क्या ईस्लाम शांति वाला है ?

Source: https://www.youtube.com/watch?v=0ohjjmUrFXI&pbjreload=10

Mind Hunters

अगर कोई मुसलमान कहता है कि हम शांति वाले हैं तो उसे यह जरूर बता देना, जिहाद का उद्देश्य इस्लाम के धर्म-ग्रंथों-कुरान और हदीसों में सुस्पष्ट दिया गया है। देखए कुछ प्रमाण-

( 1 ) ”तुम उनसे लड़ो यहाँ तक कि फितना (उपद्रव) बाकी न रहे और ‘दीन’ (मजहब) पूरा का पूरा अल्लाह के लिए हो जाए”। (कुरान 8:39 ,पृष्ठ 354)

( 2 ) ”वही है जिसने अपने ‘रसूल’ को मार्ग दर्शन और सच्चे ‘दीन’ (सत्यधर्म) के साथ भेजा ताकि उसे समस्त ‘दीन’ पर प्रभुत्व प्रदान करे,चाहे मुश्रिकों को नापसन्द ही क्यों न हो”। (कुरान 9:33, पृष्ठ 373)

( 3 ) पैगम्बर मुहम्मद ने मदीना के बैतउल मिदरास में बैठे यहूदियों से कहाः ”ओ यहूदियों! सारी पृथ्वी अल्लाह और उसके ‘रसूल’ की है यदि तुम इस्लाम स्वीकार कर लो तो तुम सुरक्षित रह सकोगे।” मैं तुम्हें इस देश से निकालना चाहता हूँ इसलिए यदि तुममें से किसी के पास सम्पत्ति है तो उसे इस सम्पत्ति को बेचने की आज्ञा दी जाती है वर्ना तुम्हें मालूम होना चाहिए कि सारी पृथ्वी अल्लाह और उसके रसूल की है”। (बुखारी, जिल्द 4:392,, पृष्ठ 259-260 , मिश्कत , जिल्द 2:217, पृष्ठ 442)

( 4 ) पैगम्बर मुहम्मद ने अपने जीवन के सबसे आखिरी वक्तव्य में कहाः ”हे अल्लाह! यहूदियों और ईसाइयों को समाप्त कर दे, वे अपने पैगम्बरों की कबरों पर चर्चे (पूजाघर) बनाते हैं अरेबिया में दो धर्म नहीं रहने चाहिए।” (मुवट्टा मलिक, 511 : 1588, पृष्ठ 371)

( 5 ) पैगम्बर मुहम्मद ने मुसलमानों से कहा ”जब तुम गैर-मुसलमानों से मिले तो उनके सामने तीन विकल्प रखोः उनसे इस्लाम स्वीकारने या जजिया (टैक्स) देने को कहा यदि वे इनमें से किसी को न मानें तो उनके साथ जिहाद (सशस्त्र युद्ध) करो।” (मुस्लिम, जिल्द 3: 4249, पृष्ठ 1137 ; माजाह , जिल्द 4: 2858,, पृष्ठ 189-190) अतः कुरान, हदीसों एवं मुस्लिम विद्वानों के अनुसार जिहाद के प्रमुखतम उद्देश्य हैं —

( A ) गैर-मुसलमानों को किसी भी प्रकार से मुसलमान बनाना

( B) मुसलमानों के एक मात्र अल्लाह और पैगम्बर मुहम्मद में अटूट विश्वास करके तथा नमाज , रोजा , हज और जकात द्वारा उन्हें कट्टर मुसलमान बनाना

( C ) विश्व भर के गैर-मुस्लिम राज्यों, जहाँ की राज व्यवस्था सेक्लयूरवाद, प्रजातन्त्र, साम्यवाद, राज या मोनार्की आदि से नियंत्रित होती है, उसे नष्ट करके उन राज्यों में शरियत के अनुसार राज्य व्यवस्था स्थापित करना

 

क्या अल्लाह ईश्वर एक है ?

