This is one of the proofs that Islam does not include human rights.
Source: https://www.youtube.com/watch?v=JHV3lU0jXeg
Comment by Shri Saraswat
इस्लाम की घिनौनी चालें [पार्ट-3 (तहर्रुश गेमिया)]
‘तहर्रुश गेमिया’ यानि गैर-मुस्लिम या बिना बुर्केवाली महिला का उत्पीड़न/गैंगरेप का एक ऐसा पुराना इस्लामिक खेल जो अरब से शुरू होकर आज बाहर भी फैल चुका है । यह आउटडोर खेल (कुकर्म) अत्यधिक भीड़ वाली खुशनुमा सार्वजनिक जगहों पर भी अचानक से तब शुरू हो जाता है जब कोई गैर-मुस्लिम महिला अल्लाह के बंदों के बीच अकेली फंस जाती है ।
यह खेल मुस्लिम मर्दों (कुछ से लेकर 200 तक) और एक महिला के बीच 3 घेरों को बनाकर खेला जाता है। पहले यानी अंदर के घेरे के पुरुष फंसी हुई महिला के साथ छेड़खानी से शुरुआत करते हैं फिर उसके कपड़े फाड़ना, उसको निर्वस्त्र करना फिर छेड़खानी कर एक-दूसरे की ओर धकेलना और इसके बाद पीटते हुए उसका सामुहिक बलात्कार करते हैं।
दूसरे यानी इससे बाहरी घेरे के पुरुष खेल में कोई अड़चन न आए इसका ख्याल रखते हुए खेल देखने का आनंद लेते हैं। सबसे बाहरी यानी तीसरा घेरा भीड़ को इस खेल से दूर रखने का काम करता है, इस तीसरे घेरे में कई बार मुस्लिम महिलाएं भी हिस्सा लेती देखी गई हैं।
इस खेल के पुरुष खिलाड़ी बारी-बारी से अपना घेरा भी बदलते रहते हैं । इस खेल में अक्सर महिला की मौत हो जाने के कुछ समय बाद खेल समाप्त हो जाता है ।
इस पुराने इस्लामिक कुकर्म को दुनिया के सामने लाने का श्रेय 2011 में अफ्रीका की उस महिला पत्रकार (लॉरा लोगन) को जाता है जो मिस्र में काहिरा के तहरीर स्क्वायर पर इस खेल की पात्र बन गई थी, पर उसके साथियों ने तीनों घेरे तोड़कर उसकी जान जरूर बचा ली ।
चूंकि हिंदुस्तान में मुसलमान अल्पसंख्यक हैं इसलिये वो इस खेल के प्रति अपनी अनभिज्ञता जताते हैं, अन्यथा अरब में इस खेल के प्रचलित होने का घिनौना इस्लामिक मकसद यही है की दुनिया की सभी महिलाएं बुर्के में रहें अन्यथा अंजाम देख लें ।
कश्मीर घाटी से ब्राह्मणों के पलायन का एक कारण यह खेल भी था । याद करिये भारतीय महिला शतरंज ग्रेंड मास्टर सौम्या स्वामीनाथन ने ईरान में एशियन चैंपियनशिप में बुर्के/हिज़ाब की शर्त के कारण शामिल होने से इंकार कर दिया था ।
आप इस्लाम की ऐसी ही घिनौनी चालों से अपडेट होते रहें, मुझे आपसे बस यही अपेक्षा है.
– श्री सारस्वत । (04/12/2019)