एस. सेनाका कोंगीकरण और कट्टरतावादी मुस्लिमीकरण?

From: Shirish Dave < >

I have an interesting blog to share it with you. If you cannot read this blog properly, kindly click on the link hereunder. Please share it to maximum. It is a call of the time.

https://treenetram.wordpress.com/2020/09/13/%e0%a4%8f%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%9f%e0%a5%8d/

एस. सेनाका कोंगीकरण और कट्टरतावादी मुस्लिमीकरण?

 

हाँ जी, एस.सेना का अर्थ है ए.एसएस. सेना (ASS SENA) या सुएज़ सेना (गटर सेना) या सोनिया सेना. हाँ जी, यह सेना कभी शिवसेना नहीं हो सकती. जिस सेनाका सेना पति एक महिलाके उपर पूर्वग्रह ही नहीं लेकिन अहंकारकी भावनासे उन्मत्त हो जाय तो वह कभी शिवाजीकी सेनाका सैनिक हो ही नहीं सकता. अहंकार उसका ही हो सकता है जिसने कुछ अच्छा काम किया हो या योगदान दिया हो.

शिवाजी कैसे थे?

शिवाजी एक महाराजा थे. उन्होंने हिन्दुराष्ट्रका स्वप्न देखा था. उनका मंत्रीमंडळ हमारे देशके प्राचीन राज्यव्यवस्थाके अनुसार सुग्रथित था. शिवाजीने उर्दुके स्थान पर संस्कृतको रक्खा था.  शिवाजी महाराज भारतीय संस्कृतिके अनुसार स्त्री दाक्षिण्यता वाले संस्कारवाले थे. चाहे वह स्त्री दुश्मनकी ही क्यों न हो.

शिवाजीके एक सुबेदारने जब एक हारे हुए और भागे हुए दुश्मनकी स्त्री को शिवाजीके समक्ष प्रस्तुत की शिवाजीने उस सुबेदारको डांटा और उस स्त्रीकी क्षमा याचनाकी. उसने यह भी कहा कि यदि मेरी माँ तुम जैसी सौंदर्यवान होती तो मै भी एक सौंदर्यवान पुरुष होता.

ऐसे थे शिवाजी महाराज.

आज तो संजय राउत और उद्धव ठाकरे जैसा ऐरा गैरा शिवाजीका नाम लेता है.

“अरे, यदि तूने मेरे सामने उंगली उठाई तो मैं तुम्हारी उंग्ली तोड दूंगा,

“अरे यदि तूने मेरे सामने आंख उठाई तो मैं तेरी आंख फोड दूंगा,

“तू आ के तो देख, (मेरी गलीमें या मेरी मुंबईमें या मेरे महाराष्ट्रमें) मैं तेरी कमर तोड दूंगा, (बल्हैयाँ मरोड दूंगा),

“मैं कौन हूँ तुज़े मालुम है? मैं शिवाजी महाराजके महाराष्ट्रका फरजंद हूँ …  तूने मेरी सरकारका अपमान किया … ? तू ने मेरे पूलिसतंत्रका अपमान किया … ? यह सब  हमारे शिवाजी महाराजका ही अपमान हुआ … शिवाजी महाराजके महाराष्ट्रका अपमान हुआ. अब मैं तुम्हे नहीं छोडुंगा.

ऐसी भाषा न तो कोई सुशिक्षित पुरुषकी हो सकती है, न तो ऐसी भाषा शिवाजी महाराजके सैनिककी हो सकती है.

हाँ जी, यह भाषा सडक छाप गुन्डेकी अवश्य हो सकती है. उद्धव ठकरे और संजय निरुपम दोनोंने यह सिद्ध कर दिया कि उनकी कक्षा सडकछाप गुन्डेकी है.

निम्नकक्षाके व्यक्तिको यदि आप कितना ही उच्चस्थान पर बैठा दो वह अपना संस्कार नहीं छोड सकता.

संस्कृतमें एक श्लोक है

श्वा यदि क्रियते राजा, अपि नात्ति उपानहम्‌

कुत्तेको यदि राजा कर दो तो क्या वह जूता नहीं खायेगा?

