बाबा रामदेवजी ।
मेरा आपको दंडवत् प्रणाम ।
मे आपको एक सुचन और प्रार्थना करता हु कि आप एक खास प्रकारका गलेका हार या हाथमे पहेनने का band हजारों कि संख्या मे बनवा लिजिये जो कपडे का होवे या नायलोन जैस होवे । उस पर बडे अक्षर मे लिख होना चाहिये – “॥मैने रुश्वत लेना देना सदन्तर छोड दिया है॥” जब कोई व्यक्ति आपकी सभामे आकर जाहिर करे कि उसने रुश्वत लेना देना छोड दिया है तो आप ये खास बनाया हुवा हार या band उसको अपने हाथ से पहना कर उसको धन्यवाद दे । ऐसा होगा तो सभामे सबको रुश्वत छोडने का उत्साह मिलगा। बस यहि सुचना और प्रार्थना है ।
जय श्री कृष्ण॥
– सुरेश व्यास