Source: https://www.youtube.com/watch?v=0ohjjmUrFXI&pbjreload=10

Ayush Kaptiyal

 

जो लोग अल्ला ईश्वर एक बोलते है ये उनके लिए एक लेख है ,,, अल्ला और ईश्वर में अंतर देखये :-

 

🕉️भगवान् कहते हैं जीवों पर दया करो,

☪️अल्लाह कहते हैं जानवरों को हलाल करो मतलब धीरे धीरे तड़पा के मारो और फिर खाओ।

 

🕉️भगवान् कहते हैं की मेरी पूजा तब करो जब तुम्हारा मन शांत और तन मन पवित्र हो। भगवान् ने कहीं भी अपनी पूजा को अनिवार्य नहीं बताया है न ही ये कहा है की अगर मेरी पूजा नहीं की तो तुमको आग में झोक दूंगा ,

☪️अल्लाह कहते हैं की 5 समय मेरी इबादत करना अनिवार्य है अगर ऐसा नहीं करोगे तो जहन्नुम की आग में झोंक दूंगा मतलब जबरन इबादत।

 

🕉️भगवान् कभी नहीं कहते की मेरे सिवा किसी की पूजा की तो तुम्हे नर्क में डाल दूंगा, खौलते तेल में पकाऊंगा तुम्हे, और हमे तो वो विभिन्न रूपों में पेड़ पौधों पशु पक्षियों का भी पूजन करने का सुझाव देते हैं।

☪️अल्लाह कहते हैं मेरे सिवा किसी को पूजा तो तुम सबसे बड़े पापी हो और तुम्हे कठोरतम यातना मिलेगी और तुम जहन्नम के इंधन बनोगे। इसी के तहत मुस्लिम अपने माता पिता के पैर तक नहीं छू सकते। वन्दे मातरम तक नहीं बोल सकते। (इतिहास में देखें तो अपनी जबरन पूजा कराने वाले और अपने सिवा किसी को पूजने वाले को म्रत्युदंड देने वाले रावण और हिरण्यकश्यप हुए हैं।)

 

🕉️भगवान् ने सिखाया है वसुधैव कुटुम्बकम

☪️अल्लाह कहते हैं की मुस्लिम मुस्लिम तो भाई भाई हैं,, पर गैरमुसलमान मुसलमानों के खुले दुश्मन हैं।

 

🕉️भगवान कहते हैं तुम्हे स्वर्ग नर्क तुम्हारे कर्मों के अनुसार मिलेगा।

☪️अल्लाह कहते हैं की जन्नत सिर्फ मुसलामानों के लिए हैं और सारे के सारे गैरमुसलमान जहन्नुम में जायेंगे जहाँ उनके लिये कठोरतम यातना तैयार है। गैरमुसलमान किसी भी कीमत पे जन्नत में नहीं जा सकते। कर्मों को गोली मारो मुसलमान होना भर जन्नत की गारंटी है और अगर तुम जिहादी हुए मतलब आतंकवादी तो तुमको जन्नत में अल्लाह के सबसे निकट और हीरा मोती की बनी कुर्सियों पर बैठने को मिलेगा। जिहादियों को जन्नत में सबसे ऊँचा स्थान मिलेगा।

 

🕉️भगवान् कहते है पृथ्वी गोल है। सूर्य निरंतर प्रकाशमान रहता है,

☪️अल्लाह कहते हैं पृथ्वी चपटी है और सूर्य अस्त होने पर कीचड़ में घुस जाता है.

 

🕉️भगवान् कहते हैं की तुम तुम्हे अंतरिक्षयान से अन्तरिक्ष की सैर कराने वाले भगवान् की पूजा करो।

☪️अल्लाह कहते हैं की तुम आकाश से बहार जा ही नहीं सकते जबकि आज मनुष्य अन्तरिक्ष में कहीं भी जा सकता है। शादी के वो एक विवाह या बहुविवाह कर सकते हैं पर अल्लाह ने पुरुषों को तो 4 शादी का अधिकार दिया है पर महिलाओं को नहीं। उल्टा महिलाए यौन्संबंधों का आनंद न लेने पायें तो उनकी भगनासा काट देने को कहा है जिसे महिला खतना कहते हैं

🕉️भगवान् ने पुरुष महिला में भेद नहीं किया है,

☪️किन्तु अल्लाह कहते हैं की महिलायें जन्नत में जा ही नहीं सकती। उनके लिए दोजख ही है तभी तो मुस्लिम पुरुषों को तो जन्नत में 72 हूरें अर्थात 72 कुवारी लडकियाँ देने को कहा है पर महिलाओं को कुछ नहीं ।

 

किसी को किसी से तुलना करने से पहले सामने वाले को जाने ,,. .

