हिन्दू राष्ट्रवाद समझो और समझाओ.

पश्चीमी देशों कहते रहते है कि राष्ट्रवाद बुरा है – उसका विरोध करो। मै कहता हुं कि हर राष्ट्रवाद दूसरे राष्ट्रवाद से अलग होता है। तो बुद्धिमान मनुष्योंका कर्तव्य कि वो जाने कि कौनसा राष्ट्रवाद क्या है।

और फिर निर्णय करे कि वो राष्ट्रवाद अच्छा है या बुरा है। तो मै यहां हिन्दू राष्ट्रवाद क्या है वो बताना चाहता हुं।

हिन्दू राष्ट्रवाद का आधार हिन्दू धर्म है जिसको वेदिक धर्म या सनातन धर्म या वर्णाश्रम धर्म भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म सबसे पुराना है, और वेद उसके आदि धर्म ग्रन्थ है। चार वेदो का नाम सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेदा  और ऋग्वेद है। कुल मिलाकर उसके २०,००० मन्त्र है। भगवद गीता ये वेदो का ७०० श्लोको मे सार है।

ईसके उपरान्त १८ पुराण है जिसमे वेदो का सन्देश है और ६ दर्शन शास्त्र है। कुछ स्मृतियां है जो हमारे ऋषिओ ने लिखी है। वेदों के अन्दर २०५७ उपनिषद् है जिसमे १०८ उपनिषद् का बहूत् महत्व है – इसलिये हमारी जपमाला के १०८ मणीका है। और रामयण और महाभारत ग्रन्थ है।

वेद का ज्ञान स्वयम् भगवान ने ब्रह्माजी को दिया, और फिर उस ज्ञानके आधारसे ब्रह्माजी ने प्रजाओ को उत्पन्न किया। ब्रह्माजी के शरीर से मनु और शतरूपा उत्पना हुवे। ब्रह्माजी ने वेदका ज्ञान अपने पुत्रों को दिया, और उन सब ने अपने पुत्रों को दिया। इस तरह गुरु-शिष्य परम्परा से वेद का ज्ञान नयी पिढीयो को मिलता रहा। और वो ब्राह्मणो के स्मृति मे था।

जब ५,००० साल पहले कली युग का आरम्भ हुवा तो भगवान व्यासदेव ने जाना कि कलीयुग मे लोगों की यादशक्ती बहूत कम होगी, और वे वेदको मस्तक मे नहि रख पायेंगे। तब व्यासदेव ने वेदको पत्र पर लिख दिये, और ब्राह्मण समाज और धर्म आचर्यों ने वेदको अबतक सम्भाल के रक्खा है।

तो भगवान ने मनुष्यों को पैदा किया, और उनको कैसे रहना, और कैसे अपनी आध्यात्मिक प्रगती करके मोक्ष पाना या भगवान को पाना, वो वेद मे स्वयं भगवान ने बताया है, जिसको धर्म कहा जाता है। तो धर्म भगवान ने मनुष्य को दिया है, कोई मनुष्यने नहि। इसलिये हर हिन्दू कोई मनुष्य के बनाये हुवे धर्म का स्विकार नहि करता, और न करना चाहिये।

तो हिन्दू धर्म के ये बहूत धर्म ग्रन्थ है, और उसमे एक विशेष बात है जो आजके कोई परदेशी धर्म मे नहि है।

कोई हिन्दु धर्म ग्रन्थ नहि कहता है कि भगवान को किसी पर द्वेष है। भगवान सब को चाहता है क्युं कि हर जीव भगवान का सन्तान है।

कोई हिन्दु धर्म ग्रन्थ नहि कहता है कि भगवानको कोई एक मनुष्य जाती या वर्ण कोई दूसरे जाती या वर्ण से अधीक पसन्द या प्यारा है।

कोई हिन्दु धर्म ग्रन्थ नहि कहता है कि भगवान ने कोई एक देश कोई अमुक जाती या वर्ण के लिये हि बनाया है।

कोई हिन्दु धर्म ग्रन्थ नहि कहता है कि कोई एक जाती या वर्ण कोई दूसरी जाती या वर्ण के लोगो को गुलाम रक्खे या धिक्कार करे।

