From: Pramod Agrawal < >
महाराष्ट्र के हिंदुओं ने कोंग्रेस और एनसीपी की देशद्रोही तथा हिंदूद्रोही नीतियों से त्रस्त हो कर बीजेपी और शिवसेना जैसी हिंदुत्ववादी देशभक्त पार्टियों को वोट दे कर विजयी बनाया लेकिन यदि शिवसेना मात्र अपना मेयर बनाने के लोभ में देशद्रोही और हिन्दूद्रोही कोंग्रेस का आश्रय लेती है तो क्या यह हिंदुओं के साथ विश्वासघात नहीं होगा ?*
*और क्या कोंग्रेसी ब्लैकमेल करके शिवसेना को हिंदूद्रोही नीतियों के लिये बाध्य नहीं करेंगे ?
*और अगले चुनावों में शिवसेना क्या दुबारा देशभक्त हिंदुओं का वोट प्राप्त कर वर्तमान सीट संख्या रख सकेगी या कोंग्रेस की तरह डूब जायेगी ?*
*और अगले चुनावों में शिवसेना क्या दुबारा देशभक्त हिंदुओं का वोट प्राप्त कर वर्तमान सीट संख्या रख सकेगी या कोंग्रेस की तरह डूब जायेगी ?*
*ये मेरी निजी सोच है पसंद आये तो अपना समर्थन दीजिये*…..
अगर तीन तलाक़ के नियम का निर्णय सुप्रीम कोर्ट नही कर सकती, क्युकि इससे मुस्लिम भाइयों के धर्म और मन को ठेस पहुचती है; और
इसका मामला सिर्फ मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड तय करेगी………


तो उस सुप्रीम कोर्ट को कोई हक़ नही बनता की राम मन्दिर के निर्माण का फ़ैसला वो करे। इसका फ़ैसला भी हिंदू धर्म के संगठन ही करेंगे, क्यूकी ऐसा न करने से 100 करोड़ हिन्दुओं के मन को ठेस पहुँचती है.. सुप्रीम कोर्ट किसी एक समुदाय को लेकर नही चल सकती..
बात ऊपर तक जानी चाहिये..इतना शेयर करो कि ये सोच भी एक मुद्दा बन जाय..
*जय श्री राम*