From: Pramod Agrawal < >

 

एशिया के मुसलमानों की दुनिया में औकात :-

 

(१) एशिया ( भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका ) के मुसलमान अपने आप को अरबीयों का वंशज मानते हैं और अपने को बढ़ चढ़ कर अरबी दिखाने के जुनूनी होते हैं, लेकिन अरब देशों के असली शेख मुसलमान इनको मुसलमान ही नहीं मानते । ( क्योंकि जैसे एक हिजड़ा भी अपने आप को औरत की तरह सुंदर दिखाने के चक्कर में किसी औरत से भी ज्यादा कमर मटकाता है और नज़ाकत दिखाता है लेकिन उसे ये पता नहीं कि असली औरत और मर्द उसे हिजड़ा ही समझते हैं चाहे कितना भी वो ज़ोर लगा ले ठीक वही हाल एशिया के मुसलमानों का है )

 

(२) अरबी लोग एशिया के मुसलमानों को गंदा, गलीज़, नापाक, हरामी, Converted, कुत्ता, हैवान आदि समझते हैं और इन्हीं शब्दों से संबोधित करते हैं । अधिकतर वो इनको अपने बाप दादा परदादाओं की गलतियों का नतीजा समझते हैं और वहाँ पर किसी भी एशिया के मुसलमान को कोई अरबी शेख अगर बुलाना चाहे तो वो उसे “या अब्दी” कहकर बुलात है (अब्दी का मतलब होता है गुलाम)

 

(३) वहाँ पर कोई भी एशिया का मुसलमान अगर पचास साल भी अपनी ज़िन्दगी के लगाकर वहाँ काम करे तो भी उसे वहाँ पर न तो ज़मीन खरीदकर रहने का अधिकार मिलता है न ही उसे वहाँ की नागरिकता मिलती है ।

 

(४) कोई भी एशिया का मुसलमान वहाँ पर किसी अरबी मुसलमान औरत से शादी नहीं कर सकता और अगर गलती से करने की कोशिश भी करे तो मार दिया जाता है ।

 

(५) कोई भी अरबी शेख जब चाहे वहाँ पर किसी भी एशिया के मुसलमान की लड़की को मज़े के लिए उठवा सकता है और उसे अपनी हसीन रातों की नमकीन बेगम बनाकर उसके मज़े लूट सकता है लेकिन किसी एशिया के मुसलमान की वहाँ हिम्मत नहीं पड़ती कि ऐसा करने पर उन्हें रोक पाए ।

 

(६) वहाँ पर अधिकतर एशिया के मुसलमानों को बकरियाँ चराने, ऊँट चराने या अन्य किसी कामों में लगाया जाता है और बहुत से एशिया के मुसलमान वहाँ अरबीयों का मल मूत्र भी उठाते हैं । क्योंकि वे लोग इनको मल मूत्र से भी गंदा और नापक समझते हैं ।

 

(७) एशिया से गए हाजियों के साथ वहाँ पर बहुत ही गंदा व्यवहार किया जाता है । बाज़ार में लेनदेन के समय अरबी उनसे बहुत बदतमीज़ी से पेश आते हैं । उनको वहाँ पर अरबी हाजियों से दूर ही कैंप बनाने की इजाज़त है । कोई भी एशिया का मुसलमान वहाँ अरबी हाजियों के साथ अपने कैंप नहीं बना सकता ।

 

(८) एक बार हज के दौरान कैंपों में भयंकर आग लग गई थी तो सभी हाजियों में अफरा तफरी मच गई तो वहाँ एशिया के मुसलमानों को उनके क्षेत्र से निकलने की इजाज़त न दी गई क्योंकि वहाँ के अधिकारी चाहते थे कि अरबी हाजियों को इन नापाकों की भगदड़ से कोई परेशानी न हो जिसका नतीजा ये निकला कि पाकिस्तान और भारत के हाजी वहाँ जलकर मर गए थे लेकिन उनकी मौत पर किसी अरबी को अफसोस भी नहीं हुआ और हज यात्रा ज्यों की त्यों चलती रही ।

 

(९) अभी ताज़ा घटना में हज यात्रा में जब शैतान नामक बड़े पत्थार के टीले को पत्थर मारते वक्त हाजीयों में भगदड़ मच गई तो वहाँ बहुत से हाजी मारे गए । लेकिन वहाँ मक्का की सरकार ने अरबी हाजियों की लाशों को बहुत ही सम्मान के साथ उठाया और एशिया के हाजियों को क्रेन से उठावाया गया जैसे कि किसी कचरे को उठवाया जाता है ।

