कुरान में स्त्रियों की दशा .


Source: https://www.youtube.com/watch?v=8rGoNOD6gAA

Comment by Mr. STRANGER

कुरान में स्त्रियों की दशा-

 

कुरान भी ऐसी ही पुस्तक हुई है कि जिसने स्त्रियों के अस्तित्व को मिटा दिया है। कुरान में कुंवारा रहना मना है बिना विवाह के कोई मनुष्य रह नहीं सकता। इसमें स्त्रियों को नीचा दिखलाने के सन्देश ही दिए गए हैं। देखिए- व करना फी बयूतिकुन्ना। -(सूरते अहज़ाब आयत ३२) और ठहरी रहो अपने घरों में। यह वही आयत है जिसके आधार पर परदा प्रथा खड़ी की गई है। इससे शारीरिक, मानसिक, नैतिक व आध्यात्मिक सब प्रकार की हानियां होती हैं और हो रही हैं। फ़मा अस्तमतअतमाबिहि मिन्हुन्ना फ़आतूहुन्ना अजूरहुन्ना फ़री ज़तुन। और जिनसे तुम फ़ायदा उठाओ उन्हें उनका निर्धारित किया गया महर दे दो। सन्तान हो जाने पर किसी ने तलाक दे दिया तो? फ़रमाया है- बल बालिदातोयुरज़िअना औलादहुन्ना हौलैने कामिलीने, लिमन अरादा अन युतिम्मरज़ाअता व अललमौलूदे लहू रिज़ कहुन्न व कि सवतहुन्ना बिल मारुफ़े। –(सूरते बकर आयत २३३) और माँऐ दूध पिलायें अपनी सन्तानों को पूरे दो वर्ष। और यदि वह (बाप) दूध पिलाने की अवधि पूरा कराना चाहे। और बाप पर (ज़रूरी है) उनका खिलाना, पिलाना और कपड़े-लत्तों का (प्रबन्ध) रिवाज के अनुसार माँ का रिश्ता इतना ही है औलाद से, इससे बढ़कर उनकी वह क्या लगती है? फिर बहु विवाह की आज्ञा है। कहा है- फ़न्किहु मताबालकुम मिनन्निसाए मसना व सलास वरूब आफ़इन ख़िफ्तुम इल्ला तअदिलू फ़वाहिदतन ओमामलकत ईमानुक़ुम। -(सूरते निसा आयत ३) फिर निकाह करो जो औरतें तुम्हें अच्छी लगें। दो, तीन या चार, परन्तु यदि तुम्हें भय हो कि तुम न्याय नहीं कर सकोगे (उस दशा में) फिर एक (ही) करो जो तुम्हारे दाहिने हाथ की सम्पत्ति है। यह अधिक अच्छा है ताकि तुम सच्चे रास्ते से न उल्टा करो। कुरआन की महिलाओं से संबंधित सूरा:आयतें — इस्लाम मूर्खो का मजहब हैं और मूर्खो के लिए है 2:223 – स्त्रियां खेत हैं जैसे चाहो अपने खेत में जाओ और आगे भेजो । (आगे भेजो ही हलाला है ?) 65:4 – जो पत्नी अभी रजस्वला नहीं हुई है उससे तलाक की इद्दत तीन मास है । 33:37 – ससुर अपने मुंहबोले या गोद लिये बेटे की बीबी से निकाह कर सकता है । 33:33 – महिलाएं बिना सज-धज के घर में ही रहें । 2:228 – मर्दों का औरतों के मुकाबले दर्जा बडा हुआ है । 2:230 – एक तलाकशुदा पत्नी को पहले पति से फिर निकाह करने से पहले किसी दूसरे मर्द से निकाह, शारिरिक संबंध और तलाक की प्रक्रिया (हलाला) पूरी करनी होगी । इतना पड़ने के बाद मे कहूंगा की इस्लाम अधर्म है उपरोक्त प्रमाण द्वारा सिद्ध होता है कि इस्लाम केवल स्त्रीयों की रक्षा नहीं अपितु स्त्रीयों से व्यभिचार करना चाहता है अतः कुरान पढ़कर भी नारी की रक्षा नहीं हो सकेगी।

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Author: Vyasji

I am a senior retired engineer in USA with a couple of masters degrees. Born and raised in the Vedic family tradition in Bhaarat. Thanks to the Vedic gurus and Sri Krishna, I am a humble Vedic preacher, and when necessary I serve as a Purohit for Vedic dharma ceremonies.

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