Modi ji,अनुच्छेद 35ए तथा 370को संविधान से समाप्त करो

From: Vinod Kumar Gupta < >

सेवा में
माननीय प्रधानमंत्री जी                        25.2.2019
भारत सरकार
नई दिल्ली

आदरणीय महोदय

आज देश का सम्पूर्ण जनमानस शोकाकुल और आक्रोशित है। आतंकवादी वर्षों से जम्मू-कश्मीर को लहुलूहान किये जा रहें है। निःसंदेह इसका मुख्य कारण है कि भारतीय संविधान के अस्थायी व विवादित अनुच्छेद 35 ए  और अनुच्छेद 370  के समस्त प्रावधान जो अभी तक यथावत बनें हुए है। राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता को बनाये रखने के लिए इन अनुच्छेदों को भारतीय संविधान से पूर्णतः हटाया जाना अति आवश्यक है। आज केंद्रीय सरकार आपके नेतृत्व में राष्ट्रनीति की सर्वोच्चता के मापदंडों को अपनाने में क्यों असमर्थ है?

आप भलीभांति परिचित ही है कि “जम्मू-कश्मीर” की धरती दशकों से भारतभक्तों के रक्त से लाल हो रही है। देशद्रोहियों व आतंकवादियों के भयावह अत्याचारों से वहां के हज़ारों मूल निवासियों के हत्याकांडों की पीड़ा और लाखों के पलायन की हृदयविदारक घटनाएं निरंतर उद्वेलित करती आ रही है। सन् 1947 के देश विभाजन से उखड़े व उजड़े पश्चिमी पाकिस्तान से आये कुछ हज़ार हिन्दू-सिख परिवारों को, जिनकी संख्या अब लाखों में हो चुकी है, अभी तक अपने प्रादेशीय मूलभूत अधिकारों से वंचित है।

अतः आपसे देश व देशवासियों के हित के लिए विनम्र अनुरोध है कि अनुच्छेद 35  ए  तथा अनुच्छेद 370 को भारतीय संविधान से समाप्त कर जम्मू-कश्मीर व अन्य राज्यों में एक समानता बना कर अखण्ड भारत की धारणा को सुदृढ़ बनाये। इससे भारतीय संस्कृति पर आक्रामक इस्लामिक जिहादियों पर भी नियंत्रण हो सकेगा। मोदी जी आपके “मन की बात”  बहुत बार सुन चुकें है कृपया अब “हमारे मन की बात” भी सुनें और अनेक समस्याओं के समाधान के लिए इस दशकों पुरानी संवैधानिक व्यवस्था को हटवा कर करोड़ों देशवासियों के हितों की रक्षा करें।

सधन्यवाद

निवेदक

विनोद कुमार सर्वोदय
(राष्ट्रवादी चिंतक व लेखक)
गाज़ियाबाद

नोट:  मैने यह पत्र प्रधानमंत्री जी को ईमेल किया है।
आप भी अपने अनुसार ऐसा करके राष्ट्रीय दायित्व निभाये। अपने समाचार पत्र में प्रकाशित करके अधिक प्रचार करें तो सक्रियता बढ़ेगी और लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल्य बढेगा।
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कश्मीर का बिना शर्त भारत में पूर्ण विलय , फिर अनुच्छेद 370 का क्या औचित्य…❔

▶कश्मीर का भारत में विलय➖

26 अक्टूबर 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 ( इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947 )  के अनुसार जिस विलय पत्र पर कश्मीर के राजा हरिसिंह ने हस्ताक्षर किये थे वह पूर्णतः बिना किसी शर्त के था। इस अधिनियम के अनुसार किसी भी राज्य के भारत में विलय के निर्णय का संपूर्ण अधिकार केवल वहाँ के शासक का ही होता था। इस पर भी राजा हरिसिंह ने यह स्पष्ट कर दिया था कि इस विलय पत्र में कोई भी परिवर्तन या संशोधन हो तो उनकी स्वीकृति आवश्यक होगी । भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन ने 27 अक्टूबर 1947 को उस विलय पत्र पर अपने हस्ताक्षर करके उसी रूप में उसे स्वीकार किया था । लेकिन माउंटबेटन ने जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के कबाइलियों व सेना ने आक्रमण कर देने के कारण वहाँ की असामान्य स्थिति का अनुचित लाभ उठाते हुए अपनी कुटिल चाल चलते हुए राजा हरिसिंह को एक अलग पत्र द्वारा यह बताया कि भविष्य में जब कश्मीर राज्य की स्थिति सामान्य हो जाएगी और आक्रमणकारी निकाल दिए जाएँगे तो इस विलय पर वहाँ की जनता से राय ली जाएगी । पर “इस पत्र का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था क्योंकि इस प्रकार के सशर्त विलय का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम में कोई प्रावधान नहीं था”। ध्यान रहे देश की अन्य समस्त 568 देशी रियासतों के समान ही जम्मू-कश्मीर का बिना शर्त भारत में विलय हुआ था। अतः जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय अन्य रियासतों के समान ही अविवादित,  बिना शर्त व पूर्ण था । आज जो लोग अपनी कुटिल राजनीति के कारण देश को भ्रमित कर रहे हैं वे भारत विरोधी ही हो सकते हैं।