अर्थात्  जूते खाजाना कुत्तेकी तो प्रकृति है, कुत्तेको राजा बना दो तो भी वह जूता खाना छोडेगा नहीं.

एस.सेना के उद्धव और संजयका यही हाल है. पूर्व प्रकाशित ब्लोगमें हमने देखा ही है कि एस.सेनाके लोग कैसे हप्ता वसुली करते है.

दाउद भी वैसे तो सडकका गुन्डा ही था.

 

ऐसी हवा है कि एस.सेनाके फरजंद या और नेता ड्रगके मामलेमें फंसे है. इसलिये ये एस.सेनाके नेता बोखला गये है. उनका असामाजिक आचरणकी मानसिकता उजागर हो के जनताके सामने आ गयी है.

हो सकता है कि शरदने इन नेताओंको आगे किया हो. जी हाँ. शरद यह सब कर सकता है.

ड्रग्ज़के कारोबारका नेट वर्क

ड्रग्ज़के कारोबारका नेट वर्क अति विस्तृत है. यह पाकिस्तानसे भी होता है.

आतंकवादी संगठनोंको जिवित और सक्रिय रहेनेके लिये पैसे तो चाहिये ही.

 

ओवर ईन्वोईन्सींगके व्यापरसे जो धन प्राप्त होता है, हवालासे इन संगठनोंको पैसे मिलते है. किन्तु आतंकवादी संगठनोंको तो जितने पैसे मिले वे कम ही है. मालेतुजार लोगोंके फरजंदोंकी आदतें बिगाडके उनको ड्रग्ज़सेवनके आदी  कर देतें है. ड्रग्ज़का कारोबार केवल ब्लॅक मनीसे ही हो सकता है. काले धनका उद्भवस्थान, अचलसंपत्तिकी खरीद-बीक्रीमें, होता है, ड्र्ग्ज़के व्यापारमें होता है. ड्रग्ज़को वहीं खरीद सकता है जिसके पास काला धन है. कालाधनके संचयमें, कोंगी और उसके सांस्कृतिक साथी जिनमें उनके सहायक मीडीयाकर्मी , पूलिसके बडे अफसर, सरकारके बडे अफसर, फिलमी दुनियाके महानुभाव होते है. इनका एक नेटवर्क होता है.

 

एस.सेनाका गठबंधन प्रत्यक्ष रुपसे इस शठविद्यामें प्रवीण लुट्येन गेंगसे हुआ तो उनको भी अपनी चारित्र्यिक योग्यता सिद्ध करनी पडेगी ही न?

नया मुसलमानः

आम मुसलमान दिनमें पांच बार नमाज़ पढता है. जब एक व्यक्ति नया नया मुसलमान बनता है तब वह सात बार नमाज़ पढता है.

अब यह एस.सेना भी कोंगीयोंकी सांस्कृत्क गेंगमें आ गयी तो उसको अपनी योग्यता तो सिद्ध करना ही पडेगा.

सर्व प्रथम तो पालघरमें हिन्दु संतोंका पूलिस और एन.सी.पी. के नेताकी उपस्थितिमें ही तथा कथित मोबलींचींग द्वारा हत्या करवाना.  और इसमें जिन्होंने जांचके उपर प्रश्न उठाये उनको स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा धमकी देना. इस प्रकार एस.सेनाने कोंगी गेंगके सदस्य बननेकी अपनी क्षमता सिद्ध कर दी. अर्णव गोस्वामीके उपर एफ.आई.आर. लगाके पूलीस स्टेशनमें १२ घंटा रक्खा क्यों कि उसने कोंगीके प्रमुखको उसके पैतृक नामसे संबोधन किया.

अर्णव गोस्वामीको मारडालने लिये गुन्डे भेजे गये और अर्णव गोस्वामीने उनके उपर केस दर्ज किया. तो गुन्डोंको जमानत मिल गयी. लेकिन जो मीडीया कर्मी उद्धवके फार्म हाउस पर गये और उसने वॉचमेनको पूछा कि यह फार्म हाउस किसका है तो इन मीडीयाकर्मीयोंको गिरफ्तार करवा दिया और इनको जमानत नहीं मिली.

