Hindus Couples Require At Least Three Children For Survival of Culture


From: Vishvapriya Vedanuragi < >

लघुकथा
एक माँ – एक बेटा 
गली में कुतिया ने नौ बच्चे दिए 
बेटा माँ से बोला :- माँ ! एक पिल्ले को मैं घर लेकर आऊं ?
माँ बोली :- नहीं बेटा ! 
बेटे ने पूछा :-क्यों?
माँ :- यदि तुमको कोई मेरे पास से अपने घर ले जाये तो मुझे कैसा लगेगा ?
बेटा :- हम्म ………ठीक है 
(थोड़ी देर बाद)
लेकिन माँ ! कुतिया के पास तो कई हैं 
माँ :- लेकिन मेरे पास तो एक ही है 
बेटा :- तो फिर हम “कई” क्यों नहीं ले आते 
माँ :- निरुत्तर , असहाय 
.
(कथा-सार :- कृपया यदि अब भी अवसर है तो एक से अधिक सन्तान करें,
एक सेना में (शस्त्र) के लिए दें, एक धर्म कार्य में (शास्त्र) के लिए दें 
और  एक अपने पास रखें 
तब ही जा कर वेद मन्त्र यजुर्वेद 20/25 सफल होगा |)

यजुर्वेद 20/25 :-
यत्र ब्रह्म च क्षत्रं च सम्यञ्चौ चरतः सह |
तं लोकं पुण्यं प्रज्ञेषं यत्र देवा: सहाग्निना || 
.
जिस राष्ट्र/समाज में ब्रह्म-शक्ति (ज्ञान/ब्राह्मण)और क्षत्र-शक्ति (बल/क्षत्रिय) दोनों समन्वित सुसंगठित हो, एक साथ चलती हों उसी राष्ट्र/समाज में पुण्यलोक = सुराष्ट्र व दर्शनीय जनसमाज निर्मित होता है | और जहाँ विद्वान अधिकारी शासकगण अपने नायक के साथ एकमत हो व्यवहार करते हैं |

सादर धन्यवाद
विदुषामनुचर 
विश्वप्रिय वेदानुरागी

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Author: Vyasji

I am a senior retired engineer in USA with a couple of masters degrees. Born and raised in the Vedic family tradition in Bhaarat. Thanks to the Vedic gurus and Sri Krishna, I am a humble Vedic preacher, and when necessary I serve as a Purohit for Vedic dharma ceremonies.

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