 

जानो कुरान क्या कहती है।

जानो कुरन क्या कहती है।

 

(By) Avengers 2 months ago

पहले मैं मानता था कि मज़हब नहीं सिखाता । आपस में बैर करना पर कुरान पढ़ने के बाद मेरे विचार सर के बल पलट गये और इसका कारण कुरआन की ये सूरा : आयतें हैं – –

2 : 98 – अल्लाह गैर मुस्लिमों का शत्रु है ।

3 : 85 – इस्लाम के अलावा कोई अन्य धर्म स्वीकार नहीं है ।

8 : 39 – गैर मुस्लिमों से युद्ध करो जब तक की अल्लाह का दीन पूरी तरह कायम न हो जाए ।

9 : 5 – मूर्तीपूजकों को जहां पाओ वहां मार दो ।

35 : 3 और 27 : 61 – अल्लाह के अलावा कोई अन्य प्रभू पूज्य नहीं है ।

9 : 23 – गैर मुस्लिमों को दोस्त न बनाओ

5 : 5 / – यहूदियों और ईसाइयों को दोस्त न बनाओ ।

9 : 28 – मूर्तीपूजक नापाक हैं ।

4 : / 0 / – काफिर तुम्हारे खुले दुश्मन हैं ।

9 : 123 – काफिरों पर जुल्म करो ।

66 : 9 – काफिरों और मुनाफिकों से जिहाद करो ।

4 : 56 – आयतों को इंकार करने वाले की खाल पकाएंगे ।

8 : 69 – लूट का सब माल ( महिलाओं सहित ) हलाल है ।

9 : / 4 – अल्लाह मोमिनों के हाथों काफिरों को यातना देगा ।

21 : 98 – अल्लाह के सिवाय किसी और को पूजने वाले जहन्नुम का ईंधन हैं ।

 

Source: https://www.youtube.com/watch?v=HXvQX-tZDwk

 

मुहम्मद_ने_कुरान_कब_और_क्यों_बनाई_थी  ?

From: Vishwas Pitke < >

मुहम्मद_ने_कुरान_कब_और_क्यों_बनाई_थी  ?

 

मुस्लिम  विद्वानों   और इतिहासकारों   ने यह दावा  कर रखा  है कि कुरान  का पहला हिस्सा जिब्राईल  नामका फरिश्ता आसमान से     रमजान महीने   की तारीख  27  को सन 610 में   लेकर  आया  था  ,उस समय  रात  थी जिसे  आज मुस्लिम  लैलतुल  ,कद्र कहते हैं ,उस  समय मुहम्मद  की  आयु  40 साल  थी ,

 

लेकिन  यह  बात  सरासर  बेबुनियाद  और झूठ   है , क्योंकि   मुस्लिम  विद्वान् कुरान   के आवरण   की जो तारीख   सन  610 बताते हैं  ,उस से काफी पहले   सन 586 ही   मुहम्मद के ताऊ  जुबैर इब्न  अब्दुल मत्तलिब   ने  एक  कविता  मक्का के लोगों  को सुनाई  थी  ,जो कुरान को अल्लाह की किताब  होने की पोल  खोलने   वाली है ,  यह   बात    तो  हम अपनी तरफ  से  कह  रहे हैं  ,  और न  किसी हिन्दू   संगठन  की  तरफ   से  कह  रहे  हैं लोगों  को यह  बात  जानकर   सहसा विश्वास  नहीं  होगा  की  ,  यह  बात   खुद मुहम्मद   के ताऊ ”  अल जुबैर –    ” ने  उस  समय   कह  दी थी  ,  जब   मुहम्मद  ने कुरान   बनाना   चालु  कर  दिया   था ,, और अपनी   उलटी  सुल्टी बेतुकी   बातों   को अल्लाह   का कलाम बता  कर   मक्का  के लोगों   को जिहादी  बना  रहे  थे ,

 

इस संवेदनशील  विषय   की  सत्यता  को  समझाने  के लिए  आपको    यह  बताना  जरुरी     था कि हमें  यह  जानकारी कहाँ  से  और  कैसे  मिली  ?