 

तो आप समज़ गये कि यह सब कैसे होता है

 

इस एस. सेनाने अपनी योग्यता सिद्ध करनेके लिये फर्जी धर्म-निरपेक्षता, जूठ बोलनेका नैपूण्यम्‌, आतंकवादका समर्थन, असामाजिक तत्त्वोंके महानुभावोंसे मेलमिलाप, और उनको केवल समर्थन ही नहीं लेकिन सहायताके लिये तत्परता, और फिल्मी कलाकारोंसे मिलना जुलना, पार्टीयां करना … ये सब तो करना पडेगा ही न.

 

एस.सेनाको ऐसा करनेमें कोई कष्ट नहीं है. क्यों कि वे तो ऐसा करनेके लिये कई वर्षोंसे आतुर थे. हप्ताबाजी तो उनके संस्कारमें था. किन्तु ये सब छोटे पैमाने पर था. अब जब कोंगी-सेनामें मिल गये है तो अब कुछ बडा करना आवश्यक है.

 

देशप्रेमी होना, नीतिमान होना, आमजनता लक्षी होना, सहिष्णु होना, शांतिप्रेमी होना … ये सब बकवास है. ये सब तो फरेबीसे भी सिद्ध कर सकते है.

 

एस.सेनाने सोचा;

“यह साला बीजेपीके साथमें, खुले आम कुछ भी नहीं हो सकता है, ये लुट्येन गेंग हमारे पीछे ही पड जाती है. यदि हम कोंगी गेंगमें मिल जावे तो अच्छा होगा. कोंगी गेंगमें हम सुरक्षित है, और चाहे वह का सकते है. सिर्फ हमें यह अहेसास दिलाना होता है कि वे हमें जो कुछ भी कहें, उन सबको करनेके लिये हम सक्षम है.

 

“कोंगीयोंके पास क्या नहीं है? टूकडे टूकडे गेंग है, अर्बन नक्षल है, समान रुपवाले सांस्कृतिक पक्षके महानुभावमंडल है. हमें और क्या चाहिये? यदि मर जायेंगे तो ये ईशा मसिहा हमारा सब पाप अपने सर पर लेनेको तयार ही है. नहिं तो हमारे मुस्लिम साथीयोंकी कृपासे, हम मुस्लिम बन जायेंगे.  इन मुस्लिमोंकी कृपासे जन्नतमें सोलह सोलह हुरें मिलेगी. और मरनेसे पहेले तो इस मृत्युलोकमें, जी ते जी, हुरें ही हुरें है. चाहे तो फार्म हाउसमें में समुह मज़ा कर लो या चाहे तो सप्ततारक होटेलमें अकेले उनके साथ मजा कर लो. कौन रोकने वाला है! यदि कोई मीडीयावाला आया तो, आनेवाले को जेल ही भेज देंगे और उसकी चेनलको ताला लगा देंगे. यदि कोई न्यायाधीशने चापलुसी की तो …? शीट! यह कोई बात है!!

“अरे भाई देखा नहीं कि सर्वोच्च अदालतके एक निवृत्त न्यायाधीशने क्या कहा था? यदि निष्पक्ष न्याय दिलाना है तो लुट्येन गेंगको खतम करना पडेगा.

 

“इस गेंगको खतम करनेवाला अभी तक अवतरित नहीं हुआ है.

एस. सेना आगे बोली “हमें पहेले अक्ल क्यूँ नहीं आयी?…”

 

शिरीष मोहनलाल दवे

Watch the video to know about the Congi – Daud – NCP – Bollywood – ISI

 

https://youtu.be/cU8NXTeo6GY

 

