From: Vinod Kumar Gupta < >
जहरीले जिहाद का जनून…★ 15.02.2019
★क्या यह उचित है कि दुश्मन के छदम युद्धों का सिलसिला बना रहें और हम उसे कायराना हमला कहकर निंदा करके अपने दायित्वों से भागते रहें ? निसंदेह केवल आक्रोशित होकर उत्साहवर्धक बयान तक सीमित रह जाने वाला नेतृत्व आज हमारे देश की नियति बन चुका है ।
★कल (14.2.2019) जम्मू-कश्मीर हाईवे पर अवंतीपोर के पास गोरीपोरा में सी.आर.पी.एफ. के 2500 सैनिकों से अधिक के काफिले पर लगभग 100 किलो आर.डी.एक्स. (विस्फोटक) से भरी “कार बम” बनी एक स्कॉर्पियो गाड़ी से आत्मघाती आतंकवादियों ने आक्रमण करके एक बार फिर हमको ललकारा है।
★हमारा शासन-प्रशासन व सभ्य समाज जिहादियों द्वारा बहाये गये निर्दोषों व मासूमों के बहते रक्त के प्रति तत्काल आक्रोशित होकर निंदा व भर्त्सना करने तक अपने को सीमित कर लेता है। आज सभ्य समाज की एक सामान वैश्विक विवशता है कि वे आतंकवादी घटना घटने के बाद शोकाकुल व एकजुट होकर श्रद्धाञ्जलि सभा करना व मोमबत्ती जलाना ही अपना कर्तव्य समझने लगा है।
★आज देश का प्रत्येक नागरिक पाकिस्तानियों व देश में छिपे पाक परस्त षड्यंत्रकारियों के आक्रमणों से अत्यधिक दुखी है। पिछले कुछ वर्षों से ये जिहादी हमारे सैन्य व पुलिस ठिकानों को लक्ष्य बना कर निसंकोच हानि पहुँचा रहें हैं।
★भारत-पाक सीमाओं पर प्रति वर्ष सैंकड़ों बार होने वाला युद्धविराम उल्लंघन एवं आतंकवादियों की घुसपैठ भी हमको शर्मसार करती आ रही है। पिछले 40-45 वर्षों में सुरक्षाकर्मियों सहित लगभग 90 हज़ार देशवासियों को भी हम खो चुके हैं। जब हमारा भारत विकसित राष्ट्रों की श्रेणी आने की ओर अग्रसर है तो फिर हमकों कम से कम अपने मुकुट “जम्मू – कश्मीर” को जिहादी जल्लादों से तो बचाना ही होगा ।
★विचार करना होगा कि 29 सितंबर 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक द्वारा शत्रुओं के लाँचिंग पैडों पर अपनी अद्भूत साहसिक रणनीति का परिचय देने के अब ढाई वर्ष उपरांत भी पाकिस्तानी सेना व उसके आतंकियों में भारतीय सेना का कोई भय नहीं ? वे बार बार हमारे क्षेत्रों में अकारण आक्रमण करने का दुःसाहस कर रहें हैं।
★हमें अपनी सुरक्षा में हो रही कमियों व अन्य संदेहात्मक तत्वों की सच्चाई को समझना होगा। सुरक्षाबलों और सीमाओं पर बार – बार होने वाले आतंकी हमलों के पीछे छुपे देशद्रोही भेदियों व उनके साथियों को ढूँढना होगा। बिना किसी गुप्त सूचनाओं के कोई बाहरी शत्रु व घुसपैठिये हमारी सेनाओं के अतिसुरक्षित क्षेत्रों और सुरक्षाबलों के काफिले को निशाना बनाने में कैसे सफल हो सकते है ?
