From: विनोद कुमार सर्वोदय < >
महोदय/ महोदया
➖हमारे देश के नागरिकों द्वारा दिए जा रहें भारी राजस्व से हो रहा है देशद्रोही अलगाववादियों व आतंकियों के आनंदमय जीवन के लिए सरकारी सहायता का गोरखधंधा 1989 में आरम्भ की गई 2 योजनाओं में आवंटित धन के घोटालों से हो रहा है।इन घोटाले की अधिकृत जानकारी CAG द्वारा मार्च 2016 में प्रकाशित 162 पेज की रिपोर्ट से हुआ है। अशांत राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा संबंधी व्यय योजना (SRE-P) व पुलिस कर्मियों और विस्थापितों के पुनर्वास व सहायता के लिए बनाई गयी दूसरी योजना (SRE-RR) के अन्तर्गत जम्मू -कश्मीर को भारत सरकार ने क्रमशः Rs. 4735.51 व Rs.2472.45 करोड़ की आर्थिक सहायता दी गई थी।परंतु इन दोनों योजनाओं का धन अलगाववादियों की विदेश यात्राओं,सुरक्षा,फाइव स्टार होटल सुविधा,सरकारी कारें,निवास व कार्यालय और स्वास्थ आदि पर व्यय हुआ ।
➖यह भी कहना गलत नहीं होगा कि इन अलगाववादियों को मिली सरकारी सहायता से ही आतंकियों को पोषित किया जाता आ रहा है , जिससे पिछले 35 वर्षों में 5462 सुरक्षाकर्मियों व 16725 निर्दोष नागरिको की हत्याऐं हुई।पिछले 6 वर्षो से अलगाववादियों पर 100 करोड़ प्रति वर्ष केंद्र व राज्य सरकार द्वारा व्यय के समाचार आये है वह संभवतः इन योजनाओं के घोटाले से अलग हो ।
➖क्या हमारी सरकार इतनी अंधी हो गई , कि वह दीमक की तरह देश को खोखला करने वाले अलगाववादियों व आतंकियों के प्रति बिलकुल निश्चिन्त ही नहीं , बल्कि उन सापों को दूध पिला कर उनके विषैली दंश से आहत भी हो रही है ।मुख्य रुप से पिछले लगभग 35 वर्षो से देश मज़हबी आतंकवाद “जिहाद” से पीड़ित है। इसमें जम्मू-कश्मीर के कुछ वरिष्ठ अलगाववादियों के सहयोग को नकारा नहीं जा सकता, जिनको समय समय पर शत्रु देश पाकिस्तान का भी सहयोग मिल रहा है ।
➖कट्टरपंथी इस्लामिक “जिहाद” को पुरे देश में फैलाने के लिए आतंकियों ने कश्मीर को आधार बना कर देश के विभिन्न स्थानों के आतंकियों से मिलकर अपने नेटवर्क को जिस प्रकार बढ़ाया है उसमें इन अलगाववादियों की मुख्य भूमिका हो तो कोई आश्चर्य नहीं।इन आतंकियों के नेटवर्क को गुप्तचर विभागों की अनेक फाइलों में ढूंढा जा सकता है ।
➖परंतु अकर्मण्यता की स्थिति में आतंकियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही न होने से इनके हौसले बहुत बढ़ गए है ।सत्ता के लालच में कोई भी शासन-प्रशासन इस फैलती हुई जिहादी जड़ को संज्ञान में ही नहीं लेता ? क्योंकि हमारे राजनेताओं की प्राथमिकता “देश की सत्ता” पाने के लिए राजनीति करने की है न कि “देश की संप्रभुता ” की रक्षा के लिए ?
➖इस आतंकवाद के लिए बार बार हमारी सरकार केवल पाकिस्तान को दोष देती है पर यह नहीं सोचती की पहले अपने ही घर में पल रहें सापों को दूध पिलाना बंद करके उनके विष को नष्ट किया जाय। जिस प्रकार दीमक प्रायः दिखाई नहीं देती, वह पेड़ को अंदर ही अंदर चुपचाप खोखला करती रहती है और पता जब चलता है, जब पेड़ अचानक गिरता है । कुछ यही हाल अलगाववादियों व आतंकवादियों का भी है उनको पोषित करने वाली अनेक सहायतायें भी चुपचाप पुरे देश में आतंकवाद का विस्तार करने में लगी हुई है।
➖अतः केंद्र सरकार को समस्त ऐसी योजनाओं पर रोक लगा कर इन देशद्रोही अलगाववादियों के “प्रिवीपर्स” बंद करके काला पानी के समान कठोर सजा देनी होगी तभी इन देशद्रोहियों में भय व्याप्त होगा और इस्लामिक आतंकवाद से मुक्ति मिल सकेगी ?अन्यथा वार्तायें चाहे पाकिस्तान से हो या अलगाववादियों से सब व्यर्थ होती रहेगी और समाज व राष्ट्र को जिहादरुपी दीमक अंदर ही अंदर खोखला करती रहेगी।
✍विनोद कुमार सर्वोदय
गाज़ियाबाद