▶विभाजनकारी ‘अनुच्छेद 370’ ➖

भारतीय संविधान का अनुछेद 370 कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देता है , जिसके अनुसार  रक्षा, विदेश व संचार नीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों को छोड़कर बाकी सभी विषयों पर राज्य सरकार की सहमति आवश्यक होगी । कश्मीर के लोग भारत के किसी भी भाग में भूमि खरीद सकते हैं, चुनाव लड़ सकते हैं परंतु शेष भारत के लोग वहाँ न तो भूमि खरीद सकते हैं और न ही वहाँ कोई चुनाव लड़ सकते हैं । जम्मू-कश्मीर के लोग भारत के नागरिक हैं, परंतु शेष भारत के लोग इस राज्य के नागरिक नहीं माने जाते। इससे भारत व कश्मीर के नागरिकों के विरुद्ध आपसी भेदभाव बढ़ता जा रहा है । यही कारण है कि  भारत विरोधी व अलगाववादी मानसिकता को प्रोत्साहन भी मिलता आ रहा है। यहाँ के लोगों को एक प्रकार से राज्य व केंद्र की दोहरी नागरिकता मिली हुई है।

इस अनुच्छेद के कारण देश के 134 कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं हो पा रहे हैं। यदि ये कानून शेष देश के नागरिकों के हितों पर चोट नहीं करते तो जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के लिये कैसे हानिकारक हो सकते हैं ? इस अनुच्छेद के कारण वहां का क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ रहा है क्योंकि जम्मू व लददाख के लोगों से सरकारी नौकरियों व विकास कार्यों में भेदभाव करते हुए कश्मीर घाटी को प्रमुखता दी जाती रही है। इसके रहते यहाँ की अधिकांश हिन्दू जातियों को जो पिछड़ी हुई हैं भारतीय संविधान के अनेक प्रावधानों के लागू न होने कारण आरक्षण भी नहीं मिलता जिससे इन हिन्दुओं के और अधिक पिछड़ने से गरीबों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
इस अनुच्छेद का अधिकांश  लाभ सामान्य जनता को नही केवल वहां के सत्ताधारियों व अलगाववादियों को ही मिल रहा है । इसके कारण अलगाववादियों, आतंकियों एवं भारतीय ध्वज व संविधान का अपमान करने वालों पर कठोर कार्यवाही भी नहीं हो पाती । सन् 2002 में पूरे देश मे लोकसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन हुआ था पर इस विवादित अनुच्छेद के चलते यह जम्मू-कश्मीर में नही हो सका। क्या ऐसे में भारतीय संसद की भूमिका वहाँ अप्रासंगिक नहीं हो गई ? अतः यह विचार करना होगा कि अनुच्छेद 370 के होते वहाँ के सामान्य नागरिकों को क्या लाभ हुआ और अगर देश के अन्य कानून वहां लागू होते तो उन्हें कितना लाभ होता ?
वास्तव में जम्मू-कश्मीर से सम्बंधित भारत के संविधान में अनुच्छेद 370 जोड़ने का विरोध सभी राजनीतिक दलों , संविधान सभा व कांग्रेस कार्य समिति के सभी सदस्यों एवं जम्मू-कश्मीर के चारों प्रतिनिधियों ने भी किया था । संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर ने भी इस अनुच्छेद के पक्षधर पं जवाहरलाल नेहरु को समझाया था कि इस प्रकार के विशेष दर्जे से कश्मीर घाटी में भारतीय राष्ट्रवाद की पकड़ समाप्त हो जाएगी और भविष्य में कश्मीर के युवा अलगाववाद के रास्ते पर चलकर पाकिस्तान की गोद में चले जाएंगे । डॉ अंबेडकर ने अनुच्छेद 370 की फिरकापरस्ती जिद्द पर अड़े शेख अब्दुल्ला से भी स्पष्ट कहा था ” तुम यह तो चाहते हो कि भारत कश्मीर की रक्षा करे , कश्मीरियों को पूरे भारत में समान अधिकार हो, पर भारत और भारतीयों को तुम कश्मीर में कोई अधिकार देना नहीं चाहते। मैं भारत का कानून मंत्री हूँ और मैं अपने देश के साथ इस प्रकार की धोखाधड़ी और विश्वासघात में शामिल नहीं हो सकता”।  इतने विरोध के उपरान्त भी जम्मू-कश्मीर के एक विशेष समुदाय (मुस्लिम) व शेख अब्दुल्ला को प्रसन्न रखने के लिये इस विभाजनकारी अनुच्छेद को नेहरु जी ने स्वीकार करके देश में  धर्मनिरपेक्षता , लोकतंत्र और संघीय ढाँचे के स्वरूप को अपनी अड़ियल व अधिनायकवादी प्रवृत्ति के कारण  बिगाड़ने का कार्य किया था।

