From: Vinod Kumar Gupta < >

हिन्दू तीर्थ यात्रियों का उत्पीड़न…..जलता कश्मीर….

महोदय/महोदया

➖यह बहुत खेदजनक है कि कुख्यात आतंकी बुरहान की मौत का बहाना लेकर घाटी को जिस प्रकार से रक्तरंजित करके व हिंदुओं को खुलेआम भारतीय काफ़िर कह कर उनको अमरनाथ जी की यात्रा के प्रति मौत का भय बना कर रोका जा रहा है ।

➖क्या महबूबा सरकार ने ईद से पहले  लगभग 650 पत्थरबाजो को इसीलिये छोड़ा था कि वे हिन्दू धर्मावलंबियों को अमरनाथ यात्रा में विध्न डाल कर उनको उत्पीड़ित करें ?

➖ध्यान रहें महबूबा मुफ़्ती के पिताजी मुफ़्ती मोहम्मद सईद भी आतंकियों के प्रति निरंतर नम्र रहते रहें और पूर्व में अपने कार्यकाल में भी कश्मीरी अलगाववादियों व आतंकवादियों को अनेक प्रकार से सहयोग करके उनके आपराधिक विवादों को लौटाया गया , सरकारी नौकरियां दी गयी और पुनर्वास नीति के अन्तर्गत करोडो रुपयो की सहायता भी की गयी थी।

➖यही सिलसिला उमर अब्दुल्ला की पिछली सरकार में भी चलता रहा।पिछले 10-15 वर्षो में लगभग दस हज़ार से अधिक ऐसे आतंकियों व अलगाववादियों को पुनर्वास नीति का लाभ भी मिला और आपराधिक मुकदमे से भी बचे।उनमें से न जाने आज कितने  पुनःसक्रिय हो गये होंगे और नए नए युवाओ को आगे करके अपने लक्ष्य को साधने में लगे होंगे ,बुरहान वानी …भी उनमे से एक हो तो कोई आश्चर्य नहीं।

➖ढुलमुल नीतियों से राष्ट्र सुरक्षित नहीं रह सकते ।शासन को देशद्रोहियों के प्रति कठोर तो होना ही होगा, जैसे चीन में दंगाइयों को सरकारी गोलियों का शिकार होना पड़ता है, तभी वहां दंगा व  देशद्रोही प्रदर्शन नियन्त्रित हो पाते है। राष्ट्र की सुरक्षा सरकार का सर्वोच्च दायित्व होता है।
➖कश्मीर की जनता यह क्यों नहीं सोचती कि उनको देश में आम जनता के मुकाबले दस गुना अधिक प्रति व्यक्ति जो सहायता मिल रही है वह उन्ही हिन्दुओ. के द्वारा दिए गए राजस्व से एकत्रित कोष से ही मिलती है जिनको ये कट्टरपंथी “काफिर” कहते है ?

➖ उनको केन्द्रीय सरकार की सहायता से होने वाली हज़ यात्रा व अन्य अल्पसंख्यक योजनाओं का जो लाभ मिलता है वह भी उन्ही काफ़िर हिंदुओं के राजस्व से एकत्रित हुए कोष से ही मिलता है जिनसे ये जिहाद करके जन्नत पाना चाहते है।

➖आज कल जिस प्रकार से कश्मीर घाटी में हिन्दू तीर्थ यात्रियों के उत्पीड़न के समाचार आ रहें है उससे ऐसा आभास हो रहा है कि आलगाववादियों , आतंकवादियो व पाकिस्तान की आई. एस. आई. एवम लश्करे-तोइबा आदि आतंकी संगठन हमारी सरकार की कमजोर व समझौता वादी नीतियों का अनुचित  लाभ उठा कर घाटी में निज़ामे-मुस्तफा की स्थापना के लिए अधिक कटिबद्ध हो रहे है।

➖जब तक चीन के समान कोई ठोस व आक्रामक नीति नहीं बनेगी और आतंक के धर्म का बुर्का नहीं हटेगा तब तक कट्टरपंथी जिहादियों को नियंत्रित नहीं किया जा सकता।

➖इसके लिए सेना व पुलिस को भी तत्काल आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश देने होंगे ।अब सुरक्षाबलों को छदम धर्मनिरपेक्षता व मानवाधिकार  के नाम पर अनियंत्रित जिहादियों के सामने आत्मघात सहने को विवश करना बंद करना होगा।

➖अतः केन्द्र व राज्य की सरकारो को राष्ट्रीय अखंडता के लिए इन देशद्रोही शक्तियों के विरुद्ध आक्रामक नीतियों का सहारा लेना होगा नहीं तो 1990 की काल अवधि से भी अधिक भयानक परिणाम हो सकते है । यह अब देश की केंद्रीय सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है क्योंकि राज्य  सरकार तो प्रायः अप्रत्यक्ष रुप से इन षड्यंत्रकारियों के सामने बेबस ही रहती है।

विनोद कुमार सर्वोदय

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