 

1- जानकारी   का सुराग  कैसे मिला  ?

कुछ   दिन  पहले  मुझे     एक उर्दू किताब     मिली  जो  निजामी प्रेस  लखनऊ  से छपी  थी  इसका नाम   “ग़दीर  से करबला  –غدیر سے کربلا تک

”   था  ,  इसके लेखक  का  नाम   हसन  नवाब  रिजवी   है  ,  इस किताब  के पेज नंबर 49 पर   मुहम्मद के  ताऊ  जुबैर अब्दुल मत्तलिब  का  एक  अरबी    शेर     दिया   गया   है   ,

لعبت هاشم بالملک فلا

خبر جاء و لا وحی نزل‏

(लबअत हाशिम बिलमुल्क  फला ,खबर जाअ व्  ला  वही  नजल )

अर्थात –  हाशिम   की  औलाद(MUhammad)  ने दुनिया  के साथ  खेल  किया  , नतो आसमान  से कोई खबर  आयी  और   कोई वही  ( revelation )   ,यानी कुरान   आयी.

,हमने इस पूरी कविता के बारे में   दो  दिन  तक   अंगरेजी  और उर्दू  में  सर्च  किया लेकिन   कुछ  पता नहीं   चला   ,    तीसरे दिन  जब  हमने  फारसी में  सर्च    किया  तो  ईरानी  साईट में   अरबी की   वह पूरी  कविता मिल  गयी   ,  साथ में उसका फारसी अनुवाद  भी मिल  गया  , यह  कविता मुहम्मद  सबसे बड़े  चाचा   यानि  ताऊ जुबैर  बिन   अब्दुल  मुत्तालिब   जिसे अव्वाम  भी कहा  जाता   है  ,  उस  समय   लिखी  थी  जब   मुहम्मद   लोगों   से  यह    कहा  करता  था   कि  अल्लाह   के  फ़रिश्ते   मेरे पास  खबर     लाया    करते   हैं  ,  और  मैं  जो  भी  कहता  हूँ   वह  अल्लाह  का  कलाम   है  ,

 

2-मुहम्मद  का  संयुक्त  परिवार 

लेकिन   मुहम्मद   के   ताऊ  ,  चचेरे  भाई   सभी  मुहम्मद  को पाखंडी  और  सत्तालोभी      मानते  थे  ,  दादा  (grand father ) का नाम ” अब्दुल मुत्तलिब    बिन   हिशाम   –  شيبة ابن هاشم عبد المطّلب ” था। इसकी   छह   पत्नियां   थी  ,जिन   से  अब्दुल मुत्तलिब     के    10 संतानें  हुई  ,(  कुछ  लोग  12 संतानें   भी  कहते   हैं   ,)इनका  विवरण   यह    है

 

1-अल जुबैर ”  الزبير بن عبد المطلب “यह  परिवार  का सबसे  बड़ा बेटा  था  इसलिए  मुत्तलिब   ने इसे  घर  का मुखिया    बना दिया   ,  यह  अपने  ऊँटों   से  व्यापारियों  का  सामान लाने   और  भेजने  का काम   करता   था  ,  इसके  अतिरक्त   अरबी में कविता  भी  करता   था  ,  लोग इसे अबू  ताहिर  भी  कहते   थे  , इसी  नाम  से  यह  शायरी भी  करता  था ,और  जब मुहम्मद  के पिता गुजर  गए तो  सबसे  पहले इसी ने  मुहम्मद को  पाला  था  ,  और जब  मुहम्मद      14 साल  का  हो  गया तो  सन 584 में यही  मुहम्मद   को  सीरिया   घुमाने ले  गया   ,  वहां   राजा   की  शान शौकत  देख  कर  मुहम्मद  के  दिल  में  दुनियां  पर  राज करने  इच्छा   पैदा हो  गयी   ,  चूँकि    अपना  राज  कायम  करने  के लिए   सेना  जरुरी    होती   है   ,  और  सैनिकों  को  वेतन देने  की मुहम्मद  की  औकात  नहीं   थी  ,  इसके लिए मुहम्मद  ने जिहाद  का तरीका  खोज  निकाला 