▶अनुच्छेद 370 को हटाना कठिन नहीं➖

उस समय ऐसा भी कहा गया था कि पाकिस्तानी आक्रमण की पृष्ठभूमि में शेख अब्दुल्ला की कुटिल सलाह पर इस विशेष अनुच्छेद का प्रावधान नेहरु जी ने स्वीकारा, जिससे जनमत संग्रह की स्थिति में स्थानीय नेता होने के कारण शेख अब्दुल्ला भारत के पक्ष में रहेगा। शेख अब्दुल्ला ने भी यह माना था कि यह अनुच्छेद अपरिवर्तनीय नहीं है। जम्मू-कश्मीर के एक पूर्व मुख्यमंत्री जी.एम. सादिक़ ने भी सार्वजनिक रूप से इसको समाप्त करने को कहा था। कश्मीर की संविधान सभा के 1957 में समाप्त होते ही इस अनुच्छेद की प्रासंगिकता शेष नहीं रहती और वैसे भी इस सभा के निरस्त होने के बाद इसके सारे अधिकार लोकसभा को दिये गये हैं । अतः जो लोग जम्मू कश्मीर की संविधान सभा को पुनर्गठित करने की बात करते हैं,  वह बिल्कुल निराधार है।संविधान निर्माताओं ने  अनुच्छेद 370 के शीर्षक में “जम्मू-कश्मीर के बारे में अस्थायी उपबंध” लिखकर इसे निहायत अस्थायी व्यवस्था के रूप में लिखा था। विधि-विशेषज्ञों के अनुसार इसके उपखंड (3) में इसको समाप्त करने की साफ साफ व्यवस्था है कि इसे संविधान से खारिज करने के लिए लोकसभा की किसी बैठक की आवश्यकता नहीं है । राष्ट्रपति एक साधारण उद्घोषणा द्वारा इसे समाप्त कर सकते हैं।प्रसिद्ध विधिवेत्ता डॉ सुब्रमणियन् स्वामी ने भी यह  स्पष्ट बताया था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल भी अगर  इस अस्थायी अनुच्छेद 370  को समाप्त करने की विधिवत् अनुशंसा राष्ट्रपति को भेजे तो वह उसे स्वीकार करके इस दशकों पुरानी विवादित समस्या का निदान करने में सक्षम हैं। इस विवादकारी अनुच्छेद  के कारण ही पाकिस्तान  जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग नही मानता। अतः इसको हटाने की माँग को सांप्रदायिक रंग देना दुःखद है। बल्कि वास्तविकता यह है कि इस अनुच्छेद के हटने से जम्मू-कश्मीर के भारत मे पूर्ण  विलय सम्बन्धित सभी भ्रम दूर हो जाएंगे। वैसे भी जम्मू-कश्मीर के दोहरे स्तर को समाप्त करके मूलधारा से जोड़कर सशक्त भारत के निर्माण के लिये इसको हटाना अति आवश्यक है।

विनोद कुमार सर्वोदय
(राष्ट्रवादी चिंतक एवं लेखक)
गाज़ियाबाद

नोट: यह लेख मैने  04.5.2017  को भी प्रेषित किया था। आज भी सर्वाधिक प्रसांगिक है…उचित समझें तो अवश्य प्रकाशित करें।
धन्यवाद

