनी दुकानें चलाते रहते हैं।

जहां तक मदर टेरेसा की मानव-सेवा की बात है, उसकी भी पोल उन्हीं के साथी अरुप चटर्जी ने अपनी किताब में खोलकर रखी है। उसने बताया है कि मदर टेरेसा का सारा खेल मानव-करुणा पर आधारित था। वे अपने आश्रमों में मरीजों, अपंगों, नवजात फेंके हुए बच्चों, मौत से जूझते लोगों को इसलिए नहीं लाती थीं कि उनका इलाज हो सके बल्कि इसलिए लाती थीं कि उनकी भयंकर दुर्दशा दिखाकर लोगों को करुणा जागृत की जा सके। उनके पास समुचित इलाज की कोई व्यवस्था नहीं थी और मरनेवालों के सिर पर पट्टी रखकर उन्हें वे छल-कपट से बपतिस्मा दे देती थीं याने ईसाई बना लेती थीं। मरते हुए आदमी से वे पूछ लेंती थीं कि ‘क्या तुमको स्वर्ग जाना है?’ इस प्रश्न के जवाब में ‘ना’ कौन कहेगा? ‘हां’ का मतलब हुआ बपतिस्मा। किसी को दवा देकर या पढ़ाकर या पेट भरकर बदले में उसका धर्म छीनने से अधिक अनैतिक कार्य क्या हो सकता है? कोई स्वेच्छा और विवेक से किसी भी धर्म में जाए तो कोई बुराई नहीं है लेकिन इस तरह का काम क्या कोई संत कभी कर सकता है? 1994 में लंदन में क्रिस्टोफर हिचंस और तारिक अली ने एक फिल्म बनाई, जिसमें मदर टेरेसा के आश्रमों का आंखों देखा हाल दिखाया गया था। हिचंस ने फिर एक किताब भी लिखी। उसमें बताया कि कैसे हैती के बदनाम और लुटेरे तानाशाह ज्यां क्लाड दुवालिए से टेरेसा ने सम्मान और धनराशि भी हासिल की। लंदन के राबर्ट मेक्सवेल और चार्ल्स कीटिंग-जैसे अपराधियों से उन्होंने करोड़ों रु. लिये। उन्होंने आपात्काल का समर्थन किया और भोपाल गैस-कांड पर लीपा-पोती की। धन्य है, मदर टेरेसा, जिनके संत बनने पर हमारे भोले प्रचार प्रेमी नेता वेटिकन पहुंच गए हैं।

 

एशिया के मुसलमानों की दुनिया में औकात

From: Pramod Agrawal < >

 

एशिया के मुसलमानों की दुनिया में औकात :-

 

(१) एशिया ( भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका ) के मुसलमान अपने आप को अरबीयों का वंशज मानते हैं और अपने को बढ़ चढ़ कर अरबी दिखाने के जुनूनी होते हैं, लेकिन अरब देशों के असली शेख मुसलमान इनको मुसलमान ही नहीं मानते । ( क्योंकि जैसे एक हिजड़ा भी अपने आप को औरत की तरह सुंदर दिखाने के चक्कर में किसी औरत से भी ज्यादा कमर मटकाता है और नज़ाकत दिखाता है लेकिन उसे ये पता नहीं कि असली औरत और मर्द उसे हिजड़ा ही समझते हैं चाहे कितना भी वो ज़ोर लगा ले ठीक वही हाल एशिया के मुसलमानों का है )

 

(२) अरबी लोग एशिया के मुसलमानों को गंदा, गलीज़, नापाक, हरामी, Converted, कुत्ता, हैवान आदि समझते हैं और इन्हीं शब्दों से संबोधित करते हैं । अधिकतर वो इनको अपने बाप दादा परदादाओं की गलतियों का नतीजा समझते हैं और वहाँ पर किसी भी एशिया के मुसलमान को कोई अरबी शेख अगर बुलाना चाहे तो वो उसे “या अब्दी” कहकर बुलात है (अब्दी का मतलब होता है गुलाम)

 

(३) वहाँ पर कोई भी एशिया का मुसलमान अगर पचास साल भी अपनी ज़िन्दगी के लगाकर वहाँ काम करे तो भी उसे वहाँ पर न तो ज़मीन खरीदकर रहने का अधिकार मिलता है न ही उसे वहाँ की नागरिकता मिलती है ।

 

