Month: April 2021
गोडसे का वो सच, जो आपसे छुपाया गया! / The truth about Godse / Prakhar Shrivastava
Comment from Divyansh Tripathi < >
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Godse reality part 2 जनवरी की कडकडाती ठंडी में हिन्दू महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर पुलिस ने मस्जिद के बाहर निकाला, गटर के किनारे रहो लेकिन छत के निचे नहीं l क्योकि… तुम हिन्दू हो…. 4000000 हिन्दू भारत में आये थे,ये सोचकर की ये भारत हमारा हैं…. ये सब निर्वासित गांधीजी से मिलाने बिरला भवन जाते थे तब गांधीजी माइक पर से कहते थे क्यों आये यहाँ अपने घर जायदाद बेचकर, वहीँ पर अहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं रहे ?? यही अपराध हुआ तुमसे अभी भी वही वापस जाओ..और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने निकले थे ? कैसा होगा वो मोहनदास करमचन्द गाजी उर्फ़ गंधासुर … कितना महान … जिसने बिना तलवार उठाये … 35 लाख हिन्दुओं का नरसंहार करवाया 2 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं का इस्लाम में धर्मांतरण हुआऔर उसके बाद यह संख्या 10 करोड़ भी पहुंची l 10 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को खरीदा बेचा गया l 20 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया, तरह तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाओं के बाद ऐसे बहुत से प्रश्न, वास्तविकताएं और सत्य तथा तथ्य हैं जो की 1947 के समकालीन लोगों ने अपनी आने वाली पीढ़ियों से छुपाये, हिन्दू कहते हैं की जो हो गया उसे भूल जाओ, नए कल की शुरुआत करो … परन्तु इस्लाम के लिए तो कोई कल नहीं .. कोई आज नहीं …वहां तो दार-उल-हर्ब को दार-उल-इस्लाम में बदलने का ही लक्ष्य है पल.. प्रति पल विभाजन के बाद एक और विभाजन का षड्यंत्र … ========================= आपने बहुत से देशों में से नए देशों का निर्माण देखा होगा, U S S R टूटने के बाद बहुत से नए देश बने, जैसे ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान आदि … परन्तु यह सब देश जो बने वो एक परिभाषित अविभाजित सीमा के अंदर बने l और जब भारत का विभाजन हुआ .. तो क्या कारण थे की पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान बनाए गए… क्यों नही एक ही पाकिस्तान बनाया गया… या तो पश्चिम में बना लेते या फिर पूर्व में l परन्तु ऐसा नही हुआ …. यहाँ पर उल्लेखनीय है की मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था की पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए, बहुत कम लोगों को ज्ञात है की 1947 के समय में पंजाब की सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी … यानी की पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ होना तय था … मोहनदास करमचन्द के अनुसार l नवम्बर 1968 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय हुआ .. हिमाचल प्रदेश और हरियाणा l पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के बाद भी जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे … उन्होंने फिर से मांग की … की हमको पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं l 1. पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है क्योंकि श्री लंका के रस्ते से घूम कर जाना पड़ता है l 2. और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं l इसलिए …. कुछ मांगें रखी गयीं 1. इसलिए हमको भारत के बीचो बीच एक Corridor बना कर दिया जाए…. 2. जो लाहोर से ढाका तक जाता हो … (NH – 1) 3. जो दिल्ली के पास से जाता हो … 4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो … (10 Miles = 16 KM) 5. इस पूरे Corridor में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे l 30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा बच्चा यह जानता था की यदि मोहनदास करमचन्द 3 फरवरी, 1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को भी …मान लिया जायेगा l तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो मोहनदास करमचन्द किसी की बात सुनने की स्थिति में था न ही समझने में …और समय भी नहीं था जिसके कारण हुतात्मा नाथूराम गोडसे जी को गांधी वध जैसा अत्यधिक साहसी और शौर्यतापूर्ण निर्णय लेना पडा l हुतात्मा का अर्थ होता है जिस आत्मा ने अपने प्राणों की आहुति दी हो …. जिसको की वीरगति को प्राप्त होना भी कहा जाता है l यहाँ यह सार्थक चर्चा का विषय होना चाहिए की हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जीने क्या एक बार भी नहीं सोचा होगा की वो क्या करने जा रहे हैं ?
राज्य पुनर्गठन आयोग | Article 1 to 4 | Part 1 of Constitution | State Reorganization Commission
योगी की धमकी|| Bangal Election|| Mamata Banerjee|| Yogi Adityanath|| Pushpendra kulshrestha||
क्या सूफी शान्ति का पैगाम लाये थे? – Sanjay Dixit – #IndicTalks
कन्वर्टेडों (मुस्लिमों) का कन्फ्यूजन समझिए . बने हुवे मोसलमानो की मन्योव्यता को समज़िये।
Source:
Comment by Shri Saraswat < >
कन्वर्टेडों (मुस्लिमों) का कन्फ्यूजन समझिए ….
इस्लाम से संबंधित कोई भी आर्कोलॉजिकल सर्वे (खुदाई) का सबूत आज तक ऐसा नहीं मिला है जो इस्लाम के सन् 613 ई. से पहले के होने का प्रमाण देता हो यानि मस्जिदों के नीचे मंदिर-चर्च तो बहुत मिल जाएंगे पर किसी मंदिर के नीचे मस्जिद होने का तो कोई मुस्लिम दावा तक नहीं करता ; ऐसे में यह कहना की आदम-हव्वा अब्राहमिक रिलिजन से थे, क़ुरआन से पहले भी किताबें आयी थीं, मुहम्मद के पहले भी नबी आए थे जैसी बातों का कोई एक भी जमीनी सबूत नहीं है ; सब बातें हैं बातों का क्या?