पाकिस्तान से पतंजलि के 18 लोगों को जान से मारने की धमकी

Source: youtube.com/watch?v=E7sUthMGKmc

Bt Milan Aryvart

पाकिस्तान से धमकी आयी है पतंजलि के 18 लोगों को जान से मारने की धमकी दी है। क्योंकि पतंजलि ने हाफिज सईद और मसूद अजहर को ज़िंदा दफन करने की बात की है, हम आंतकवादियो की धमकी से डरने वाले नही है, हम न रुकने वाले न झुकने वाले न डटने वाले। पूज्य स्वामी जी महाराज ने 400 से अधिक जिलों में जाकर, एक लाख से अधिक गांव में जाकर , 2000000 किलोमीटर की यात्रा करके, 20 करोड़ लोगों से सीधे संवाद कर के उनके मन में , देश के प्रति समाज के प्रति राष्ट्र के प्रति एक जज्बे का एक जुनून का भाव भरा है इसलिए आतंकवादियों की हिट लिस्ट में #पतंजलि# है।

 

संविधान काआर्टिकल 370 को विगतपूर्ण समझिये

ईसको संविधान में से मिटाना होगा।

जब पाकिस्तान ने घुस के आधा काश्मीर ले लिया वो पहला गुनाह – गलत काम – था।
ईसलिये भारत चाहे तो कभी भी POK सैन्य के बल से वापस ले शकता है।
सही काम करने के लिये किसी बाह्य देश या संस्था कि मंजूरी कि जरुरत नहिं।

– सुरेश व्यास

 

ईस्लाम का आतन्क काफिरो पर जीहद है।

ईस्लाम का आतन्क काफिरो पर जीहाद है जो १००० साल से हिन्दूओ पर चल रही है। कोई भी मुसलमान हिन्दू के साथ कुछ भी गलत या हरकत करता है वो जीहाद है। हर मुसलमान और मुल्ला हिन्दुओ को मुसलमान बनाना चाहता है, गुलाम रखना चाहता है, वा मार डालना चाहता है। मुस्लिम अग्रणी ओं का मुसलमानो को आदेश है “गजवा ए हिन्द”. सुनो ये विडीओ youtube.com/watch?v=ujh_iDQ1crk

१९४७ मे जिन्नाह ने Direct Action कर के हिन्दूओ को मारना शुरू करा, और भारत का बटवारा हुवा – ये आशा से कि अब शान्ति रहेगी। तो ये आशा रखना मूर्खता थी, और मुसलमानो को बटवारे के बाद भी देश मे रहने देने कि बडी मूर्खता थी। हुवा क्या कि हम हिन्दूओ ने ईस्लाम को भारत की जमीन का तीसरा भाग फोगट दे दिया जहां सुरक्षा पूर्वक हिन्दू ओ पर जिहाद कर ने के लिये बिना हरकत वो हमेश काम करता रहे। और वो करता भी है वो दुनिया ने देख लिया है। जमीन के साथ बहूत रुपये भी दिये और लश्कर भी दिया – गांधी के कहने से।

अब काश्मीर के पुलवामा मे ईस्लाम ने आतन्कि हमला कर के ४४ जवानो को मार डाले और् बहुत जवान धमाके से घायल हुवे १४ फ़ब्रुआरी २०१९ को। तो सब कहते है कि पाजिस्तान को खतम करो। ठीक है, खतम करो क्यु कि ये पाकिस्तान के किया है।

किन्तु असली दुश्मन ईस्लाम है ये सच कुरान और हडीथ से साफ मालुम होता है।

कुरआन की ये कुछ सूरा : आयतें हैं –

2 : 98 – अल्लाह गैर मुस्लिमों का शत्रु है ।

3 : 85 – इस्लाम के अलावा कोई अन्य धर्म स्वीकार नहीं है ।

8 : 39 – गैर मुस्लिमों से युद्ध करो जब तक की अल्लाह का दीन पूरी तरह कायम न हो जाए ।

9 : 5 – मूर्तीपूजकों को जहां पाओ वहां मार दो ।

35 : 3 और 27 : 61 – अल्लाह के अलावा कोई अन्य प्रभू पूज्य नहीं है ।

9 : 23 – गैर मुस्लिमों को दोस्त न बनाओ

5 : 5 / – यहूदियों और ईसाइयों को दोस्त न बनाओ ।

9 : 28 – मूर्तीपूजक नापाक हैं ।

4 : / 0 / – काफिर तुम्हारे खुले दुश्मन हैं ।

9 : 123 – काफिरों पर जुल्म करो ।

66 : 9 – काफिरों और मुनाफिकों से जिहाद करो ।

4 : 56 – आयतों को इंकार करने वाले की खाल पकाएंगे ।

8 : 69 – लूट का सब माल (महिलाओं सहित) हलाल है ।

9 : / 4 – अल्लाह मोमिनों के हाथों काफिरों को यातना देगा ।

21 : 98 – अल्लाह के सिवाय किसी और को पूजने वाले जहन्नुम का ईंधन हैं ।

कोई मुसलमान अच्छा हो शकता है, किन्तु इससे ईस्लाम अच्छा नहि हो शकता। सांप या उसके बच्चे कभी तो काटेंगे ही। उनको घर मे या देश मे रखना जान, धर्म और संस्कृति के लिये जानलेवा खतरा है।

