मुस्लिम बादशाओं के हिंदुओं पर अत्याचार .


From: Pramod Agrawal < > wrote:

मुस्लिम बादशाओं के हिंदुओं पर अत्याचार और हत्याएं और मंदिरों को लूटना और तोडना ——-

क्या कभी वामपंथी और कोंग्रस इतिहासकारों ने आपको ये बताया ?

👇🏽

१. सन् 1018 में मुस्लिम तुर्कीयों का आक्रमण और मुस्लिम अब्दुल कासिम महमुद(महमुद गजनी) के द्वारा 50 हजार हिन्दुओं का कत्ल, हजारो स्त्रियों के साथ दुराचार व लगभग १ हजार मन्दिरो को नष्ट करना ।

२. सन् 1024 मे महमुद गजनी का पुन: आक्रमण और 50 हजार हिन्दुओं का कत्ल, सोमनाथ मन्दिर की लुट, और मन्दिर को तोड़ देना ।

३. सन् 1193 मे मुहमद गौरी का आक्रमण और 1 लाख हिन्दुओं का कत्ल ।

४. सन् 1196 कुतुब अल दीन ऐबक का आक्रमण और 1 लाख से ज्यादा हिन्दुओं का कत्ल ।

५. सन् 1197 मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी का अाक्रमण करके नालन्दा विश्वविधालय को धव्स्त करना और 10 हजार हिन्दु और बौद्धष्ठो का कत्ल ।

६. गयासुद्दीन बलबन का आक्रमण और मेवात के 1 लाख राजपुतो का कत्ल करना ।

७. सन् 1323 मे मुहम्मद बिन तुगलक के द्वारा 12 हजार हिन्दुओं का कत्ल ।

८. सन् 1353 मे फिरोज शाह तुगलक के द्वारा 1 लाख 80 हजार हिन्दुओं का कत्ल ।

९. सन् 1366 में बहमनी सल्तनत के द्वारा 5 लाख हिन्दुओं का कत्ल, गर्भवती स्त्रियों का पेट काटना, और हिन्दु महिलाओं के साथ दुराचार ।

१०. सन् 1398 तैमुर का भारत पर आक्रमण करके 45 लाख हिन्दुओं का हरियाणा मे कत्ल करना ।

११. सन् 1398 मे तैमुर द्वारा पर भटनेर के किले पर आक्रमण करके सम्पुर्ण आबादी का सफाया।

१२. सन् 1398 मे ही तैमुर द्वारा गाजियाबाद के निकट लगभग 1 लाख स्त्रियों और बच्चो का दुराचार के बाद कत्ल करना । ।

१३. सन् 1398 मे तैमुर द्वारा दिल्ली मे 1.5 लाख हिन्दु समेत अन्य धर्मो के लोगो का कत्ल ।

१४. सन् 1399 में तैमुर मेरठ में द्वारा 3 लाख हिन्दुओं का कत्ल, और लाखो स्त्रियों के साथ दुराचार ।

१५. मार्च 1527 खानवा के युद्ध मे बाबर की सेना द्वारा 20 हजार हिन्दुओं की हत्या, जिसमे से 10 हजार राजपुत सैनिक बलिदान हुये ।

१६. सन् 1560 मे अकबर द्वारा नरसिंहपुर जिले मे 48 हजार हिन्दुओं की हत्या, मुख्यत: राजपुत मारे गये ।

१७. सन् 1565 मे दक्कन के सुलतान द्वारा 1 लाख से अधिक हिन्दुओं का नरसंहार और सभी मुख्य मन्दिरो को ध्वस्त करना ।

१८. सन् 1568 अकबर द्वारा किये गये आक्रमण मे चितौड़ केे 30 हजार राजपुतो का नरसंहार, और 8 हजार स्त्रियों का हरम मे जाने से बचने के लिये स्वयं को समापत कर लेना ।

१९. सन् 1618 से 1707 के मध्य मुगल साम्रज्य और ओरंगजेब के द्वारा 46 लाख हिन्दुओं की हत्या, लगभग 15 लाख ब्राहम्ण की हत्या काशी, हरिद्वार व अन्य स्थानो पर ।

२०. सन् 1738 से लेकर 1740 के मध्य नादिर शाह( फारसीयो द्वारा) के द्वारा 3 लाख हिन्दुओं की हत्या ।

२१. सन् १७६१ मे अफगानो के आक्रमण पर मराठो के साथ युद्ध मे 70 हजार मराठों का बलिदान होना, और 22 हजार मराठा स्त्रियों और बच्चों को गुलाम बनाना।

(बाबरी मस्जिद विवाद और वामपंथी फरेब)

