After Death (A हिन्दी Article based on Garud PuraN)


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After Death (A हिन्दी Article based on Garud PuraN)

मृत्युलोक

इस सृिष्ट का एक ही सत्य अटल है और वो है मृत्यु। मौत से इतर ऐसा कुछ भी नहीं है िजसका होना िनिश्चत है। मृत्युलोक पर जन्म लेने वाले हर जीव को एक ना एक िदन अपने शरीर को त्यागना ही पड़ता है।

आिखरी पड़ाव

जीवन के कई पड़ावों में मृत्यु उसका आिखरी पड़ाव होता है, िजसके बाद परिवार में गरुड़ पुराण का पाठ करना आवश्यक होता है। गरुड़ पुराण एक ऐसा ग्रंथ है िजसमें जीवन और मृत्यु की हर सच्चाई का ब्यौरा तो है ही साथ ही इस बात का भी उल्लेख है िक मृत्यु के बाद आत्मा िकस तरह और िकन-िकन हालातों से गुजरते हुए यमलोक तक पहुंचती है।

जीिवत अवस्था

यमलोक पहुंचने के बाद उसके जीिवत अवस्था में िकए गए पाप और पुण्य का िहसाब-िकताब होता है, िजनके अनुसार उसे आगे के हालातों को पार करना पड़ता है।

गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के पश्चात 47 िदनों की यात्रा कर आत्मा यमलोक पहुंचती है। इसके अलावा मृत्यु से जुड़ा और क्या-क्या है उिल्लिखत है गरुड़ पुराण में, आइए जानते हैं।

मृत्यु

गरुड़ पुराण के अनुसार िजस व्यिक्त की मृत्यु कुछ ही िमनटों में होने वाली होती है, वह अपने मुख से एक शब्द भी नहीं िनकाल पाता। वह बहुत कुछ कहना चाहता है लेिकन कुछ भी बोल नहीं पाता। वह ना तो िहल पाता है और ना ही अपने सामने खड़े व्यिक्त से कुछ कह पाता है। उसके मुंह से झाग या लार िनकलने लगती है।

यमराज

जब मृत्यु होने वाली होती है तब व्यिक्त के सामने यमराज द्वारा भेजे गए यमदूत आते हैं। वे बहुत डरावने होते हैं िजन्हें देखकर व्यिक्त कांपने लगता है, वह िकसी से अपना डर नहीं कह सकता लेिकन जब यमदूत उसके सामने होते हैं तो वह डर के मारे अपना मल-मूत्र त्यागने लगता है।

यमलोक

उस समय उसके शरीर के भीतर से मात्र एक अंगूठे के बराबर आत्मा िनकलती है िजसे यमदूत अपने साथ यमलोक ले जाते हैं।

यमदूत

जब तक वह आत्मा यमलोक नहीं पहुंच जाती, तब तक यमदूत उसे अपने साथ रखते हैं। यमलोक जाते समय रास्ते भर वह उस आत्मा को यमलोक के िवषय में बताते हैं, दुष्ट आत्मा वहां िमलने वाली यातनाओं को लेकर डर जाती है और जोर-जोर से िचल्लाने लगती है।

यमलोक 99 योजन

गरुड़ पुराण के अनुसार यमलोक 99 योजन दूर है, एक योजन चार कोस के बराबर, और चार कोस 13 िकलोमीटर के बराबर होता है। लेिकन यमराज के दूत कुछ ही देर में उस आत्मा को अपने साथ यमलोक पहुंचा देते हैं।

पाप आत्मा

यमदूत अंधेरे रास्ते से उस पाप आत्मा को अपने साथ यमलोक लेकर पहुंचते हैं। पाप आत्मा पूरे रास्ते अपने जीवन में िकए गए बुरे कमोर्ं को याद करते हुए चलती है। वह मार्ग में िमलने वाले कष्टों और अत्याचारों से पीिड़त होती है। आग से भी ज्यादा गर्म तल पर उस आत्मा को चलना पड़ता है।

पापों के अनुसार सजा

यहां पहुंचने के बाद यमदूत उसे यमराज के सामने प्रस्तुत करते हैं। यमराज उस आत्मा को उसके द्वारा िकए गए पापों के अनुसार सजा देते हैं।

शरीर को वापस पाने का आग्रह

इसके बाद वह आत्मा यमराज की आज्ञा पाकर अपने घर वापस लौटती है। घर आकर वह आत्मा अपने शरीर को वापस पाने का आग्रह करती है लेिकन यमदूत उसे अपने बंधन में रखते हैं।

िपंड-दान

मृत्यु के पश्चात परिवार वाले िपंड-दान और ब्राह्मणों को भोजन तो करवाते हैं लेिकन पापी आत्मा को उस दान-पुण्य से तृिप्त नहीं िमलती। भूख और प्यास से िबलखती हुई वह दोबारा यमलोक पहुंचती है।

प्रेत

अगर मृत व्यिक्त के परिवार वाले िपंडदान और पूरे िवधान के साथ अंितम संस्कार नहीं करते तो वह आत्मा सुनसान जंगल में प्रेत बनकर घूमने लगती है।

10 िदन तक िपंडदान

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद 10 िदन तक िपंडदान अवश्य िकया जाना चािहए। प्रतिदिन िकया

जाना वाला िपंडदान चार भागों में िवभािजत होता है। दो भाग पंचमहाभूत देह को पुिष्ट देने वाले होते हैं,

तीसरा भाग यमदूत , और चौथा भाग आत्मा का होता है।

चलने की शक्ति

नौवें िदन िपंडदान करने से आत्मा का शरीर बनने लगता है और दसवें िदन िपंडदान करने के बाद आत्मा

को चलने की शक्ति िमलती है।

दाह संस्कार

शव के दाह संस्कार के पश्चात उसमें से एक अंगूठे के बराबर आत्मा िनकलती है, िजसे यमदूत अपने साथ यमलोक ले जाते हैं। जहां जाकर वह अपने जीवन में िकए गए पाप कर्मो का दंड भुगतती है।

वैतरणी नदी

86 हजार योजन फैली वैतरणी नदी को पारकर यमलोक का पहुंच जाता है। पापात्मा अकेले ही यह यात्रा पूरी करती है। करीब 47 िदनों तक चलने के बाद आत्मा यमलोक पहुंचती है

6 पुिरयों को पार करना

गरुड़ पुराण के अनुसार यमलोक तक पहुंचने के बीच 16 पुिरयों को पार करना होता है, जो इस प्रकार हैं ।

सौम्य, सौिरपुर, नगेंद्रभवन, गंधवर्, शैलागम, क्रौंच, क्रूरपुर, विचत्रभवन, बह्वापाद, दु:खद, नानाक्रंदपुर, सुतप्तभवन, रौद्र, पयोवषर्ण, शीतढ्य, बहुभीित।

 

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Author: Vyasji

I am a senior retired engineer in USA with a couple of masters degrees. Born and raised in the Vedic family tradition in Bhaarat. Thanks to the Vedic gurus and Sri Krishna, I am a humble Vedic preacher, and when necessary I serve as a Purohit for Vedic dharma ceremonies.

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