तो ईस्लाम् कि जिहाद भारत मे से मिटाने के लिये हमे भारत मे से ईस्लाम को निकालना होगा, और ये काम भारत के युवा हिन्दू हि कर शकते है।

हर मोहल्ले मे हिन्दू युवा सन्ठन करो। आसपास वाले सब मुसलमानो को कह दो कि या तो वे ईस्लाम् छोडे या देश छोडे। जब तक वो ये ना करे तब तक ना उनसे कुछ खरीदो और् ना कुछ बेचो।

और कुछ हथीयार घर मे रक्खो और कुछ अपने साथ भी रक्खो जैसे शीख रखते है (शीख लोग हिन्दू ही है।)

ईस्लाम लोकतन्त्र का दुश्मन है। इसलिये Parliament पर भी आतन्कि हमके हुवे है। अब जब भारत मे लोकतन्त्र है, तो वहां मुसलमानो को रहने की जरूरत नहि और लोकतान्त्रिक राज कारण मे सक्रिय होने की भी जरूरत नहि। ईसलिये भारत के मुसलमानो का वोट देनेका अधिकार छीन लेना चाहिये। इससे मुसलमानो की प्रतिशत जनसन्ख्या का भी नियन्त्रन होगा। अगर उनको ये पसन्द नहि तो वे ईस्लाम छोड दे।

भारत का संविधान बिन-हिन्दू-मित्र है और हिन्दू का दुश्मन है। तो संविधान को हिन्दू-मित्र बनाओ – संविधान अनुच्छेद ३५ए को खतम करो (जिससे अनुच्छेद् ३७० का बुरा परिणाम् बिल्कुल् कम हो जायेग – श्री अरुण जैटली http://www.youtube.com/watch?v=jFM-zcFvLe8) – और भारत को एक हिन्दू राष्ट्र घोषीत – सिकुलर नहि; क्यु कि ये सिकुलरिज़म ईसाईयत-बीमारी का परदेशी ईलाज है। ये न हिन्दू के लिये है, न हिन्दूस्तान के लि है. क्यु कि जो धर्म वेदिक धर्म का सम्मान करते है उनका हम सम्मान करते है। याद रहे हर मुस्लीम देश मे केवल ईस्लाम हि कायदेसर है। तो हमे भारत मे ईस्लाम प्रतिबद्ध (Ban) होना ही चाहिये।

Article 35A और उसके अमानवीय परिणाम के बारे मे जानो :-

www.youtube.com/watch?v=WNUGfu0RU14

35(A)हटेगा तभी देश बचेगा:पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ

www.youtube.com/watch?v=Drnxuu4itBk

श्री पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ और R. N. सिंह के विडीयो सुने। वो बताते है कि भारत के अन्दर ५०० छोटे पाकिस्तान बन चुके है। ये सब से बडा खतरा है जिनको भारत के युवा सन्गठन हि मिटा शकते है। मुझे ये लगता है कि गुजरातमे गोधरा कांड का जो प्रतीशोध हुवा था वो ये फुलवामा के आतन्कि हमले का पूरे भारतमे हो शकता है।

जय श्री कृष्ण

 

भारत के खिलाफ देश में खतरनाक फ़ौज

 

भारत के खिलाफ देश में तैयार हो चुकी

है, ये खतरनाक फ़ौज ट्रेनिंग भी हुई पूरी

भारत के खिलाफ देश

खतरनाक फ़ौज

Several Acts To Be Done By Modi ji

Source: youtube.com/watch?v=Id8DvZLE3ZM

By Shirshendu Dey

Several steps left for Modiji

  1. Implement Indus water treaty so that Pakistanis are left without water
  2. Stop entry for Chinese product in India, and tell China: “Either you leave supporting Pakistan or loose 120 crore business”
  3. Start killing the terrorist as Israeli did
  4. Remove 370 and 35A articles from the constitution.

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jaya sri krishna!

 

“हरामखोर गद्दारों को गोळी मारो सालों को”

Source: youtube.com/watch?v=PCc_9eLIa_E

It is clear that some internal gaddaaras have played part in this terrorist attack.

Think of the solution, he says; free from politics.
I believe this kshatriya bhaaratiya lion can lead all the angry youths, and guide their anger in well organized proper actions to eliminate 500 mini-Pakistans within Bhaarat.
jaya sri krishna!

jaya sri krishna!