 

(१०) अरबी शेख वहाँ पर एशिया के मुसलमानों को गुलामों की तरह रखते हैं और अगर उनसे कोई गलती हो जाए तो उन्हें कुत्ते की तरह मार पीटकर मज़े ले लेकर मारते हैं और बहुत दिनों तक खाना भी नहीं देते । ये अरबी शेख बांग्लादेशी मुसलमान को मार रहा है और अपने पैर चटवा रहा है :- https://www.youtube.com/watch?v=puPSg-H9ggc ऐसे ही बहुत से वीडीयों आप You Tube पर देख सकते हैं ।

 

(११) एशिया के मुसलमान जहाँ अरबीयों पर दुनिया में हो रहे अत्याचारों के लिए अपनी छातियाँ पीटते हैं, मातम करते हैं और सड़कें जाम करके आसमान सिर पर उठा लेते हैं । जैसे कि इज़राईल के फिलिस्तीन पर हमले के लिए, अमरीका के इराक पर हमले के लिए, फ्रांस के मुसलमानों पर प्रतिबन्ध लगाने आदि मसलों पर खूब मतम मचाते हैं लेकिन वही अरबी इनपर आई आपत्ति के लिए इनपर थूकते भी नहीं । जैसे पेशावर में स्कूल पर हमला हुआ तो किसी अरबी ने कोई मातम नहीं किया, म्यांमार में रोहिंगया मुसलमानों को मारा गया तो किसी अरबी ने एक मोमबत्ती तक नहीं जलाई । ऐसे और भी कई मौके हैं अरबीयों को इनकी बिलकुल भी परवाह नहीं है ।

 

(१२) साऊदी के प्रिंस अब्दुल्लाह और मिश्र के एक मौलवी ने भी अभी हाल ही में ये बयान दिया है कि भारत और पाक के मुसलमान अपने आप को हमसे मिलाकर न देखें, वे हमा शुद्ध खून वालों की तरह अरबी नहीं हैं कनवर्टिड होने से हमारे कुत्ते हैं । वे हमसे दूर रहें ।

 

(१३) कोई एशिया का मुसलमान अगर वहाँ जकर किसी अरबी के सामने गलती से जकर ये बोल दे कि “हमने हिन्दोस्तान पर 1000 साल तक राज किया है” तो पहले तो वो अरबी उसे गंदी गंदी गालियाँ देगा और उसके मूँह पर थूकते हुए बोलेगा कि “जो किया है हमने किया! तुम हो ही कौन हरामी ? तुम हमारी नाजायज़ औलादें हो जो न तो अपने मज़हब और देश के वफादार रह सके और न किसी और के” । ऐसा ही कुछ हुआ था पकिस्तान की आवाज़ कहे जाने वाले डा. इकबाल के साथ जिसे उर्दू बोलने के कारण गुलामों की ज़ुबान बोलने वाला गलीज़ कहा गया और तभी उसने आकर भारत में ये गीत बनाया “सारे जहाँ से अच्छा ! हिन्दोस्ताँ हमारा” ।

 

(१४) पाकिस्तान के पूरा ज़ोर लगाने पर भी उसे अरब लीग में शामिल नहीं किया गया था । जिसका मुख्य कारण अरबीयों की एशिया के कनवर्टिड मुसलमानों के प्रति नफरत ही था ।

 

(१५) अगर वहाँ अरब देश में किसी ATM Machine पर एशिया के मुसलमानों की पैसे निकलवाने के लिए लम्बी लाईन लगी हो । तो कोई अरबी शेख आकर बिना लाईन में लगे ही पैसे निकलवाकर ले जायेगा और किसी एशियाई मुसलमान की हिम्मत नहीं होगी की उसको थोड़ा सा भी कुछ बोल जायेगा । वहाँ किसी अरबी शेख से बैर ले लेना मानों मौत क बुला लेना है । और किसी से पंगा हो भी जाए तो अगर उसने एशिया के मुसलमान को सिर्फ लात और जूते से बुरी तरह मारकर और अपनी थूक चटवाकर छोड़ दिया तो मानों बहुत बड़ा एहसान कर दिया क्योंकि वहाँ वह कम से कम हत्या तक कर डालते हैं और सरकार भी कुछ नहीं कहती ।