 

2-अबू  तालिब  –बचपन   में इसका नाम     “अब्द मनाफ़ –عبد مناف ”  था  , इसका बेटा  अली  था  ,( मुहम्मद ने  इसी से अपनी पुती  फातिमा  से  शादी  कर    दी  थी  )यद्यपि   अबू  तालिब   ने मुहम्मद को  पाला  ,  फिर भी  अबुतालिब   कभी मुस्लमान   नहीं   बना  , जुबैर की तरह   अबूतालिब   भी  इस्लाम  को  पाखण्ड और  कुरान  को मुहम्मद  की  रचना     मानता   था

 

3-अब्द इलाह   –  यह  मुहम्मद   के पिता  थे ,इसकी पत्नी  का नाम   आमिना  थाजब  अब्दुल्लाह  और आमिना  की  शादी  हुई   तो  अब्दुल मुत्तलिब  ने  एकहि  दिन   एकसाथ   एक  लाइन में सौ  ऊँटों  को  क़ुरबानी  की   थी  ,  उस  से कहा  गया था कि इस से अल्लाह      आमिना   से  अच्छे गुणों    वाला बच्चा   देगा ,  और  बच्चे के बाप को लम्बी आयु   देगा  ,  लेकिन   इसका बिलकुल उल्टा  हुआ  , मुहम्मद के  जम्म  से पहले अब्दुल्लाह   मर   गया  , और  आमिना    का जो बच्चा  मुहम्मद  हुआ  उसके  हाथ पैर ऊँट के खुर   जैसे   थे  , लोग  समझते  थे  इस बच्चे  में दुष्ट   शक्तियों   का वास  है इसी  लिए मुहम्मद  के सभी  चाचा   उस  से दूर   रहते  थे  ,  कोई  भी मुस्लमान   नहीं   बना 

 

4-उम्मे हकीम अल  बैदा –तीसरे  खलीफा उस्मान बिन  अफ्फान की नानी

5-बर्रा  – अबू सलमा की माता

6-अरवा -यह बचपन में मर गयी

7-अतीका -उमय्या अल मुगीरा की पत्नी

8-उम्मा -जैनब  बिन्त जहश और अब्दुल्लाह इब्न जहश  की माता

9-अब्दुल उज्जा -उर्फ़  अबू  लहब  , मुहम्मद  का चाचा  , कुरान में इसका उल्लेख है

10-हमजा – अली का भाई – उहद  के युद्ध में अबू सुफ़यान  की औरत हिंदा ने इसका कलेजा  चबा लिया  था

 

