From: Vinod Kumar Gupta < >
➖ गांधी पर कैसा गर्व ➖
🔘➖आज भी भारत का अधिकांश समाज यह मानता कि गांधी जी की विचारधारा को मारा जा रहा है, पूर्णतः अतार्किक है, अशुद्ध है ।देश में आज भी “बुरा न बोल, न सुन, न देख ” की विचारधारा अहिंसात्मक होकर बहुसंख्यक वर्ग के भरोसे फल-फूल रही है।
🔘➖यह कहना भी अनुचित नहीं होगा कि गांधी जी की मुस्लिम पोषित विचारधारा आज भी राष्ट्र को सुदृढ़ व सफल बनाने में बाधक बनी हुई है।
🔘➖जो इस्लाम आज भारत के साथ साथ विश्व में आतंकवाद का पर्याय बन चुका है उसमें गांधी जी को क्या सत्य व अहिंसा के दर्शन हुए थे जो उन्होंने उनको वह पाठ पढ़ाने का कभी साहस नहीं किया?
🔘➖क्या अहिंसा का दर्शन करोड़ों भारतवासियों को आज भी कायरता का पाठ नहीं पढाता? क्या अहिंसात्मक मनस्थिति से अन्याय, अत्याचार व आतंकवाद को बढ़ावा नहीं मिला ?
🔘➖परिस्थितियां और वास्तविकता की अज्ञानता में आज भी करोड़ों भारतीय गांधी जी पर “गर्व” करते होंगे। परंतु राष्ट्र की अस्मिता पर अभिमान करने वाले करोड़ों भारतीयो को यह कौन समझायेगा कि राष्ट्रीयता के पतन का मुख्य कारण ‘मुस्लिम उन्मुखी राजनीति’ गांधी जी की देन नहीं थी?
🔘➖भारत की स्वतंत्रता से पहले का मुस्लिम पोषित इतिहास व विभाजन की पीड़ा को समझे बिना ‘गांधी’ पर गर्व करना उन लाखो निर्दोषो की आत्माओं के साथ विश्वासघात होगा, जो उस समय “गांधी – दर्शन” के कारण मुस्लिम धर्मान्धता का शिकार बनें थे।
🔘➖काश गांधी जी अंग्रेज़ो के प्रभाव में स्वतंत्रता के पश्चात् कश्मीर जाकर शेख अब्दुल्ला के घर न ठहरते और कश्मीर के राजा हरीसिंह से पाकिस्तान में विलय का सुझाव/आग्रह न करते तो संभवतः कश्मीर के भारत में बिना शर्त विलय हो जाने पर भी अभी तक विवादित अनुच्छेद 370 का समावेश नहीं होता और नहीं शीघ्रता में जनमत संग्रह के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ से कहना पड़ता? यह आत्मघाती काम नेहरु जी ने अंग्रेज़ो व गांधी जी की इच्छानुसार ही किया था।
🔘➖अंत में एक वाक्य से यह समझना और सरल होगा कि “गांधी भारत में सर्वोत्तम ब्रिटिश पुलिसमैन” थे जो नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अपनी पुस्तक INDIAN STRUGGLE ➖ 1920-1942 में एक ब्रिटिश महिला सांसद एलन विल्किसन को उद्द्दत करते हुए लिखा था और बर्लिन रेडियो पर भी 12 अक्टूबर 1942 में अपने भाषण में यह बात कही थी।
▶इनके विषय इतिहास से बहुत कुछ समझने को शेष है…
विनोद कुमार सर्वोदय
गाज़ियाबाद, 201001
उत्तर प्रदेश, (भारत)