★हमें हमारी सेनाओं व सुरक्षाबलों की सजगता, सतर्कता व कर्तव्यपरायणता के प्रति कोई संदेह नही फिर भी क्या हम ऐसी आत्मघाती आक्रमणों को अपनी सीमाओं व सीमांत क्षेत्रों में योंही झेलते रहें ? ऐसी संकटकालीन स्थिति में हमारी सुरक्षा व्यवस्था की त्रुटियों का विश्लेषण अवश्य होता होगा और उसके उपाय भी विशेषज्ञों द्वारा सुझाये जाते होंगे फिर भी हम आहत होते रहें तो क्या इस पर राष्ट्रीय चिंतन नही होना चाहिये ? अब और अधिक धैर्य व संयम युद्धकालीन रणनीतिक कौशल के अभाव का नकारात्मक संकेत देगा ?
★आज श्री नरेंद्र मोदी जी जैसे कर्मठ प्रधानमंत्री के होने से देश की वैश्विक स्थिति सकारात्मक है तो क्यों न हमें कम से कम अपने जन्मजात शत्रु पाकिस्तान से सभी राजनैतिक , व्यापारिक व सांस्कृतिक सम्बन्धों को तोड़ने का विकल्प तो अपनाना ही चाहिये। पाकिस्तानी घुसपैठियों व आतंकवादियों के प्रवेश पर अंकुश लगाने के लिए सड़क व रेल मार्गों को भी बंद करना उचित होगा।
★इन परिस्थितियों में विचार करना होगा कि निर्दोष लोगो की मौत को कोई भी सभ्य व्यक्ति, समाज ,समुदाय व धर्म कैसे स्वीकार कर सकता है ? क्या मदरसा शिक्षा प्रणाली में इतनी सामर्थ्य है कि मुस्लिम समुदाय के अपरिपक्व बचपन को तोते की तरह रटा-रटा कर उसमें “क़ाफ़िर” व “अविश्वासी” के प्रति इतनी अधिक नफरत भर देती है कि वह “जन्नत की हूरो” के लालच में गैर मुस्लिमों के सर्वनाश करने को उद्वेलित हो जाता है।
★अब धर्म के नाम पर बार-बार निर्दोषो का बहने वाला लहू सभ्य समाज के लिये भयावह चुनौती बन चुका है। फिर भी सत्य, अहिंसा, धर्मनिरपेक्षता, सहिष्णुता व मानवता की बात करने वाले बड़े बड़े बुद्धिजीवी केवल शांति से रहने वाले उदार और सहिष्णु समाज को ही उपदेश देना जानते है ।
★आज इस्लामिक आतंकवाद जिसे जिहाद (धर्मयुद्ध) भी कहा जाता है, एक वास्तविकता है और भारत सबसे अधिक इसकी भयानक चपेट में है। ऐसे में सेक्युलर कहे जाने वाले मानवतावादी शान्ति बनाये रखने में कैसे सफल हो सकते है ? इस्लामी मानसिकता के जहरीले जनून से भरे जिहादियों के सामने शान्ति का प्रस्ताव किसी मूर्खता से कम नहीं। ★भारत के साथ साथ विश्व के समस्त राजनीतिज्ञों व बुद्धिजीवियों को चिंतन करना होगा कि कौन समाज मिलजुल कर सहिष्णुता के साथ अहिंसक तरीके से रहना चाहता है और कौन कट्टरता के कारण असहिष्णु व हिंसक व्यवहार करने में विश्वास करता है।
★हम भारतवासी आखिर कब तक अपना रक्त बहा कर पाकिस्तान व पाक समर्थित इस्लामिक आतंकवाद का दंश झेलने को विवश होते रहेंगे ? एक तरफा धार्मिक उन्माद से उपजे अमानवीय अत्याचारों की जड़ों को ढूंढ कर सूखा देने से वसुधैव कुटुम्बकम की धारणा को बल देना होगा।अन्यथा धार्मिक श्रेष्ठता की होड़ में जहरीले जिहाद के जनून से निर्दोषों व मासूमों का नरसंहार मानवता को कलंकित करता रहेगा ?
विनोद कुमार सर्वोदय
(राष्ट्रवादी चिंतक व लेखक)
गाज़ियाबाद