बिना पूरी बात जाने जल्दीबाजी मे कोई फैसला नहीं करना चाहिए.


From: Vinay Kapoor < >

एक बार की बात है..!

एक सुंदर लड़की और गुप्ता जी में अफेयर चल रहा था….!
एक दिन दोनों एक मनोरम पार्क में बैठे हुए थे कि….
लडकी ने गुप्ता जी से पुछा-
क्या तुम्हारे पास मारूति कार है ?
गुप्ता जी – नहीं…!
लडकी – क्या तुम्हारे पास फ्लैट है ?
गुप्ता जी – नहीं…!
लडकी – क्या तुम्हारे पास नौकरी है ?
गुप्ता जी – नहीं…!
और….
फिर….. ब्रेक अप….!!
वो सुंदर लडकी…. गुप्ता जी को छोडकर चली गयी…!!
इधर…. अपनी प्रेमिका के इस तरह चले जाने से गुप्ता जी उदास हो गए
और सोचने लगे कि….
जब मेरे पास पाँच-पाँच
BMW कार हैं …
तो, मुझे भला मारूति की क्या जरूरत है ?
जब, मेरे पास खुद का इतना बडा बंगला है तो मुझे फ्लैट की क्या जरुरत है ????
और…
जब, मेरे पास 500 करोड सलाना टर्नओवर का अपना बिजनेस है और 400 लोग मेरे यहाँ नौकरी करते है तो फिर मुझे नौकरी की क्या जरूरत ????
आखिर, वो मुझे क्यों छोड गयी ???
इसीलिए…. बिना पूरी बात
जाने जल्दीबाजी मे कोई फैसला नहीं करना चाहिए…!
और…. सबको अपने स्टैन्डर्ड से नहीं परखना चाहिए क्योंकि हो सकता है वो आपकी सोच से ज्यादा बडा हो…!
यही हालत आज हमारे सनातन हिन्दू समाज की है….!
हमारे सनातन हिन्दू समाज के हर परंपराओं और हर त्योहार बदलते मौसम के अनुसार वैज्ञानिक पद्धति से उसमें एडजेस्ट करने और उससे परेशान होने की जगह उसमें स्वस्थ रहने के लिए बनाए गए हैं…!
झाड़ू का सम्मान करने से लेकर तिलक लगाने, हाथ में कलावा बांधने से लेकर सर पर चोटी रखने और मंदिर में घण्टा बजाने तक का वैज्ञानिक आधार मौजूद है.
क्योंकि…. हमारे हर त्योहार और परम्पराएं पूर्णतः वैज्ञानिक पद्धति से बनाए गए हैं…!
लेकिन…. ज्यादातर लोगों को इसका ज्ञान नहीं है इसीलिए वे इसे सिर्फ महज एक परंपरा मानकर निभाते चले जा रहे हैं…!
जबकि…. हमें जरूरत है अपनी हर परंपरा और त्योहारों के वैज्ञानिक आधार को जानने की… ताकि, हम उसे ज्यादा हर्षोउल्लास से मना सकें और अपनी आने वाली पीढ़ी को भी उसकी जानकारी दे सकें…!
अगर हम ऐसा नहीं कर पाएंगे तो ….जानकारी के अभाव में… अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ने वाले हमारी आगामी पीढ़ी …. आने वाले समय में इसे एक महज अंधविश्वास मानकर इससे किनारा कर लेंगे…!
और…. हमारी आने वाली पीढ़ी का हमारे हिन्दू सनातन धर्म से “ब्रेकअप” हो जाएगा जैसे उस “सुंदर लड़की” का हुआ था.
इसीलिए…. मेरी नजर में हमारी जिम्मेदारी बहुत बड़ी है… तथा, हमें उसे निभाने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए…!
In nutshell
1. we need not adjust our festivals, traditions & rituals for the happiness of others.
2. Need of the hour is to find reasons behind all these rituals, traditions & festivals.
3. We should have a separate platform for discussing these topics keeping this platform for Country/patriotic topics only
Regards.
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Author: Vyasji

I am a senior retired engineer in USA with a couple of masters degrees. Born and raised in the Vedic family tradition in Bhaarat. Thanks to the Vedic gurus and Sri Krishna, I am a humble Vedic preacher, and when necessary I serve as a Purohit for Vedic dharma ceremonies.

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