कोई हिन्दु धर्म ग्रन्थ नहि कहता है कि आप कोई एक देव या देवी को नहि मानेंगे तो आप नर्क मे जायेन्गे।

कोई हिन्दु धर्म ग्रन्थ नहि कहता है कि आप पापी है।

हिन्दु धर्म ग्रन्थ कहते हैं कि आप ये शरीर नहि है, किन्तु उसके अन्दर रहनेवाल आत्मा है, जो परमात्मा का सत् चित् आनन्द स्वरूपहै।

वेद या गीता मे बताये हुवे कोई भी योग व साधना करने से आप पाप-मुक्त जीवन जी शकते है, और आपकी आधात्मिक प्रगती कर शकते है। आध्यात्मिक प्रगती करके ही आप परमात्माको पा शकते है या मोक्ष पा शकते है।

अब ये समज़ लो कि कोई एक मनुष्य की आधात्मिक प्रगति होवे – वो पाप-मुक्त जीवन जिए – तो उससे किसी अन्य मनुष्यको आपत्ती नहि हो शकती। जो मनुष्य पाप कर्म करता है उससे उस मनुष्यको और दूसरों को आपत्ती होती है।

तो हिन्दू राष्ट्रवादी लोग भारते देश को एक हिन्दू राष्ट बनाना चाहते है, जिस राष्ट्र मे हर एक व्यक्ति को अपनी आध्यात्मिक प्रगती करने के लिये सुविधा होगी, और वो करने मे कोई बाधा नही करेगा।

दूसरी बात ये है कि हिन्दू धर्म की कोई भी साधना या योग ऐसा नहि है जिसको करने से कोई दूसरे मनुष्यमो कोई आपत्ती होवे। हिन्दू धर्म ये भी कहता है कि किसी भी अन्य व्यक्ति का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन मत करो। ऐसा करना पाप है।

तो जब भारत हिन्दू राष्ट्र बनेगा तो सब लोग अपने पसन्द किये हुवे धर्म का पालन करेन्गे, और उनके धर्म पालन करने से किसी अन्य को कोई आपत्ती नहि होगी। तो ऐसे हिन्दू राष्ट्रवाद को कोई नहि कहेगा कि वो बुरा है। हिन्दू राष्ट्रवाद से अच्छा कोई अन्य राष्ट्रवाद मनुष्यके लिये नहि है।

ईस्लाम और ईसाईयत परदेशी religions है जो भारत मे घुसे हुवे है, निमन्त्रित नहि किये गये।

ये दोनो religions हिन्दू धर्म के दुश्मन है, और हिन्दू धर्म को पूर्णतह मिटाना चाहते है।

हम हिन्दू धर्म का पालन करे वो उनको पसन्द नहि है। उन्हो ने जान की धमकी से लाखो हिन्दू का धर्म परिवर्तन किया है। ये दो परदेशी घुसे हुवे religion हिन्दू राष्ट्र मे प्रतिबद्ध होंगे।

हिन्दू धर्म हर मनुष्य के लिये है। वेद कि हर प्रार्थना हर जीवके कल्याण के लिये है। जैसे की :-

श्वेतास्वर उपनिषद मे कहा है – शृणवन्तु विश्वे वयम् अमृतस्य पूत्राः। (सुनो हे विश्व, हम सब अमृतके (भगवान के) सन्तान है।)

गरूड पुराण मे कहा है :-  सर्वे भवन्तु सुखीनः। (हर जीव सुखी हो।)

https://hinduunation.com/2019/03/02/universal-prayers-from-the-veda/

https://hinduunation.com/2019/03/02/universal-anthem/

हमारी कोई प्रार्थना ऐसी नहि है जिसमे कहा को कि “हे भगवान सीर्फ़ हमारे उपर हि कृपा करो, दूसरे के उपर नहि।“

 

ईसलिये हिन्दू हिन्दू-धर्म कहलाता है हिन्दू -religion नहि।

तो आप हिन्दू राष्ट्रवाद समझो, और दूसरों को समझाओ यही मेरी विनती है।

जय श्री कृष्ण

Hinduunation.com

 

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