Bollywood contempt of Hindu Dharma

From: Savarfkar Vinayan < >

Bollywood contempt of Hindu Dharma

The millennium 2000 brought a paradigm shift in Bollywood productions of music and film that began to undermine the Hindu Dharma in a subliminal way, and recent academic studies, eg., the Indian Institute of Management Ahmedabad, have shown that the youth are not only influenced by Bollywood films but they believe them to be an authentic representation of culture and society.
These messages are predominantly anti-Hindu:
  • Hindu priests, rituals, gods are mocked in films
  • Casteism where high caste is set against the low caste
  • Hindu surnames are given to characters with low morals while Muslim surnames given to honest and pious characters – we believe this to be a growing trend over the last two decades of the Khan’s era – to the point now that it has become anti-national.
  • Other Muslim stars like Nassurdin Shah and the Lyricist Javed Akhtar – who we believe uses Islamic Taqyia to masquerade as an atheist against non-Muslims – have shown themselves to be anti-CAA, a law to protect the minorities of Hindus Sikhs Christians and Buddhists from the neighbouring Islamic countries where they are persecuted. None of the Muslim stars including the three Khans came out to defend the abrogation of the article 370 which was discriminatory to the Kashmiri Pandits, women and Dalits. Mahesh Bhatt who apparently converted to Islam has been seen inciting Muslims against the nation on YouTube. Its apt to note here that the Congress leader Kapil Sibal used similar words in the debate on CAA in parliament about fearless Muslims, no doubt inciting a community using his parliamentary privilege. Hindus should note also that none of these people came out in favor of Ram Mandir – we give them all the love and praise, but they cannot return the favor.
  • A journalist Vivek Agnihotri, observes that Christian girls are shown to be of lacking morals and that Homosexuals and Sikhs are shown to be a joke
  • Villains always wear the Hindu Tilak on their forehead
In music we hardly see any new songs that can be classified as ‘evergreen’.
Aamir Khan has even taken to the TV screen to show fault lines among Hindus yet never among Muslims in his SatyamaveJayate shows, not to speak of his anti-Hindu big screen productions as PK and the Hindu terrorists in Baazi with our god names of Raghu-Ram, Shiva, and Krishna.
Salman Khan in Big Boss last year tried to destroy the reputation of our main Hindu Bhajan singer Shri Anup Jalota. Govinda the actor explained on YouTube how he and his group destroy newcomers’ careers, after the Sushant Singh Rajput’s (SSR) death, which has wide opened this hornet’s nest.
Kangana Renaut a successful actor, after the SSR death, took on the ‘Bollywood mafia’, in her words, of drugs and nepotism where the second generations of the past great Bollywood directors and producers whom she respects, no longer care for the arts but only their control and power to the point if and when newcomers begin to rise they create schemes to drive them to mental illness and suicide.
Karan Johar the second generation of the great Yash Johar family said in an interview here at the London School of Economics in 2015 that people can leave Bollywood if they have a problem with us…” This arrogant attitude stifles the arts development as it blocks newcomers to rise above the glass ceiling which they cannot surpass.
Kangana has shown how the nexus of Bollywood, media and politicians works and now we saw its proof, when ShivSena’s second generation leader with his power over the municipal authority razed her house today which then the High Court had to intervene to issue an order to stop further damage.
The effects on society is resulting in our Hindu Sadhus being killed during the last few months while the police watch over their beatings by youths as in Palghar Maharashtra and indeed in Tamil Nadu a Christian police officer beat a Sadhu so badly he soon after died.
Bollywood has a moral duty to spread goodness and the high ideals of truth and dharma in society. Sadly, the veterans of Bollywood have chosen to remain silent in the current upheaval started by Sushant Singh Rajput’s death. But the central Government ought to look at helping the industry to establish self-regulatory mechanisms to avoid stifling the art and artists development, by removing financial and other bottlenecks for them – they could establish a Quango funded by the taxes to promote free arts and artists. India has the resources now but lacks some institutions – Government agencies – for checks and balances and promote its culture and art.
We are grateful to Kangana Renaut for exposing all of the above and from Hindu Council UK representing the British Hindus and their temples and cultural organisations we support her implicitly in her endeavors to bring Truth and Dharma to her industry. The paradigm shift we noticed around the start of the millennium when Sonia Gandhi a committed Catholic came to power and started imprisoning our Sadhus and even a Shakracharya and lathi-charging Baba Ramdev in Delhi but now we cannot take the killings of Sadhus lying down, it is an attack on our Dharma and the British Hindus – from India, Nepal, Africa, Caribbean, Srilanka and other nations – will be with you all the way.
Anil Bhanot OBE
Director Hindu Council UK
9 September, 2020