(४) कोई भी एशिया का मुसलमान वहाँ पर किसी अरबी मुसलमान औरत से शादी नहीं कर सकता और अगर गलती से करने की कोशिश भी करे तो मार दिया जाता है ।

 

(५) कोई भी अरबी शेख जब चाहे वहाँ पर किसी भी एशिया के मुसलमान की लड़की को मज़े के लिए उठवा सकता है और उसे अपनी हसीन रातों की नमकीन बेगम बनाकर उसके मज़े लूट सकता है लेकिन किसी एशिया के मुसलमान की वहाँ हिम्मत नहीं पड़ती कि ऐसा करने पर उन्हें रोक पाए ।

 

(६) वहाँ पर अधिकतर एशिया के मुसलमानों को बकरियाँ चराने, ऊँट चराने या अन्य किसी कामों में लगाया जाता है और बहुत से एशिया के मुसलमान वहाँ अरबीयों का मल मूत्र भी उठाते हैं । क्योंकि वे लोग इनको मल मूत्र से भी गंदा और नापक समझते हैं ।

 

(७) एशिया से गए हाजियों के साथ वहाँ पर बहुत ही गंदा व्यवहार किया जाता है । बाज़ार में लेनदेन के समय अरबी उनसे बहुत बदतमीज़ी से पेश आते हैं । उनको वहाँ पर अरबी हाजियों से दूर ही कैंप बनाने की इजाज़त है । कोई भी एशिया का मुसलमान वहाँ अरबी हाजियों के साथ अपने कैंप नहीं बना सकता ।

 

(८) एक बार हज के दौरान कैंपों में भयंकर आग लग गई थी तो सभी हाजियों में अफरा तफरी मच गई तो वहाँ एशिया के मुसलमानों को उनके क्षेत्र से निकलने की इजाज़त न दी गई क्योंकि वहाँ के अधिकारी चाहते थे कि अरबी हाजियों को इन नापाकों की भगदड़ से कोई परेशानी न हो जिसका नतीजा ये निकला कि पाकिस्तान और भारत के हाजी वहाँ जलकर मर गए थे लेकिन उनकी मौत पर किसी अरबी को अफसोस भी नहीं हुआ और हज यात्रा ज्यों की त्यों चलती रही ।

 

(९) अभी ताज़ा घटना में हज यात्रा में जब शैतान नामक बड़े पत्थार के टीले को पत्थर मारते वक्त हाजीयों में भगदड़ मच गई तो वहाँ बहुत से हाजी मारे गए । लेकिन वहाँ मक्का की सरकार ने अरबी हाजियों की लाशों को बहुत ही सम्मान के साथ उठाया और एशिया के हाजियों को क्रेन से उठावाया गया जैसे कि किसी कचरे को उठवाया जाता है ।

 

(१०) अरबी शेख वहाँ पर एशिया के मुसलमानों को गुलामों की तरह रखते हैं और अगर उनसे कोई गलती हो जाए तो उन्हें कुत्ते की तरह मार पीटकर मज़े ले लेकर मारते हैं और बहुत दिनों तक खाना भी नहीं देते । ये अरबी शेख बांग्लादेशी मुसलमान को मार रहा है और अपने पैर चटवा रहा है :- https://www.youtube.com/watch?v=puPSg-H9ggc ऐसे ही बहुत से वीडीयों आप You Tube पर देख सकते हैं ।

 

(११) एशिया के मुसलमान जहाँ अरबीयों पर दुनिया में हो रहे अत्याचारों के लिए अपनी छातियाँ पीटते हैं, मातम करते हैं और सड़कें जाम करके आसमान सिर पर उठा लेते हैं । जैसे कि इज़राईल के फिलिस्तीन पर हमले के लिए, अमरीका के इराक पर हमले के लिए, फ्रांस के मुसलमानों पर प्रतिबन्ध लगाने आदि मसलों पर खूब मतम मचाते हैं लेकिन वही अरबी इनपर आई आपत्ति के लिए इनपर थूकते भी नहीं । जैसे पेशावर में स्कूल पर हमला हुआ तो किसी अरबी ने कोई मातम नहीं किया, म्यांमार में रोहिंगया मुसलमानों को मारा गया तो किसी अरबी ने एक मोमबत्ती तक नहीं जलाई । ऐसे और भी कई मौके हैं अरबीयों को इनकी बिलकुल भी परवाह नहीं है ।

 