 

(१६) एशिया के मुसलमान इतने जाहिल होते हैं कि वहाँ अरबीयों की हर चीज़ को पाक ही समझते हैं वहाँ किसी सड़क पर कोई अरबी में लिखी कोई चीज़ पड़ी हो तो उसे भी पाक समझकर उठाकर चूम लेते हैं चाहे उसमें गंदी और अश्लील बातें ही क्यों न लिखी हों ।

 

(१७) एशिया के मुसलमान इतनी भयंकर मानसिक गुसामी में जी रहे हैं कि अरब की तर्ज पर अपने देशों का हाल बनाने में तुले हुए हैं । जैसे पाकिस्तान में बँटवारे के वक्त लाहौर में सभी पीपल के पेड़ उखाड़कर खजूर के पेड़ लगा दिये गए क्योंकि हुज़ूर के मुल्क में खजूर के पेड़ हैं, पाकिस्तान या भारत की किसी सब्जी बेचने वाली दुकान जिसे मुसलमान चलाता हो ज्यादातर लौकी की सब्जी को सारी सब्जियों से ऊपर रखा जाता है चाहे वो सड़ भी जाए तो भी फेंका नहीं जाता खा लिया जाता है क्योंकि रसूल साहब लौकी खाते थे, लम्बी दाढ़ियाँ और कपड़े से शरीर ढकना अरबी देशों में इसलिए ज़रूरी है क्योंकि वहाँ रेत के भयंकर तुफान आते हैं और ऐसा न करने पर त्वचा तक छील देते हैं इसी कारण औरतें वहाँ पर हिज़ब पहनती हैं, लेकिन एशिया के मुसलमान बिना सोचे समझे ही उनकी नकल करके सब पहनते हैं और दाढ़ीयाँ रखते हैं, अरब देशों में पानी की बहुत किल्लत होती है जिसके कारण पानी बचाना पड़ता है और अरबी कम नहाते धोते हैं लेकिन एशिया के मुसलमान पानी सम्पन्न देशों में भी अरबीयों की नकल करते हुए नहाने से बचेंगे और पत्थर से पिछवाड़ा साफ करेंगे और बदबूदार रहेंगे, नमाज़ पढ़ते वक्त अरबी लोग कई रह की सलाह बाँधते हैं ( उठक बैठक करना ) क्योंकि कपड़ों पर बार बार रेत लग जाती है जिसे उतारना पड़ता है लेकिन एशिया के मुसलमान बिना सोचे ही वैसी उठक बैठक नमाज़ के वक्त करते हैं । ऐसी ही कई बातें हैं जिसमें एशिया के मुसलमान अरबीयों की बिना सोचे नकलें करते हैं ।

 

(१८) ये तो एशिया के मुसलमानों की बात रही । इससे भी अधिक भारत के मुसलमानों को पाकिस्तान में भी नीची नज़रों से देखा जाता है । वहाँ पर इनको उर्दू बोलने वाले मुहाज़िर बोला जाता है । बँटवारे के वक्त जिन मुसलमानों ने बढ़चढ़कर भाग लिया था । उन्हीं को वहाँ पाकिस्तान जाने के बाद पश्तूनों ने मारना शुरू कर दिया और आजतक वहाँ पर मुहाज़िर बोलकर उनको मारा काटा जा रहा है ।

 

(१९) अरब के शेख भारत में सैक्स टूरिज़म के लिए आते हैं और यहाँ पर कम उमर की कमसीन मुसलमान हसीन लड़कियों को खरीदकर अपनी अय्याशी के लिए अपने साथ अरब देशों में ले जाते हैं और यहाँ के मुसलमान इस बात को अपना बड़ा सौभाग्य समझते हैं कि “शेख साहब ने हमारी बेटी को चुना” । वहाँ पर इस हसीनाओं के साथ खूब रंग रलिया मनाते हुए वो उन्हें अपनी रखैल बनाकर रखते हैं ।

नोट :- इस्लाम समीक्षा पढ़ने के लिए ऋषिदयानंद सरस्वति कृत सत्यार्थ प्रकाश का 14 वाँ समुल्लास अवश्य पढ़ें ।

 

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