श्री तारेक फ़ताह ने बताया है कि शिक्षण नेता मौलाना अबुल कलाम आज़ाद – जो मक्का मे पैदा हुवे थे – उन्होने राजा दाजिर को किताबो मे रखने से मना कर दि या था। जब पैगम्बर मुहम्मद और उनके परिवार की जाने खतरे मे थी तो उन्होने राजा दाहिर कि मदद मांगी। दाहिर उनको बचाने के लिये गया तो उतने समय मे मुहम्मद को मार दिया गया था। किन्तु उनके परिवार को दाहिर ने अपने राज्य मे बचा के रक्खा। हिन्दू की ये अच्छाई लोगो को पता ना चले ईसलिये स्कूलोमे दाहिर का इतिहास लिख्ने की मना मौलाना के की। बात समज़ो – कि ईस्लाम हिन्दू लोग और हिन्दू धर्म का दुश्मन है जो कभी मित्र नहि बन शकता। तो मुसलमानो को क्भी भारतमे नेता ना बनावे।
जय श्री कृष्ण