Source: https://www.youtube.com/watch?v=ILwo_J7OwiM

Comment by Hindu Publisher Viral Videos

#Zomato का बहिष्कार करिये !!🙏 जोमाटो के मालिक ने कहा कि ” हिंदुओं के बिना भी हमारा व्यापार चलता रहेगा “.. मेने #boycottzomato पर full expose किया है हलाल और झटके में फर्क भी बताया है, हिंदुओ में झटके के मांस की डिमांड बढ़ रही है, पर सारी ऑनलाइन food सर्विस वाली कंपनियों ने हलाल माँस को बढ़ावा दिया है जिस से हिन्दुओ को मिट काटने, मिट पकाने आदि में बड़े पैमाने पर बेरोजगार होना पड़ता है, सभी होटल और रेस्तरां के मालिक मुल्लो को ही रखते है क्योंकि मुल्ले हलाल का माँस खाते है, पूरा विवाद समझने के लिए ये वीडियो 1 बार जरूर देखिये 👇 https://youtu.be/Qgb0frMsPMM 🙏 मैने halal vs jhatka के मिट के science को समझाया भी है, please सभी से हाथ जोड़कर विनती है कि शेयर जरूर करे ये वीडियो अपने whatsaap ग्रुप्स में भी🙏 Zomato की कहानी ट्विटर से घूम कर फेसबुक पर आ गयी. उसमें भोजन के धर्म का प्रश्न उठाया गया है. एक हिन्दू ने एक मुस्लिम डिलीवरी बॉय के हाथ से डिलीवरी लेने से इनकार कर दिया और अपना आर्डर कैंसिल करा दिया. Zomato ने अपनी पीठ थपथपाते हुए शाबाशी लूटने की कोशिश की कि भोजन का कोई धर्म नहीं होता…एक कस्टमर की कमी बर्दाश्त की जाएगी. हम हिंदुओं का इस विषय पर गुस्सा यह निकल कर आ रहा है कि एक मुस्लिम की हलाल मीट नहीं होने की शिकायत को तो गम्भीरता से लिया गया, पर हिन्दू की धार्मिक कंसीडरेशन की शिकायत को ना सिर्फ नकार दिया गया, बल्कि उसे अपनी पीठ थपथपाने का अवसर भी बना लिया गया. क्यों? हमारी आपत्तियों में वह दम क्यों नहीं होता जो एक मुस्लिम की आपत्ति में होता है? पहली बात तो यह कि एक हिन्दू की आपत्ति एक व्यक्ति की आपत्ति है जबकि एक मुसलमान की आपत्ति पूरे समुदाय की आपत्ति है. उसमें एक कंसिस्टेंसी है. जो एक मुस्लिम की आपत्ति होगी वही दूसरे मुस्लिम की भी होगी. और यह आपत्ति किसी एक दिन की नहीं होगी. पूरे साल, हर समय रहेगी. आपकी आपत्ति सावन के महीने को लेकर है. और वह आपत्ति भी हर हिन्दू की नहीं होगी. कितने हिन्दू ऐसे होंगे जो सावन में रेस्टॉरेंट का फ़ूड तो आर्डर करेंगे पर मुस्लिम डिलीवरी बॉय के हाथ से लेना मंजूर नहीं करेंगे? यह विषय हर किसी के इंटरेस्ट का विषय है ही नहीं. तो इसके बजाय वह विषय उठायें जो हर किसी के इंटरेस्ट का हो… जब एक डिलीवरी बॉय आपके घर आता है तो उसके पास आपका नाम, पता और फ़ोन नंबर पहुँच जाता है. इसकी कहानियाँ सुनने में आई हैं कि इन नाम पतों में से वे अकेले रहने वाली सिंगल हिन्दू लड़कियों को खोजते हैं, उनसे संपर्क करके उन्हें लव जिहाद के जाल में फँसाते हैं. और इसी वजह से जोमाटो की डिलीवरी सर्विस मुस्लिम युवाओं से भरी पड़ी है. वे ऐसे लोगों की पहचान कर सकते हैं जो अकेले रहते हैं, या कमजोर हैं…और उन्हें अपराधी हरकतों का शिकार भी बना सकते हैं. हमें पता है, देश भर के अपराधों की दुनिया में शेर का हिस्सा किन लोगों का है. और मुस्लिम के हाथ से आपका भोजन गुजरना एक और खतरा खड़ा करता है…हाल ही में हमने देखा कि जिहादियों ने मंदिर के प्रसाद में ज़हर मिला कर हज़ारों हिंदुओं को मारने का प्लान बनाया था. तो जिहाद करने का ऐसा अवसर वे क्यों छोड़ने लगे? देर सबेर एक दिन यह आईडिया किसी जिहादी ग्रुप को आएगा ही आएगा…जब कई सारे जोमाटो डिलीवरी बॉयज एक दिन में कई सारे हिंदुओं के खाने में ज़हर मिला सकते हैं. और बड़े ऑर्डर्स पर एक साथ यह करने से देश भर में अलग अलग जगह सैकड़ों लोगों की जान ली जा सकती है और उसे किसी डिलीवरी बॉय पर आतंकी हरकत सिद्ध करना भी संभव नहीं होगा. यह जोमाटो का डिलीवरी का मामला भोजन की धार्मिक शुद्धता का मामला है ही नहीं. इस रूप में यह ज्यादा लोगों को प्रभावित नहीं करता. यह मूल रूप से आपकी सुरक्षा का मामला है…आपकी जान-माल को खतरा है. और यह हर हिन्दू का खतरा है… चाहे आप धार्मिक हों या अधार्मिक…राइट विंग हों या लिबरल, संघी हों या नहीं हों…आपका खाना आपके पास किसी संभावित जिहादी के हाथ से पहुँच रहा है तो आप खतरे में हैं. और उसके साथ पहुँच रही है उनके पास आपके नाम-पते-फ़ोन नंबर की जानकारी…

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