अटल चुनोती अखिल विश्व को


अटल चुनोती अखिल विश्व को 
अटल चुनोती अखिल विश्वको |   भला बुरा जो चाहे माने |
डटे हुए हें राष्ट्र धर्म पर | विपदाओं में सीना ताने ||
लाख –  लाख पीढियां लगी तब हमने यह संस्कृति उपजाई |
कोटि – कोटि सर चढ़े तबी इसकी रक्षा संभव हो पाई | 
हैं अह्संखय तैयार स्वयं मिट इसका जीवन अमर बनाने |
डटे हुए हें राष्ट्र धर्म पर | विपदाओं में सीना ताने ||
 देवों की है स्फूर्ति हर्दय में आदरयुत  पुरखों का चिंतन |
परम्परा अनुपम वीरों की चरम साधकों के चिर साधन |
पीड़ित शोषित दुखित  बांन्ध्वों के हमको हैं कष्ट मिटाने |
डटे हुए हें राष्ट्र धर्म पर | विपदाओं में सीना ताने ||
नहीं विधाता नयी सृष्टि के सीधी सच्ची स्पष्ट कहानी |
प्रेम कवच है त्याग अस्त्र है लगन धार आहुति है वाणी |
सभी  सुखी हों यही स्वप्न है मरकर भी यह सत्य बनाने | 
डटे हुए हें राष्ट्र धर्म पर | विपदाओं में सीना ताने ||
नहीं विरोधक  रोक सकेंगे निन्दक होवेंगे अनुगामी  |

जन-जन इसकी वृध्धि करेगा इसकी गति न थमेगी थामी |
बस इसकी हुंकार मात्र से दुष्ट लगेंगे आप ठिकाने |
जुटे हुये है इसीलिए हम राष्ट्रधरम को अमर बनाने ||
डटे हुए हें राष्ट्र धर्म पर | विपदाओं में सीना तान…..||
A poem by Atal Bihari Bajyai
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Author: Vyasji

I am a senior retired engineer in USA with a couple of masters degrees. Born and raised in the Vedic family tradition in Bhaarat. Thanks to the Vedic gurus and Sri Krishna, I am a humble Vedic preacher, and when necessary I serve as a Purohit for Vedic dharma ceremonies.

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