(१२) साऊदी के प्रिंस अब्दुल्लाह और मिश्र के एक मौलवी ने भी अभी हाल ही में ये बयान दिया है कि भारत और पाक के मुसलमान अपने आप को हमसे मिलाकर न देखें, वे हमा शुद्ध खून वालों की तरह अरबी नहीं हैं कनवर्टिड होने से हमारे कुत्ते हैं । वे हमसे दूर रहें ।

 

(१३) कोई एशिया का मुसलमान अगर वहाँ जकर किसी अरबी के सामने गलती से जकर ये बोल दे कि “हमने हिन्दोस्तान पर 1000 साल तक राज किया है” तो पहले तो वो अरबी उसे गंदी गंदी गालियाँ देगा और उसके मूँह पर थूकते हुए बोलेगा कि “जो किया है हमने किया! तुम हो ही कौन हरामी ? तुम हमारी नाजायज़ औलादें हो जो न तो अपने मज़हब और देश के वफादार रह सके और न किसी और के” । ऐसा ही कुछ हुआ था पकिस्तान की आवाज़ कहे जाने वाले डा. इकबाल के साथ जिसे उर्दू बोलने के कारण गुलामों की ज़ुबान बोलने वाला गलीज़ कहा गया और तभी उसने आकर भारत में ये गीत बनाया “सारे जहाँ से अच्छा ! हिन्दोस्ताँ हमारा” ।

 

(१४) पाकिस्तान के पूरा ज़ोर लगाने पर भी उसे अरब लीग में शामिल नहीं किया गया था । जिसका मुख्य कारण अरबीयों की एशिया के कनवर्टिड मुसलमानों के प्रति नफरत ही था ।

 

(१५) अगर वहाँ अरब देश में किसी ATM Machine पर एशिया के मुसलमानों की पैसे निकलवाने के लिए लम्बी लाईन लगी हो । तो कोई अरबी शेख आकर बिना लाईन में लगे ही पैसे निकलवाकर ले जायेगा और किसी एशियाई मुसलमान की हिम्मत नहीं होगी की उसको थोड़ा सा भी कुछ बोल जायेगा । वहाँ किसी अरबी शेख से बैर ले लेना मानों मौत क बुला लेना है । और किसी से पंगा हो भी जाए तो अगर उसने एशिया के मुसलमान को सिर्फ लात और जूते से बुरी तरह मारकर और अपनी थूक चटवाकर छोड़ दिया तो मानों बहुत बड़ा एहसान कर दिया क्योंकि वहाँ वह कम से कम हत्या तक कर डालते हैं और सरकार भी कुछ नहीं कहती ।

 

(१६) एशिया के मुसलमान इतने जाहिल होते हैं कि वहाँ अरबीयों की हर चीज़ को पाक ही समझते हैं वहाँ किसी सड़क पर कोई अरबी में लिखी कोई चीज़ पड़ी हो तो उसे भी पाक समझकर उठाकर चूम लेते हैं चाहे उसमें गंदी और अश्लील बातें ही क्यों न लिखी हों ।

 

(१७) एशिया के मुसलमान इतनी भयंकर मानसिक गुसामी में जी रहे हैं कि अरब की तर्ज पर अपने देशों का हाल बनाने में तुले हुए हैं । जैसे पाकिस्तान में बँटवारे के वक्त लाहौर में सभी पीपल के पेड़ उखाड़कर खजूर के पेड़ लगा दिये गए क्योंकि हुज़ूर के मुल्क में खजूर के पेड़ हैं, पाकिस्तान या भारत की किसी सब्जी बेचने वाली दुकान जिसे मुसलमान चलाता हो ज्यादातर लौकी की सब्जी को सारी सब्जियों से ऊपर रखा जाता है चाहे वो सड़ भी जाए तो भी फेंका नहीं जाता खा लिया जाता है क्योंकि रसूल साहब लौकी खाते थे, लम्बी दाढ़ियाँ और कपड़े से शरीर ढकना अरबी देशों में इसलिए ज़रूरी है क्योंकि वहाँ रेत के भयंकर तुफान आते हैं और ऐसा न करने पर त्वचा तक छील देते हैं इसी कारण औरतें वहाँ पर हिज़ब पहनती हैं, लेकिन एशिया के मुसलमान बिना सोचे समझे ही उनकी नकल करके सब पहनते हैं और दाढ़ीयाँ रखते हैं, अरब देशों में पानी की बहुत किल्लत होती है जिसके कारण पानी बचाना पड़ता है और अरबी कम नहाते धोते हैं लेकिन एशिया के मुसलमान पानी सम्पन्न देशों में भी अरबीयों की नकल करते हुए नहाने से बचेंगे और पत्थर से पिछवाड़ा साफ करेंगे और बदबूदार रहेंगे, नमाज़ पढ़ते वक्त अरबी लोग कई रह की सलाह बाँधते हैं ( उठक बैठक करना ) क्योंकि कपड़ों पर बार बार रेत लग जाती है जिसे उतारना पड़ता है लेकिन एशिया के मुसलमान बिना सोचे ही वैसी उठक बैठक नमाज़ के वक्त करते हैं । ऐसी ही कई बातें हैं जिसमें एशिया के मुसलमान अरबीयों की बिना सोचे नकलें करते हैं ।

