भारतीय संविधान पाखंड


From: Pramod Agrawal < >

Subject: Re: *भारतीय संविधान पाखंड!*

अम्बेडकर में संविधान बनाता इतनी काबिलियत ही नहीं थी…

I hate Ambedkar. हिन्दी में कहूँ तो मैं अम्बेडकर से घृणा करता हूँ । कारण लाखों हैं । मैं उन लोगों से भी घृणा करता हूँ जो संविधान सभा के सदस्य थे । अम्बेडकर ही वह व्यक्ति था जिसने अंग्रेजों से डिक्टेशन लेकर संविधान को लिखा । अंग्रेजों की फूट वाली नीति को लागू किया और उसी के लिखे संविधान में सैकडों जातियाँ क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट का पाप 1952 तक भोगना पड़ा । और याद दिला दूँ कि ये वो जातियाँ थी ,जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और बाद में भी अंग्रेजों की नाक में रस्सी डाले रखी ।

दूसरी बात ये की भारत का संविधान बनाने में कुल 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन लगे थे।। कॉपी पेस्ट करने में इतने दिन???? इस से बाबा साहेब के टेलेंट का पता चलता है..

भारत का संविधान बनाने में कुल 6396729 रुपए उस जमाने में बाबा साहेब ने खर्च किये थे। उस जमाने में घी 5 रुपए किलो मिलता था और आज घी 450 रुपए किलो है। कुल मिलाकर 90 गुना अंतर आगया। उसी तरह 6396729 ×90=575705610 रुपए आज के हिसाब से खर्च हुए…ये किसी आठवे अजूबे से कम नहीं की एक पूर्व निर्मित संविधान को कॉपी पेस्ट करने में इतने साल और इतना पैसा खर्च हुआ…,

भारतीय संविधान विश्व का सबसे लचीला संविधान है इसीलिए इसको Paradise of Advocates कहते है यानि वकीलो का स्वर्ग…क्योंकि ये इस तरह से बना है की वकील मनमाने तरीके से इसका उपयोग करके किसी भी बेगुनाह को गुनहगार और गुनहगार को बेगुनाह साबित कर सकते है

भारतीय कानून में समानता (equality) वास्तव में एक पाखंड है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(3) और 15(4) वास्तव में देश को जाति और लिंग में विभाजित करते है। संविधान में सबको समानता का हक़ प्राप्त नहीं है। वर्तमान परिस्थिति ये है की अनुच्छेद 15 आज भारतीय नेताओ के लिए वोट बटोरने का जरिया बन गया है…और उसके लिए वो अपने देश को भी बेंच सकते है। जितने भी दहेज़ रेप इत्यादि एक तरफ़ा कानून बने है सब इन्ही अनुच्छेदों की बदौलत बने है…

भारतीय संविधान में देश की राजनितिक पार्टियो को लेकर कोई अनुच्छेद ही नहीं है…

भारतीय संविधान में हिंदी को मातृ भाषा घोषित ही नहीं किया गया…

और सबसे बड़ा प्रश्न ये की अम्बेडकर और नेहरू जैसे ब्रिटिश एजेंट लोगो ने संविधान जिस समय लागू किया उस समय ये लोग जनता द्वारा चुने हुए नहीं थे… तो फिर इस संविधान को हम क्यों माने??? संविधान 26 जनवरी 1950 से लागु हुआ,और पहला आम चुनाव भारत में 1952 में हुआ…तब फिर इन लोगो को ये हक़ किसने दिया था की ये एक कॉपी पेस्ट वाली किताब पूरे भारत पर थोप दे???

मान लीजिये आपका देश आजाद हुआ और चार लोग मिलकर लोकतंत्र की दुहाई देकर एक किताब बना दे और आपसे पूंछे भी नहीं..क्या ये जायज़ होगा??? और वो किताब आपके साथ भेदभाव करती हो…उसमे कुछ भी सटीक न हो बल्कि लचकदार हो..

संविधान की प्रस्तावना में लिखा है “”हम भारत के लोग……

हम को जगह कब दी?? सिर्फ चार लोगो ने मिलकर उस समय के 40 करोड़ लोगो की तरफ से संविधान थोप दिया…

मित्रो संविधान में भारत को राज्य क्यों बोला है~? राष्ट्र क्यों नहीं बोला?? मतलब साफ है की कहीं न कहीं आज भी भारत ब्रिटिश हुकूमत के अधीन है…

दोस्तों संविधान इस तरह का बनाया है की आज ये संविधान भारत का विनाश लिख रहा है । हर तरह की व्यवस्था के लिए यही संविधान जिम्मेदार है। भारतीय नेता इसका मनमाना निर्वचन करके देश को बर्बाद कर रहे है। अगर आपको न्याय नहीं मिलता या आपके साथ भेदभाव होता है तो इसके लिए संविधान जिम्मेदार है क्योंकि संविधान बनाया ही इस तरह से गयाहै….

आज़ादी के बाद इन नेताओ के पास एक नया भारत बनाने का सुनहरा मौक़ा था मगर इन लोगो ने एक सड़ा गला संविधान बनाकर देश को गर्त में डाल दिया…अफ़सोस….

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Author: Vyasji

I am a senior retired engineer in USA with a couple of masters degrees. Born and raised in the Vedic family tradition in Bhaarat. Thanks to the Vedic gurus and Sri Krishna, I am a humble Vedic preacher, and when necessary I serve as a Purohit for Vedic dharma ceremonies.

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