*ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं* A Poem

From: Vinod Kumar Gupta < > _*ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं*_ _*है अपना ये त्यौहार नहीं*_ _*है अपनी ये तो रीत नहीं*_ _*है अपना ये व्यवहार नहीं*_ _*धरा ठिठुरती है सर्दी से*_ _*आकाश में कोहरा गहरा है*_ _*बाग़ बाज़ारों की सरहद पर*_ _*सर्द हवा का पहरा है*_ _*सूना है प्रकृति का आँगन*_ _*कुछ रंग … Continue reading *ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं* A Poem