3-जुबैर  ने  यह कविता क्यों  लिखी 

जुबैर    परिवार  का मुखिया  होने के साथ   शायर भी  था  , मक्का  के लोग उसकी कविताओं  को  यद् रखते   थे  ,  लेकिन  लोगों को मुहम्मद  की  आदतें   और  कामों   से नफ़रत    थी  , 13 साल होते ही  मुहम्मद    ने अपनी  गैंग बना    ली   , जिस से वह काफिले  लूटा करते थे  ,  मुहम्मद ने यह  बात फैला राखी  थी  कि ऐसा करने के लिए  उसे  आसमान   से हुक्म  मिलता   है  ,पहली  बड़ी  लूट  मुहम्मद   ने सन 583 में  मकका  के कबीले कबीले  हवाजिन   को लूटा ,इस  लूट को “हरब  अल फ़िज़ार – ﺣﺮﺏ الفجار ”  कहा   जाता    है  , इसमें मुहम्मद  को  काफी  माल मिला  , इसके बाद   मुहमम्मद ने  लगातार     चार  लूट की वारदातें    की ,  जिस  से मक्का  के लोग मुहम्मद के दुश्मन    हो  गए  ,   लोगन   का मुंह  बंद  करने के लिए मुहम्मद   ने चाल चली   ,  वह  अपने  हरेक  कुकर्मों  को जायज  सिद्ध   करने के लिए  एक पुस्तक  बनाया  करता   थे जिसका  नाम   मुहम्मद   ने  ” अल किताब –    ”  रख  लिया   था   और जब  लोगों   ने आरोप  लगाया कि यह  किताब  तुमने   ही  बनाइ  है  , तो मुहमम्मद  ने अनपढ़  होने  का  नाटक   किया  , जबकि  इसका छोटा  भाई  अली लिखना पढ़ना   सीख   गया  .  और  जब  मुहम्मद    ने कहा यह   किताब  मेरी  रचना नहीं   ,  अल्लाह फ़रिश्ते   के माध्यम   से भेजता  रहता  ,  और  जब  जुबैर  को  लगा  कि सत्ता   के लोभ    में मुहममद दुनिया   को  धोखा  दे  रहा  है  तो उसने सोचा कि मुहमद  के कारन    पूरा कबीला  ,  अरब  लोगों   का नाश हो जायेगा  उसने  यह  कविता  लिखी   थी और जैसे जैसे मुहम्मदी   जिहाद  फैलता  गया  , जुबैर की कविता भी लोगों  को याद होती  गयी  ,जिहाद के बहाने मुहम्मद  ने जिन लोगों  को मरवाया था  वह बदला  लेने का मौका  देखने  लगे  ,

 

4-यह  कविता  कब  सार्वजनिक हुई 

यद्यपि   जुबैर ने यह कविता  कुरान के  अवतरण  से काफी पहले ही लिखी थी  ,लेकिन  इसे “यजीद बिन मुआविया – : يزيد بن معاوية بن أبي سفيان ” ने   अपने दरबार में लोगों  के सामने  उस  समय पढ़ा  था  जब  उसके सामने   इमाम हुसैन   का कटा  हुआ   सर लाया  गया   था  , यह  घटना 10  अक्टूबर  सन 680 , यानी  10 मुहर्रम   हिजरी 61 की बात  है  ,दरबार  में यजीद हुसैन के कटे सर  को छड़ी  से  मारते हुए कहने  लगा

(Most of the narrations had confirmed that Yazeed Bin Muawiya had recited the poetry of Al-Zubary during his public assembly, Al-Zubary is a poet from Quraish at the time of Jahiliyyah (pre-Islamic stage) who was very tough on Muslims)

أتمنى لو أن قادتي القدامى في بدر يمكن أن يشهدو

I wish my old chiefs at Badr could witness

الخازرج خوفا من تأثير الاندفاع

Al-Khazraj’s fearing of the impact of rush

كانوا سيهتفون ويصرخون بسعادة

They would have cheered and shouted happily,

ثم قالوا لي ، يا حسن يا سعيد

Then they would have said, good job O Yazeed

ان كُن مَن خندف اِذا كُنت الانتقام

I shall not be from the Khandaf if I do not avenge,

من عائلة أحمد لما فعله

From the family of Ahmad for what he had done

لعبت هاشم با مُلك فما

Hashim had manipulated the Reign

لاخبرجاء ولا وحي نزل

So, neither news arrived nor revelations happened”

****************  **********************************

 

इन  पुख्ता सबूतों   से     यह बातें  सिद्ध होती   हैं  ,

 

1 –मुस्लमान  विद्वान झूट  कहते हैं  कि कुरान   “कलाम उल्लाह  – ” यानी अल्लाह  की वाणी  है  ,   जो अरबी नौवें  महीने रमजान में  आसमान   से जिब्राईल  नाम  का फरिश्ता  मुहम्मद  के  पास  लाया   था  , और मुस्लिम  विद्वान्  कुरान  के अवतरण अर्थात  नुजूल ( Revelation )  की  जो 23 तारीख दिसंबर  सन 609 बताते   हैं   वह  भी  सरासर  झूठ  है  ,

 