चूंकि इस्लाम महज 1,408 साल पहले का है इसलिये सभी मुसलमान या इनके पूर्वज (नबी मुहम्मद सहित) किसी न किसी समय के कन्वर्टेड ही हैं बस फर्क इतना है कि कोई पहले कन्वर्ट हुआ तो कोई बाद में .. किन्तु पहले कन्वर्ट हुए मुसलमान बाद में कन्वर्ट हुए मुसलमानों को कन्वर्टेड कहकर जलील करते हैं जो की ठीक वैसा ही है जैसा प्रोफेशनल कॉलेजों में सीनियर्स द्वारा जूनियर्स की रेगिंग। यानि कन्वर्टेड ही कन्वर्टेडों को कन्वर्टेड कह कर जलील कर रहे हैं .. या कहें की पुराना पागल ही नये पागल को पागल कह कर चिढ़ा रहा है ..
और मेरे इस दृष्टिकोण से तो पूरी मुस्लिम उम्मत ही खुद को एक खुला पागलखाना घोषित करने में लगी है।
इनके कन्फ्यूजन का आलम तो यह है की जब मैं इनसे इस्लाम की खूबियां पूछता हूं तो ये कहते हैं कि ‘कुछ तो खूबी होगी इस्लाम में तभी तो हमारे पूर्वजों ने इस्लाम कबूला।’
दक्षिण एशिया के मुस्लिम पहले तो नहीं पर आज गर्व से कहते हैं की वे कन्वर्टेड हैं पर इसी कन्वर्जन के कारण इन्हीं के आका यानि अरब के शेख जो खुद बेसिकली कन्वर्टेड हैं पर वे इन्हें अल-हिंद-मस्कीन (निम्न दर्जे के धर्मांतरित हिंदू) कहकर जलील करते हैं .. यानि कन्वर्टेड होना इज्जत है या बेइज्जती इस पर खुद आज के मुस्लिम ही एकमत नहीं हैं .. जबकि क़ुरआन कन्वर्जन को सही ठहराती है, मतलब अरब के मुसलमान या तो क़ुरआन ठीक से नहीं समझ पाए या अपने पुराने कन्वर्टेड होने और मक्का-मदीना पर कब्जे के अहंकार में वे दूसरे मुस्लिमों की बल्कि क़ुरआन की ही तौहीन कर रहे हैं और यहां के मजबूरी में बने नासमझ कन्वर्टेड हज का असिद्ध सबाब लेने और खुद को ज्यादा कट्टर मुस्लिम बताकर उनका वरदहस्त चाहने के चक्कर में उनसे खुशी-खुशी जलील भी हो रहे हैं।
इनकी भाषा उर्दू भी कन्वर्टेड ही है जो बोली तो हिंदी में जाती है पर लिखी फारसी में जाती है क्योंकि मुगलों ने हिंदी बोलना तो सीखी पर लिखना उन्होंने फारसी में ही जारी रखा जैसे आज भी सोनिया गांधी पढ़कर हिंदी तो बोलती है पर वह पढ़ती अंग्रेजी शब्दों (Hinglish) में ही है बस ऐसे ही मुस्लिम बोलते तो हिंदी हैं पर हिंदी पढ़ना नहीं जानते और ऐसे ही ये हैं तो कभी न कभी की हिंदुओं की औलादें पर आदर्श इनके फारसी लिखने वाले मुगल हैं। ऐसे तो ये ‘कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा’ वाले मिश्रण हो गये बल्कि काफिर ही हो गये क्योंकि इनके तो कई नाम, उपनाम (पंडित, चौधरी, शाह, पटेल, चौहान, गौर, भट, सोलंकी आदि) और रीतिरिवाज आज भी सनातन के ही चले आ रहे हैं और कायमखानी मुसलमानों (चौहानों के वंशज) के ज्यादातर रीतिरिवाज
तो आज भी हिंदुओं से ही लिये गये हैं यहां तक की दुल्हे को पटरे पर खड़ा कर उसकी आरती उतारना ओर उसे तिलक लगाना तक! दुल्हन की विदाई की हिंदू प्रथा आज भी इनमें जारी है वरना घर की घर में बहन से निकाह करने में एक पलंग से दूसरे पलंग पर शिफ्ट होने में कौनसी विदाई?
महज कुछ दशक पहले तक तो दक्षिण एशियाई मुसलमान अरबियों द्वारा जलील होने से बचने के लिये स्वयं को झूठे ही अरब से जोड़ते थे पर हकीकत झुठलाने में यहां होती बेइज्जती देख अब अपने आप को शान से कन्वर्टेड बोलने लगे यानि ये स्वयं ही धोबी के कुत्ते भी बने और फिर प्याज और कोड़े दोनों भी इन्होंने स्वयं ही चुने जैसे अहमदिया मुस्लिम जो मुस्लिम तो बने पर उनके हज जाने पर पाबंदी है एवं शिया मुस्लिम जो पूरी दुनिया में वहाबी सुन्नियों के हाथों मारे जा रहे हैं .. और इस्लाम छोड़ो तो इस्लाम ही इन्हें मारने दौड़ता है।
कुल मिलाकर कन्वर्टेडों को ‘न ख़ुदा मिला न विसाल-ए-सनम’
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Kerala conversion report 2020-21
It was Ghar Waapasi.
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koraa Gajjaa bhagavaan kaa prakop!