I pray the police change its modus operandi line this:

जब पुलिस और सरकार को जानकारी हो कि प्रजातंत्र के दुश्मन लोग, जो किसी की भी नहि सुनते है और प्रजा के जान माल का नुकसान करते है, वैसे लोग जब आन्दोलन करते है, तो पुलिश और प्रजा को चाहिये कि वो उन द्श्मनो को काबू मे रखने के लिये पुरी शक्ति व हथियार से तैयार रहे।

फिर आन्दोलन मे जब भी देखो कि ये दुश्मन गलत कर रहे तब ही उनपर वार करो। कोई परवा नहि दुश्मन मर जाये तो। पहले दुश्मन को जान माल का नुकसान करने देना, अराजकता करने देना, और सब कुछ दुश्मन कर के चला जाये उसके बाद कुछ दुश्मन को पकड़ना Court मे जाना मुकदमा चलाना और फिर् उनको jail मे रखना, वो ठीक नहीं है। दुश्मन को encounter से ही चालू आन्दोलन मे मारो। पूरा मार खा के फिर मारने निकलने से ये अच्छा है सही है।

 

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