2-जबकि  सच्चाई   तो  यह  है कि मुस्लिम  विद्वान्  कुरान  के उतरने की  जो तारीख   (23Dec 609    ) बताते  हैं  उस से  काफी पहले से  ही  लगभग  सन 585 -586 से  ही   मुहम्मद  जो भी बेतुकी  बातें  बोलता  था उसे( वही – “यानी  अल्लाह के वचन  बता दिया करता था  ,  और अपने  हरेक  कुकर्मों  को  को न  कोई  आयत बना  कर जायज ठहरा  देता  है  ,  इस  काम   में   उसका चचेरा भाई  और  दामाद  अली  भी  साथ  देते  थे  , मुहम्मद  की इस  धूर्तता  को बेनकाब  करने के लिए  ही   अबू  जुबैर  ने कविता  लिखी  थी  , लेकिन  जब  सन 610 में  अबू  जुबैर  की मौत  हुई  तो  मुहम्मद  ने अपनी किताब  को  अल्लाह  की किताब के नाम   से प्रकट  कर  दिया  .

 

B. N. Sharma (भंडाफोडू)

 

Muslims’ Video Say Rape is Okay

 
1. Female Muslim Professor Says Rape Is Okay With Allah Against Non Muslim women
 
2. Muslim Woman claims they can rape non Muslim women #349
 
3. Brother Rasheed : Allah of Islam legalizes raping Non-Muslim women

 

कुछ ख्यात हस्तियों के विचार – ईस्लाम के बारेमे

From: https://www.youtube.com/watch?v=qP6ChEiuMkM

UMESH PARMAR:

कुछ ख्यात हस्तियों के विचार –

(1) इस्लाम धर्म नहीं एक मानसिक रोग है – शी जिनपिंग । (चीनी राष्ट्रपति)

(2) 99 % मुसलमान सोच से कट्टर आतंकवादी ही होते हैं चाहे वह भाईचारे का कितना ही दिखावा करें – सलमान रुशदी ।

(3) आतंकवादी कुरान का गलत अर्थ नहीं निकाल रहे, जो लोग मानते हैं कि कोई भी धर्म गलत नहीं सिखाता उन्होंने कुरान कभी पढी ही नहीं, कुरान ही आतंकवाद की जड़ है – तसलीमा नसरीन ।

(4) इस्लामिक आतंकवादी मरीज हैं और कुरान इस बीमारी की जड है इसलिये कुरान पर ही प्रतिबंध लगाना होगा – डॉ. वफा सुल्तान ।

(5) मुसलमान उस मछली के समान है जो बाकि सभी मछलियों को खा जाना चाहती है – यू. विराथू ( बौद्ध भिक्षुक ). .

(6) जब तक क़ुरान रहेगी तब तक दुनिया मे शांति स्थापित करना असंभव है—भूतपूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ग्लेडस्टोन

(Still we Hindu can (and must) declare Islam illegal in Bhaarat desh to bring peace and prosperity in Bhaarat. -Suresh Vyas)

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Hindus, Know What is Ghazwa-e-Hind

Hindus, Know What is Ghazwa-e-Hind

Source: Wikipedia.

Hadith of Ghazwa-e-Hind or Ghazwatul Hind (Arabic: غزوة الهند) is a prophecy of Jihad mentioned in some sayings of the Islamic prophet Muhammad foretelling battles in the Indian subcontinent between Muslims and non-Muslims, resulting in the victory of Muslims.

Prophecy

In the Hadith collections, the prophet is reported to have said:

“There are two groups of my Ummah whom Allah will free from the Fire: The group that invades India, and the group that will be with Isa ibn Maryam”.

— Sunan an-Nasa’i, Book of Jihad, 3175

“The Messenger of Allah promised that we would invade India. If I live to see that I will sacrifice myself and my wealth. If I am killed, I will be one of the best of the martyrs, and if I come back, I will be Abu Hurairah Al-Muharrar (freed from the Fire)”.

— Sunan an-Nasa’i, Book of Jihad, 3173 and 3174

“In this Ummah, the troops would be headed towards Sindh and Hind”.

