जैन धर्म के आदि गुरु ऋषभदेव है। श्रीमद् भागवत मे बताया गया है कि वो भगवान् विष्णु के एक अवतार थे। इसलिये जैन धर्म हिन्दु धर्म का एक सम्प्रदाय है। ये जैन भाई ने बिलकुल सहि कहा कि जैन लोग हिन्दू ही है। धर्म सास्त्र कहता हे :- अहिंसा परमो धर्मः। (अहिंसा सबसे उच्च धर्म है।) धर्म हिंसा तथैव च॥ ( और धर्मरक्षण के लिये हिंसा करनी पडे तो वो भी सबसे उच्च धर्म है।). अब धर्म रक्षण क्या है वो समजो। धर्म कर्म करने के लिये जगह चाहिये और शांति व आज़ादी चाहिये। मतलब कि देश चाहिये और वहां आन्तरिक और बाह्य दुश्मनो से सुरक्षा चाहिये। तो ये आन्तरिक् सुरक्षा का काम ज्यादातर हिन्दु समाज को ही करना होगा क्युं कि सब जगह सही समय पर पुलिस नहि पहुंच शकती। याद रहे कि महाभारत मे जब अर्जुन ने कहा कि वो नहि लडेगा तो कृष्ण ने कहा कि असुरो और अधर्मि ओ के सामने उसे लडना हि धर्म है। — धर्म शाश्त्र हे भी कहते है कि “धर्मः रक्षितः रक्षति॥“ आप धर्म का रक्षण करेंगे – धर्म के अनुसार कर्म करेंगे- तो धर्म आपकी रक्षा करेगा। — भारत के इतिहास मे जब जब धर्म युद्ध के लिये धनराशी की जरुरत पडी तो जैन लोगों ने उदारता से दान दिया है। धन्यवाद !