अटल चुनोती अखिल विश्व को
अटल चुनोती अखिल विश्वको | भला बुरा जो चाहे माने |
डटे हुए हें राष्ट्र धर्म पर | विपदाओं में सीना ताने ||
लाख – लाख पीढियां लगी तब हमने यह संस्कृति उपजाई |
कोटि – कोटि सर चढ़े तबी इसकी रक्षा संभव हो पाई |
हैं अह्संखय तैयार स्वयं मिट इसका जीवन अमर बनाने |
डटे हुए हें राष्ट्र धर्म पर | विपदाओं में सीना ताने ||
देवों की है स्फूर्ति हर्दय में आदरयुत पुरखों का चिंतन |
परम्परा अनुपम वीरों की चरम साधकों के चिर साधन |
पीड़ित शोषित दुखित बांन्ध्वों के हमको हैं कष्ट मिटाने |
डटे हुए हें राष्ट्र धर्म पर | विपदाओं में सीना ताने ||
नहीं विधाता नयी सृष्टि के सीधी सच्ची स्पष्ट कहानी |
प्रेम कवच है त्याग अस्त्र है लगन धार आहुति है वाणी |
सभी सुखी हों यही स्वप्न है मरकर भी यह सत्य बनाने |
डटे हुए हें राष्ट्र धर्म पर | विपदाओं में सीना ताने ||
नहीं विरोधक रोक सकेंगे निन्दक होवेंगे अनुगामी |
जन-जन इसकी वृध्धि करेगा इसकी गति न थमेगी थामी |
बस इसकी हुंकार मात्र से दुष्ट लगेंगे आप ठिकाने |
जुटे हुये है इसीलिए हम राष्ट्रधरम को अमर बनाने ||
डटे हुए हें राष्ट्र धर्म पर | विपदाओं में सीना तान…..||
A poem by Atal Bihari Bajyai