Comment by Suresh Vyas: This is adharma. Srimad Bhagavatam says:

धर्मं तु साक्षात् भगवत् प्रणीतम्
नैव विदुर् ॠषयो नापि देवाः।
न सिद्धमुख्या असुरा मनुष्याः
कुतो नु विद्याधर चारणादयः ॥ SBM 6-3-19

Translation: “Real dharma principles are enacted by the Supreme Personality of Godhead. Although fully situated in the mode of goodness, even the great rishis who occupy the topmost planets cannot ascertain the real dharma principles, nor can the demigods or the leaders of Siddhaloka, to say nothing of the asuras, ordinary human beings, Vidyadharas and ChaaraNas.”

Therefore the Hindus and Hindu dharma gurus must protest any creation of dharma by non-god.

From: Vinod Kumar Gupta < >

“आदिवासियों की आड़ में अनुचित मांग” आज प्रकाशित इस लेख के लेखक श्री विकास सारस्वत जी व आपको भी बहुत-बहुत साधुवाद। इस सम्बंध में आने वाले समाचारों से यह ही आभास होता रहा कि आदिवासियों और वनवासियों को हिन्दू धर्म से विभाजित करके उन्हें अल्पसंख्यक बनाने के षड़यंत्र अभी भी चलाए जा रहे है। भारत विरोध और उसका बन चुका पर्याय हिंदू विरोध के लिए सक्रिय शक्तियों को हम समझने में क्यों मंदबुद्धि हो जाते हैं। हिंदुओं को अनेक वर्गों में बांटने की अंग्रेजों के समय से चले आ रहे ऐसे षड़यन्त्रों में ईसाई मिशनरियां अभी भी सक्रिय हैं। ध्यान करना होगा कि हिंदुओं के समान आदिवासी व वनवासी भी पूर्णतः प्रकृति पूजक है और हिन्दू धर्म में प्रचलित सारे रीतिरिवाजों को यथावत मानते व निभाते हैं। ऐसे समाज को हिन्दू धर्म से पृथक करना तो उनके साथ सर्वथा अन्याय व अत्याचार होगा।देश में धर्मांतरण करने वाली शक्तियां जब हिंदुओं में बार-बार भेद करके उन्हें विभाजित करने के षड़यन्त्रों में सफल होती रहेगी और इस्लामिक शक्तियां जो पहले से ही भारत को गज़वा-ए-हिन्द बनाने के लिए निर्दोष हिंदुओं का रक्त बहाने तक के अत्याचारों में लिप्त हैं, तो एक दिन भारत भूमि पर विराट हिन्दू समाज अल्पसंख्यक हो जाये तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। हमें चिंतन अवश्य करना होगा कि अल्पसंख्यको के लिये बनती जा रही विशेष योजनाओं के कारण बहुसंख्यकों की उपेक्षा व उनका निरंतर अपमान होने से राष्ट्रवाद को ही क्षति होती है।

अतः झारखण्ड सरकार के “सरना धर्म कोड” के प्रस्ताव का देशव्यापी विरोध होना चाहिये। केंद्र सरकार को ऐसे विषयों पर आक्रामक नीति बनानी होगी जिससे प्रदेशों में भारत विरोधी शक्तियां राज्य सरकारों के राजनैतिक हितों के बहाने अपने षड़यन्त्रों में सफल न हो सकें।

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