 

(१८) ये तो एशिया के मुसलमानों की बात रही । इससे भी अधिक भारत के मुसलमानों को पाकिस्तान में भी नीची नज़रों से देखा जाता है । वहाँ पर इनको उर्दू बोलने वाले मुहाज़िर बोला जाता है । बँटवारे के वक्त जिन मुसलमानों ने बढ़चढ़कर भाग लिया था । उन्हीं को वहाँ पाकिस्तान जाने के बाद पश्तूनों ने मारना शुरू कर दिया और आजतक वहाँ पर मुहाज़िर बोलकर उनको मारा काटा जा रहा है ।

 

(१९) अरब के शेख भारत में सैक्स टूरिज़म के लिए आते हैं और यहाँ पर कम उमर की कमसीन मुसलमान हसीन लड़कियों को खरीदकर अपनी अय्याशी के लिए अपने साथ अरब देशों में ले जाते हैं और यहाँ के मुसलमान इस बात को अपना बड़ा सौभाग्य समझते हैं कि “शेख साहब ने हमारी बेटी को चुना” । वहाँ पर इस हसीनाओं के साथ खूब रंग रलिया मनाते हुए वो उन्हें अपनी रखैल बनाकर रखते हैं ।

नोट :- इस्लाम समीक्षा पढ़ने के लिए ऋषिदयानंद सरस्वति कृत सत्यार्थ प्रकाश का 14 वाँ समुल्लास अवश्य पढ़ें ।

 

जागो ! भारत कि मीडिया दुश्मनो के हाथमे है।

From: Pramod Agrawal < >

जागो ! भारत कि मीडिया दुश्मनो के हाथमे है।

क्या आप जानते हैं हम मीडिया को बिकाऊ क्यूँ कहते हैं?
क्या आप जानते हैं हमारा मीडिया पश्चिमीकरण का समर्थन और भारतीयता का विरोध क्यों करता है ?
भारत की मीडिया हिन्दू विरोधी क्यों है ??

आइये जानते हैं भारत के सारे चैनलों और मीडिया की सच्चाई के बारे में-सन् 2005 में एक फ़्रांसिसी पत्रकार भारत दौरे पर आया उसका नाम फ़्रैन्कोईसथा,उसने भारत में हिंदुत्व के ऊपर हो रहे अत्याचारों के बारे में अध्ययन किया और उसने फिर बहुत हद तक इस कार्य के लिए मीडिया को जिम्मेवार ठहराया, फिर उसने पता करना शुरू किया तो वह आश्चर्य चकित रह गया कि भारत में चलने वाले न्यूज़ चैनल, अखबार वास्तव में भारत के है ही नही —-

फिर भारत के मीडिया समूह और उसकी आर्थिक श्रोत के बारे में पता किया गया जो निम्न है।

1. द हिन्दू :-जोशुआ सोसाईटी, बर्न, स्विट्जरलैंड, इसके संपादक एन॰ राम, इनकी पत्नी ईसाई में बदल चुकी हैं।

2. एनडीटीवी :- गोस्पेल ऑफ़ चैरिटी, स्पेन, यूरोप।

3. सीएनएन, आईबीएन 7, सीएनबीसी:-100 % आर्थिक सहयोग साउथर्न बैपिटिस्ट चर्च द्वारा ।

4. द टाइम्स ऑफ़ इंडिया,नवभारत, टाइम्स नाउ :- बेनेट एंड कोल्मान द्वारा संचालित, 80% फंड वर्ल्ड क्रिस्चियन काउंसिल द्वारा, बचा हुआ 20% एक अंग्रेज़ और इटैलियन द्वारा दिया जाता है , इटैलियन व्यक्ति का नाम रोबेर्ट माइन्दो है जो यूपीए अध्यक्षा सोनिया गाँधी का निकट सम्बन्धी है।

