From: Vishwapriya Vedanuragi <

सादर नमस्ते !
कृपा कर संलग्न / निम्न ऐतिहासिक शास्त्रार्थ पढ़िए !!!  Click at the link 20150512135619184 also provided below.
यह ऐतिहासिक शास्त्रार्थ संस्कृत व हिन्दी भाषा में आयोजित है |
गोवर्धनपीठाधीश्वर श्री शंकराचार्य वा श्री स्वामी करपात्री जी के साथ आर्य समाज के मूर्धन्य विद्वान पण्डित युधिष्ठिर जी मीमांसक की मध्य |
शास्त्रार्थ का स्थल है :- अमृतसर
शास्त्रार्थ की तिथि है :- 16-17 नवम्बर 1964
वेदवाणी पत्रिका के अप्रैल वर्ष  1965 के अंक में यह शास्त्रार्थ प्रकाशित हुआ था | पृष्ठ १२ से लेकर १८ तक के इस नौ घन्टे चले शास्त्रार्थ में बहुत ही महत्त्वपूर्ण प्रमाण व ज्ञानप्रद बातें  दी गयीं हैं |
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अप्रैल 1965  की वेदवाणी पत्रिका का यह अंक मेरे पूज्य पिताजी व्याकरणाचार्य-निरुक्ताचार्य श्री रामचंद्र जी के संग्रह में उपलब्ध था/है | उल्लेखनीय है की मेरे पूज्य पिताजी हैदराबाद स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे और पण्डित युधिष्ठिर जी मीमांसक के सहाध्यायी थे |
मैं इसे आप सबके लाभार्थ प्रेषित कर रहा हूँ  | कृपा कर इसे छाप कर (इसका प्रिन्ट लेकर) अपने संग्रह में ले लें क्यों की ऐसे शास्त्रार्थ बार-बार मिलते नहीं हैं  और शायद यह कहीं अन्य पुस्तक में प्रकाशित भी नहीं हुआ है |
अन्यों को प्रेषित कर सबको लाभान्वित करें |
धन्यवाद
विदुषामनुचर
विश्वप्रिय वेदानुरागी 

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