———

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले ने विवादित स्थल पर मंदिर होने के शोधपूर्ण वैज्ञानिक निष्कर्षों की पुष्टि तो की ही थी, साथ ही साथ मस्जिद-कमिटी की ओर से गवाह के तौर पर वामपंथी इतिहासकार इरफ़ान हबीब की अगुवाई में पेश हुए देश के तमाम वामपंथी इतिहासकारों के फरेब को भी न्यायालय ने उजागर किया था l न्यायालय को ये टिप्पणी करनी पडी थी कि इन इतिहासकारों ने अपने रवैये से उलझाव, विवाद, और सम्प्रदायों में तनाव पैदा करने की कोशिश की और इनका विषय-ज्ञान छिछला है l क्रॉस एग्जामिनेशन में पकड़े गए इनके फरेबों के दृष्टांत आपको हैरत में डाल देंगे :-

(1) वामपंथी इतिहासकार प्रोफ़ेसर मंडल ने ये स्वीकारा कि खुदाई का वर्णन करती उनकी पुस्तक दरअसल उन्होंने बिना अयोध्या गए ही (मामले को भटकाने के लिए) लिख दी थी l

(2) वामपंथी इतिहासकार सुशील श्रीवास्तव ने ये स्वीकार किया कि प्रमाण के तौर पर पेश की गयी उनकी पुस्तक में संदर्भ के तौर पर दिए पुस्तकों का उल्लेख उन्होंने बिना पढ़े ही कर दिया है l

(3) जेएनयू की इतिहास-प्रोफ़ेसर सुप्रिया वर्मा ने ये स्वीकार किया कि उन्होंने खुदाई से संदर्भित ‘राडार सर्वे’ की रिपोर्ट को पढ़े बगैर ही रिपोर्ट के गलत होने की गवाही दे दी थी l

(4) अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर जया मेनन ने ये स्वीकारा कि वे तो खुदाई स्थल पर गयी ही नहीं थी लेकिन ये (झूठी) गवाही दे दी थी कि मंदिर के खंभे बाद में वहां रखे गए थे l

(5) ‘एक्सपर्ट’ के तौर पर उपस्थित वामपंथी सुविरा जायसवाल जब क्रोस एग्जामिनेशन में पकड़ी गयीं तब उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें मुद्दे पर कोई ‘एक्सपर्ट’ ज्ञान नहीं है; जो भी है वो सिर्फ ‘अखबारी खबरों’ के आधार पर ही है l

(6) पुरात्व्वेत्ता वामपंथी शीरीन रत्नाकर ने सवाल-जवाब में ये स्वीकारा कि दरअसल उन्हें कोई “फील्ड-नॉलेज” है ही नहीं l

(7) “एक्सपर्ट” प्रोफ़ेसर मंडल ने ये भी स्वीकारा था, “मुझे बाबर के विषय में इसके अलावा – कि वो सोलहवीं सदी का एक शासक था – और कुछ ज्ञान नहीं है l न्यायधीश ने ये सुन कर कहा था कि इनके ये बयान विषय सम्बंधित इनके छिछले ज्ञान को प्रदर्शित करते है l

(8) वामपंथी सूरजभान मध्यकालीन इतिहासकार के तौर पर गवाही दे रहे थे पर क्रॉस एग्जामिनेशन में ये तथ्य सामने आया कि वे तो इतिहासकार थे ही नहीं, मात्र पुरातत्ववेत्ता थे l

(9) सूरजभान ने ये भी स्वीकारा कि डी एन झा और आर एस शर्मा के साथ लिखी उनकी पुस्तिका “हिस्टोरियंस रिपोर्ट टू द नेशन” दरअसलद खुदाई की रपट पढ़े बगैर ही (मंदिर संबंधी प्रमाणों को झुठलाने के) दबाव में केवल छै हफ्ते में ही लिख दी गयी थी l

(10) वामपंथी शिरीन मौसवी ने क्रॉस एग्जामिनेशन में ये स्वीकार किया कि उन्होंने झूठ कहा था कि राम-जन्मस्थली का ज़िक्र मध्यकालीन इतिहास में नहीं है l

दृष्टान्तों की सूची और लम्बी है l पर विडंबना तो ये है कि लाज हया को ताक पर रख कर वामपंथी इतिहासकार रोमिला थापर ने इन्हीं फरेबी वामपंथी इतिहासकारों व अन्य वामपंथियों का नेतृत्व करते हुए न्यायालय के इसी फैसले के खिलाफ लम्बे लम्बे पर्चे भी लिख डाले थे l पर शर्म इन्हें आती है क्या ?

(सन्दर्भ: Allahabad High court verdict dated 30 September 2010 )

Unknown's avatar

Author: Vyasji

I am a senior retired engineer in USA with a couple of masters degrees. Born and raised in the Vedic family tradition in Bhaarat. Thanks to the Vedic gurus and Sri Krishna, I am a humble Vedic preacher, and when necessary I serve as a Purohit for Vedic dharma ceremonies.

Leave a comment