— Naim ibn Hammad in Kitab al-Fitan

“A group of you will conquer India, Allah will open for them (India) until they come with its kings chained – Allah would forgive those warriors – when they return back (from India), they will find Isa ibn Maryam in Syria”.

— Naim ibn Hammad in Kitab al-Fitan

“A king of Jerusalem (Baitul Maqdis) would make warriors move forward towards Hindustan. The warriors will destroy the lands of Hind; would seize its treasures; the king would use those treasures for the decor of Jerusalem. That troops would bring the Indian kings in front of the king of Jerusalem. His warriors by king’s order would conquer all the areas between East and West: and would stay in Hindustan till the appearance of Dajjal”.

— Naim ibn Hammad in Kitab al-Fitan

Interpretation

Some scholars believe that the prophecy has already been fulfilled when Muslims invaded India during the reign of the second Umayyad caliph, Muawiyah ibn Abi Sufyan followed by Mahmud ibn Sebuktegin, Mu’izz ad-Din Muhammad Ghori, Taimur bin Taraghay Barlas etc. to this day while others believe that the conquest of India has not taken place completely yet, but it will occur when Isa ibn Maryam and Imam Mahdi descend from the Heaven to fight Dajjal as per the reported traditions.

According to some Pakistani scholars such as Irfan-ul-Haq and Zaid Hamid, Pakistan came into existence to fulfil the Ghazwa-e-Hind as a prophesy.

 (Dear Hindus, after reading the above, do you find any reason to respect Mohammed or his teachings? Islam is a pardeshi anti-Vedic barbaric ideology that has invaded in Hindustan, and invader has no right to be there. It is against democratic form of government, and it must not be given legal status in any democracy of the world.  Angola understood it well, and has declare Islam illegal. We Hindus have every right and reason to do so, and we can do it with unity and determination, but only till we are a majority in Bhaarat. Please unite and act. Jaya sri Krishna! – Suresh Vyas)

 

Saudi Arabia Demolishes Mosques

From: Mohan Natarajan < >

 

Saudi Arabia Demolishes Mosques to Build Roads Etc.

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Babri masjid was built over a Hindu temple. Saudi Arabia demolishes mosques to build roads etc.

 

Why Indian Muslims object to demolishing the dilapidated and locked, Babri masjid for building of ram temple?

 

  • Mohan

 

Please see the posting from another group:

 

In Saudi Arabia, the government demolishes mosques, build roads and other constructions.

 

So then why did Indian Muslims make such an issue of the Babri Masjid case in India?

 

Rajat Verma, Politics is really bad..!!

Answered Mar 18, 2015 · Author has 111 answers and 131.3k answer views

 

Let’s Face the truth first.

What are the Mosques destroyed in Medina (Saudi Arabia)?

 

Photos showing the destruction of the Grand Mosques.

Over 98% of the Kingdom’s historical and religious sites have been destroyed since 1985, according to the U.K.-based Islamic Heritage Research Foundation.

Fine, they might be lying as the West always lies!!(?)

Sami Alawi, the founder and former director of Mecca’s Hajj Research Center and opponent of the destruction of Mecca’s historic sites, estimates that over 300 antiquity sites in Mecca and Medina have already been destroyed, such as:

* House of the first caliph, Abu Bakr, which was leveled to make room for the Mecca Hilton Hotel.

* An ancient house belonging to the Prophet Mohammed was recently razed to make room for a public toilet facility.

* House of Khadijah, the wife of the Prophet, demolished to make way for public lavatories;

* The house of Abu Bakr, the Prophet’s companion, now the site of the local Hilton hotel;

* The house of Ali-Oraid, the grandson of the Prophet, and the Mosque of Abu-Qubais, now the location of the King’s palace in Mecca.

* An ancient mosque belonging to Abu Bakr has now been replaced by an ATM machine.

* Six small mosques in Medina where Muhammad is believed to have prayed have been locked.

* The sites of Mohammed’s historic battles at Uhud and Badr have been paved to put up a parking lot.

All these from the following References: Please read them:

1.http://time.com/3584585/saudi-ar…
2. http://www.independent.co.uk/new…