5. हिन्दुस्तान टाइम्स, दैनिक हिन्दुस्तान :- मालिक बिरला ग्रुप लेकिन टाइम्स ग्रुप के साथ जोड़ दिया गया है।

6. इंडियन एक्सप्रेस :- इसे दो भागों में बाँट दिया गया है, दि इंडियन एक्सप्रेस और न्यू इंडियन एक्सप्रेस (साउथर्न एडिसन) फंडिंग लंदन से

7. दैनिक जागरण ग्रुप :- इसके एक प्रबंधक समाजवादी पार्टी से राज्यसभा में सांसद है ,अब आगे कुछ कहने की ज़रूरत नही आप जानते हैं।

8. दैनिक सहारा :- इसके प्रबंधन सहारा समूह देखती है, इसके निर्देशक सुब्रोतो राय भी समाजवादी पार्टी के बहुत मुरीद हैं।

9. आंध्र ज्योति:- हैदराबाद की एक मुस्लिम पार्टी एम्आईएम् (MIM ये वही पार्टी है जो हैदराबाद मे दंगे करते रहते है) ने इसे कांग्रेस के एक मंत्री के साथ कुछ साल पहले खरीद लिया।

10. दि स्टेट्स मैन :- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया द्वारा संचालित।

11. इंडिया न्यूज:- प्रबन्धक कार्तिकेय शर्मा (जेसिका लाल हत्या के आरोपी मनु शर्मा का भाई), जिनके पिता विनोद शर्मा हरियाणा से काँग्रेस विधायक हैं।

12 स्टार टीवी ग्रुप (एबीपी न्यूज़):-सेन्ट पीटर पोंतिफिसिअल चर्च, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। स्टार न्यूज़ (एबीपी न्यूज़) सदा से ही भारत में हिंदू विरोधी रहा है,भारत में इसके मुख्य संपादक शाजी जमान हैं जो शुरू से ही हिंदू विरोधी रहे हैं

13- आज तक न्यूज़ :- क्रिश्चियन कॉउंसिल ऑफ़ लंदन,100% फंडिंग लंदन ।

इस तरह से एक लंबी लिस्ट है जिससे ये पता चलता है की भारत की मीडिया भारतीय बिलकुल भी नहीं है और जब इनकी फंडिंग विदेश से होती है है तो भला भारत के बारे में कैसे सोच सकते हैं।

कृपया इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो के पास पहुंचाएँ ताकि दूसरो को नंगा करने वाले दलाल बिकाऊ मीडिया की भी सच्चाई का पता लग सके।

 

 

Fasting for Political Reason is Demoniac Act

Fasting for Political Reason is Demoniac Act

 

(Bhagavaan Krishna says: ) “Those who undergo severe austerities and penances not recommended in the scriptures, performing them out of pride and egoism, who are impelled by lust and attachment, who are foolish and who torture the material elements of the body as well as the Supersoul dwelling within, are to be known as demons.” Bhagavad Gita 17.5-6

Purport (By Bhaktivedanta Swami Prabhupapa):

 

There are persons (E.g. M K Gandhi and his followers*) who manufacture modes of austerity and penance which are not mentioned in the scriptural injunctions. For instance, fasting for some ulterior purpose, such as to promote a purely political end, is not mentioned in the scriptural directions. The scriptures recommend fasting for spiritual advancement, not for some political end or social purpose. Persons who take to such austerities are, according to Bhagavad-gītā, certainly demoniac. Their acts are against the scriptural injunctions and are not beneficial for the people in general. Actually, they act out of pride, false ego, lust and attachment for material enjoyment. By such activities, not only is the combination of material elements of which the body is constructed disturbed, but also the Supreme Personality of Godhead Himself living within the body. Such unauthorized fasting or austerities for some political end are certainly very disturbing to others. They are not mentioned in the Vedic literature. A demoniac person may think that he can force his enemy or other parties to comply with his desire by this method, but sometimes one dies by such fasting. These acts are not approved by the Supreme Personality of Godhead, and He says that those who engage in them are demons. Such demonstrations are insults to the Supreme Personality of Godhead because they are enacted in disobedience to the Vedic scriptural injunctions.

Source: https://www.vedabase.com/en/bg/17/5-6

*words inserted here by Suresh Vyas.