From: Vinod Kumar Gupta < >
*_क्रांतिकारी सन्त यति नरसिंहानंद सरस्वती जी के एक-एक शब्द को सुनें।
उनकी ओजस्वी वाणी को अपने मन मस्तिष्क में आत्मसात करे।*
_यह कटु सत्य है कि जब तक हम अपने शत्रुओं के घृणित व हिंसक व्यवहार को नहीं जानेंगे तब तक ऐसे आत्याचारियों से सुरक्षित नहीं रह सकते. हमारी संस्कृति जीयो और जीने दो का संदेश देती है साथ ही अत्याचारियों का समूल नाश करने का भी आह्वान करती है।श्रीमद भगवत गीता केवल कथा वाचकों का धनोपार्जन का माध्यम नहीं बल्कि यह तो प्रत्येक व्यक्ति को धर्म की रक्षार्थ विधर्मियों के विरुद्ध संघर्ष करके मानवता के कल्याण का संदेश देती है।
_अतः सभी को अपने जीवन में धर्म रक्षार्थ केंद्रित होकर आगे बढ़ना होगा
और इसके लिए भगवान श्री राम व भगवान श्री कृष्ण के समान शास्त्र व शस्त्र तो धारण करने ही होंगे।
